शनिवार, 6 दिसंबर 2014

गजल

एमरीक पूजा जोड़ पकरने छै
गाम गाम मैयाकेँ पसारने छै

एक दोसरामे होड़ छैक लागल
सभक बुद्धिकेँ के आबि जकरने छै

पाठ माइकसँ छकरैत आँखि मुनि सभ
अपन घरक माएकेँ तँ बिसरने छै

एक कोणमे छथि चूप मूर्त मैया
लोक नाच गाजा भाँग दकरने छै

'मनु' किछो बाजल आँखि खोलि कनिको
लोक ओकरेपर गाल छकरने छै

(मात्राक्रम :२१-२१-२२/२१-२१-२२)

©जगदानन्दझा 'मनु'  

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मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

लास्ट टाइम सजेशन



लास्ट टाइम सजेशन

हम कोनो नौकरीमे सफल नै भऽ सकलहुँ। कारण ई नै छल जे हम काज नै करिऐ तैमे बस आठ घंटाक सुतबाक आदति छल तँए। बिजनेसो नै कऽ सकलिऐ कारण हेड़ा-फेरीमे हम माँजल लोक आ हम ओहूमे हेड़ा-फेड़ी करऽ लगलहुँ तँए ओहो असफल भेल। अंतमे हारि कऽ हम कुंजी लिखऽ बला बनि गेलहुँ। ने पूँजी लागल आ ने किछु सोलहो आना हेडा-फेरी। मोन बड़ लागल हमर ऐमे। हमर दिनानुदिन तरक्की भेल ऐ क्षेत्रमे जकर फलस्वरूप हम महान कुंजीकार बनि गेलहुँ। प्रस्तुत अछि हमर एकटा कुंजी---


प्रिय विद्यार्थी गण,


हम अपने लोकनिक समक्ष ई लास्ट टाइम सजेशन राखि रहल छी। आशा अछि जे ऐसँ अहाँ सभकेँ लाभे-लाभ भेटत। ओना हम पाठ्यपुस्तक सेहो लीखि सकैत छलहुँ मुदा नै लिखलहुँ कारण जे बिकाइत नै अछि किएक तँ अहाँ सभ खाली सजेशने केर माँग करैत छिऐ। तँइ हम अपने लोकनिक सामने ई प्रस्तुत कएल। बंधुगण ऐ सजेशनमे मात्र बीस गोट प्रश्न उत्तर सहित अछि। एकर अध्ययन केलासँ पास करबे टा करब से हमर गारंटी अछि। डीवीजन एनाइ कोनो आवश्यक नै संगहि संग हम ईहो कहब जे ई सजेशन कोर्से नै व्यावहारिक जीवनमे सेहो काज देत। तँ आउ अध्ययन करी ऐ लास्ट टाइम सजेशन केर।


इति शुभम


1) नेताक परिभाषा दिअ-
नेता ओहन लोककेँ कहल जाइत छै जे लेबा बेरमे सभसँ आगू आ देबा बेरमे सभसँ पाछू रहैत अछि।
2) नेता आ जनताक बीच केहन संबंध छै-
जेना पानिमे तेल घोरल हो। दूनू एकैठाँ देखाएत मुदा दूनूक अलग-अलग अस्तित्व।
3) ठेकेदारपर संक्षिप्त टिप्पणी दिअ-
कोनो बनैत चीजक नेओं कमजोर कऽ जे अपन नेओं मजगूत करथि से ठेकेदार कहाबथि छथि।
4) डाक्टर के छथि-
डाक्टर ओ लोक छथि जे बेमारीकेँ तेना ने हटाबथि जे आदमी संसारिक आवागमनसँ मुक्त भऽ जाए। वस्तुतः डाक्टर महान योगी होइत छथि जे की साधारण साधककेँ सोझें मोक्षक बाट बतबैत छथि।
5) उच्च अधिकारीक दू काजक वर्ण करू-
a) ओ घूस लै छथि,
b) स्वंय नियम बना तोड़ै छथि।
6) पुलिसक दू काजक वर्णन करू-
a) ओ अपराधी आ दुष्टक रक्षा करै छथि,
b) फुसिक सबूतसँ निर्दोषकेँ फँसबै छथि।
7) बेसबाक परिभाषा प्रस्तुत करू-
बेसबा ओ नै जे पेटक भूख लेल देह बेचैत हो। बेसबा तँ ओ अछि जे बेसी पाइ लेल देह बेचैत अछि।
8) जनताक संक्षिप्त काजक वर्णन करू-
a) ओ पाइ लऽ कऽ भोट खसबैत छथि,
b) अपन अधिकारक प्रति निष्चेष्ट रहि आनक अधिकारक उपभोग करै छथि।
9) हीरो किनका कहि सकैत छिअनि-
हीरो ओ छथि जे की फिल्ममे दुष्टक संहार करै छथि मुदा असल जीवनमे ओकरा संग दोस्ती रखने रहै छथि।
10) मनुख आ कूकूरमे की अंतर-
अंतर अतबए जे मनुख स्वर्थक पूर्ति लेल अपन माए सेहो बेचि सकैए मुदा कूकूरसँ से संभव नै।
11) सज्जनक दू टा लक्षण प्रस्तुत करू-
a) ओ एकौट होथि,
b) समाज हुनका बताह कहैत होइन।
12) पुजारी किनका कहि सकैत छिअनि-
पुजारी ओ छथि जे मंत्रक सस्वर पाठ करैत स्वार्थक मानसिक पाठ करैत होथि।
13) संन्यासीक दू टा लक्षण प्रस्तुत करू-
a) संन्यासी मठ आ कामिनी लेल बंदूको निकालि सकै छथि,
b) अपने ज्ञान होइन की नै होइन मुदा अपना नामक आगू जगतगुरू लगबैत छथि।
14) साहित्यकार के छथि-
साहित्यकार ओहन लोककेँ कहल जाइत छै जे की टका ओ पुरस्कारक लेल वाग्विलास करै छथि। जे खाली अपने लिखलकेँ पढ़ि-पढ़ि कऽ अनका सुनाबथि आ अनकर लिखलकेँ पढ़बे नै करथि तिनको साहित्यकार कहल जाइत छै। ओना संसारमे किछु एहनो साहित्यकारक प्रजाति अछि जे अपने आगू बढ़बाक लेल अपस्याँत रहत मुदा सदिखन दोसरकेँ छिटकी मारि कऽ।
15) जनपथ आ राजपथमे की अंतर छै-
जै बाटपर गरीब चलै छै तकरा जनपथ आ पाइ बला लोकक बटाकेँ राजपथ कहल जाइत छै।
16) ओकील के छथि-
ओकील हुनका मानल जाए जे टका लऽ कऽ एक आदमीक माध्यमें दोसर आदमीक छातीमे कील ठोकै छथि।
17) न्यायाधीश हेबाक मापदंड की अछि-
जे न्यायपर आधीश भऽ ओकरा अपना इच्छे मोड़ि सकए से न्यायधीश भऽ सकै छथि।
18) की बेपारीके बेपार विशेषज्ञ बूझल जाए-
बुझि सकै छी कारण हुनकर पार पेनाइ सभसँ संभव नै।
19) गुरू आ शिक्षकमे की अंतर थिक-
गुरू ज्ञान दऽ कऽ बौआ दै छथि आ शिक्षक बिना ज्ञान देने।
20) विद्यार्थी के थिकाह-
ओ बालक जे अनर्थसँ अर्थ आनि धर्म, काम ओ मोक्षक प्राप्ति करै छथि से विद्यार्थी भेला।

http://www.videha.co.in/new_page_17.htm

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सोमवार, 1 दिसंबर 2014

गजल

नजरि जे अहाँकेँ लाजे झुकल अछि
प्राण लेलक हमर जे आँचर खसल अछि

देखलहुँ एक झलकी जखने अहाँकेँ
लागल रूप मोनेमे बसल अछि

सत कहै छी अहाँकेँ हम मानियो लिअ'
बिनु अहाँ हमर जीवन शुन्ना बनल अछि

हम दुनू मिलि जँ जीवनमे संग चललहुँ
प्रेम जग देखतै मनमे जे भरल अछि

बिनु पएने अहाँके नै जगसँ जेबै
हाँ सुगन्धाक सुनि ली तें 'मनु' बचल अछि


(बहरे असम, मात्रा क्रम - २१२२-१२२२-२१२२)
जगदानन्द झा 'मनु' 

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सोमवार, 24 नवंबर 2014


  
मधुशाला!
आई पवन वेग में चली रहल,
नव अंकुर मन में पली रहल!
अछि फ़ूकबा के गुंजाइस नै,
आब उड़बा के फरमाईस नै!
पलव्वित करी एही अंकुर के,
माया छोरी क्षण भंगुर के!
कलकल प्रेमक निरवता सँ
मन चंचल वेग समीरता सँ
सिंचन करी एही विटपता के
चित साधु संत सहजता के
एक दिवस महा वट वृक्ष बनै
ता पर नाना मधु पुष्प खिलै
प्रेमक पाश में बाँधि अपन
मधु के ललसा में भय मगन
दुश्टो सब अपन सुइध हेरय
भंवरा बनि अपने पंख चिरय
द छाया अपना आँचल के
एही माया मृग सँ बाँचल जे
निस्वार्थ भाव् नीर बहैत रहा
जग्भर्मित पथगामी पिबैत रहैए
मधु सन माधुर्य सुधामय जग
लय सुख - दुःख के मेथैत रहैए
जीवन संझा आब ढैल रहल
अंकुर के बीज फेर पनैप रहल!
आई पवन वेग में चली रहल, !!
(नविन ठाकुर)

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सगर राति दीप जरय

मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...


पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

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मैथिल आर मिथिला
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