सोमवार, 30 नवम्बर 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (पन्द्रहम कड़ी )

माँ मामाक सँग बाबुजी के s s अलिगढ चलि गेलिह, छोटू के s सँग s गेलिह मुदा बाकि तीनू बहिन के हमरा पर छोड़ि s गेल रहथि। हम सब बड़का काका काकी सँग मोतिहारी सँ गाम आबि गेलहुँ। दादी मौसी मधु निक्की पप्पू सोनू सेहो संगे आबि गेलाह। गाम पहुँचलहुँ, समाचार सुनि बाबा बड दुखी छलाह। एकटा बेटा के गेलाक दुःख s रहबे करैन्ह दोसर बेटा के दुघॅटनाक समाचार हुनका आओर तोड़ि देलकैन्ह। इम्हर सब बच्चा सब डरल सहमल रहथि। मधु सब s मौसी लग रहैत रहथि दादी से, अपन दोसर दोसर काज मे रहैत छलिह मुदा हमर तीनू बहिन हमरा एको मिनट लेल नहि छोरथि। हमरा अपने किछु नहि फुरैत छल की करी। डरल s हमहू रही मुदा हुनका सब केर सोंझा मे साहस केने रही। बौआ सेहो गाम पर छलथि हुनकर परीक्षा s गेल रहैन्ह।

दोसर दिन भरि दिन लोकक एनाई गेनाई लागल रहलै भरि दिन कन्ना रोहटि सेहो होयत रहैत छलैक। जतेक कन्ना रोहटि होय ततेक बच्चा सब और डरि जैत छलथि। साँझ होयत देरी सब हमरा पकरि s बैसि जाय गेलिह। अचानक हम जाहि कोठरी मे रही ताहि मे बड़की काकी अयलीह बच्चा सब के पकड़ि किछु जलखई करेबाक लेल s गेलिह। हम चुप चाप घर मे बैसि s असग़र कानैत छलहुँ भगवान सँ कहैत छलहुँ हे भगवान माँ नहि छैथ बाबुजी के की होयतैन्ह नहि जानि एखैंह कम सँ कम हिनका पठा दियौन हम असग़र कोना तीनू के सम्भारब। मौसी मधु सब सँग s सब गोटे के सहानुभूति छलैन्ह मुदा तीनू बहिन के देखय लेल हमही टा छलियैन्ह। सोचिये रहल छलहुँ कि देखलियैक एकटा जन बैग लेने आयल राखि s चलि गेल। देखला सँ हिनके बैग जेहेन छलैक मुदा जा धरि हम किछु पुछतिए चलि गेल। हमरा मोन मे पचास तरहक बात आबि रहल छल कि देखलियैन्ह घर मे घुसि रहल छथि। सीधे हमरा लग अयलाह जहिना पुछलाह अहाँ कोना छी कि हमरा नहि रहि भेल हम हिनका पकरि s खूब कानय लगलहुँ। इहो पाछु कथि लेल रहताह दुनु गोटे एक दुसरा के पकरि s कानैत छलहुँ। हमरा सब केर मुँह सँ एको शब्द कथि लेल निकलत।

अचानक हमरा बुझायल जे तीनू बहिन आबि रहल छथि। हम अपना के सम्हारैत हिनका सँ पुछलियैन्ह अहाँके कोना बुझल भेल। कहलाह हम s मोतिहारी आयल छलहुँ अपन कॉलेजक काज सँ ओझाजी ओहिठाम गेलहुँ s पता चलल। हम पहिने हॉस्पिटल गेल रहि बाबुजी मामा के देखि हमर मोन ख़राब s गेल। ओहि ठाम सँ भागल एहि ठाम आयल छी। हम सब गप्प करिते छलहुँ कि तीनू बहिन आबि गेलिह आबिते सोनी हिनका पकरि s कानय लगलीह। बिन्नी अन्नू से लग मे आबि गेलिह। दृश्य हम नहि बिसरी सकैत छी। बौआ s लड़का छलाह बाबा सँ हुनका बड लगाव छलैन्ह मुदा हमरा सब के मोन मे असुरक्षा के भावना छल हिनका देखि खतम भेल।

काका केर काज खतम भेलाक बाद सब चलि गेलाह हम चारु भाई बहिन, बाबा दादी मौसी अपन चारु बच्चा सब सँग रहि गेलिह। इहो चलि गेलाह, हमरा एको रत्ती गाम पर मोन नहि लागैत छल, मुदा मजबूरी मे रहय परल। अचानक एक दिन तार आयल जे नानी सेहो नहि रहलिह। काका के देहान्तक खबरी सुनि खाना पीना छोरि देने रहथि हुनक देहांत s गेलैन्ह। तार अयलाक एक दू दिन बाद मामा अयलाह अपना सँग मौसी हुनक चारु बच्चा सब के सेहो s s चलि गेलाह मुदा एक बेर हमरा सब के कहबो नहि केलाह जे अहुँ सब चलु। हम दिन नहि बिसरी सकैत छी मौसी सब केर गेलाक बाद मात्र हम पाँच भाई बहिन बाबा दादी रहि गेलहुँ एक s हम सब कहियो गाम असग़र नहि रहल रही ताहु परओहेन परिस्थिति मे। राति राति भर हम डर सँ नहि सूती। सोनी s राति मे हमारा पकडि s सुतथि ताहू पर कैयक बेर डर सँ चिल्ला उठैथ।

एक s हम अपनहि डरपोक ताहि पर सब भाई बहिन के जिम्मेदारी हमरा पर रहैक। दादी बाबा s बुढ छलथि। माँ बाबुजी के कोनो समाचार से बुझय मे नहि आबि रहल छल। हम राति राति भर सूती नहि सोचैत रहैत छलहुँ।

नहि जानी कियैक करीब पन्द्रह दिन s गेलैक माँ बाबूजी के कोनो समाचार नहि भेटल छल सोचि सोचि हमरा बड चिन्ता होयत छल। राति के निन्द s नहिये होय उलटे चारि पाँच दिन सँ हमर छाती मे जोर सँ दर्द होमय लागल पहिने s दादी के हम नहि कहलियैन्ह मुदा बाद मे कहय परल। दादी के से चिन्ता होमय लागलैंह, अपना भरि किछु किछु सँ मालिश करथि मुदा ठीक नहि भेल। अंत मे दादी कहलथि ठाकुर जी के चट्ठी लिखि दहुन आबि जयताह। मुदा अपनहि हमरा सब केर देखय लेल पहुँचि गेलाह दादी के कहला पर हमरा s पटना डॉक्टर सँ देखाबय लेल s गेलाह। पटना मे हमर मौसी रहैत छलिह हुनके ओहि ठाम रही इलाज करेबाक विचार भेलैक। सब गोटे के जेबा मे s झंझट छलैक मुदा हम अन्नू के नहि छोरलियैन्ह हुनका अपना सँग लेने गेलियैन्ह। सोनी बिन्नी के दादी राखि लेलथिन्ह कहलथि कोनो चिन्ता नहि करय के लेल।

हम सब साँझ मे पटना पहुँचलहुँ मौसी के डेरा गेलहुँ, ओहि ठाम बाबुजी पहिनहि सँ रहथि।ओ सब भोर मे पहुँचल रहथि। माँ सँ पता चलल जे बाबुजी के कोहुना एकटा आँखि बाचि गेलैन्ह दोसर नहि बचायल जा सकलैन्ह। दोसर दिन हम सब जमशेदपुर आबि गेलहुँ

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मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
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चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

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पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

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कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

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