सजल धजल बड़ सुंदर लागल
दरबज्जा सगरो बरियाती स'
तकलौ त' तकिते रहि गेलौं
सघन समाज आ सरियाती स'
उचित व्यवस्थाक प्रश्न नहि पूछू
कहैत लगैइयै मोन गदगद
पैर धोआय कुर्सी बैसोलन्हि
बाँट' लगला चाह आ शरबत
बिग्जी,मिठाई के हाल नै पूछू
ऐल गेल कत्तेको प्लेट
भोजन करब त' बांकिये छल
ताबतहि में अफ़रि गेल पेट
किछु क्षण केलहुं विश्राम ओतय
कुरुड़ क' लेलहुं भक तोड़ि
भोजनक वास्ते आग्रह केने
व्यक्ति एक ठाढ़ छलाह कर जोड़ि
सभ बरियाती क्रम-क्रमशः
ग्रहण केलहुं बैसक आसन
भोजन परसथि युवक सदस्यगण
वृद्ध ठाढ़ करै छथि शासन
एक कात बैसल नवयुवक सब
दोसर कात बुजुर्गक पाँत
युवक लोकन्हि बक ध्यान लगौने
बुजुर्गक मुँह में बान्हल जाँत
खाइत देखि बरियात के कहलन्हि
अपनेंक घर पर नहि अछि खर
एतबहि सुनि युवक एक बजलाह
अपनेंक कृपा स' की कहू सर
बन्हने छी खाली पक्के के घर
देलन्हि ठहक्का सब बरियाती
संग देलन्हि सम्पूर्ण समाज
वाह वाह क' गूँजि उठल स्वर
ओ युवक सबहक बचौलन्हि लाज
विविध प्रकारक भोजन केलहुं
तरूआ, तरकारी, मांछ, मिठाई
पत्र शुद्धि दही केर जोग स'
पेट अफ़रि गेल मोन अघाई
भोजनोपरांत प्रस्थानक तैयारी
लेलौं विदा जनऊ-सुपारी पाबी
सभा मध्य में अपन ई रचना
परसै छथि "मनीष जी" लाबि
ग्राम+पोस्ट- बड़हारा
भाया - अंधरा ठाढी
जिला -मधुबनी (बिहार)
पिन-८४७४०१
http://www.manishjha1.blogspot.com/
सोमवार, २९ जून २००९
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)

7 पाठकक टिप्पणी भेटल - अपने दिअ।:
bad nik kavita, samajik yatharth ke chitrit karait
खाइत देखि बरियात के कहलन्हि
अपनेंक घर पर नहि अछि खर
एतबहि सुनि युवक एक बजलाह
अपनेंक कृपा स' की कहू सर
बन्हने छी खाली पक्के के घर
देलन्हि ठहक्का सब बरियाती
संग देलन्हि सम्पूर्ण समाज
वाह वाह क' गूँजि उठल स्वर
ओ युवक सबहक बचौलन्हि लाज
Badd neek, bahut sundar.
मनीष..अहां त..हिला देलियैक..एक दमे सं बरियाती में ल जाक बैसा देलहुं.....बड्ड नीक कविता।
bahut nik prastuti, ehina likhait rahoo...apne sa paryapt apeksha achhi
nik kavita
बिग्जी,मिठाई के हाल नै पूछू
ऐल गेल कत्तेको प्लेट
भोजन करब त' बांकिये छल
ताबतहि में अफ़रि गेल पेट
bah
bad nik aphral pet
एक टिप्पणी भेजें
मैथिल आर मिथिला टीमकेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, जेना
1. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो तथ्यगत कमी अछि:(स्पष्ट करैत लिखू):-
2. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो परिमार्जन आवश्यक अछि: (सङ्केत दिअ):-
3. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो भाषागत, तकनीकी वा टंकण सम्बन्धी कमी अछि: (निर्दिष्ट करू कतए-कतए आ कोन ठाम):-
4. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो आर त्रुटि अछि:-
5. रचना/ प्रस्तुतिपर कोनो आर सुझाव:-
6. रचना/ प्रस्तुतिक उज्जवल पक्ष/ विशेषता:-
7. रचना प्रस्तुतिक शास्त्रीय समीक्षा।
अहाँक सुझाव मूल्यवान अछि अपन बहुमूल्य समयसँ किछु पल निकालि रचना/ प्रस्तुतिक विस्तृत समीक्षा करू। जाति-सम्प्रदायक जंजालसँ मैथिलीकेँ बाहर निकालि भाषाकेँ जनभाषा बनएबाक आन्दोलनमे हमरा सभ मिलि कए आगाँ बढ़ी आ तखने मैथिली साहित्यक वास्तविक अर्थमे विकास भए सकत। अहाँक देखाओल स्नेह आ विश्वास "मैथिल आर मिथिला" जालवृत्तकेँ मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आ सर्वग्राह्य ब्लॉगक स्थान पर बैसेने अछि। अहाँ अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा maithiliblog@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।