मंगलवार, 3 मार्च 2015

दहेज मुक्त मिथिलाक चारि वर्ष पूरा: ३ मार्च - २०१५

दहेज मुक्त मिथिलाक चारि वर्ष पूरा: ३ मार्च - २०१५

फेसबुक सँ शुरु कैल अभियान, धरातल पर उतरि बढेलक मिथिलाक शान, कहियो हिन्दुस्तानक फ्रंट पेज पर लिखेलक अपन नाम आ देलक एकटा नवज्योतिक किरणक आभान - आइ पूरा केलक यात्राक चारिम वर्ष आ लऽ रहल अछि पुन: नव संकल्प। 
चारिम वर्ष मे पूरा कैल गेल:
*स्मारिका केर प्रकाशन
*मैथिली महायात्रा केर प्रारंभ
*मुंबई मिथिला महोत्सव
सौराठ मे विमोचित 'दहेज मुक्त मिथिला' केर स्मारिका राजविराज, सहरसा, कोलकाता, कानपुर, दिल्ली, जमशेदपुर - सब ठाम अलग-अलग विमोचन आ आवश्यक अभियान-प्रचार-प्रसार आ आम अपील जे 'माँगरूपी दहेज नहिये ली - नहिये दी, बरु समान रूप सँ शिक्षा दियबैत बेटा आ बेटी सबकेँ आत्मनिर्भर बनाबी। मैथिल लेल एकमात्र आसरा विद्याधनं-सर्वधनंप्रधानम् केर सूत्र अपनाबी।' कहैत अभियान भारत व नेपालक चहुँदिशि अपन आवाज बुलंद कयलक।
    मैथिली महायात्राक शुभारंभ साईंधाम, दिल्ली सँ कैल गेल जेकर मूल उद्देश्य मिथिलाक बिखरल मोती (विभिन्न गणनीय व्यक्तित्व) केर परिचय समेटैत डायरेक्ट्रीक प्रकाशन करब अछि। अही मार्च केर आखिर तक प्रथम भाग डायरेक्ट्रीक प्रकाशन कैल जयबाक अछि। एखन धरि यात्रा दिल्ली, कोलकाता, राजविराज, सहरसा, कानपुर आ जमशेदपुर मे कैल गेल अछि। एकर अतिरिक्त जानकारी आरो-आरो ठाम सँ इमेल द्वारा प्राप्त भऽ रहल अछि। उपलब्ध तथ्यांक मुताबिक प्रथम भाग डायरेक्ट्री बहुत जल्दिये सबहक सोझाँ रहत।
  मुंबई - दहेज मुक्त मिथिला द्वारा भव्य 'मिथिला महोत्सव' - केर आयोजन कैल गेल। विभिन्न दहेज मुक्त विवाह कयनिहार केँ सम्मानित कैल गेल। दहेजक प्रकोप सँ जरि रहल समाजक विभिन्न रूप पर मिथिलाक अनेको प्रसिद्ध गायक एवं कलाकार द्वारा स्वैच्छिक प्रस्तुति देल गेल छल। संगहि विभिन्न गणमान्य नेतृत्वकर्ता आ विद्वान् तथा साहित्यकार लोकनि द्वारा एहि दिशा मे चिन्तन कैल गेल छल जे कोना हमरा लोकनि मिथिलाक बिगड़ैत स्वरूप केँ पुन: गरिमामय बना सकब।
      विदित हो जे 'दहेज मुक्त मिथिला' अपन प्रतिनिधित्व लगभग समस्त महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम मे करैत आबि रहल अछि आ स्वैच्छिक-स्वयंसेवा सँ मिथिलाक सेवा मे लागल एहि संस्थाक सदस्य सब धन्यवादक पात्र छथि।
      पाँचम वर्ष लेल 'शिकायत केन्द्र' केर स्थापनाक लक्ष्य लेल जा रहल अछि। जेकर लक्ष्य अछि: कोनो पीड़ित पक्ष बिना कोनो प्रकारक पूर्वाग्रह रखने - बिना कोनो सेल्फ-फेब्रिकेटेड स्टोरी (मनगढंत कहानी) बनेने विवाह पूर्व 'माँगल गेल दहेज'क आ कथा-वार्ता कोना शुरुआत केलहुँ, कोन स्तरक वरक इच्छा/माँग अहाँक छल, के मध्यस्थकर्ता छलाह, कथा-वार्ता मिलेबाक लेल कि सब शर्त राखल गेल, पैसा-कौड़ी या गर-गहना आ वर-वरियातीक स्वागतार्थ तथा बियाह-विदाई लेल खर्च करबाक लेल माँग कि सब कैल गेल, अहाँक स्वेच्छापूर्ण खर्च सँ बेसी कि सब जबरदस्ती लादबाक कूचेष्टा भेल, आदि समस्त व्योरा उपलब्ध कराउ, दहेज मुक्त मिथिला समुचित मध्यस्थकर्ताक भूमिका निर्वाह कय सकैत अछि।
      एहि संस्थाक सदस्यता लेल सब कियो स्वतंत्र छी। अपन-अपन इलाका मे एहि अभियान केर प्रचार-प्रसार एकमात्र कार्यक्रमक क्रियान्वयन अछि।
     एहि संस्थाक आधिकारिक फेसबुक ग्रुप-पेज एहि लिंक पर अछि, कृपया सदस्यता ग्रहण करी एहि ठाम ज्वाइन करैत:

संपर्क लेल: इमेल पठाबी - dmmithila@yahoo.com
सधन्यवाद,
प्रवीण नारायण चौधरी
अन्तर्राष्ट्रीय संयोजक
दहेज मुक्त मिथिला।

Read more...

शनिवार, 21 फ़रवरी 2015

मातृभाषा दिवश

मातृभाषा दिवशकेँ शुभ अवसर पर देश विदेशमे रहयवाला सभ भाषा–भाषी मित्र लोकनिमे हार्दिक मंगलमय शुभकामना व्यक्त करैत छी । अपन मातृभाषाकेँ बचाएब हमरासभक परम कर्तव्य अछि 

21 फरवरी के मनाबु अप्पन 'मातृ भाषा दिवस'
मिथिला धरोहर : 21 फरवरी यानी कि मातृ भाषा दिवस .. अंहा मे सँ बहुते कम लोग के पता होयत कि आय कोन दिन अछि। आधहा सँ ज्यादा लोग के तऽ फरवरी खाली वैलेंनटाइन डे कs लेल याद रहैत अछि।
आय के दिन अपन माँ भाषा के सेलिब्रेट करैय के अछि। आय के दिन अंहा अपन मातृ भाषा चाहे मैथिलि, अंगिका, भोजपुरी, मगही, वजिजका, जे भी होय ओकरा सेलिब्रेट कऽ सकय छि। कियाकि विविध भाषा के अय मोति के पिरोये कऽ भारत देशक एकता के माला बनय अछि, जय मे प्रेमक धागा होयत अछि।
हिंदी दिवस : हर हिंदुस्तानी के आवाज हिंदी..
मुदा बदलैत परिवेश मे जतय आय लोग के लेल वक्त नय अछि ओतय आय लोग सव भाषा के खिचड़ी कऽ देलक अछि। अंहा अपन आस-पासक लोगक बात पर गौर करव तऽ अंहा पैव जे आय शायदे ही कुनो एहन पुरूष औऱ महिला हैत जे कि शुद्ध भाषा के प्रयोग करैत होयत..जेना कि हिंदी बाजैत समय अंग्रेजी के प्रयोग, मैथिलि बाजैत हिंदी आ इंग्लिश शब्दक प्रयोग।
आय तऽ लोग महिलाओं सँ बात करैत कहैत अछि. आप खा रहे हो..या फेर बड़े सँ बात करैत समयो तू-तड़ाके क प्रयोग करैत अछि जेना कि तू खा ले, आप निकलो वगैरह..वगैरह।
दोसर अहम बात जे आय-काइल हर जगह अछि ओ अछि अंग्रेजी के बोलबाला। भौतिकतावादी युग मे स्टेटस मेंटेन करय के चक्कर मे हम विदेशी भाषा के तऽ तेजी सँ अपना रहल छि कियाकि इ बेहद जरूरी अछि, मुदा अपन पहचान ऑउर अपन मातृभाषा के बिसरैत जा रहल छि।
आय अगर मिथिलांचल दंपति दिल्ली, पुणे ऑउर बैंगलोर मे रहैत अछि तऽ हुनका बच्चा के मैथिलि नय आवैत अछि कियाकि ओ अपन बच्चा के कखनो मैथिलि बाजनय सिखेवे नय केलक, अगर बच्चा कखनो काल नकल करैतो अछि तऽ डांट-फटकार परैत अछि कियाकि हुनका लागैत यऽ जे कि हमर बच्चा मातृभाषा सीखे कs की करत ओकरा अंग्रेजी एवा चाहि कियाकि इहे सँ ओ स्मार्ट कहलैत जहनकि अपन क्षेत्रीय भाषा बाइज के पिछडल लागत।
इ सवटा लोगक ग्रसित मानसिकता कऽ सबूत अछि जेकर कारणे आय हमार क्षेत्रीय भाषा के ओ बढ़ावा नय मिलैत अछ जे कि अंग्रेजी कs मिल रहल अछ। हम देशक आन-बान ऑउर शानक बरकरार राखय के लेल कसम तऽ खाइत छि मुदा की मातृभाषा के अनदेखा कऽ के हम वाकई मऽ अपन सप्पत निभा रहल छि।
जय  मैथिलि  जय  मिथिला 

Read more...

सोमवार, 19 जनवरी 2015

नरक निवारण चतुर्दशी


                             नरक निवारण चतुर्दशी 



ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात् !!

   माघ मास कृष्ण पक्षक चतुर्दशी - देवाधिदेव महादेव केर प्रिय दिन, आइ देवता लोकनि परमपिता ब्रह्माजी सँ आदेश लय शिवकेर विवाह हेतु राजा हिमालय पुत्री गौरी संग कथा-वार्ता निश्चित कैल गेल छल।

     आजुक दिन अत्यन्त शुभ मानल गेल अछि आ एकर महत्ता बहुते पैघ छैक। मानव प्रजाति गार्हस्थ जीवनमे रहैत जे किछु पापाचार अनचोके केने रहैछ ताहि लेल क्षमायाचना आजुक दिन व्रत राखि करैत अछि। कर्म अनुरूपे फल भेटबाक बात मानव-संसारमे प्रसिद्ध छैक। तुलसीदासजी लिखैत छथि:

कर्म प्रधान विस्व रचि राखा - जो जस करहिं सो तस फल चाखा।
    अर्थात् एहि संसारमे जे कियो आयल अछि ओ निहित कर्म करबे करत आ तही लेल एहि संसारकेँ कर्मप्रधान मानल जाइछ, पुन: कर्म अनुरूप क्रियमाण, संचित ओ प्रारब्ध तीन तरहक फल पबैछ। हिन्दू धर्म-संस्कृतिमे जीवन पर्यन्त कर्मफलकेर जे किछु भोग छैक - तेकर अतिरिक्त मृत्युपरान्त सेहो कर्म अनुसार गति मानल गेल छैक। स्वर्ग आ नरक केर परिकल्पना ताहि लेल मानल जाइत छैक। सीधा शब्दमे पुण्यसँ स्वर्ग आ पाप सँ नर्क केर भोगक मान्यता छैक।
       गार्हस्थ जीवनमे विभिन्न प्रकारक कर्म करैत अनचोके कतेको पापाचार होइत रहैत छैक। लेकिन दर्शनशास्त्र ओ वैदिक कर्मकाण्ड द्वारा एहेन तरहक पापक भोगकेँ मेटाबय लेल किछु व्रत ओ अनुष्ठान आदिक चर्चा आयल छैक। माघ कृष्ण चतुर्दशीक व्रत एहेन पापसँ मुक्तिकारक होयबाक चलते नरक-निवारण चतुर्दशी कहाइछ। आइ लोक दिन भरि उपास रखैत अछि। आजुक दिन शिव-परिवारक पूजनमे बेल आ तीर्थक जलसँ जलाभिषेक केर विशेष महत्त्व छैक।
           मिथिलाक्षेत्रमे मकर संक्रान्तिसँ शुरु भेल शिवमठ पर दर्शन-पूजा, रवि-रवि मकर-मेला जेबाक प्रक्रियामे आइ चतुर्दशी दिन सेहो दर्शन-पूजापाठ लेल शिवमठपर जेबाक विशेष परंपरा छैक। लोक औझका व्रतक पारण लेल मठेपरसँ बेड फर आनैछ, संध्याकाल पारण करैत व्रत समापन कैल जाइछ। कतेक ठाम बेडक संग तील सेहो खाइत नरक निवारण चतुर्दशी व्रतक पारण करैत उपास खत्म करैछ। आजुक व्रत बाल्यावस्थासँ वृद्धावस्थामे रहनिहार सब कियो करैत अछि। मठ सबपर बड पैघ मेला सेहो लगैत छैक। प्राचिनकालसँ मिथिलामे एहेन समय घरक गृहिणी (नारीवर्ग) विशेष रूप सँ मठपर जाइत छथि आ नैहरा सहित अन्य सगा-सम्बन्धी सबसँ सेहो भेंटघाँट होइत छन्हि। कतेको रास वैवाहिक सम्बन्ध आजुक दिन मठेपर कनियां-निरीक्षणसँ पूर्ण होइत छैक। यैह कारण छैक जे संसारक लोकमे ई मान्यता छैक जे वैदिक विधान आ मिथिलाक लोकचर्या बहुत मिलैत छैक। 

Read more...

सोमवार, 5 जनवरी 2015

मैथिली महायात्रा आ रक्तदान कार्यक्रम



मिथिलांचल महासभा द्वारा आयोजित मैथिली महायात्रा ४ जनबरी केँ होटल रिलेशन केर सभागार मे भव्यतापूर्वक सम्पन्न भेल। कानपुर सँ सांसद तथा भाजपाक वरिष्ठ नेतृत्वकर्ता डा. मुरली मनोहर जोशी केर जन्मदिनक पूर्व-संध्या पर आयोजित एहि कार्यक्रम मे सामाजिक सरोकार आ मानव-सेवा प्रति जिम्मेवारीक वहन करैत आयोजक संस्था द्वारा रक्तदानक कार्यक्रम सेहो राखल गेल छल। रोटरी क्लब - कानपुर संग सहकार्य करैत सभागारक बाहर रक्तदान कैम्प लगाओल गेल। विदित हो जे मिथिलांचल महासभा अपन स्थापनाकालहि सँ समाज प्रति पूर्ण संवेदनशील रहि विभिन्न तरहक मानव-सेवाक कार्य करैत आबि रहल अछि। एहि मे फ्री मेडिकल कैम्प, विकलांग लेल ट्राइ-साइकिल वितरण, असहाय परिवार पर अचानक आयल कोनो आफत-विपत्तिक घड़ी सहायक बनि मानवीय सहयोग देनाय, आर्थिक रूप सँ विपन्न बाल-बालिकाक समुचित शिक्षा लेल प्रयास आदि विभिन्न सामाजिक कार्य करबाक पैघ सूची अछि।
        मैथिली-मिथिला प्रति योगदान देनिहार विभिन्न शहर-नगर मे बसनिहार प्रवासी मैथिल लोकनिक परिचय केँ संग्रह करबाक उद्देश्य सँ कैल जा रहल मैथिली महायात्राक पड़ाव कानपुर मे 'मैथिली, मैथिल के प्रति सिनेह एवं एकजुटता' आ 'प्रवासी मैथिलक राजनैतिक अधिकार' पर परिचर्चा गोष्ठीक संग कविता पाठ, भगवती गीत तथा सहभोज सँ समापन कैल गेल। मिथिलांचल महासभाक संस्थापक अध्यक्ष तथा कानपुर मैथिल समाजक अग्रणी श्री रवि नाथ मिश्र केर अध्यक्षता मे लगभग ५ घंटा तक चलल परिचर्चा कार्यक्रम मे विभिन्न ठाम सँ पधारल विद्वान्, अभियानी, नेतृत्वकर्ता, कवि सहित स्थानीय विज्ञजनक नीक सहभागिता देखल गेल। मैथिलक सम-सामयिक अवस्था पर आधारित रहबाक कारणे श्रोतावर्ग शालीनता सँ वक्ता लोकनिक सब बात केँ सुनलैन।
     किसलय कृष्णक कुशल ओ विशिष्ट मंच संचालन सँ चलि रहल कार्यक्रम मे प्रमुख अतिथि प्रो. ज्योति किरण (प्राध्यापक, विमेन्स कालेज, कानपुर) द्वारा दीप-प्रज्वलन तथा हरेराम झा द्वारा गाओल गोसाउनि गीत सँ सभा आरंभ भेल। कार्यक्रम प्रभारी (संयोजक) अनिल झा द्वारा स्वागत-मन्तव्यक संग विषय प्रवेश करबैत मिथिलांचल महासभाक विगत मे कैल गेल विभिन्न मूल्यवान् सेवा सहित भविष्य मे मैथिल केँ अधिकार संपन्न बनेबाक लेल राजनैतिक सामर्थ्य सँ परिपूर्ण बनेबाक लेल संघर्ष जारी रखबाक बात स्पष्ट कैल गेल। ओ अपन प्रखर वाणी सँ समस्त मैथिल समाजकेँ आह्वान कयलनि जे जाबत हमरा लोकनि अपना आप केँ राजनैतिक पद आ पावर सँ परिपूर्ण नहि करब, बाहरी दुनिया हमरा सबकेँ मोजर नहि देत। मुस्लिम वोट बैंक केर उदाहरण दैत ओ मैथिल वोट केर परिकल्पना पर विचार केन्द्रित केलनि। एहि लक्ष्य केर प्राप्ति तखनहि संभव होयत जखन हम सब सशक्त एकजुटता सँ अपन नेता अपनहि बनायब। दुनियाक कोनो राजनैतिक शक्ति मैथिल केँ पाछू नहि कय सकैत अछि जँ हमरा लोकनि एकसूत्री कार्यक्रम चलाबी, अपन समाजक लोक मे कथमपि राजनैतिक लड़ाई मे धोखा नहि दय बस एक स्वर मे आवाज लगाबी। काफी भावुकता सँ भरल विचार सब रखैत श्री झा इहो कहलैन जे कोना लोक अपन मूल घर-द्वारि छोड़ि कतहु शहर मे अबैत अछि, कोन तरहें ओकरा पर ओहिठामक स्थानीय समाजक लोक बिहारी कहिकय वा आन-आन तरहें दुत्कार-फटकार दैत छैक, तथापि अपन माटि-पानि-भाषा-संस्कृतिक प्रसादे कोना एक मैथिल प्रवास पर सेहो अपन जीवटतापूर्ण संघर्ष सँ अपना केँ स्थापित करैत अछि आ आब बेर आबि गेल छैक जे प्रवासी मैथिल केँ अपन राजनैतिक अधिकार प्रति पूर्ण साकांछ रहैत अधिकारसंपन्न बनय। आब कानपुर मे मैथिल केर एतेक अधिकार बनैत छैक जे कुल ७ विधायक मे सँ ३ विधायक मैथिल बनय, कानपुर नगरक मेयर मैथिल बनय, मैथिल बाहुल्य क्षेत्रक वार्ड कमिश्नर मैथिलहि केँ चुनल जाय आ विभिन्न राजनीतिक दलक मात्र मुखौटा वोटबैंक नहि बनि मैथिल ओहि दलक नीतिकार आ पदवीधारी अधिकारी सेहो बनय। मुह ताकयवला समय सँ आब मैथिल ऊपर आबि चुकल अछि। सब तरहें मैथिल मे ई सामर्थ्य छैक जाहिक आधार पर ओ राजनैतिक सामर्थ्य केँ हासिल कय सकैत अछि। एहेन उर्जावान् आ सशक्त घोषणा सुनि उपस्थित जनमानस बेर-बेर तालीक गुंज सँ स्वागत करैत देखायल। एहि उद्घोषणाक तुरन्त बाद बाल गायक निकेतन द्वारा भगवतीक गीत गाबि दर्शक-श्रोताकेँ मंत्रमुग्ध कय देल गेल।
           तदोपरान्त मैथिली महायात्राक उद्देश्य तथा कानपुर धरि अयबाक अनुभूति पर प्रवीण नारायण चौधरी द्वारा सभाकेँ संबोधन कैल गेल। पूर्व वक्ताक भावुक प्रस्तुति सँ अभिभूत प्रवीण सेहो हुनकहि समस्त बातकेँ बल दैत कानपुरवासी सँ अपील कयलनि जे हनुमानी शक्ति जे बिसरायल अछि तेकरे पुनर्स्मृति मे अनबाक लेल ईश्वरीय कृपासँ ई यात्रा आइ कानपुर आबि गेल अछि। कानपुर सहित भारत ओ नेपालक विभिन्न शहर मे मैथिलक जे उपस्थिति अछि ताहिक बले आब मैथिल पुत्र विधानसभा आ संसद भवन तक पहुँचय लागल छथि। मिथिलाक हालत बदतर अछि, ताहि दिशा मे सोराज केर सिद्धान्त टा कारगर होयत। ताहि लेल सेहो आब प्रवासी मैथिल केँ जिम्मेवारी वहन करय पड़तनि। ब्रजस्थ मैथिलक उदाहरण दैत ओ सभा सँ यैह अपील कयलनि जे पहिचानक विशिष्टताक प्रथम आधार भाषा प्रति उदासीनता दुखद अछि। मैथिली भाषा मे सृजनशील कार्य करबाक परंपराक निर्वाह कैल जाय। जहिना मैथिली अन्तो-अन्त तक संविधान द्वारा सम्मानित भेल तहिना मिथिला सेहो सम्मानित हेबाक चाही।
       क्रमश: विषय तथा महायात्राक उद्देश्य पर विभिन्न वक्ता द्वारा सारगर्वित संबोधन कैल गेल। परिचर्चा तखन फेर रंग पकैड़ लेलक जखन दिल्ली सँ यात्रा मे आयल मिथिला राज्य निर्माण सेनाक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमर नाथ झा द्वारा मैथिली आ मिथिला लेल कैल जा रहल युवा प्रयास पर प्रकाश देल गेल, संगहि इहो स्पष्ट कैल गेल जे एक रतिक इगो कतेक घातक बनि सकैत अछि आ कोना कोनो सार्थक कार्यकेँ पटरी सँ उतारि सकैत अछि। लोक देवी-देवता केँ पूजा डरे करैत अछि जे जँ पूजा नहि करब तऽ अनिष्ट होयत। तहिना आइ राजनीतिकर्ता एहि डरक सिद्धान्त पर काज करैत अछि जे जँ कोनो खास समुदाय वा भाषाभाषी वा क्षेत्रक लोक केर बात नहि मानब तऽ वोट कटि जायत। मैथिल केँ ई आत्मसात करबाक चाही जे आपसी विखंडन सँ मैथिलक डर केकरो नहि होइत छैक आ यैह कारण सँ आइ मैथिल केर अधिकार संविधान द्वारा सम्मान नहि पाबि सकल अछि। अपन सुन्दर अनुभव केर वर्णन प्रस्तुत करैत ओ आह्वान कयलनि जे हम सब दोसराक पैर पूजा कम करी, अपन भाषाभाषीक नेताकेँ आगू बढाबी आ एकजुटता आर विषय मे हो नहि हो, राजनीतिक विषय मे सबहक स्वर एक रहबाक चाही। एहि लेल दोसर किछु नहि, बस अपन इगोकेँ हम सब कम करी।
गवर्नमेन्ट कालेजक प्राचार्य प्रो. पंकज चौधरी एहि आयोजन प्रति हर्षक अनुभूति प्रकट करैत स्वयं बहुत दिन सँ एहि मौकाक प्रतीक्षा करबाक उद्गार व्यक्त केलनि। मात्र पेपर मे पढि संतोष कय लैत छलहुँ, मुदा आइ प्रत्यक्ष मैथिल द्वारा आयोजित मैथिली महायात्रा कार्यक्रम मे सहभागी बनि प्रवासी मैथिल रहितो स्वयं मिथिले मे रहबाक अनुभव कय रहल छी। एहि तरहक कार्यक्रम निरंतरता मे रहत तऽ स्वत: परिस्थिति निर्माण होइत रहतैक, आ हम सब फेर सँ अधिकारसंपन्न बनबे टा करब। मिथिलांचल महासभाक उपाध्यक्ष देवेन्द्र झा अपन संबोधन मे 'संघे शक्ति कलियुगे' सिद्धान्त पर सबकेँ एकजुट बनबाक आह्वान केलनि। संगहि प्रवासी मैथिल दुइ प्रकारक होइत अछि, एक मैथिलीभाषी आ एक गैर-मैथिलीभाषी, एहि दुनु केँ जोड़बाक बात पर ध्यान देबाक आवश्यकता अछि, तखनहि संघ मजगुत बनत। अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषदक महासचिव प्रेमकान्त झा सभा मे कने देरी सँ पहुँचलाक कारणे केवल अपन मनक बात राखि मिथिला राज्यक आवश्यकता आ मैथिली भाषाक प्रयोग पर जोर देलनि। समाधान लेल मैथिलीक अपन मिडिया आ मैथिली पढाई लेल सिबिएसई कोर्स मे विषय रखबाक बात पर प्रकाश देलनि। ओ अपन आलोचनात्मक अंदाज मे सभा मे बैसल जोरदार भाषण देनिहार लोक सब सँ सेहो ईमानदारी सँ मैथिली केँ स्वीकारबाक माँग केलनि। दिनेश झा, राधा बल्लभ झा व कानपुर मैथिल समाजक अनेको अगुआ लोकनिक सुन्दर उपस्थिति आ संबोधन सभाक विशेषता रहल।
     तहिना मिथिला राज्य निर्माण सेनाक संस्थापक अध्यक्ष हेमन्त झा द्वारा सेहो राजनीतिक लड़ाई कोन आधार पर लड़ल आ जितल जा सकैत अछि तेकर सुन्दर चित्रण प्रस्तुत कैल गेल। आर कतहु मतभिन्नता हो, मुदा मिथिला राज्य लेल आ मैथिलक राजनैतिक अधिकार लेल एकजुटताक आवश्यकता केँ मनन करी। सरस्वतीक धनी मैथिल लक्ष्मी केँ प्रसन्न किऐक नहि कय पबैत छथि। विखंडित समाज द्वारा कहियो अधिकारसंपन्नता प्राप्त नहि भेलैक अछि, तैँ एकजुटता पर सब कियो निरंतर कार्य करी। मैथिली महायात्रा कार्यक्रम आइ जोड़बाक कार्य कय रहल अछि। मिथिला राज्य निर्माण सेनाक कोषाध्यक्ष तथा नीतिकार संजीब सिन्हा द्वारा एक सँ बढि कय एक प्रेरक उदाहरण दैत संघर्ष लंबा समय धरि करबाक बात पर जोर देलनि। हुनक कहब छल जे बस एकटा ज्ञापन कतहु देला सँ ओ माँग पूरा होयत से जरुरी नहि छैक, ओकर प्रक्रिया छैक आ ताहि मे हमरा सबकेँ बेर-बेर प्रयास करहे टा पड़त। जन-आन्दोलन मे जन-जन केर सहयोगक आवश्यकता पर ओ जोर दैत रहलाह। कौशल कुमार संबोधन करैत कहला जे आइ मैथिल पलायन जेहेन खतरनाक वन-वे-स्ट्रीट मे यात्रा करबाक लेल बाध्य अछि। पलायन तखनहि रुकत जखन प्रवासी संपन्न मैथिल एहेन रास्ताक निर्माण करैथ जाहि सँ पलायन रुकय। विकासक परिस्थिति आइ बाहरे बसल सक्षम आ सामर्थ्यवान मैथिल द्वारा बनि सकैत अछि।
कानपुर युवा मैथिल केर प्रतिनिधित्व करैत मनोज कुमार द्वारा युवा-जागृति पर जोर देल गेल। ओ कहलनि जे हम सब योजनाबद्ध तरीका सँ अपन पहिचान, भाषा, संस्कृति आ एकजुटताक लेल काज कय रहल छी। आब चुप नहि रहब, अधिकार लेबे टा करब। तहिना दिल्ली सँ आयल 'नशा मुक्त मिथिला' केर संस्थापक विक्की ठाकुर द्वारा संबोधन मे कहल गेल जे जँ दहेज मिथिला समाजक लेल साँप छी तऽ नशा समाज लेल जहर छी। साँपक समाधान संभव छैक, मुदा ओकर बिख चढि गेलाक बाद समाधान कठिन छैक। एहि अभियानक कार्य किनको निजी जीवन मे प्रवेश करबाक कदापि नहि मुदा नशाक असर सँ समाजकेँ मुक्त करबाक एहि अभियान मे समाजक सबहक सहभागिता जरुरी छैक। एहि लेल कानपुर समाज सँ सेहो सहयोग भेटत एहि अपेक्षा केँ ओ प्रकट केलैन। मैथिली गीतकार विमल जी मिश्र सेहो दिल्ली सँ आबि एहि यात्रा मे सहभागी बनलाह आ दहेज लेनिहारक पत्नी आ बिन लेनिहारक पत्नी कोन तरहें अपन पति ओ परिवार संग व्यवहार करैत अछि तेकरा लयात्मक प्रस्तुति मे रखलनि।
      मिथिला मिरर केर संपादक ललित नारायण झा मैथिल समाज सँ वर्तमान युग अनुरूप महिलाक सहभागिता बढेबाक बात पर जोर देलनि। उपस्थित जनसमूह मे महिलाक सहभागिताक उदाहरण दैत ओ कानपुर समाजकेँ आइना देखबैत अपन पत्नी सहित ओहि समस्त महिलाक उदाहरण देलनि जे आइ पढि-लिखि सब तरहक फैशन आ मिशन मे आगाँ छथि। मैथिलानी कतहु सँ कमजोर नहि छथि आ ई बात मिथिलावासीक परंपरावादी समाजकेँ आत्मचिन्तन करबाक चाही। तहिना ओ अपन मन्तव्य मे मैथिली सिखेबाक दायित्व माता-पिता पर रहबाक बात कहलनि। भले धिया-पुता अंग्रेजी माध्यम सँ किऐक नहि पढि रहल हो, ओकरा काउ माने गाय मैथिली मे होइत छैक सेहो पता हेबाक चाही। पापा बापे केँ कहल जाइत छैक ई बात हम सब अपन बच्चा केँ जरुर सिखा सकैत छी। माता-पिताक गुणे धिया-पुताक बाढि होइत छैक, संस्कार जेहेन देबैक वैह आगाँ देखब। जे मैथिली नहि सिखबैत छथि ओ स्वयं २० वर्षक बाद परिणाम भुगतय लेल तैयार रहैथ। एहि तरहें मिथिला मिरर द्वारा कैल जा रहल मैथिली ओ मिथिला प्रति विभिन्न योगदान तथा एहि मे सबहक सहयोगक आवश्यकता पर जोर दैत आगामी समय मे सेहो स्वयं प्रतिबद्ध रहैत सेवा करैत रहब ओ अपन भावना व्यक्त केलनि।
           अन्त मे अध्यक्षीय संबोधन करैत मिथिलांचल महासभाक संस्थापक अध्यक्ष श्री आर एन मिश्र समस्त संबोधन-भाषण केँ ध्यान सँ सुनि आ मनन करबाक उपरान्त एक्कहि बात पर जोर देलनि जे वर्तमान कानपुर मैथिल समाजक हित सर्वोपरि अछि, जाहि लेल मिथिलांचल महासभाक स्थापना ओ केलनि। एहि मे सब नि:स्वार्थ भावना सँ मात्र सेवा करैत अपन पहिचान आ आत्मसम्मानक रक्षा लेल आगू बढि गेल छथि। कियो गैर-मैथिल नेता संग फोटो खिचाबय मे गर्वक अनुभूति करैत छथि ताहि सँ बहुत नीक जे स्वयं मे स्थित ओहि विशिष्टताकेँ जगाउ जे आन-आन लोक अहाँक संग फोटो खिचाबय मे गर्वक अनुभूति करैथ। अपन निज जीवनक एक अविस्मरणी उदाहरण रखैत ओ स्मृति मे अनलाह जे कोना हुनक पिता कानपुर मे पुरोहिताइ करेबा समय एक व्यवसायीक घर हुनकर सोझें अपमानित भेल छलाह, जेकरा ओहि समय तँ ओ मजबूरी मे वर्दास्त कय लेने छलाह, मुदा बाद मे अपन संकल्प-शक्ति सँ नौकरी नहि करबाक प्रण करैत व्यवसाय शुरु केनाय आ ओहि अपमान केनिहार व्यवसायीक पुत्र केँ अपन फर्म मे बारह वर्ष नौकर बनाय रखबाक विलक्षण आ अति-प्रेरणादायक जोशीला उद्धरण सभाक समक्ष प्रस्तुत केलनि। अपन संस्थाक युवा आ उर्जावान् शक्ति अनिल झा तथा अध्यक्ष अमित झा केँ दायाँ आ बायाँ हाथ कहैत ओ वचन देलनि जे बस काज करू आ एहि मे नकारात्मक शक्तिक कोनो गिनती नहि कैल जायत। अनिल झा केर उर्जा केँ आ काज करबाक प्रतिबद्धताकेँ आत्मसात करैत ओ एहि मुहिम मे आजन्म आगाँ रहबाक सेहो वचन देलनि। समाजक हर वर्गक लोक केँ आगू आबि मिथिलांचल महासभाक उद्देश्यक संग डेग बढेबाक आह्वान सेहो केलनि। कानपुर मैथिली, मिथिला आ मैथिल लेल सदैव तत्पर रहत आ कानपुरक हरेक समाज संग सहकार्य करैत एहि ठामक विकासक संग मूल मिथिला लेल सदैव अग्रगामी भूमिकाक निर्वाह करत।
      आयोजक संस्था मिथिलांचल महासभाक अध्यक्ष श्री अमित झा द्वारा आगन्तुक अतिथि तथा समस्त सहभागी सभासद लोकनिकेँ हृदय सँ आभार प्रकट करैत धन्यवाद ज्ञापन केलनि। अपन संछिप्त संबोधन मे कानपुरक आयोजन बहुत कम समय मे एतेक गंभीर होयबाक सत्यकेँ साक्षात् दर्शन कय आह्लादित हेबाक बात कहलनि। तदोपरान्त सभाध्यक्षक आदेश सँ महाकवि विद्यापतिक स्मृति करैत प्रवीण नारायण द्वारा 'उगना रे मोर कतय गेलाह' आ 'कहल सुनल सब क्षेमा करियौ यौ बैद्यनाथ' गाबि संपूर्ण दर्शक-श्रोताकेँ भाव-विभोर बनायल गेल।

    मैथिली महायात्राक कार्यक्रमक संग रक्तदान कैम्प मे लगभग ४० गोटा अपन रक्तदान केलनि। रोटरी क्लब अफ कानपुर केर सेहो सक्रिय सदस्य तथा ऐगला सत्रक अपेक्षित अध्यक्ष मिथिलांचल महासभाक अध्यक्ष अमित झा केर सृजनशील प्रयास सँ एहि महान मानवीय कार्यकेँ निष्पादन कैल गेल। कार्यक्रम मे लगभग ५ बजे अत्यन्त गरिमामयि उपस्थितिक संग डा. मुरली मनोहर जोशी द्वारा कार्यक्रम सराहना कैल गेल, ५ जनबरी हुनक जन्मदिनक उपलक्ष्य आयोजित कार्यक्रम मे सेहो मिथिलांचल महासभाक उपस्थिति लेल आमंत्रणाक संग मैथिली भाषा जेना संविधान मे हुनक दल भारतीय जनता पार्टी स्थापित केलक तहिना मिथिला राज्य केँ सेहो स्थापित करबे करत। एहि लेल विशेष कार्यदल द्वारा समुचित गृहकार्य कैल जा रहल रहस्य सेहो प्रकट कैल गेल। समस्त अभियानी केँ अपना संगे सोफा पर बैसाय फोटो सेशनक संग बेर-बेर डा. जोशी द्वारा मैथिली-मिथिला प्रति शुभकामना संदेश देल गेल। भविष्य मे सेहो मिथिलांचल महासभा एहेन गौरवपूर्ण कार्यक्रम करैत रहबाक अपेक्षा रखैत सभा सँ विदाइ लेलनि।
        आगन्तुक अतिथि लोकनि केँ जहिना आरंभ मे पाग, बैज आ माला सँ सम्मान कैल गेलनि, तहिना अन्त मे 'मिथिलांचल महासभा अंकित स्मृति चिह्न'क संग दोपटा दऽ के अनन्तकाल धरि आयोजित मैथिली-महायात्रा-कानपुर केँ मोन राखबाक अनुपम संदेश देल गेल। कार्यक्रमक अन्त एक भव्य सहभोज सँ भेल। समस्त श्रोता-दर्शक आ आगन्तुक अतिथि लोकनि एक संगे मिथिलाक पारंपरिक शैली मे भोजक रसास्वादन करैत सभाक समापन कैल गेल।

प्रवीण नारायण चौधरी
कानपुर उत्तर प्रदेश  

Read more...

सगर राति दीप जरय

मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...


पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

© कॉपीराइट सूचना:
मैथिल आर मिथिला
सर्वाधिकार सुरक्षित। एहि जालवृत्तपर ई-प्रकाशित कोनो रचनाकेँ प्रिंट, दृश्य, श्रव्य,इलेक्ट्रॉनिक वा कोनो डाटा स्टोरेज माध्यमसँ स्थांतरण वा प्रकाशन बिना सम्बन्धित प्रस्तुतकर्त्ता/ लेखकगणक, जिनकामे ओहि रचनाक कॉपीराइट निहित छन्हि, लिखित अनुमतिक नहि कएल जा सकैत अछि।

  © Maithil Aar Mithila. All rights reserved. Website Design By: Jitmohan Jha (Jitu)

Back to TOP