बुधवार, 30 जुलाई 2014

अनचिन्हार आखर: गजल

अनचिन्हार आखर: गजल

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गुरुवार, 24 जुलाई 2014

Maithili Mp3 - एल्बम : मैथिली आरती

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सोमवार, 14 जुलाई 2014

MAITHILI PANCHANG -2014-15



































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मंगलवार, 1 जुलाई 2014

पृथक् मिथिला राज्यक माँग हेतु एकदिवसीय कार्यक्रम

परमादरणीय मिथिलावासी,
सादर नमस्कार----
       भाईलोकनि अपने सभ सँ साग्रह निवेदन अछि जे मिथिला-मैथिली के विकास आओर क 
पृथक् मिथिला राज्यक माँग हेतु , "मिथिला विकास संगठन" दिनांक 5 जुलाई 2014 क् सुवह दस बजे दरभंगा समाहरणालय पर प्रचण्ड धरना के एकदिवसीय कार्यक्रम रखलक अछि ।

      हम समस्त मिथिलावासी के आवाहन करैत छी जे एहि कार्यक्रम में अपार जनसमूह के संग पहुँच आन्दोलन के धारदार बनाबी ।अहाँक योगदान मिथिलाक मर्यादा एवं भाषा साहित्य, सभ्यता, संस्कृति के संरक्षण आओर पृथक मिथिला राज्यक माँग के दिशा में अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करत । जय मिथिलावाशी , हरहर महादेव, जय माँ मैथिली , जय श्री हरिः
घर घर सँ आयल आवाज,
हमरा चाही मिथिला राज्य।
संयोजक त्रिपुरारी मिश्र
फोन नंबर :- +919472905825
+917546091476

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सगर राति दीप जरय

मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...


पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

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मैथिल आर मिथिला
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