बुधवार, २ दिसम्बर २००९

अएनाके की मोल- बिनीत ठाकुर



अएनाके की मोल

अएनाके की मोल आन्ह रके शहरमे
लागे उल्टाी मुँह सुल्टाा अपने नजरमे
ज्ञानक शुरमा लगाकऽ जे बजबैय गाल
व्यावहारमे देखल ओकरो उहे ताल

मोन भितरके दर्पण सेहो चुरचुर
एतऽसँ मानवता भागल अछि कोशो दुर
घुमे दिनमे दरिन्दाह ओढी सज्ज नके खोल
कतहुँ देखल मातम कतहुँ बाजे ढोल
अएनाके की मोल आन्ह रके शहरमे
लागे उल्टाी मुँह सुल्टाज अपने नजरमे

जे समाज सुधारक करैय किशुनकेर
ओकरे पाछु मुसना कहबैय शवाशेर
जा धैर नहि हाएत मोन सँ मदपन नाश
करत लोक कोनाकऽ विनीत भावक आश
अएनाके की मोल आन्ह रके शहरमे
लागे उल्टाी मुँह सुल्टाा अपने नजरमे

Maithili Poems published in www.videha.co.in (part 3)


कोसिक प्रकोप
प्राकृतिक प्रकोप मिथिला में
देखि के नहिं हैत अधीर
देहैत डूबैत जन जीवन
सरकार बनल अछि बहीर
कहिया स अछि बनल
कोसी नदी बिहारक शोक
पर्यावरण के सतत हनन
कियैक नहिं लागल रोक
घमैत हिमनद बढ़ैत जलस्तर
सृष्टि के दिनोदिन बढ़ैत तापमान
पर्यावरण पर गंभीर चिंतन आवश्यक
पहिने वर्तमान संकट स पाबी निदान
कतेक सालक समय देलाक बाद
फेर रास्ता बदली ललक कोसी नदी
अहि महाप्रलय स बचनाय चाल संभव
समय पर सरकारी कोष खुजितय यदि
मजबूत बांह आ प्रवाहक मार्ग दर्शन लेल
भूगोल वेत्ता आ अभियंता आगू आबैथ
जल संचय स सिंचायक समस्या भगा
जलशक्ति स विद्युत् बनाबैत
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मंगलवार, १ दिसम्बर २००९

हमर पहिल मैथिली कविता

"चुल बुली कन्या बनि गेलहुँ "


बिसरल छलहुँ हम कतेक बरिस सँ ,
अपन सभ अरमान सपना
कोना लोक हँसय कोना हँसाबय ,
कि हँसी में सामिल होमय
आइ अकस्मात अपन बदलल ,
स्वभाव देखि हम स्वयं अचंभित
दिन भरि हम सोचिते रहि गेलहुँ ,
मुदा जवाब हमरा नहि भेंटल
एक दिन हम छलहुँ हेरायल ,
ध्यान कतय छल से नहि जानि
अकस्मात मोन भेल प्रफुल्लित ,
सोचि आयल हमर मुँह पर मुस्की
हम बुझि गेलहुँ आजु कियैक ,
हमर स्वभाव एतेक बदलि गेल
किन्कहु पर विश्वास एतेक जे ,
फेर सँ चंचल , चुलबुली कन्या बनि गेलहुँ ।।


-
कुसुम ठाकुर -

कि हमहूँ रहबै बेरोजगार? -मदन कुमार ठाकुर

कि हमहूँ रहबै बेरोजगार? ----

खिचरी खायते- खायते समय गमेलो
नही भेटल शिक्षा केर अधिकार ,
बौवा नेना कही घर से प्यार भेटल
नहीं भेटल आँगन बारि केर केंद अधिकार ,,
आब कहू यो एस डी ओ साहिब
कि हमहूँ रहबै बेरोजगार ?

डिग्री लेने गाम सहर सं
भैया हमरो सब कतेक हजार ,
शिक्षक पद के आश में सदिखन
घुमैत फिरैत छैथ हाट बाजार ,,
आब कहू यो नितीश सरकार
कि हमहूँ रहबै बेरोजगार ?

दौरते - दौरते राईत दिन हम
दरभंगा , मधुबनी लोकसभा केर दुवार ,
हारल थाकल घर आबि हम बैसलों
नै मिलल पंचसमिति केर अधिकार ,,
आब कहू यो नेता - मुखिया
की हमहूँ रहबै बेरोजगार ?

दिल्ली में किछ इज्जत अछि बाचल
माहाराष्ट्र सरकार केलक बहार ,
देश दुनिया के खोज खबरी सुनी
मन कहैत अछि, नै छोरू घर- दुवार ,,
आब कहू यो बिहार सरकार
कि हमहूँ रहबै बेरोजगार ?

the end

www.apangaam.blogspot.com
मदन कुमार ठाकुर
ग्राम/पोस्ट- कोठिया पट्टीटोल
ब्लाक - झंझारपुर
जिला - मधुबनी ,
बिहार ( 847404)
mo -91-9312460150

E-mail , madanjagdamba@yahoo.com
madanjagdamba@yahoo.com

आब कहू कतय गेल रोजगार -मदन कुमार ठाकुर

आब कहू कतय गेल रोजगार ---


छी गरिब निर्धन के घर सं
आशा भेटल कतेको हजार ,
नही अहि फंड त अगिला फंड में
बढिक घर खसी केर कतेक इंतजार ,,
आब कहू यो बीडियो सहिब
कतय गेल इंदरा आबस अधिकार ?

आरीये - धुरे चलिते फिरते
खसैत - परैत भेलो लाचार ,
अहि गाम से ओही गाम धरी
कतोउ नही भेटल सरक शुधार ,,
आब कहू यो डी एम् साहिब
कतय गेल प्रधानमंत्री योजना अधिकार ?

टी वी , रेडियो सब दिन सुनलो
होयत जगत में शिक्षा केर पहचान ,
स्कुल कालेज सब दिने देखय छि
मास्टर नहीं त बिद्दार्थी शुने मशान ,,
आब कहू यो केंद्र सरकार
कतय गेल ई सर्व शिक्षा अभियान अधिकार ?

सब दिन भगलो पटना दिल्ली
गाम घर से भेलो लाचार ,
जायत -जायत दरभंगा , मधुबनी
कतेको बुजुर्गो केलानी सिधार ,,
आब कहू यो स्वास्थ विभाग
कतय गेल स्वास्थ पंचायत समिति अधिकार ?

रौदी - दाही साले - साले
पेट से भूखल रहल परिवार ,
घुस खोरी बैमानी के चकर
सब दिन चलल ई रोजगार ,,
आब कहू यो ग्राम सेबक जी
कतय गेल अन्तोदय अनपुर्ना अधिकार ?

चोरी - डकैती बाटे घाटे
अपहरण देखै छी बिच बाजार ,
रंगदारी आ टेक्स वसूली
गामे - गामे चलैया ई रोजगार ,,
आब कहू यो कमिशनर साहब
कतय गेल क़ानून अधिकार ?

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मदन कुमार ठाकुर
ग्राम/पोस्ट- कोठिया पट्टीटोल
ब्लाक - झंझारपुर
जिला - मधुबनी ,
बिहार ( 847404)
mo -91-9312460150
E-mail , madanjagdamba@yahoo.com
madanjagdamba@yahoo.com

सोमवार, ३० नवम्बर २००९

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (पन्द्रहम कड़ी )

माँ मामाक सँग बाबुजी के s s अलिगढ चलि गेलिह, छोटू के s सँग s गेलिह मुदा बाकि तीनू बहिन के हमरा पर छोड़ि s गेल रहथि। हम सब बड़का काका काकी सँग मोतिहारी सँ गाम आबि गेलहुँ। दादी मौसी मधु निक्की पप्पू सोनू सेहो संगे आबि गेलाह। गाम पहुँचलहुँ, समाचार सुनि बाबा बड दुखी छलाह। एकटा बेटा के गेलाक दुःख s रहबे करैन्ह दोसर बेटा के दुघॅटनाक समाचार हुनका आओर तोड़ि देलकैन्ह। इम्हर सब बच्चा सब डरल सहमल रहथि। मधु सब s मौसी लग रहैत रहथि दादी से, अपन दोसर दोसर काज मे रहैत छलिह मुदा हमर तीनू बहिन हमरा एको मिनट लेल नहि छोरथि। हमरा अपने किछु नहि फुरैत छल की करी। डरल s हमहू रही मुदा हुनका सब केर सोंझा मे साहस केने रही। बौआ सेहो गाम पर छलथि हुनकर परीक्षा s गेल रहैन्ह।

दोसर दिन भरि दिन लोकक एनाई गेनाई लागल रहलै भरि दिन कन्ना रोहटि सेहो होयत रहैत छलैक। जतेक कन्ना रोहटि होय ततेक बच्चा सब और डरि जैत छलथि। साँझ होयत देरी सब हमरा पकरि s बैसि जाय गेलिह। अचानक हम जाहि कोठरी मे रही ताहि मे बड़की काकी अयलीह बच्चा सब के पकड़ि किछु जलखई करेबाक लेल s गेलिह। हम चुप चाप घर मे बैसि s असग़र कानैत छलहुँ भगवान सँ कहैत छलहुँ हे भगवान माँ नहि छैथ बाबुजी के की होयतैन्ह नहि जानि एखैंह कम सँ कम हिनका पठा दियौन हम असग़र कोना तीनू के सम्भारब। मौसी मधु सब सँग s सब गोटे के सहानुभूति छलैन्ह मुदा तीनू बहिन के देखय लेल हमही टा छलियैन्ह। सोचिये रहल छलहुँ कि देखलियैक एकटा जन बैग लेने आयल राखि s चलि गेल। देखला सँ हिनके बैग जेहेन छलैक मुदा जा धरि हम किछु पुछतिए चलि गेल। हमरा मोन मे पचास तरहक बात आबि रहल छल कि देखलियैन्ह घर मे घुसि रहल छथि। सीधे हमरा लग अयलाह जहिना पुछलाह अहाँ कोना छी कि हमरा नहि रहि भेल हम हिनका पकरि s खूब कानय लगलहुँ। इहो पाछु कथि लेल रहताह दुनु गोटे एक दुसरा के पकरि s कानैत छलहुँ। हमरा सब केर मुँह सँ एको शब्द कथि लेल निकलत।

अचानक हमरा बुझायल जे तीनू बहिन आबि रहल छथि। हम अपना के सम्हारैत हिनका सँ पुछलियैन्ह अहाँके कोना बुझल भेल। कहलाह हम s मोतिहारी आयल छलहुँ अपन कॉलेजक काज सँ ओझाजी ओहिठाम गेलहुँ s पता चलल। हम पहिने हॉस्पिटल गेल रहि बाबुजी मामा के देखि हमर मोन ख़राब s गेल। ओहि ठाम सँ भागल एहि ठाम आयल छी। हम सब गप्प करिते छलहुँ कि तीनू बहिन आबि गेलिह आबिते सोनी हिनका पकरि s कानय लगलीह। बिन्नी अन्नू से लग मे आबि गेलिह। दृश्य हम नहि बिसरी सकैत छी। बौआ s लड़का छलाह बाबा सँ हुनका बड लगाव छलैन्ह मुदा हमरा सब के मोन मे असुरक्षा के भावना छल हिनका देखि खतम भेल।

काका केर काज खतम भेलाक बाद सब चलि गेलाह हम चारु भाई बहिन, बाबा दादी मौसी अपन चारु बच्चा सब सँग रहि गेलिह। इहो चलि गेलाह, हमरा एको रत्ती गाम पर मोन नहि लागैत छल, मुदा मजबूरी मे रहय परल। अचानक एक दिन तार आयल जे नानी सेहो नहि रहलिह। काका के देहान्तक खबरी सुनि खाना पीना छोरि देने रहथि हुनक देहांत s गेलैन्ह। तार अयलाक एक दू दिन बाद मामा अयलाह अपना सँग मौसी हुनक चारु बच्चा सब के सेहो s s चलि गेलाह मुदा एक बेर हमरा सब के कहबो नहि केलाह जे अहुँ सब चलु। हम दिन नहि बिसरी सकैत छी मौसी सब केर गेलाक बाद मात्र हम पाँच भाई बहिन बाबा दादी रहि गेलहुँ एक s हम सब कहियो गाम असग़र नहि रहल रही ताहु परओहेन परिस्थिति मे। राति राति भर हम डर सँ नहि सूती। सोनी s राति मे हमारा पकडि s सुतथि ताहू पर कैयक बेर डर सँ चिल्ला उठैथ।

एक s हम अपनहि डरपोक ताहि पर सब भाई बहिन के जिम्मेदारी हमरा पर रहैक। दादी बाबा s बुढ छलथि। माँ बाबुजी के कोनो समाचार से बुझय मे नहि आबि रहल छल। हम राति राति भर सूती नहि सोचैत रहैत छलहुँ।

नहि जानी कियैक करीब पन्द्रह दिन s गेलैक माँ बाबूजी के कोनो समाचार नहि भेटल छल सोचि सोचि हमरा बड चिन्ता होयत छल। राति के निन्द s नहिये होय उलटे चारि पाँच दिन सँ हमर छाती मे जोर सँ दर्द होमय लागल पहिने s दादी के हम नहि कहलियैन्ह मुदा बाद मे कहय परल। दादी के से चिन्ता होमय लागलैंह, अपना भरि किछु किछु सँ मालिश करथि मुदा ठीक नहि भेल। अंत मे दादी कहलथि ठाकुर जी के चट्ठी लिखि दहुन आबि जयताह। मुदा अपनहि हमरा सब केर देखय लेल पहुँचि गेलाह दादी के कहला पर हमरा s पटना डॉक्टर सँ देखाबय लेल s गेलाह। पटना मे हमर मौसी रहैत छलिह हुनके ओहि ठाम रही इलाज करेबाक विचार भेलैक। सब गोटे के जेबा मे s झंझट छलैक मुदा हम अन्नू के नहि छोरलियैन्ह हुनका अपना सँग लेने गेलियैन्ह। सोनी बिन्नी के दादी राखि लेलथिन्ह कहलथि कोनो चिन्ता नहि करय के लेल।

हम सब साँझ मे पटना पहुँचलहुँ मौसी के डेरा गेलहुँ, ओहि ठाम बाबुजी पहिनहि सँ रहथि।ओ सब भोर मे पहुँचल रहथि। माँ सँ पता चलल जे बाबुजी के कोहुना एकटा आँखि बाचि गेलैन्ह दोसर नहि बचायल जा सकलैन्ह। दोसर दिन हम सब जमशेदपुर आबि गेलहुँ