शनिवार, 28 जनवरी 2012
गजल
हम अहां केर प्रीतम नहि बनी सक्लहूँ
मुदा अहांक करेजक दर्द बनी गेलहुं
अहां हमर प्रेम दीवानी बनल रहलौं
हम अहांक दीवाना नहि बनी सक्लहूँ
अहां हमर प्रेम उपासना करैत गेलौं
हम आनक वासना शिकार बनी गेलहुं
अहांक कोमल ह्रदय तडपैत रहल
हम बज्र पाथर केर मूर्ति बनी गेलहुं
हम अहांक निश्च्छल प्रेम जनि नै सकलौं
अनजान में हम द्गावाज बनी गेलहुं
आब धारक दू किनार कोना मिलत प्रिये
मजधार में हम नदारत बनी गेलहुं
................वर्ण:-१६ ...............
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट
शुक्रवार, 27 जनवरी 2012
गजल
कहि कऽ नै मोनक हम तँ बड्ड भेल तबाह छी बाबू।
कहब जे मोनक, अहीं बाजब हम बताह छी बाबू।
हुनकर गप हम रहलौं जे सुनैत तँ बनल नीक छलौं,
गप हुनकर हम नै सुनल, कहथि हम कटाह छी बाबू।
सदिखन रहलथि मूतैत अपने आगि सभ केँ दबने,
हम कनी डोलि गेलौं, ओ कहै अगिलाह छी बाबू।
बनल छल काँचक गिलास हुनके मोनक विचार सुनू,
इ अनघोल सगरो भेलै हम तँ टुनकाह छी बाबू।
सचक रहि गेल नै जुग, सच कहि कऽ हम छी बनल बुरबक,
गप कहल साँच तऽ अहीं कहब "ओम" धराह छी बाबू।
(ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ)--- ४ बेर
रचनाकार-प्रस्तुतकर्ता छथि:
OM PRAKASH
समय :
7:31 अपराह्न
, Links to this post
, 0
पाठकक टिप्पणी भेटल - अपने दिअ।
बुधवार, 25 जनवरी 2012
रखु सम्हईर जुवानी जिआन नै करू@ प्रभात राय भट्ट
छोड़ी दिय आँचर पिया परेशान नै करू
सदिखन प्रेमलीला पैर एतेक धियान नै धरु
रखु सम्हैर जुवानी जिआन नै करू
होबए दिय कने राईत एखन हैरान नै करू
प्रेम सागर में डुबकी लगाएब हम अहांक संग
मोन के सम्हैर रखु पिया एखन नै करू तंग
अरमान अहांक पुराएब हमरो मोन में अछि उमंग
रखु मोन पैर काबू पिया हम आएब अहांक संग
सास मोर आँगन नंदी बैसल छथि ओसार
ससुर मोर दलान दियर जी बैसल छथि दुवार
लाज सरम सं देह कपैय नीक लगैय नहि दुलार
पैयाँ परैतछि सैयां जी खोलिदिय नए केवार
घरक मर्यादा रखु पिया करू नै नादानी
घर केर जुनी बुझियौ बलम फ़िल्मी कहानी
लोक बेद्क रखु मन बनू नै अज्ञानी
छोड़ी दिय आँचर सैयां करू नै मनमानी
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट
रचनाकार-प्रस्तुतकर्ता छथि:
Prabhat from madhes
समय :
11:46 अपराह्न
, Links to this post
, 0
पाठकक टिप्पणी भेटल - अपने दिअ।
विदेह मैथिली नाटय उत्सव 2012- तिथि २८ आ २९ जनवरी २०१२ समय......दुनू दिन ११ बजे पूर्वाह्णसँ ५ बजे अपराह्ण धरि............स्थान न्यू लोटस इंग्लिश स्कूल, चनौरागंज, झंझारपुर
VIDEHA
MAITHILI DRAMA FESTIVAL.....28th & 29th January 2012, Place New
Lotus English School Campus, Village- Chanauraganj, Via- Jhanjharpur,
District Madhubani- 847404, BIHAR, INDIA विदेह मैथिली नाटय उत्सव 2012-
तिथि २८ आ २९ जनवरी २०१२ समय......दुनू दिन ११ बजे पूर्वाह्णसँ ५ बजे
अपराह्ण धरि............स्थान न्यू लोटस इंग्लिश स्कूल, चनौरागंज,
झंझारपुर.......
......नाटक, एकांकीक भरत नाट्यशास्त्रक मंच परिकल्पनाक आधारपर मंचन..........
............काव्यगोष्ठी आ नाटक, रंगमंच आ फिल्मपर परिचर्चा......
........नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ सेहो प्रदान कएल जाएत।
अभिनय- मुख्य अभिनय ,
सुश्री शिल्पी कुमारी, उम्र- 17 पिता श्री लक्ष्मण झा
श्री शोभा कान्त महतो, उम्र- 15 पिता- श्री रामअवतार महतो,
हास्य-अभिनय
सुश्री प्रियंका कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री वैद्यनाथ साह
श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पिता- स्व. भरत ठाकुर
नृत्य
सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पिता- श्री हरेराम यादव
श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पिता- नागेश्वर कामत
चित्रकला
श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना
श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पिता- श्री मोती मण्डल
संगीत (हारमोनियम)
श्री परमानन्द ठाकुर, उम्र- 30, पिता- श्री नथुनी ठाकुर
संगीत (ढोलक)
श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पिता- स्व. चिल्टू राउत
संगीत (रसनचौकी)
श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पिता- स्व. सरजुग राम
शिल्पी-वस्तुकला
श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज
मूर्ति-मृत्तिका कला
श्री यदुनंदन पंडित, उम्र- 45, पिता- अशर्फी पंडित
काष्ठ-कला
श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना
किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति
श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा
-"उल्कामुख" विदेह नाट्य उत्सवमे मंचित हएत।
-"उल्कामुख"क नाटककार छथि गजेन्द्र ठाकुर।
-निर्देशक रहताह बेचन ठाकुर।
-जादू वास्तवितावादी ऐ नाटकमे इतिहासक एकटा षडयंत्रकेँ उघारल गेल अछि , मंच परिकल्पना अछि भरतक नाट्यशास्त्रक अनुसार।
-आचार्य व्याघ्र, आचार्य सिंह, आचार्य सरभ, शिष्य साही, शिष्य खिखिर, शिष्य नढ़िया, शिष्य बिज्जी ऐ मे पात्र छथि।
[ पहिलसँ चारिम कल्लोल धरिक पात्र बदलि जाइ छथि, दोसर रूपमे पाँचम
कल्लोलसँ ४ टा स्त्री पात्र ऐ अन्तिम दुनू अंकमे बढ़ि जाइ छथि: रुद्रमति
(माधवक माए) सोहागो (गंगाधरक माता), आनन्दा (गंगाधरक बहिन), मेधा (हरिकर-
सेनापतिक बेटी)]
-गंगेश आ वल्लभाक प्रेम ऐ नाटकक विषय अछि। मुदा
पहिल दू अंकक बाद तेसर आ चारिम अंक जादू वास्तविकतावादक उदाहरण बनि जाइए। आ
आबि जाइ छथि सोझाँ उदयन, दीना, भदरी, आचार्य व्याघ्र, आचार्य सिंह, आचार्य
सरभ, शिष्य साही, शिष्य खिखिर, शिष्य नढ़िया, शिष्य बिज्जी। आ शुरू भऽ जाइए
इतिहासक एकटा षडयंत्रक अनुपालन। मुदा चारिम कल्लोलक अन्तमे भगता कहि दै
छथि अपन शिष्यकेँ एकटा रहस्य.......जे विस्मरणक बादो आबि जाएत
स्मरणमे।...बनि उल्कामुख...
- पाँचम कल्लोलसँ संकेतक बदला वास्तविकता, कल्पनाक बदला सत्य...
-पहिलसँ चारिम कल्लोल धरि मंचपर शतरंजक डिजाइन बनाएल घन राखल रहत, पाँचम
कल्लोलसँ भूत आ कल्पनाक प्रतीक ओइ संकेतक बदला वास्तविकताक प्रतीक गोला
राखल रहत।
- गंगेशक तत्त्वचिन्तामणिपर ढेर रास टीका उपलब्ध अछि,
गंगेशकेँ कहल जाइ छन्हि तत्वचितामणिकारक गंगेश; मुदा हुनकर कविता भऽ गेल
छन्हि "उल्कामुख"!!!
मैथिली नाटककेँ.....................
नव आयाम दैत ............................
नाटकक नव युगमे प्रवेश प्रवेश करबैत अछि.......
उल्कामुख...................... .............................. .....
विदेह नाट्य उत्सव २०१२ मे मंचित हएत........................... .
निर्देशक बेचन ठाकुर......................... .............................. ...........
मंच भरत नाट्यशास्त्रक अनुरूप........................ .............................. .................
[संयोजक: विदेह- http://www.videha.co.in/ प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर।]
http://maithili-drama.blogspot.com/ Read more...
रचनाकार-प्रस्तुतकर्ता छथि:
Bechan Thakur
समय :
10:33 अपराह्न
, Links to this post
, 0
पाठकक टिप्पणी भेटल - अपने दिअ।
Labels:
विदेह मैथिली नाटय उत्सव
गजल - जगदानंद झा 'मनु'
अहाँक चमकैत बिजली सन काया ओई अन्हरिया राति में
आह ! कपार हमहुँ की पयलौंह मिलल जए छाति छाति में
सुन्नर सलोनी मुंह अहाँ कए, कारी घटा घनघोर केशक
होस गबा बैसलौंह हम अपन, पैस गेल हमर छाति में
बिसरि नहि पाबी सुतलो-जैगतो, ध्यान में हरदम अहीं के
अहाँक कमलिनी सुन्नर आँखि, देखलौं जए नशिली राति में
ओ बनेला निचैन सँ अहाँ के, पठबै सँ पहिले धरती पर
मिलन अहाँ कए अंग-अंग में जे, नहि अछि दीप आ बाति में
सुन्नर अहाँ छी सुन्नर अछि काया अंग-अंग सुन्नर अहाँ के
नहि कैह सकैछी एहि सँ बेसी अहाँक बर्णन हम पांति में
***
रचनाकार-प्रस्तुतकर्ता छथि:
जगदानंद झा 'मनु'
समय :
4:53 अपराह्न
, Links to this post
, 0
पाठकक टिप्पणी भेटल - अपने दिअ।
Labels:
गजल,
जगदानंद झा 'मनु'
गजल@प्रभात राय भट्ट
आई हमर मोन एतेक उदास किये
सागर पास रहितों मोनमें प्यास किये
निस्वार्थ प्रेम ह्रिदयस्पर्श केलहुं नहि
आई मोनमे बहै बयार बतास किये
हम प्रगाढ़ प्रेमक प्राग लेलहुं नहि
आई प्रीतम मोन एतेक हतास किये
प्रेम स्नेह सागर हम नहेलहूँ नहि
आई प्रेम मिलन ले मोन उदास किये
हम मधुर मुस्कान संग हंस्लहूँ नहि
आई दिवास्वपन एतेक मिठास किये
"प्रभात" संग पूनम आएत आस किये
नहि आओत सोचिक मोन उदास किये
.................वर्ण-१५............................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट
रचनाकार-प्रस्तुतकर्ता छथि:
Prabhat from madhes
समय :
12:12 पूर्वाह्न
, Links to this post
, 0
पाठकक टिप्पणी भेटल - अपने दिअ।
सोमवार, 23 जनवरी 2012
१५ जनवरी २०१२ -दिल्लीमे मैथिली-भोजपुरी अकादेमीक कवि सम्मेलन.
![]() |
| चित्र साभार: विजय, दैनिक भास्कर |
![]() |
| चित्र साभार: विजय, दैनिक भास्कर |
![]() |
| चित्र साभार: विजय, दैनिक भास्कर |
![]() |
| चित्र साभार: विजय, दैनिक भास्कर |
![]() |
| चित्र साभार: विजय, दैनिक भास्कर |
![]() |
| चित्र साभार: विजय, दैनिक भास्कर |
रचनाकार-प्रस्तुतकर्ता छथि:
पूनम मंडल
समय :
9:17 अपराह्न
, Links to this post
, 0
पाठकक टिप्पणी भेटल - अपने दिअ।
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
















