शनिवार, 30 जनवरी 2010

दिल्ली में विश्व पुस्तक मेला आइ सं। मैथिली पत्रिका सभ सेहो उपलब्ध

प्रगति मैदान में 7 फरवरी तक चलत। 11 बजे सं 8 बजे राति तक।

• हॉल नं.-1,2,3,4,5,6,7,12 आ 14 में लागल अछि प्रदर्शनी
• टिकट 20 रूपया,नेना सभहक-10 रूपया।
• राजकमल प्रकाशन के दरियागंज कार्यालय में10 बजे सं 6 बजे तक टिकट मुफ्त उपलब्ध। प्रतिदिन ओकर स्टॉल पर पहिल 10 पाठक कें 100-100 टका केर पोथी सेहो मुफ्त भेटत।
• सोम सं शुक्र धरि शिक्षकक साथ यूनीफार्म में अएला पर बच्चा सभहक प्रवेश निःशुल्क।
• हॉल नं. 14,स्टैंड-एस1-2 में मिथिला दर्शन केर स्टॉल छैक।
अंतिका प्रकाशन केर स्टॉल हॉल नं. 12-ए,स्टॉल नं. 6 पर।
मिथिलांगन सेहो हॉल नं. 2 में स्टॉल संख्या 624-626 (फोनः23371275)पर उपलब्ध अछि।
• पार्किंग सुविधा भैरों रोड पर सशुल्क। बोट क्लब आ इंडिया गेट पर सेहो पार्किंग सुविधा।

www.krraman.blogspot.com

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शुक्रवार, 29 जनवरी 2010

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व

गर्भावस्था स्त्री जीवनक संगहि होमय वाला संतानक भावी जीवनक लेल महत्वपूर्ण आ संवेदनशील कालखंड होइत अछि । एहि क्रम मे स्त्रीक स्वस्थ आ सजग रहब बहुत ज़रूरी होइछ । एहि अवस्थाक विभिन्न लक्षण, परेशानी सँ बचाव, सहज ढंगे जच्चगी आ स्वस्थ सुन्दर शिशुक जन्म लेल ध्यान राखबा योग्य बिन्दु पर चर्चा क’ रहल छथि बिहारक प्रख्यात स्त्री रोग विशेषज्ञ- डा. मंजू गीता मिश्रा । आशा अछि ई आलेख पाठकक लेल लाभप्रद शिद्ध होयत । आलेख भारती मंडन (अंक-12, नवम्बर 2006) सँ सभार लेल गेल अछि ।




मातृत्व

नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि गर्भ मे पलैत शिशुक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा ।भरपूर पौष्टिक भोजन, पर्याप्त आराम एवं आवश्यक व्यायामक संग-संग सम्पूर्ण निरोग शरीर गर्भस्थ शिशुकेँ पूर्णतया स्वस्थ राखिसकैत अछि । गर्भावस्थाक पहिल तीन मासक समय कष्टमय होइत अछि । उल्टी, अरूचि, सहज लक्षण होइत अछि । एकरादूर करबाक लेल कम –कम मात्रा मे पांच-छओ बेर हल्लुक भोजन करबाक चाही । मौसमी फल, हरियर तरकारी आ दूध दही केर भरपूर सेवन करबाक चाही । वसायुक्त भोजन सँ बचबाक चाही । गर्भावस्थाक दौरान गर्भवतीक भूख तेज होइत अछि, एहि समयमे कम-कम मात्रा मे पौष्टिक लैत रहबाक चाही । अन्तिम तीन मे शिशु पेट मे बेसी हलचल कर’ लगैत छैक । हल्लुक भोजन कयला सँ शिशुक हलचल मे कोनो रूकाबट नहि होइत छैक (ई बच्चाक पूर्ण बिकासक लेल ज़रूरी होइछ ।), गर्भवती हल्कापन महसूस करैत छथि आ एहि तरहेँ शिशुक स्वास्थ्य आ पुष्टता सुनिश्चित होइत अछि । डाक्टरक परामर्शक अनुसार गर्भवतीकेँ कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन सी, लौह तत्व(आइरन), विटामिन-बी काम्पलैक्सक सेवन करबाक चाही । गर्भवती स्त्रीकेँ डाँड़ आपीठ दर्दक शिकायत रहैत छनि जे कैल्शियम केर सेवन सँ ठीक भ जाइत छैक ।

किछु सुझाव-
1. गर्भवती स्त्रीकेँ तनाव रहित रहबाक चाही ।
2. मसालेदार एवं तैलीय भोजन नहि करबाक चाही ।
3. भारी वजन नहि उठैबाक चाही ।
4. धुम्रपान, मद्यपान, खैनी-तम्बाकूक सेवन नहि करबाक चाही ।
5. भीड़-भाड़युक्त जगह पर जायबा सँ बचबाक चाही ।
6. संक्रमणक स्थिति नहि होमय देबाक चाही ।
7. डायटिंग नहि करबाक चाही ।
8. समय-समय पर डाक्टरी जाँच करैबाक चाही ।
9. प्रसव कोनो कुशल डाक्टरक निरीक्षणमे करेबाक चाही ।
10. उचित व्यायाम करबाक चाही ।
11. टेटनसक दू टा सूई लेबाक चाही ।
12. गर्भवतीकेँ दिन मे दू घंटा आ राति में आठ घंटा नियम
सँ सुतबाक चाही ।
13.पहिल तीन मास एवं अन्तिम डेढ़ मास यात्रा नहि करबाक
चाही ।
14. कब्ज नहि हेबाक चाही ।
15. गर्भवती स्त्रीकेँ ढ़ील-ढ़ाल वस्त्र पहिरबाक चाही ।
16. दाँतक साफ-सफाई आ स्वस्थ मसुहरि लेल सजग रहबाक
चाही ।

एहि तरहेँ स्वास्थ्य आ आदतिक प्रति सजग रहला सँ नौ मास पूरा
भेलाक बाद एक स्वस्थ शिशुक जन्म होइत अछि, जकर किलकारी
सँ घर आँगन गूँजि उठैत अछि ।

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बुधवार, 27 जनवरी 2010

सरकारी नोकरी- सोमदेव




आ अन्तमे हम नोकरी स्वीकार क’ लेलहुँ। थाकि गेल छल मोन तीन माससँ दरखास्त दैत दैत। फोन्टन पेन झमान भ’ करचीक कलम जकाँ रहि गेल आ नोन-मसल्ला आदि धरबा लेल डिब्बा-डिब्बीक आब कोनो टा दरकार नइं-दोआतक ततेक ने अमार लागल छल चारूकात। ढन-मन पसरल, जेना नेना भुटका ओकरे ल’ क’ क्रिकेट खेलएबाक अभ्यास करैत हो। नित्तह चारिटा दरखास्त लिखी नियमसँ। एकटा ढर्रा बना नेने छलहुँ, ओकरे नकल क’ ली सभ बेर, खाली हाकिम आ पदक नाम टा बदल’ पड़ए। काॅलेजोमे एतबा कलम-घस्सी नइं कएने छलहुँ, से हाथराम एना कुहरथि जेना जाँतक लागनि चलौने होथि। ओहि वेदना पीड़ित हाथसँ माथ ठोकि मासक दस तारीख धरि चावसी आदिक प्रमाणपत्राक नकलक संग नत्थी क’ दरखास्त सभक रजिस्ट्री कराबी। मासक एगारहम तारिखसँ बीसम तारिख धरि पन्द्रह पैसाही सादा लिफाफे पत्रा-पेटीमे खसाब’ पड़ए,केँचा-कौड़ीक कमी भ’ जएबाक कारणें। लिफाफ नइं भरिया जाओ, तैं बी. ए. टाक प्रमाणपत्रा दरखास्तक संग गाँथि पाबी। आ मासक नांगरि पछिला दस दिन भोर-साँझ पुस्तकालय सभमे अखबारक दोसर पृष्ठक मनोयोग-पूर्वक पारायण आर वान्टेड टीपब, गजेटेड अफसर सभसँ प्रमाणपत्रा आदिक ट्र ू कापी अभिप्रमाणित कराएब... मने तीन मास घीक टघार जकाँ टघरि गेल, आर हम बीस तिये साठि, गुने चारि, मने दू सै चालीस टा दरखास्त पठा देबाक पुण्यलाभ क’ चुकलहुँ, तखन मोन ठेहिया गेल... क्यो जवाब नइं देलक। एहन बकटेटर अछि कर्मे... डाकपीन टोकारासँ फराके तबाह, जेना अगाँमे नढ़िया रस्ता काटि देतनि, देखितहिं साइकिल मोड़ि लेअए... आ हमरा तखन अपने पता पर सन्देह होमए लागल तँ एकटा दरखास्त अपने ओहि ठामक पता लिखि क’ खसेलहुँ, आ से हमरा प्राप्त भ’ गेल। तखन सोलहो आना विश्वास भेल, जे ठीक हमर कर्मे ठिठिआएल अछि। आर फेर ओहि दिनसँ बिचारलहुँ, डाक टिकटमे पाइ खर्च करबासँ नीक अछि, पोस्टल आर्डर कीनब, आ दरखास्त लिखबाक स्थान पर वर्ग पहेली भरब... मनोरंजन, पीड़ा-हरन आ शब्द-संचयन। संसारक सर्वसुन्दर कार्य थिक वर्ग-पहेली भरब... जीवनो तँ गर्व-पहेलिये अछि... एना बैसाबी, नइं ओना।
आ नोकरी भेटबाक आशा तँ छोड़िए देलहुँ... चलू नट्ठे रहब।
भगवानक लीला, एक दिन वर्ग-पहेली भरि रहल छलहुँ। पछिला तारीखमे एक गोटेकेँ बीस हजार टाकाक पुरस्कार भेटल छलनि। ओ बिहुँसि रहल छलाह। हमहूँ बिहुँसि उठलहुँ, जेना ओ हमरे फोटो हो, आ हमरे पुरस्कार भेटल हो... मोन आनन्दसँ हरियर बाध भ’ रहल छल आ फेफरा फुलि क’ फुटबाॅल जकाँ हरियरी पर उछलि रहल छल। तखने खिड़की दिससँ एकटा झटका लागल। हम दस लग्गा उछलि क’ आउट भ’ गेलहुँ। मूड आॅफ भ’ गेल। मुदा ओहि झटकाक संग हमर कपारोक दरबाजा फटाक द’ खुजि गेल छल। ई झटका आर किछु नइं, डाकपिन द्वारा फेकल गेल... नोकरीक हेतु अन्तर्वीक्षा लेल बजाहटि छल, सादा लिफाफ, मुदा कतेक पियरगर? सरकारी मोहरक सिन्दूर-बिन्दी लगौने। तीने दिनक बाद अन्तर्वीक्षा होएबाक छलै। अन्तर्वीक्षामे सम्मिलित भेलहुँ, आर नोकरी भेटि गेल। आ जँ सत्य पूछी, कहब मोश्किल छल जे हजारो बकरी-छकड़ीक परीक्षार्थी-समुदायमे ककर गुद्दा बेसी पसिन पड़तनि, के कहौ? ...ओ तँ खन्ना साहेबक कृपा, जे हमरा दिससँ मात्रा सै रुपैयाक उपहार, सर केर कनक चरण धरि पहुँचा अएलाह, अपने नेना-भुटका, कुकुर-बिलाइ सभक संग फस्ट-किलासमे सिनेमा देखि, हमरा कृतार्थ कएलनि, तँ विश्वास भ’ गेल, जे नोकरी अफसरक दरबारमे रिजर्व राखल अप्सरा थिकीह... हुनकर कृपा-कटाक्षसँ किरानीक पत्रा प्राप्त भेल। आ हम साष्टांग-दण्डवत कएलहुँ-
जय-जय हे नोकरी - स्वर्गकेर महरानी।
अफसर राजा कृपा बनब हम आइ किरानी।।
अहाँ पूछब, एहिसँ पहिने की झाम गूड़ैत छलहुँ? नइं, हम झाम तँ नइं, कागज गूड़ैत छलहुँ, मने पत्राकार छलहुँ, आब गुप्त की राखी, जखन सरकारी नोकरी भेटि गेल, प्रतिष्ठे बदलि गेल। कहलहुँ ने पत्राकार, मुदा असलमे हम प्रूफरीडर छलहुँ। ओना, प्रूफ-रिडरियोक जड़िमे छल एकटा साधारण ट्यूशन मात्रा।
बी. ए. पास करबाक उपरान्त पत्राकारिता, मने प्रूफरीडरी, मने ट्यूशन हम करैत छलहुँ एकटा जिम्मरि दुब्बरि, सात वर्षीया कन्याक। दूनू साँझ। आ बाँकी दिन भरि इम्प्लायमेंट एक्सचेंजक अगुअति-पछुअतिक ओगरबाहि।
ट्यूशनिया सात वर्षीया कन्याक जन्म बड़ कबुलापातीक उपरान्त भेल छलनि। पिताजी बिजनेसक हेतु अपन नगरसँ कम्मे संबंध रखथिन, आइ बम्बइ तँ काल्हि कलकत्ता करथि। आ जेहन लाह, तेहन भाग। से माताजी मेक-अपसँ बनल-ठनल दर-दरबार फुदकल चलथि, आ परम्परानुसार एक दिन एम. एल. सी. भ’ क’ रहलीह। हुनक नांगड़ि पकड़ि क’ सेठोजी ताज पोषित भ’ आटी-पाटी खा आबथि। आ जेना-जेना राजा रजबाड़सँ चीन्हा-परिचय बढ़ैत गेलनि, बिजनेस सुरसाक मुँह सन फल्लड़ होइत गेलनि आ अपने दौड़-धूप कने बेसी कर’ लगलाह... यथा वीर हनुमान।
एम. एल. सी. महोदया लग एक दिन पत्राकार बनबाक अपन आकांक्षा प्रकट कएलहुँ। ओ गद्गदायमान होइत हमरा एकटा प्रेसमे ल’ गेलीह, एकटा प्रूफरीडरक कुर्सी हमरा हेतु खाली कराओल गेल। हम पत्राकार, मने प्रूफरीडर भ’ गेलहँु, ओहि दिनसँ देवीजीक दया-दृष्टिक मारि हमरा पर सभ दिन पड़ैत रहल। अगिला मासक पहिल तारीख आएल। पैंतालिस टा टाका टेंटमे खोंसि सकलहुँ।
आगाँ दरमाहा बढ़ि जएबाक उम्मीदक संग प्रेस घुरलहुँ तँ सोझे खादी भंडार पहुँचलहुँ। एक सेट धोती-कुरता आ सेनहुली-बंडी रेडीमेड किनलहुँ, एकटा चामक बेग, एकटा नकली चश्मा। एहि सभसँ सीटल-साटल रेडीमेड बनल पानक दोकान पर ठोर रंगि अयनामे अपन आकृति देखलहुँ त’ क्षुब्ध भ’ गेलहुँ, सै प्रतिशत पत्राकार। मोन पड़ि गेल अपन चारि मास पहिनेक दाढ़ी बढ़ल मुखरा, मैल-मोड़ल बाँहिक कमीज, फाटल धोती... जखन एकटा सै टाका मासी ट्यूशन भेटल छल, तीनिये चारि दिनुका बाद युवती छात्रा बाजलि छलीह-मास्टर साहब, आप थोड़ा-सा भी रसिक नहीं हैं। साहित्य क्या पढ़ाएंगे?-ओही दिन अपन कवि हृदयक अपमान जानि, हम ओ ट्यूशन छोड़ि देने छलहुँ। से आइ बुझना जाइत छल रसिकताक महत्त्व। आ प्रसन्न मोन भेल जखन देवीजीसँ भेंट कएलहुँ। ओ ततेक आकस्मिक ढंगसँ सम्मान कएलनि आ कमलक फूल जकाँ दपदपा उठलीह जे ओहि दिनसँ हम हुनक बे-बहाल पी. ए. (खास सहायक) भ’ गेलहुँ। आब तँ ओ जत’ जाथि, हमरा अवश्य संग क’ लेथि। हमर भोजनोक व्यवस्था हुनके ओहि ठाम होम’ लागल... मुदा हमर मोन रसगुल्लो-पुराणक पारायणसँ प्रसन्न नइं भ’ रहल छल... पानक लालीसँ रंगल अधर सुरा-सुरसरिक धार पर झिल्हैर... हमरा संतुष्ट नइं क’ सकल।
एकटा सुनसान जकाँ बुझि पड़ए, भकोभन्न... जेना फाटल बाँसक बँसुरी बजा रहल होइ... जेना भारतीय फिल्म सभक अधिकतर संगीत श्रेणीक हल्ला-गुल्ला... तखन अपन नव विवाहिता पत्नी मोन पड़थि, हुनक लिखित पाँती मोन पड़ए... जकरा बेर-बेर पढ़ैत-पढ़ैत पहिने आनन्दित आ फेर अनमनाएल सन भ’ जाइ तँ बुझि पड़ए जेना कोनो संताली इलाका हो। बाघ-शेर-गर्जित वन। जानवरक डरसँ हम एकसर डाकबंगलामे बन्द छी, कतहु पहाड़ परसँ संताल नृत्यक ढोल-बँसुरीक स्वर आबि रहल अछि। नृत्यक बोल हमरा बजा रहल अछि। पंगु बनल हम छटपटा रहल छी।
...पत्नी लिखलनि अछि... विवाहक उपरान्त प्रण कएने छलहुँ, शीघ्रसँ शीघ्र संगे राखब। ...नाथ, हमर सखी सभ अपन-अपन प्रियतम संग खिलखिला रहलि छथि, आ हम अहाँक प्रतीक्षामे स्मृतिक दीप जरौने बैसलि छी। ...संगमे ओ प्रसिद्ध गीतक पाँती सभ लिखि देने छलीह जाहिमे एक स्त्राी कारी-कारी बादरि देखि मयूरी जकाँ कुहुकि उठैत छै... सभक साजन परदेशमे छै। बादरि बरसि रहल अछि। मयूरनी कुहुकि रहल अछि। हमर मोन कचोटि रहल अछि। नयनसँ नोर बहि रहल अछि...।
हम आँखि पर लाधल मेघकेँ कोनहुना टारि दी। रहि-रहि पान खाइ आ बिहुँसबाक प्रयास करैत रही। नोकरी भेटि जएबाक आशा छल। हे सुन्नरि, सरकारी नोकरी भेट’ दिअ’, फेर अहाँकेँ कहियो फराक नइं रह’ देब।
एखन की करी?
जतबा पाइ प्रेस आ ट्यशूनसँ भेटै’ए, ततबामे तँ भोजनो चलब दुर्लभ छल। जँ देवीजीक कृपापात्रा नइं रहितहुँ? विवाहक दू वर्ष लागि रहल छल। पत्नीकेँ विदा नइं करा सकल छलहुँ। सासुरक लोक सोझे विदा करा लेब’ लेल कोना कहितथि? एम्हर-ओम्हरसँ ताना भरल तगेदा भेटिए जाइक तैयो। विवाहक उपरान्त कोन पिता अन्तरमनसँ पुत्राीसँ मुक्त भ’ जएबाक इच्छा नइं रखैत छथि?
मुदा हम हारलहुँ नइं। दरखास्त फेकैत गेलहुँ।
आइ कतेक प्रसन्न छल मोन जे हम फौजदारीमे किरानी भ’ गेल छलहुँ। बी. ए. छीहे। शीघ्र तरक्की होयत। आर खन्ना साहेबक आश्वासन-लोन डिपार्टमेंट में लगा देंगे... या अंचलमे पेशकार बनवा देंगे। फिर तो यारो, रहेगी हमारी सपरिवार पिकनिक।
से जे हो, सरकारी नोकरी... किछु हो, सरकारी नोकरी अछि। पचहत्तरिए भेटत, तैं की? इज्जति तँ छै। आ इज्जति छै तँ खुशामद आ खुशामद माने आमद। मोन मधुरा गेल... एकटा डेरा लेब। पत्नीकेँ विदा करा अनबनि।
आ हम नोकरी स्वीकार क’ लेलहुँ आइसँ। भरि दिन कार्यालयमे नव फाँसल सुग्गा जकाँ अनभुआरे बनल रहलहुँ। साँझ खन जखन कार्यालयसँ निकलि कचहरीक हातामे अएलहुँ कि पाछाँसँ सोंधी साहेब हाथ पकड़लनि-हल्लो मि. जर्नलिस्ट, बहुत दिनों बाद मिले हैं यार!
आ झट द’ हाथ मिलौलनि। अंग्रेजी-मिश्रित हिन्दीमे गप्प-सप्प करैत रहलाह... चलू, डेरे पर गप्प-सप्प करबाक अछि। मोन नइं लागि रहल छल। अफसर सभ रिलीफक काजसँ बाहर चल गेल छथि। एतबे नइं, डेरो पर क्यो नइं अछि एखन। आ फेर अहाँ सभ सन साहित्यिक लोक तँ बड़ मस्त जीब होइत छथि। ...बड़ अवसर पर भेंट भेल।
आ मोटर विदा भ’ गेल। अपने चला रहल छलाह। हम हुनक कातमे बैसल छलहुँ। ड्राइभर पाछाँ छल, चपरासीक संग।
मोटर सोंधी साहेबक बँगला दिस भागि रहल छल। सोंधी साहेब फस्र्ट क्लास मजिस्ट्रेट छथि आ खूब चलता-पुर्जा। एहन चलता-पुर्जा जे शीघ्रे जिलाधीश भ’ क’ रहताह... तैं लीडर आदिक गाढ़ परिचय आवश्यक छलनि। कैक बेर देवीजीक डेरा पर आएल छलाह। देवीजी संग रहने हमर एहि तरहक मान होइत छल जेना हमर बाप-दादा कोनो पैघ जागीर छोड़ि क’ मरल होथि आ हम सौखसँ पत्राकारिता क’ रहल होइ। मोटर बँगला पर आबि क’ रुकल। ड्राइभर उतरल। दरबजा खोललक। साहेब आगाँ बढ़लाह। चपरासी सलाम देलक आ हमरा हुनक चैम्बरमे बैसौलक। पहिनेसँ ओहि ठाम हुनक स्टेनो बैसल छल। हम सोच’ लगलहुँ जे सरकारी नोकरीमे कतबा इज्जति छै। सभ-सभकेँ समान दृष्टिसँ देखैत छै। साहेब आ किरानी मित्रावत रहै छथि। मोन भेल... आब निश्चय लोन डिपार्टमेंटमे बदली भ’ जाएत... जखन साहेब मित्रा छथि। आर बुझि पड़ल जेना सौंसे फौजदारी कचहरी हमरा सलाम क’ रहल अछि, हम बिहुँसि रहल छी...।
तखने सोंधी साहेब चैम्बरमे प्रवेश कएलनि, हमरा सभ ठाढ़ भ’ गेलहुँ। ओ स्टेनोकेँ बाहर जएबाक इशारा कएलनि आ बजलाह-ई किरानी-तिरानीक आगाँमे भरिपोख गप्प करब नीक नइं। असिस्टेंट कहुना अस्टिेंट अछि-माथ पर चढ़ि जाएत आ अहाँ भेलहुँ पत्राकार-कवि-हृदय-इमोशनल फेलो।-आ चपरासीकेँ चाय मंगएबाक आदेश भेल।
राति गाढ़ होइत गेल। हमरा सभक गप्पो गाढ़ होइत गेल। ओ खूब बजबा लेल भुखाएल छलाह जेना। कहलनि, बरोबरि भेंट करैत रहब। अहाँकेँ तँ सदिखन हमरा सभक लग रहबाक चाही-हँ, देवीजीसँ हमर नमस्ते कहि देबनि।
साहस जमाइयो क’ हम नइं बाजि सकलहुँ, जे हम आब पत्राकार नइं छी, अहाँक नीचा किरानी भ’ गेल छी। आ हमरा लोन डिपार्टमेंटमे पठा दिअ’।
हम घूरि अएलहुँ।
दोसर दिन कार्यालय गेलहुँ तँ पता चलल जे हमर बदली भ’ गेल अछि नेपालक सीमा पर कोसी पीड़ित अंचलमे-जत’सँ आएब-जाएब असंभव छल, जत’ रहबाक कोनो ठौर-ठेकान नइं। खन्ना साहेबसँ दरियाफ्त करएलहुँ तँ पता चलल जे ई बदली सोंधी साहेब अपने कएलनि अछि। आ हमरा एहि ठाम नइं राखए चाहैत छथि, कारण हमरा हुनकासँ समताक व्यवहार अछि... आ राति कतेक गुप्त बात सभ कएने छलाह... आ स्टेनो हमरा देखि क’ जरि गेल छल... हमरा रहै हुनका हीन-भावनाक अनुभव हेतनि...
हम सोंधी साहेबक कक्ष दिस बढ़लहुँ।
चपरासी हमर भेंट करबाक आवेदन हुनका जा क’ देलकनि। हम बाहर पर्दाक लग ठाढ़ छलहुँ।
भीतरसँ घुनघुनएबाक आवाज आएल-डर्टी। वेरी इन्डिसेंट... कौन है वह? क्या है? कह दो जाने। मैं नहीं जानता उसे...
आ हम सोझे पाछाँ भ’ गेलहुँ।
आ हमरा बुझि पड़ल जेना हम सरकारी नोकरी नइं स्वीकार कएलहुँ अछि, अन्हार-बोनक ठीकेदारी लेल अछि।

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मंगलवार, 26 जनवरी 2010

मैथिलीक स्वॉट Strenghth- Weakness- Opportunity- Threat (SWOT) एनेलेसिस

मैथिली साहित्य आन्दोलन
मैनेजमेन्टमे एकटा विषए छैक स्वॉट अनेलिसिस। मैथिलीक वर्तमान समस्याक लेल अपन गुरुजी चमू शास्त्रीजीक सँग कएल कैम्पक योगदानकेँ स्मरण राखैत विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलनक कार्ययोजनाकेँ एहि कसौटीपर कसै छी।
मैथिलीक स्वॉट Strenghth- Weakness- Opportunity- Threat (SWOT) एनेलेसिस आ विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलन

मैनेजमेन्टमे एकटा विषए छैक स्वॉट अनेलिसिस। मैथिलीक वर्तमान समस्याकेँ आ विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलनक कार्ययोजनाकेँ एहि कसौटीपर कसै छी।

Strenghth- शक्ति, सामर्थ्य, बल –

मैथिली लेल हृदएमे अग्नि छन्हि, से सभक हृदएमे, परस्पर एक दोसराक विरोधी किएक ने होथु। जनक बीचमे एहि भाषाक आरोह, अवरोह आ भाषिक वैशिट्यकेँ लऽ कऽ आदर अछि आ एहि मे मैथिली नहि बजनिहार भाषाविद् सम्मिलित छथि। आध्यात्मिक आ सांस्कृतिक महत्वक कारण सेहो मैथिली महत्वपूर्ण अछि। एहि भाषामे एकटा आन्तरिक शक्ति छै। बहुत रास संस्था, जाहिमे किछु जातिवादी आ सांप्रदायिक संस्था सेहो सम्मिलित अछि, एकर विकास लेल तत्पर अछि। एहि भाषाक जननिहार भारत आ नेपाल दू देशमे तँ रहिते छथि आब आन-आन देश-प्रदेशमे सेहो पसरल छथि।



Weakness- न्यूनता, दुर्बलता, मूर्खता –

प्रशंसा परम्परा जाहिमे दोसराक निन्दा सेहो एहिमे सम्मिलित अछि, एकरे अन्तर्गत अबैत अछि- माने आत्मप्रशंसाक।

परस्पर प्रशंसा सेहो एहिमे शामिल अछि। सरकारपर आलम्बन, प्राथमिकताक अज्ञान- जकर कारणसँ महाकवि बनबा/ बनेबा लेल कवि समीक्षक जान अरोपने छथि- जखन भाषा मरि रहल अछि। कार्ययोजनाक स्पष्ट अभाव अछि आ जेना-तेना किछु मैथिली लेल कऽ देबा लेल सभ व्यग्र छथि, कऽ रहल छथि। स्वयं मैथिली नहि बाजि बाल-बच्चाकेँ मैथिलीसँ दूर रखबाक जेना अभियान चलल अछि आ एहिमे मीडिया, कार्टून आ शिक्षा-प्रणालीक संग एक्के खाढ़ीमे भेल अत्यधिक प्रवास अपन योगदान देलक अछि। मैथिलीक कार्यकर्ता लोकनिक कएक ध्रुवमे बँटल रहबाक कारण समर्थनपरक लॉबिइंग कर्ताक अभाव अछि। मैथिलीकेँ एहिअँ की लाभक बदला अपन/ अप्पन लोकक की लाभ एहि लेल लोक बेशी चिन्तित छथि। मैथिली छात्रक संख्याक अभाव। उत्पाद उत्तम रहला उत्तर सेहो विक्रयकौशलक आवश्यकता होइत छै। मैथिलीमे उत्तम उत्पादक अभाव तँ अछिए, विक्रयकौशलक सेहो अभाव अछि।

Opportunity- अवसर, योग, अवकाश –

विशिष्ट विषयक लेखनक अभाव, मात्र कथा-कविताक सम्बल। मैथिलीमे चित्र-शृंखला, चित्रकथा, विज्ञान, समाज विज्ञान, आध्यात्म, भौतिक, रसायन, जीव, स्वास्थ्य आदिक पोथीक अभाव अछि। ताड़ग्रन्थक संगणकक उपयोग कऽ प्रकाशन नहि भऽ रहल अछि। छात्र शक्तिक प्रयोग न्यून अछि। संध्या विद्यालय आ चित्रकला-संगीतक माध्यमसँ शिक्षा नहि देल जा रहल अछि। दूरस्थ शिक्षाक माध्यमसँ/ अन्तर्जालक माध्यमसँ मैथिलीक पढ़ाइक अत्यधिक आवश्यकता अछि। मैथिलीमे अनुवाद आ वर्तमान विषय सभपर पुस्तक लेखन आ अप्रकाशित ताड़ ग्रन्थ सभक प्रकाशनक आवश्यकता अछि। मैथिलीक माध्यमसँ प्रारम्भिक शिक्षाक आवश्यकता अछि। प्रवासी मैथिल लेल भाषा पाठन-लेखन-सम्पादन पाठ्यक्रमक आवश्यकता अछि।

Threat- भीषिका, समभाव्यविपद् –

हताशा, आत्महीनता, शिक्षासँ निष्कासन, पारम्परिक पाठशालामे शिक्षाक माध्यमक रूपमे मैथिलीक अभाव, विरल शास्त्रज्ञ, ताड़पत्रक उपेक्षा आ विदेशमे बिक्री, भाषा शैथिल्य, सांस्कृतिक प्रदूषण आ परिणामस्वरूप भाषा प्रदूषण, मुख्यधारासँ दूर भेनाइ आ मात्र दू जातिक भाषा भेनाइ, शिक्षक मध्य ज्ञान स्तरक ह्रास, राजनैतिक स्वार्थवश मैथिलीक विरोध ई सभ विपदा हमरा सभक सोझाँ अछि।

विदेहक मैथिली साहित्य आन्दोलन मैथिलीकेँ जनभाषा बनएबाक प्रक्रममे लागल अछि। पाक्षिक रूपेँ मासमे दू बेर एहिपर विचिन्ता होइत अछि। नकारात्मक चिन्तन, परदूषण आ अभाव भाषण द्वारा ई आन्दोलन नहि अवरोधित होएत आ एकरा न्यून करबाक आवश्यकता अछि। ई सभटा ऊपरवर्णित बिन्दु प्रबन्धन-विज्ञानक कार्ययोजनाक विषय अछि, आ भाषणक नहि कार्यक आवश्यकता अछि आ से हम सभ कऽ रहल छी। सम्भाषण, मैथिली माध्यमसँ पाठन, नव सर्वांगीन साहित्यक निर्माण लेल सभकेँ एकमुखी, एक स्तरीय आ एक यत्नसँ प्रयास करए पड़त। धनक अभाव तखने होइत अछि जखन सरकारी सहायतापर आस लगेने रहब। सार्वजनिक सहायताक अवलम्ब धरू, दाताक अभाव नहि स्वीकारकर्ताक अभाव अछि।
हमरा गाममे एकटा सुरजू भाइ रहथि। लोक जखन कहैत छलै जे सरकार रोड नञि बनबैत अछि तँ ओ कहै छलखिन्ह जे गाममे सभ गोटे जकर घर सड़कक कातमे छै अपन-अपन घरक आगाँक सड़क भरि देत तँ अपने सौँसे गाममे सड़क बनि जएतै। आ हुनकर खेत बाधमे दुरगरोसँ झलकैत भेटितए- गोबर-खादसँ ऊँच कऽ कऽ भरल। सुरुजु भाइकेँ भोरसँ कड़गर रौद भेला धरि पथिये-पथिये गोबर उघैत हम देखने छी। मालवीय जी झोड़ा लऽ कऽ निकलि गेल छलाह आ विश्वविद्यालय बना लेलन्हि। हमरा सभ सेहो ओही लगनसँ कार्य करी।

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राजकमल चौधरी आ आन लेखकक रचनाक चोरि

पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ.....
पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ.....
मैथिल आर मिथिला सँ पंकज पराशरकेँ निकालल जा रहल अछि।
कारण नीचाँ देल गेल अछि।
ParasharsIntellectualPropertyRightsTheft

ParasharsIntellectualTheft
ParasharsIntellect...
Hosted by eSnips

VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

DEAR SIRS/ MADAM

In Indian Constitution we all have certain rights, If somebody in the name of freedom of expression, in the name of Literary Criticism(????) and in the name of freedom on web is blackmailing you or abusing you then remember that the freedom is available to you too and all these are punishable cognizable offences.

SAY NO TO BLACKMAIL. FOR FURTHER INFORMATION contact me at ggajendra@gmail.com

2.ANNOUNCEMENT:NATASHA FOR KIDS: IN MAITHILI WE HAVE CHEATS LIKE PANKAJ PARASHAR BUT AT THE SAME TIME WE HAVE CREATIVE PEOPLES TOO LIKE DEVANSHU VATS.
VIDEHA ANNOUNCES FIRST EVER MAITHILI COMICS NATASHA BY DEVANSHU VATS- the pdf version will be sent through email to you all in a few days, the print version is available (48 cartoon sories) for just Rs. 50/-
HOWEVER THE PDF VERSION can be downloaded and printed without any restriction.
SO SHARE THIS NEWS WITH ALL THE MAITHILI SPEAKING KIDS IN YOUR VICINITY.
and congratulate Devanshu Vats on email devanshuvatsa@gmail.com

3.VIDEHA LANGUAGE AND LITERATURE MOVEMENT IS HERE TO STAY. WE CARE FOR YOU BUT AT THE SAME TIME WE ARE STERN WITH THE INTELLECTUAL PROPERTY RIGHT THIEFS. LET THEM TRY AGAIN WE WILL EMERGE EVEN STRONGER.

REGARDS
GAJENDRA THAKUR
Reply 01/29/2010 at 10:06 PM
2
VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

blackmailer pankaj parashar ke viruddha google ke likhit complain usa sthit karyalaya me official channel se patha del gel chhai aa google ke Douglas Kellner se sampark karbak lel kahi del gel chhai. ehi blackmailer ke sabhta pseudo id identify kay lel gel achhi.


अन्तर्जालपर ब्लैकमेलिंग विरुद्ध गूगल, चिट्ठाजगत आ ब्लोगवानीकेँ सूचित करू, साइबर क्राइम आ ब्लैकमेलिंग रोकबा लेल सेहो ढेर रास प्रावधान छै, विशेष जानकारी ggajendra@gmail.com पर सम्पर्क करू। अहाँसँ पत्रकार, न्यूजपेपर, पत्रिका आ हिन्दीक गणमान्य लेखकगण/ प्रोफेसर/ विश्वविद्यालय आदिकेँ एहि घटनासँ सूचित करेबाक अनुरोध अछि। विशेष जानकारी लेबाक आ देबाक लेल ggajendra@gmail.com पर सूचित करू।
you may also brought this episode before sanjay@jagran.com
Thanks readers.

But this time he has not used his name as maithil, mithila aa subodhkant but as Pankaj Parashar pparasharjnu@gmail.com

The same blackmail letter has been sent by the blackmailer to my email address which has been spammed through ISP ISP address 220.227.163.105 , 164.100.8.3 aa 220.227.174.243 and has been forwarded for taking Police action immediately.

Professor Kellner has thanked me for this detective work, but it all your efforts dear reader.

pahal=- 86, aarambh -23 aa arunkamalak naye ilake me ka sambandhit prishtha pathebak lel dhanyavad pathakgan.

http://www.gseis.ucla.edu/courses/ed253a/newDK/intell.htm ehi link par douglas kellner ke lekhak anuvad pahal-86 ke page 125-131 par achhi- soochnak lel dhanyad pathakgan.
ehi ghatnakram me kono pathak lag je Arun Kamal jik kavita "Naye Ilake Me" hoinh aa Aarambh (ank 23, maithili magazine editor Sh. Rajmohan Jha (March 2000) me prakashist maithili kavita "Sanjh Hoit Gam Me" te kripya ggajendra@gmail.com par soochit karathi- Dhanyavad.
ehi ghatnakram me bahut ras aar jankari aa dher ras samarthan debak lel dhanyavad pathakgan.


पाठकक सूचनाक बाद ई पता चलल अछि (आ ओकर सत्यापन कएल गेल) जे एहि लेखकक ई एहि तरहक पहिल कृत्य नहि अछि। ई लेखक पहिने सेहो Douglas Kellner क Technopolitics क पंक्तिशः अनुवाद मूल लेखकक रूपमे नामसँ ज्ञानरंजनक हिन्दी पत्रिका "पहल"मे धोखासँ छपबओलक। तकर पता चललाक बाद "पहल"मे एहि लेखकक रचनाक प्रकाशन बन्द भऽ गेल। एहि सम्बन्धमे विस्तृत आलेख विदेहक अगला अंकक सम्पादकीयमे देल जाएत।
२.एहि सभ घटनाक बाद पंकज पराशरकेँ विदेहसँ बैन कएल जा रहल अछि। विदेह आर्काइवसँ "विलम्बित कइक युगमे निबद्ध" पोथीकेँ हटाओल जा रहल अछि आ एकटा इनक्वायरी द्वारा एहि पोथीक ( डगलस केलनर बला घटनाक्रमक बाद) जाँच किछु चुनल लेखक-पाठक द्वारा कएल जएबा धरि रहत। प्रकाशककेँ सेहो उचित पुलिसिया कार्यवाही (यदि आवश्यक हुअए तँ) लेल एहि समस्त घटनाक्रमक सूचना दऽ देल गेल अछि।
३.पाठक डगलस केलनरसँ ई-मेल kellner@gseis.ucla.edu पर "पहल" पत्रिका वा तकर सम्पादक श्री ज्ञानरंजनसँ editor.pahal@gmail.com, edpahaljbp@yahoo.co.in वा info@deshkaal.com पर आ दैनिक जागरणसँ nishikant@jagran.com, response@jagran.com, mailbox@jagran.com, delhi@nda.jagran.com पर सम्पर्क कए विस्तृत जानकारी लऽ सकैत छथि। डगलस केलनरक आर्टिकल गूगल सर्चपर technopolitics टाइप कए ताकि सकै छी आ पढ़ि सकै छी। पहल पत्रिकाक वेबसाइट www.deshkaal.com पर सेहो पहल पत्रिकाक पुरान अंक सभ आस्ते-आस्ते देबाक प्रारम्भ भेल अछि।

विस्तृत जानकारीक लेल सुधी पाठकगण अहाँक धन्यवाद। भविष्यमे सेहो एहि घटनाक पुनरावृत्ति नहि हुअए ताहि लेल अहाँक पारखी नजरिक आस आगाँ सेहो रहत। एहि तरहक कोनो घटनाक जानकारी हमर ई-पत्र ggajendra@gmail.com पर अवश्य पठाबी।

VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

अन्तर्जालपर ब्लैकमेलिंग विरुद्ध गूगल, चिट्ठाजगत आ ब्लोगवानीकेँ सूचित करू, साइबर क्राइम आ ब्लैकमेलिंग रोकबा लेल सेहो ढेर रास प्रावधान छै, विशेष जानकारी ggajendra@gmail.com पर सम्पर्क करू। अहाँसँ पत्रकार, न्यूजपेपर, पत्रिका आ हिन्दीक गणमान्य लेखकगण/ प्रोफेसर/ विश्वविद्यालय आदिकेँ एहि घटनासँ सूचित करेबाक अनुरोध अछि। विशेष जानकारी लेबाक आ देबाक लेल ggajendra@gmail.com पर सूचित करू।
Reply 01/26/2010 at 01:56 PM
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VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

you may also brought this episode before sanjay@jagran.com
Thanks readers.
Reply 01/26/2010 at 12:25 AM
3
VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

But this time he has not used his name as maithil, mithila aa subodhkant but as Pankaj Parashar pparasharjnu@gmail.com
Reply 01/25/2010 at 09:48 PM
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VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

The same blackmail letter has been sent by the blackmailer to my email address which has been spammed through ISP ISP address 220.227.163.105 , 164.100.8.3 aa 220.227.174.243 and has been forwarded for taking Police action immediately.
Reply 01/25/2010 at 09:45 PM
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VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

Professor Kellner has thanked me for this detective work, but it all your efforts dear reader.
Reply 01/25/2010 at 08:21 PM
6
VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

pahal=- 86, aarambh -23 aa arunkamalak naye ilake me ka sambandhit prishtha pathebak lel dhanyavad pathakgan.
Reply 01/25/2010 at 08:16 PM
7
VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

http://www.gseis.ucla.edu/courses/ed253a/newDK/intell.htm ehi link par douglas kellner ke lekhak anuvad pahal-86 ke page 125-131 par achhi- soochnak lel dhanyad pathakgan.
Reply 01/24/2010 at 08:16 PM
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VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

ehi ghatnakram me kono pathak lag je Arun Kamal jik kavita "Naye Ilake Me" hoinh aa Aarambh (ank 23, maithili magazine editor Sh. Rajmohan Jha (March 2000) me prakashist maithili kavita "Sanjh Hoit Gam Me" te kripya ggajendra@gmail.com par soochit karathi- Dhanyavad.
Reply 01/24/2010 at 08:02 PM
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VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

ehi ghatnakram me bahut ras aar jankari aa dher ras samarthan debak lel dhanyavad pathakgan.
Reply 01/23/2010 at 11:40 PM
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VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

विदेहक पाठकक सूचनाक बाद ई पता चलल अछि (आ ओकर सत्यापन कएल गेल) जे एहि लेखकक ई एहि तरहक पहिल कृत्य नहि अछि। ई लेखक पहिने सेहो Douglas Kellner क Technopolitics क पंक्तिशः अनुवाद मूल लेखकक रूपमे नामसँ ज्ञानरंजनक हिन्दी पत्रिका "पहल"मे धोखासँ छपबओलक। तकर पता चललाक बाद "पहल"मे एहि लेखकक रचनाक प्रकाशन बन्द भऽ गेल। एहि सम्बन्धमे विस्तृत आलेख विदेहक अगला अंकक सम्पादकीयमे देल जाएत।
२.एहि सभ घटनाक बाद पंकज पराशरकेँ विदेहसँ बैन कएल जा रहल अछि। विदेह आर्काइवसँ "विलम्बित कइक युगमे निबद्ध" पोथीकेँ हटाओल जा रहल अछि आ एकटा इनक्वायरी द्वारा एहि पोथीक ( डगलस केलनर बला घटनाक्रमक बाद) जाँच किछु चुनल लेखक-पाठक द्वारा कएल जएबा धरि रहत। प्रकाशककेँ सेहो उचित पुलिसिया कार्यवाही (यदि आवश्यक हुअए तँ) लेल एहि समस्त घटनाक्रमक सूचना दऽ देल गेल अछि।
३.पाठक डगलस केलनरसँ ई-मेल kellner@gseis.ucla.edu पर "पहल" पत्रिका वा तकर सम्पादक श्री ज्ञानरंजनसँ editor.pahal@gmail.com, edpahaljbp@yahoo.co.in वा info@deshkaal.com पर आ दैनिक जागरणसँ nishikant@jagran.com, response@jagran.com, mailbox@jagran.com, delhi@nda.jagran.com पर सम्पर्क कए विस्तृत जानकारी लऽ सकैत छथि। डगलस केलनरक आर्टिकल गूगल सर्चपर technopolitics टाइप कए ताकि सकै छी आ पढ़ि सकै छी। पहल पत्रिकाक वेबसाइट www.deshkaal.com पर सेहो पहल पत्रिकाक पुरान अंक सभ आस्ते-आस्ते देबाक प्रारम्भ भेल अछि।

विस्तृत जानकारीक लेल सुधी पाठकगण अहाँक धन्यवाद। भविष्यमे सेहो एहि घटनाक पुनरावृत्ति नहि हुअए ताहि लेल अहाँक पारखी नजरिक आस आगाँ सेहो रहत। एहि तरहक कोनो घटनाक जानकारी हमर ई-पत्र ggajendra@gmail.com पर अवश्य पठाबी।
Reply 01/22/2010 at 12:03 PM
11
VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

out of these three addresses of the spammer i.e. pkjpp@yahoo.co.in, pparasharjnu@gmail.com and pkjppster@gmail.com the address pkjpp@yahoo.co.in, is fails verification test and addresses pparasharjnu@gmail.com and pkjppster@gmail.com stands verified and confirmed.
Reply 01/21/2010 at 10:00 PM
12
VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

the htpps host matches reliance communications and the corresponding email gamghar at gmail dot com and maithilaurmithila at gmail dot com is fake ids related with the actual spammers id i.e.pkjpp@yahoo.co.in, pparasharjnu@gmail.com and pkjppster@gmail.com
Reply 01/21/2010 at 08:50 PM
13
VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

The office premise has been located, the blackmailer works in Dainik Jagran, Process to file complaint against Cyber Crime Act is being initiated and the organisation being taken into confidence.
Reply 01/21/2010 at 06:13 PM
14
VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

maithil, mithila aa subodhkant nam se abhadra aa blackmail karay bala blackmailer ke cheenhi lel gel achhi,ISP address 220.227.163.105 , 164.100.8.3 aa 220.227.174.243 aa ban kayal ja rahal achhi, agan ohi organisation se seho sampark kayal jaayat jatay se ee email aayal achhi.
Reply 01/18/2010 at 11:19 PM
15
VIDEHA GAJENDRA THAKUR said...

comment moderation lagoo kayal ja rahal achhi
Reply 01/18/2010 at 09:27 PM
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सुबोधकांत said...

सूचना: पंकज पराशरकेँ डगलस केलनर आ अरुण कमलक रचनाक चोरिक पुष्टिक बाद (http://www.box.net/shared/75xgdy37dr)बैन कए विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलनसँ निकालि देल गेल अछि।



पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ.....

१.डॉ. जेकील आ मिस्टर हाइडक कथा अंग्रेजी विषएमे स्कूलमे पढ़ने रही। एकटा वैज्ञानिक रहथि डॉ. जेकील हृदएसँ कलुषित। मोन करन्हि जे चोरि-उच्क्कागिरी करी। से एकटा द्रवक खोज कएलन्हि जकरा पीबि कऽ ओ मिस्टर हाइड बनि जाथि आ रातिमे चोरि-उच्क्कागिरी करथि। एक रातुक गप अछि जे मिस्टर हाइड ककरो हत्या कऽ भागि रहल रहथि मुदा भोर भऽ गेल रहै से लोक सभ हुनका खेहारए लगलन्हि। ओ डॉ.जेकीलक घरमे पैसि गेलाह (कारण डॉ.जेकील तँ ओ स्वयं छलाह) आ केबार भीतरसँ लगा लेलन्हि। लोक सभ चिन्तित जे डॉ. जेकीलकेँ ई बदमाश मारि देतन्हि से ओ सभ केबार पीटए लगलाह। मिस्टर हाइड द्रव पीअब शुरु केलन्हि मुदा ओहि दिन दवाइमे रिएक्शन नहि भेलैक आ हुनकर रूप डॉ. जेकीलमे नहि बदलि सकलन्हि। आब एहि कथाक अन्तमे मिस्टर हाइड माथ नोचि रहल छथि जे हुनका अपन समस्त पापक प्रायश्चित मिस्टर हाइड बनि करए पड़तन्हि।

२. पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... हिनकर रियल आइडेन्टिटी हम नाङट करै छी आ ई आब अभिशप्त छथि अपन शेष जीवन मिस्टर हाइड रहि अपन कुकृत्यक सजा भुगतबाक लेल।

३.मैथिलमे ई एकटा तथ्य छै जे चुपचाप जे गारि सुनै अछि तकरा कहल जाइ छै जे ओ बड्ड नीक लोक छथि। मुदा समए आबि गेल अछि मिस्टर हाइड सभकेँ देखार करबाक आ ओकरा कठोर सजा देबाक। मुदा ई तँ मात्र प्रारम्भ अछि। मैथिलीमे बहुत गोटे छथि जे हिन्दीमे बैन भेल लेखककेँ पोसै छथि (मैथिली सेवाक लेल) जे जखन ककरो गारि पढ़बाक होए तँ ओ तकर प्रयोग कऽ सकथि।

४.एहि ब्लैकमेलरक डॉ. जेकील आ मिस्टर हाइड बला चरित्र मैथिल सर्जनाक विरोधमे मैथिल-जन पत्रिकामे एक दशक पहिने उजागर भऽ गेल छल मुदा लोक हिनका पोसैत रहल।

५.आरम्भमे सेहो ई एकटा चिट्ठी मैथिलीक सम्पादकक विरोधमे देलन्हि जे छपि गेल आ ओकर घृणित भाषाक कारण भाइ साहेब राजमोहन झाकेँ माफी माँगए पड़लन्हि आ फेर ई मिस्टर हाइड सेहो ओहि सम्पादकसँ लिखितमे माफी मँगलन्हि।

६.एकटा आग्रह आ आह्वान:सुभेश कर्ण आ समस्त मैथिली-प्रेमी-गण- एहि मिस्टर हाइडक ब्लैकमेलिंग आ एब्युजक द्वारे अहाँ सभकेँ मैथिली छोड़ि कऽ जएबाक आवश्यकता नहि अछि, कारण पापक घैला भरि गेलाक बाद ई आब अभिशप्त छथि अपन शेष जीवन मिस्टर हाइड रहि अपन कुकृत्यक सजा भुगतबाक लेल।
जे.एन.यू.मे छात्र-छात्रा सभसँ पोस्टकार्ड पर साइन लऽ ओहिपर अपन रचना लेल प्रशंसा-पत्र पठबैत घुमैत अपस्याँत कथित गोल्ड मेडेलिस्ट(!!!) मिस्टर हाइडकेँ चिड़ैक खोता तोड़बाक सख शुरुहेसँ छन्हि। पहिल कथा गोष्ठीमे जखन ई सहरसामे सभसँ पुछने फिरै छथि जे साहित्यकार बनबासँ की-की सभ फाएदा छै तखन ई एकटा पाइ आ पुरस्कारक लेल अपस्याँत मैथिल युवा-पीढ़ीक प्रतिनिधित्व करै छथि, जे राजमोहन झा जीक शब्दमे मैथिलीसँ प्रेम नञि करैत अछि। ई मिस्टर हाइड सेहो ओहि सम्पादकसँ लिखितमे माफी मँगलन्हि आ जखन ओ माफ कऽ देलखिन्ह तखन फेर हुनका गारि पढ़ब शुरु कऽ देलन्हि। हमरासँ लिखित मेल-माफी अस्वीकार भेलाक बाद मिस्टर हाइडक माथ नोचब स्वाभाविके। मिस्टर हाइड ककरो इनकम टैक्स, कस्टम वा सरकारी नोकरीमे देखै छथि, सुनै छथि तँ पाइक मारल जेकाँ हिनका मोनमे ब्लैकमेलिंग कुलुबुलाए लगै छन्हि, प्रायः आनन्द फिल्मक एक गोट कलाकार जेकाँ- जे एहने मिस्टर हाइड लेल कहै अछि- जे ई डॉक्टर रहितए तँ किडनी बेचितए, से ओ जतए छथि ओतहु ब्लैकमेलिंगक धन्धा शुरू कैये देने छथि। मुदा चिड़ैक खोता उजाड़ैत-उजाड़ैत मधुमाखीक छत्ता उजाड़बाक गल्ती एहेन ब्लैकमेलर कैये दैत अछि। जे सरकारी नोकरी वा इन्कम-टैक्स, कस्टममे ई ब्लैकमेलर रहितए तँ देश जरूर बेचि दैतए।

kellner@ucla.edu"
Dear Gajendra
thanks for the detective work. was there a response?
best regards,
Douglas Kellner
Philosophy of Education Chair
Social Sciences and Comparative Education
University of California-Los Angeles
Box 951521, 3022B Moore Hall
Los Angeles, CA 90095-1521

Fax 310 206 6293
Phone 310 825 0977
http://www.gseis.ucla.edu/faculty/kellner/kellner.html




पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ.....

पंकज पराशर उर्फ.....डगलस केलनर उर्फ अरुण कमल उर्फ...
डगलस केलनरक नीचाँक आलेखकक पंकज पराशर द्वारा चोरि सिद्ध कएलक जे एक दशक पहिने एहि लेखक द्वारा अरुण कमलक चोरि सँ आइ धरि हुनकामे कोनो तरहक परिवर्तन नहि आएल छन्हि। हँ, आब ओ पटना विश्वविद्यालयक प्रोफेसरक रचना चोरेबासँ आगाँ बढ़ि गेल छथि आ कैलिफोर्निया वि.वि.क प्रोफेसरक रचना चोराबए लागल छथि। एहि सन्दर्भमे हमरा एकटा खिस्सा मोन पड़ैत अछि। २०-२२ बरख पुरान सत्य कथा। दरभंगामे रहैत रही, छतपर हम आ हमर एकटा पिसियौत भाइ साँझमे ठाढ़ रही। सोझाँमे सरवनजीक घरक बाअड़ीमे खूब लताम फड़ल छलन्हि। हमर पिसियौत भाइ हुनका इशारा दऽ कहलखिन्ह जे दस टा लताम आनू। ओ बेचारे दसटा लताम तोड़लन्हि आ आबि रहल छलाह आकि रस्तामे हमसभ देखलहुँ जे एकटा छोट बच्चा संग हुनका किछु गप भेलन्हि आ ओ पाँचटा लताम ओहि बच्चाकेँ दऽ देलखिन्ह। जखन सरवन जी अएलाह तँ कहलन्हि जे ओ बच्चा हुनका भैया कहि सम्बोधित कएलकन्हि आ पाँचटा लताम मँगलकन्हि- से कोना नञि दितियैक- सरवनजीक कहब छलन्हि। आब पंकज पराशर प्रसंगमे की भेल से देखी। प्रदीप बिहारीजीक बेटा प्रणवकेँ पंकज पराशर नोम चोम्स्की आ डगलस केलनरक रचना दैत छथिन्ह आ तकर अनुवाद करबा लेल कहै छथिन्ह। बेचारा जान लगा कऽ अनुवाद कऽ दैत छन्हि, ई सोचि जे जिनका ओ चच्चा कहै छथि- जे क्रान्तिकारी विचारक छथि (मार्क्सवादी!!!) से कोनो नीक पत्रिकामे ई अनुवाद छपबा देथिन्ह। मुदा छह मासक बाद चच्चाजी कहै छथिन्ह जे नोम चोम्स्की बला रचना हेरा गेल आ डगलस केलनर बला रचनाक अनुवाद नञि नीक रहए से रिजेक्ट भऽ गेल। मुदा क्रान्तिकारी कवि (चोरुक्का सेहो विवरण नीचाँमे अछि) दुनू रचना पहल पत्रिकामे पठा दै छथि- पहल-८६ मे डगलस केलनर बला रचना छपितो छन्हि (आ से अनुवादक रूपमे नहि वरन् मूल लेखकक रूपमे) आ ओ बैन सेहो कऽ देल जाइ छथि। हमर सरवन जी एकटा बच्चा द्वारा भैया कहलापर पाँचटा लताम ओकरा दऽ दै छथिन्ह मुदा हमर पराशरजी भातिजोक पाँचटा लताम निर्लज्जतासँ छीनि लैत छथि।
आ हम हुनकर खिजबीन तखन करै छी जखन ओ विदेहंमे आइडेन्टिटी बदलि हमरा गारि पढ़ैत छथि- हुनकर रियल आइडेन्टीटी नाङट करै छी। फेर सभसँ गप करै छी आ पाठकक सहयोगसँ आरम्भ, पहल क पुरान अंक भेटि जाइत अछि जतए हिनकर कुकृत्य छन्हि।।

नीचाँक लिंकपर नीचाँक सभटा आर्टिकल आ कविता आ तकर पंकज पराशर द्वारा चोरिक रचनाक पी.डी.एफ. फाइल डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि।
http://www.box.net/shared/75xgdy37dr
सूचना: पंकज पराशरकेँ डगलस केलनर आ अरुण कमलक रचनाक चोरिक पुष्टिक बाद बैन कए विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलनसँ निकालि देल गेल अछि।


Douglas Kellner
Philosophy of Education Chair
Social Sciences and Comparative Education
University of California-Los Angeles
Box 951521, 3022B Moore Hall
Los Angeles, CA 90095-1521

Fax 310 206 6293
Phone 310 825 0977
http://www.gseis.ucla.edu/faculty/kellner/kellner.html


Intellectuals, the New Public Spheres, and Techno-Politics
The category of the intellectual, like everything else these days, is highly contested and up for grabs. Zygmunt Bauman contrasts intellectuals as legislators who wished to legislate universal values, usually in the service of state institutions, with intellectuals as interpreters, who merely interpret texts, public events, and other artifacts, deploying their specialized knowledge to explain or interpret things for publics (1987; 1992). He thus claims that there is a shift from modern intellectuals as legislators of universal values who legitimated the new modern social order to postmodern intellectuals as interpreters of social meanings, and thus theorizes a depoliticalization of the role of intellectuals in social life. .......

अरुण कमल
Arun lives in Patna where he teaches English at the Science College of Patna University.
नए इलाके में
जहाँ रोज बन रहे नये नये मकान
मैं अक्सर रास्ता भूल जाता हूँ
खोजता हूँ ताकता पीपल का पेड़
खोजता हूँ ढहा हुआ घर
और ज़मीन का खाली टुकड़ा जहाँ से बायें
मुड़ना था मुझे
फिर दो मकान बाद बिना रंग वाले लोहे के फाटक का
घर था इकमंजिला
चल देता हूँ
या दो घर आगे ठकमकाता
रोज कुछ घट रहा है
यहाँ स्मृति का भरोसा नहीं
एक ही दिन में पुरानी पड़ जाती है दुनिया
जैसे वसंत का गया पतझड़ को लौटा हूँ
जैसे वैशाख का गया भादो को लौटा हूँ
और पूछो -
क्या यही है वो घर?
आ चला पानी ढहा आ रहा अकास
शायद पुकार ले कोई पहचाना ऊपर से देख कर

अविनाशकेँ सेहो 220.227.174.243 आइ.एस.पी.सँ एहि प्रकारक ई-पत्र अबैत रहै मुदा ओ मामिला खतम कs देने रहथिन। ओ टिप्पणी सभ एतेक घृणित छैक जे एतए नहि देल जा रहल अछि।अहाँ नीचाँक लिंकपर ई देखि सकै छी।

http://tirhutam.blogspot.com/

पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... कऽ रहल अछि भाषा भूमिक मोल

मैथिली भाषा-साहित्य के पाठक आ लेखक बंधु केँ की एहि प्रश्न सबहक उत्तर अवश्य जानबाक चाही।पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... नामक एहि व्यक्तिक बहुत रास कच्चा चिट्ठा –जेना एम.ए.मे प्रथम श्रेणीमे सर्वोच्च स्थान?? पत्रकारिताक कोर्स?? ई सभ नटबरलालक तर्जपर!! जे.एन.यू.क लड़कीसँ हिन्दी अनुवाद कराएब जे एहिसँ पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ.....केँ नोकरी भेटि जएतैक आ फेर तकरा अपना नामसँ छपबा लेब, प्रणवसँ डगलस केलनरक आ नोम चोम्स्कीक अनुवाद करबाएब आ अपना नामसँ छपबा लेब, अरुण कमल, श्रीकान्त वर्मा, इलारानी सिंह। ई पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... सभ लेखक सभसँ हुनकर परिवारजनसँ कहै छन्हि जे अनुवाद लेल कथा-कविता दिअ आ फेर तकरा चोरा कऽ अपना नामसँ छपबा लैत अछि। हिन्दीमे बैन भेलाक बाद मैथिलीक सेवा! गौरीनाथकेँ पहिने गारि पढ़ै छन्हि आ फेर लिखित माफी मँगै अछि। क्लेप्टोमेनियासँ ग्रसित पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... क ई हाल छै जे रमण कुमार सिंहकेँ ओकरापर कविता लिखै पड़ै छन्हि ..ककरासँ की चोरेने छी जे अनिद्रा पैसि गेल? अविनाश केँ गारि , श्रीधरम आ अनलकान्त केँ गारि , रामदेव झा केँ गारि , राजमोहन झा आ राजनन्दन लाल दास केँ गारि , सुभाषचन्द्रयादव-केदार कानन- तारानन्द झा तरुण- प्रोफेसर महेन्द्र- रमेश सभकेँ गारि- मैथिली सर्जनामे रामदेव झाकेँ गारि पढ़ैत सहरसा चिट्ठी आ सहरसा सभक साहित्यकारकेँ गारि पढ़ैत रामदेव झाकेँ चिट्ठी, ई दुनू चिट्ठी संगे छपल!! चोरक सीना जोड़बाक एहिसँ नीक उदाहरण भेटब मोश्किल।यएह छी पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ.....क यथार्थ। # आख़िरी सफ़र पर निकलने तक / पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... # पुरस्कारोत्सुकी आत्माएँ / पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... # बऊ बाज़ार / पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ.....
# मरण जल / पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... # रात्रि से रात्रि तक / पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... # साला सब हँसकर निकल जाता है अपुन को अकेला चीख़ता छोड़कर / पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... # हस्त चिन्ह / पतचट्टा पंकज झा पराशर उर्फ पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ.....
नयनसुख इंसाफी मरड़ उर्फ ब्लैकमेलर पंकज पराशर उर्फ पतचट्टा उर्फ अरुण कमल उर्फ श्वान रूप संसार है भूंकन दे झख मार उर्फ कुफ्र कुछ चाहिए ...की रौनक के लिए उर्फ गोयबल्स उर्फ कारेल चापेक उर्फ अपन कारी मुँह उर्फ मोहल्ला लाइव उर्फ पतनुकान उर्फ उदय प्रकाश उर्फ पहल उर्फ रवि भूषण उर्फ निराला उर्फ वर्चुअल स्पेस।
Mr Pankaj Parashar alias Pankaj Jha Parashar alias Douglas Kellner alias Arun Kamal alias Sreekant Verma alias Ilarani Singh alias Udayakant alias ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 alias.....the new Natwar lal of Maithili literature got a book translated Hindi by a JNU girl colleague and got it published in his own name, he got translated Noam Chomsky’s article and Douglas Kellner’s article translated into Hindi by a young boy and got it published in Hindi Magazine PAHAL-86 in his own name and was banned!! His bio-data has many exotic and false things First class First in M.A. !!! Gold Medalist!!! journalism etc. the person is kleptomaniac and a literary cheat and has copied articles, poems of Douglas Kellner , Arun Kamal , Sreekant Verma , Ilarani Singh

पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ.....
१.डॉ. जेकील आ मिस्टर हाइडक कथा अंग्रेजी विषएमे स्कूलमे पढ़ने रही। एकटा वैज्ञानिक रहथि डॉ. जेकील हृदएसँ कलुषित। मोन करन्हि जे चोरि-उच्क्कागिरी करी। से एकटा द्रवक खोज कएलन्हि जकरा पीबि कऽ ओ मिस्टर हाइड बनि जाथि आ रातिमे चोरि-उच्क्कागिरी करथि। एक रातुक गप अछि जे मिस्टर हाइड ककरो हत्या कऽ भागि रहल रहथि मुदा भोर भऽ गेल रहै से लोक सभ हुनका खेहारए लगलन्हि। ओ डॉ.जेकीलक घरमे पैसि गेलाह (कारण डॉ.जेकील तँ ओ स्वयं छलाह) आ केबार भीतरसँ लगा लेलन्हि। लोक सभ चिन्तित जे डॉ. जेकीलकेँ ई बदमाश मारि देतन्हि से ओ सभ केबार पीटए लगलाह। मिस्टर हाइड द्रव पीअब शुरु केलन्हि मुदा ओहि दिन दवाइमे रिएक्शन नहि भेलैक आ हुनकर रूप डॉ. जेकीलमे नहि बदलि सकलन्हि। आब एहि कथाक अन्तमे मिस्टर हाइड माथ नोचि रहल छथि जे हुनका अपन समस्त पापक प्रायश्चित मिस्टर हाइड बनि करए पड़तन्हि।
२. पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ..... हिनकर रियल आइडेन्टिटी हम नाङट करै छी आ ई आब अभिशप्त छथि अपन शेष जीवन मिस्टर हाइड रहि अपन कुकृत्यक सजा भुगतबाक लेल।
३.मैथिलमे ई एकटा तथ्य छै जे चुपचाप जे गारि सुनै अछि तकरा कहल जाइ छै जे ओ बड्ड नीक लोक छथि। मुदा समए आबि गेल अछि मिस्टर हाइड सभकेँ देखार करबाक आ ओकरा कठोर सजा देबाक। मुदा ई तँ मात्र प्रारम्भ अछि। मैथिलीमे बहुत गोटे छथि जे हिन्दीमे बैन भेल लेखककेँ पोसै छथि (मैथिली सेवाक लेल) जे जखन ककरो गारि पढ़बाक होए तँ ओ तकर प्रयोग कऽ सकथि।
४.एहि ब्लैकमेलरक डॉ. जेकील आ मिस्टर हाइड बला चरित्र मैथिल सर्जनाक विरोधमे मैथिल-जन पत्रिकामे एक दशक पहिने उजागर भऽ गेल छल मुदा लोक हिनका पोसैत रहल।
५.आरम्भमे सेहो ई एकटा चिट्ठी मैथिलीक सम्पादकक विरोधमे देलन्हि जे छपि गेल आ ओकर घृणित भाषाक कारण भाइ साहेब राजमोहन झाकेँ माफी माँगए पड़लन्हि आ फेर ई मिस्टर हाइड सेहो ओहि सम्पादकसँ लिखितमे माफी मँगलन्हि।
६.एकटा आग्रह आ आह्वान: सुभेश कर्ण आ समस्त मैथिली-प्रेमी-गण- एहि मिस्टर हाइडक ब्लैकमेलिंग आ एब्युजक द्वारे अहाँ सभकेँ मैथिली छोड़ि कऽ जएबाक आवश्यकता नहि अछि, कारण पापक घैला भरि गेलाक बाद ई आब अभिशप्त छथि अपन शेष जीवन मिस्टर हाइड रहि अपन कुकृत्यक सजा भुगतबाक लेल।
जे.एन.यू.मे छात्र-छात्रा सभसँ पोस्टकार्ड पर साइन लऽ ओहिपर अपन रचना लेल प्रशंसा-पत्र पठबैत घुमैत अपस्याँत कथित गोल्ड मेडेलिस्ट(!!!) मिस्टर हाइडकेँ चिड़ैक खोता तोड़बाक सख शुरुहेसँ छन्हि। पहिल कथा गोष्ठीमे जखन ई सहरसामे सभसँ पुछने फिरै छथि जे साहित्यकार बनबासँ की-की सभ फाएदा छै तखन ई एकटा पाइ आ पुरस्कारक लेल अपस्याँत मैथिल युवा-पीढ़ीक प्रतिनिधित्व करै छथि, जे राजमोहन झा जीक शब्दमे मैथिलीसँ प्रेम नञि करैत अछि। ई मिस्टर हाइड सेहो ओहि सम्पादकसँ लिखितमे माफी मँगलन्हि आ जखन ओ माफ कऽ देलखिन्ह तखन फेर हुनका गारि पढ़ब शुरु कऽ देलन्हि। हमरासँ लिखित मेल-माफी अस्वीकार भेलाक बाद मिस्टर हाइडक माथ नोचब स्वाभाविके। मिस्टर हाइड ककरो इनकम टैक्स, कस्टम वा सरकारी नोकरीमे देखै छथि, सुनै छथि तँ पाइक मारल जेकाँ हिनका मोनमे ब्लैकमेलिंग कुलुबुलाए लगै छन्हि, प्रायः आनन्द फिल्मक एक गोट कलाकार जेकाँ- जे एहने मिस्टर हाइड लेल कहै अछि- जे ई डॉक्टर रहितए तँ किडनी बेचितए, से ओ जतए छथि ओतहु ब्लैकमेलिंगक धन्धा शुरू कैये देने छथि। मुदा चिड़ैक खोता उजाड़ैत-उजाड़ैत मधुमाखीक छत्ता उजाड़बाक गल्ती एहेन ब्लैकमेलर कैये दैत अछि। जे सरकारी नोकरी वा इन्कम-टैक्स, कस्टममे ई ब्लैकमेलर रहितए तँ देश जरूर बेचि दैतए।
kellner@ucla.edu"
Dear Gajendra
thanks for the detective work. was there a response?
best regards,
Douglas Kellner
Philosophy of Education Chair
Social Sciences and Comparative Education
University of California-Los Angeles
Box 951521, 3022B Moore Hall
Los Angeles, CA 90095-1521

Fax 310 206 6293
Phone 310 825 0977
http://www.gseis.ucla.edu/faculty/kellner/kellner.html


dear Gajendraji,
apnek mail milal. Pankajjik kritya janike bar dukh bhel. Ahi se maithilik nam kharab hoyat achhi. Apnek kadam ekdum uchit achhi.
Rajiv K Verma
These People are hellbent to bring down the literary discourse down to the gutter. Now you have been receiving mails like one. We are with you and i have forwarded your mails to Maithili speaking people all across the country

--
VIJAY DEO JHA
dhanyvad. muda ehne lok sabjagah aadar pabait achi
shridharam

अहां कें सूचनार्थ पठेने छी जे पंकज पहिनेहो इ सब काज करैत रहय छलैए।
aavinash

Dear Gajendra g

You are doing very well in the field of collecting all the documents related to the Maithili. Videha. Com realy a adventureous collection. I will also find some time to learm the article published through the videha.
Now your detective style theft the sleeping of many of the so called literary personnel. Go a head
jai Maithili jai Mithila
Sunil Mallick
President
MINAP, Janakpur

Dear Gajendra g

You are doing very well in the field of collecting all the documents related to the Maithili. Videha. Com realy a adventureous collection. I will also find some time to learm the article published through the videha.
Now your detective style theft the sleeping of many of the so called literary personnel. Go a head
jai Maithili jai Mithila

Sunil Mallick
President
MINAP, Janakpur

your efforts are commendable. Anysuch ghost writer or fake identity holder must be boycotted from literature at once Thanks.

shyamanand choudhary

Namaskar.
Chetna samitik sachiv ken mailak copy hastgat kara del achi.
Dr. Ramanand Jha' Raman'
गजेन्द्र जी ,
चेतना समिति हिनका सम्मानित कएलक अछि सेहो हमरा ज्ञात नहिं | यद्यपि हमहू चेतना क स्थाई सदस्य | जे हो. मुदा निंदास्पद घटना तं ई थिके तें दुखी कयलक | कतिपय नव मैथिल-प्रतिभाक आकलन-मूल्यानकनक हमर अपन स्नेग्रही स्वभाव, एहि दुर्घटनाक बाद तं आब चिंता मे ध' देलकय|
देखी,
सस्नेह ---गं गुंजन
प्रिय गजेंद्रजी
हम अपने विस्मित भेलहुँ| बहुत दु:खद दृश्य | सृजन विरूद्ध साहित्यिक सन्दर्भ मे ई घटना आधुनिक मैथिलीक बहुत कुरूप प्रसंग क' क' स्मरण कैल जायत
सस्नेह,
गंगेश गुंजन.
PRIYA MAITHILJAN
APPAN BHASHA- SANSKAR-SANSKRITI KE ASMARAN KARU AA EHAN VIVADAASAPAD LEKANI B KARANI KE VIRAM DIYA. ESWAR KE SAKCHI MANI - DIL PAR HATH RAKHI AA KULDEVI KE ASMARAN K-K YAD KARU KI SACHHAI KE KATEK KARIB CHHI.NIK BATAK LEL MANCH KE UPYOG KARI TA UTTAM.
DHANYABAD.
SAPREM,PK CHOUDHARY
Gajendra babu
pankaj puran chor achhi. Ham sab okar likhit ninda das sal pahine aarambh me kene rahi. Okra ban k kay ahan nik kayal. Chetna samiti ke seho samman wapas lebak chahi aa okar ninda karbak chahi.
subhash Chandra yadav
प्रिय ठाकुरजी!
(माननीय संपादक)
“विदेह ई-पत्रिका” [मैथिली]
एखन धरिक उपलब्ध साक्ष्यक आधार पर हम अपनहिक संग जाएब पसिन्न करब।
शंभु कुमार सिंह
Sir I have sent the link of Parashar's duplicacy to several people
along with Pranabh Bihari who had traslated that article. I had
telephonic conversation with him also and he was quite upset over
Parashar;s duplicay
Pranav is my junior and a good friend of mine. since you have referred Pranav who had traslated that article it is unfortunate that he was misused by Parashar. But i must congratulate you for exposing scam run by Parashar and his team. Parashar, though must not be blamed if he lifted the article of Nom Chomskey . Now i must doubt the artistic sensibility of Parashar who is now a pseudo-- intellectuals. I am amazed that how did he dare to publish the article of Nom Chomskey as his own.
God bless him no more
Vijay Deo Jha
Dear Gajendraji,
I fully agree with you that we must fight against blatant cases of wrongful appropriation.
हां अपन मेल में लिखने छी जे विदेह आर्काइव से संबंधित लेखक'क सबटा रचना हटा लेल जायत। अहि से आर्काइव सं ई प्रसंग सेहो, एकर साक्ष्य सेहो मेटा जायत। हमर मत ई जा साक्ष्यब रहबाक चाही निक आ अधलाह दुनु तरहक काज'क। अहां अप्पसन कामेंट आ र्निणय सेहो आर्काइव मे जा के संबंधित रचना के पोस्टा-स्क्रिाप्टर के रुप मे भविष्या'क पाठक'क लेल सुरक्षित राखि सकैत छियन्हिि।
ई दोहरेबाक बहुत औचित्यक नहि जे विदेह निक लागि रहल अछि आ अहांक परिश्रम एकदम देखा रहल अछि।
ईति,
सदन।


Sadan Jha
Sadan Jha

Thank you and same to you.

Nishikant Thakur

Thanx Gajendraji, for your immediate response. I must congratulate you for the work you have done to save the sanctity of the literature world as a whole.

I feel proud for the person like you who shows the courrage to bell the cat. If the so called writers like Parasharji are there to spoil the sea, on the other side it is very hopeful sight to have a person like you who is alert enough to take care of such filth & keep the sea clean.

Thanx for enlightening me on the subject.

Regards,
Bhalchandra Jha.

पंकज पराशरकेर एहन कार्य पर स्मरण अबैत अछि करीब बीस-पचीस साल पहिलुक घटना, जहिया आकाशवाणी दरभंगासँ म,म,डॉ, सर गंगानाथ झाक एकमात्र मैथिलीक कारुणिक पदकेँ एक गोट कवि द्वारा अपन कहि प्रसारित कए देल गेल छल, जे बादमे (सजग श्रोता द्वारा सूचना देलाक बाद) आजन्म बैन कए देल गेलाह । कहबाक तात्पर्य जे जँ हम मैथिल दरभैगा- मधुबनीमे गंगानाथ बाबूक पदकेँ अपन कहि सकैत छी तँ ई कोन बड़का गप । निश्चये एहन रचनाकारकेर सङ्ग कड़गर डेग उठाएब आवश्यक ।
ajit mishra

Dear Gajendrajee,
We should take strong step to prevent such intellectual cheats.
My support is always with you.
K N Jha
This seems to be a dangerous trend and we should also try and refrain from publishing anything from such authors. Regards,
Prof. Udaya Narayana Singh
प्रियवर ठाकुर जी,
मैथिल साहित्यकार आब साइबर क्राइम सेहो क रहल छथि, ई जानि अपार प्रसन्नता भेल |
पंकज पराशर के नकारात्मक बुद्धिक पूर्ण उपयोग करबाक लेल हम नोबेल प्राइज सा सम्मानित कराय चाहैत छी |
बुद्धिनाथ मिश्र
Sampadak Mahoday
Apne ehi prakarak durachar rokwak lel je prayash ka rahal chhee
ohi lel dhanyabad.Ehen blackmailer sa maithili ken bachayab aawashyak
achhi
Sadar
SHIV KUMAR JHA


गजेन्द्र भाई,
नमस्कार ! मैथिली मे एहि तरहक काज लगातार भ' रहल अछि । किछु व्यक्ति एहि धंधा मे अग्रसर छथि । मैथिलीक सम्पादक लोकनिक अनभिज्ञताक फायदा कतेको अंग्रेजी पढ़निहार तथाकथित साहित्यकार लोकनि उठा रहल छथि । पंकज जीक पहल मे छपल लेख के हम सेहो पढ़्ने र्ही आ किछुए दिनक बाद हम नेट पर मूल लेखकक आलेख के सेहो पढ़लहु । हमरा त' आश्चर्य लागल छल जे पंकज जी आलेखक कम स कम शीर्षक त' बदलि लैतथि मुदा हुनका एतेक ज्ञान रहितनि तखन की छल ।

एतबे नहि , हिनक बहुत रास कवितो अंग्रेजी साहित्य स' हेर-फेर कयल गेल अछि । खैर ! जे करथि ... । मुदा एहि बेर कहाबत ठीक होबाक चाही " सौ सोनार के त' एक लोहार के " । प्रकाशन मे जे भी कियो व्यक्ति गलती क' रहल छथि हुनका गंभीर क्रिमिनल बुझबाक चाही ।

धन्यवाद एहि लेल अहाँ के जे एतेक जोरदार तरीका स' एहि गप्प के उठैलहु ।

अहाँक

प्रकाश चन्द्र ।
pankaj parashar vala prasang bar dukhad laagal ,,
kamini
Gajendr jee,
maamailaa ke tool jatabe debainhi, sabhak oorjaa otabe svaahaa hetai. हमर मनतब एतबे, जे एक बेर अहां देखार क देलहुं, आब छोडि देल जाओ. हिन्दीयो मे एहिना भ रहल छै. बेर बेर आ खराब भाषा मे लिखल मोन के दुखी करैत अछि. फेर लागैत अछि जे अहि मे समय कियैक नष्ट करी?
हिन्दुस्तान मे जाति आ सेहो मैथिली से जाति नयि जाएत. हम एकरा नयि मानैत छलहुं मुदा आब 30 बरख से मैथिली मे लिखनाक बाद आब देखल जे एक ओर
1 मैथिली साहित्य मे लिली जी, उषा जी आ शेफलिका जी के बाद यदि किओ नाम लैत अछि त हमर.
2 एखनो कोनो पत्रिका बै छै त हमरा लेल रचनाक आग्रह होइते छै.
3 एखनो हम ओतबे सक्रिय छी आ निरंतर लिखि रहल छी.
4 दुखद जे हमरा बाद (सुस्मिता पाठक आ ज्योत्स्ना मिलन के हम अपने तुरिया बुझैत छी) के बाद एहेन कोनो सशक्त कोन, महिला लेखने नयि आएलए.
5 ई स्थिति रहलाक बादो, आब जहन हम देखै छी, त पाबै छी जे हमरा पर, हमर रचना यात्रा अथव हमर रचना पर किछु नयि लिखल गेलए, चाहे ओ मोहन भारद्वाज रहथु अथवा आन किओ. जहन हमर दशक केर चर्च होइत छै, तीन चारिटा नाम पर सविस्तार चर्चा होइत छै, जाहि मे हमर नाम नयि रहैत छै. हमर नाम मात्र सन्दर्भ लेल जोडि देल जाइत छै.
6 एतेक दिन मे मात्र रमण जी हमरा पर एक गोट लेख लिखलन्हि. हम ओकरा पुन: टाइप करबा के अहां लग पठायब.
7 जाति पाति धर्म आ द्वेष पर कहियो ध्यान नयि देलाक कारणे त कही हमर ई स्थिति नयि छै, आब हमरा ई सोचबा मे आबि रहल अछि.
8 हमर शिक्षक, जे स्वयं हिन्दी के ख्यातिलब्ध कथाकार छथि, हमरा बुझेने रहलाह जे हम मैथिली मे लिखब बन्न क; दी, कियैक त हम गैर मैथिल (जाति विशेष) से नयि छी, तैं हमर लेखन के कहियो मैथिल सभ नयि नोटिस करताह, कहियो किछु नयि करता.. अपन भाषाक प्रति प्रेम के आगरह कारणे हम हुनकर बात नयि मानलियै, लिखैत गेलहुं, मुदा आब लागि रहलअए जे हुनकर कहबी सही छलन्हि की?
9 एखनो की हाल छै मैथिली मे, देखियो. ओकरा विरुद्ध किछु करियु. मैथिली मे जे पैघ पैघ संस्था चाइ, चेतना समिति सनक, सभ बेर विद्यापति पर्व मनबैत छथि. लाखो खर्च करै छथि, मुदा नीक लेखक केर पोथी सभ बेर 5-7 टा निकालैथु, से नयि होबैत छन्हि.
10 हमरा भेटल जानकारी के मोताबिक विद्यापति हॉल किराया पर चढै छै. तकरा मे कोनो आपत्ति नयि, यदो ओकरा से किछु आय होबै. मुदा ओकरा मैथिलीक काज अथवा नाटक आदि लेल मांगल जाएत, त; नयि भेटै छै. यदि ओकर शुल्क चुका दी, तहन त किरायाके रूप मे किऊ ल' सकि छै. एकरा सभ के उजागर करी.
11 व्यक्ति से संस्था पैघ होइत छै. जतेक संस्था सभ छै, तकरा पर लिखी, साहित्य अकादमीक मैथिली विभाग सहित.
12 लिली रेक सभटा रचनाक अनुवाद अधिकार हमरा देने छथि. हुनक साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त पोथी 'मरीचिका' केर हिन्दी अनुवाद लेल पिछला 2-3 साल से हम लिखि रहल छी. साहित्य अकादमीक पत्रिका 'समकालीन भारतीय साहित्य" मे हम पिछला 25 साल से अनुवाद सहित छपि रहल छी. मुदा हमरा से अनुवादक नमूना मांगल गेल. ओहि कुर्सी पर जे स्वनाम धन्य बैसल छथि, हुनका हमरा मादे नयि बूझल त कोनो मैथिल साहित्यकार से पूछि सकैत छलाह. ई तहिने भेलै, जेना एक बेर एक गोट चैनल ऋषिकेश मुखर्जी से हुनकर बायोडाटा मंगने छल आ एखनि पढल समाचारक अनुसारे आ. जानकी वल्लभ श्हस्त्री से हुनकर बायोडाटा पद्मश्री लेल मांअगल गेलैय.
13 अपन विनम्रता दर्शाबैत हम लिली जीक दू तीन टा कथाक हिन्दी अनुवाद हम पठा देलियन्हि. तैयो अई पर कोनो विचार नयि. लिखला के बाद हमरा कहल गेल जे हम लिली जी से साहित्य अकादमी के अनुवादक अधिकार दियाबे मे मददि करी. आरे भाई, अहां के अनुवाद से मतलब अछि ने, आ जहन हम अनुवाद क; के देब' लेल तैयार छी तहन अकादमी के किअयैक अधिकार चाही? अई लेल जे अकादमी अपन पसीनक आदमी के अनुवाद लेल द; सकय. एखनि धरि ओकरा पर निपटारा नयि भेलैये. अकादमी से फेर कोनो पत्र नयि आएल अछे. अनुवाद तैयार राखल छै. लिली जी आब बहुत बुजुर्ग भ; गेल छथि. हुनक मात्र इयैह इच्छा छै (आ बहुत स्वाभाविक) जे हुनकर पोथी सभ हुनका सोझा मे प्रकाशित भ; जाए.
14 लिली जी के पोथी हिन्दी मे आनबाक श्रेय हमरे अछि, ई मनितहुं ओकरा रेकॉर्ड केनाए मैथिल समीक्षक आवश्यक नयि बुझैत छथि. एकरा पर लडू.
15 मैथिली के भारतीय ज्ञानपीठ से पुस्तक प्रकाशन लेल हमही आगां एलहुं आ प्रभास जी आ लिली जी के पोथी बहार भेलै.भारतीय ज्ञानपीठ से मैथिली पुस्तक प्रकाशन के श्रेय हमरे छन्हि, ईहो मनैत ओकरा रेकॉर्ड केनाए मैथिल समीक्षक आवश्यक नयि बुझैत छथि. एकरा पर लडू.
गजेन्द्र जी, मैथिलीक ई सभ मानसिकता पर आन्दोलन करी जाहि से रचनाकार आ वरिष्ठ रचनाकार सभ के अपमानित नयि होब' पडै. अहां चाही त' एकरा विदेह पर द' सकै छी.
हम दोसर बात सेहो लिखि के पठायब. मुदा हम फेर कहब, जे हम व्यक्ति के नयि संस्था आ व्यक्ति के मानसिकता के दोष देबन्हि. लोक पढथु आ पूचाथु ई स्वनामधन्य सभ से जे जकरा से अहां के गोलौंसी अछे, तकरा पर अहां लिखब आ जकरा से नयि अछे, जे मौन भावे लिखि रहलए कोनो विविआद मे पडल बगैर, हुनका लेल ई व्यवहार?
-विभा रानी.
Shri gajendraji

good work.

Anha sa ehina neer khshir vivekakak ummeed lagatar banal rahat.

chor ke ehina dekhar kelak baad dandit seho karbak prayas karbaak chahi. anha bahut raas neek pahal ka rahal chhi.


Saadhuvaad.

manoj pathak.


We should be greatful to Pankaj Parashar that he did not lay claim on the magnum opus of Kavi Vidyapati. I know him very well and his group as well. They have no love for Maithili in fact they are the moles planted by vested Hindi writers to damage maithili.
Parashar and likes are the distructive lots and they are the culprits for agonising senior writers of Maithili those who dedicated their life for Maithili language and literature. I have no sympathy for him. I cant say, even, God bless them.- Chitra Mishra
पंकज पराशरक पहिल मैथिली पद्य संग्रह ’समयकेँ अकानैत’ मैथिली पद्यक भविष्यक प्रति आश्वस्ति दैत मुदा एकर कविता सभ श्रीकान्त वर्माक मगधक अनुकृति होएबाक कारण आ रमेशक प्रति आक्षेपक कारण, ( पहिनहियो अरुण कमल आ बादमे डगलस केलनर, नोम चोम्स्की, इलारानी सिंह, श्रीकान्त वर्मा, राजकमल चौधरी आ प्राच्य आ पाश्चात्य रचनाक / कविता सभक निर्ल्ज्जतासँ पंकज पराशर द्वारा चोरिक कारण) मैथिली कविताक इतिहासमे एकटा कलंक लगा जाइत अछि।
पंकज पराशरक पहिल मैथिली पद्य संग्रह ’समयकेँ अकानैत’ मैथिली पद्यक भविष्यक प्रति आश्वस्ति दैत मुदा एकर कविता सभ श्रीकान्त वर्माक मगधक अनुकृति होएबाक कारण आ रमेशक प्रति आक्षेपक कारण, ( पहिनहियो अरुण कमल आ बादमे डगलस केलनर, नोम चोम्स्की, इलारानी सिंह, श्रीकान्त वर्मा, राजकमल चौधरी आ प्राच्य आ पाश्चात्य रचनाक / कविता सभक निर्ल्ज्जतासँ पंकज पराशर द्वारा चोरिक कारण) मैथिली कविताक इतिहासमे एकटा कलंक लगा जाइत अछि।
ई पंकज झा पराशर पहिनहियेसँ एहि सभमे संलग्न अछि, हरेकृष्ण झाक कविताकेँ हिन्दीमे, बिना अनुमतिक, छपबै छथि ,डॉक्टर हुनका तनावसँ दूर रहबा लेल कहने छन्हि। ई गप आर पुष्ट होइत अचि कारण विद्यानन्द झा जीक कविता सेहो ई पंकज झा पराशर एकटा हिन्दी पत्रिकामे बिना अनुमतिक छपबओलक, माने ई आदत हिनकर पुरान छन्हि। सम्पादक)

Recently Some Maithil Brahmin Samaj Organisation has started selling prizes in the name of Yatri (Vaidyanath Mishra, Nagarjun) and Kiran (Kanchinath Jha) at Rahika.
There has been trend recently to grant these prizes to those intellectual thiefs who are basically opposed to the ideology's of Kiran and Yatri (Nagarjun).
The caste based organisations are killing the spirit of Yatriji and Kiranji, recently the fraud Pankaj Jha alias Pankaj Kumar Jha alias Pankaj Parashar alias Dr. Pankaj Parashar) was
stage managed to get this casteist award, The lecturer of Hindi at Aligarh Muslim University, just appointed as adhoc staff, will teach now how to lift verbatim articles of Noam Chomsky and Douglas Kellner and poems of Illarani Singh and Arun Kamal to his students. His Samay ke akanait (समय केँ अकानैत) is lifted from Magadh of Srikant Verma (श्रीकान्त वर्मा- मगध) and his Vilambit Kaik Yug me Nibaddha (विलम्बित कइक युग मे निबद्ध) is collection of pirated poems of Illarani Singh Srikant Verma and others.
We deplore the selling of these prizes to a person who has brought respect of Maithili to a lower level.

गौरीनाथ (अनलकान्त))- सम्पादकीय अंतिका अक्टूबर-दिसंबर, 2009- जनवरी-मार्च, 2010- पंकज पराशर प्रसंगमे- हँ, दंद-फंद करैवला किछु लोक सब ठाम पहुँचि जाइ छै आ तेहन लोक एतहुँ अपन धूर्तता आ चोरि कला देखबै छथि। मुदा तकरो असलियत उजागर करब असंभव नइँ रहल। "विदेह"क गजेन्द्र ठाकुर एहन एक "युवा" (पंकज झा उर्फ पंकज पराशर) क असली चेहरा हाले मे देखोलनि।
गौरीनाथ (अनलकान्त))- सम्पादकीय अंतिका अक्टूबर-दिसंबर, 2009- जनवरी-मार्च, 2010- पंकज पराशर प्रसंगमे- हँ, दंद-फंद करैवला किछु लोक सब ठाम पहुँचि जाइ छै आ तेहन लोक एतहुँ अपन धूर्तता आ चोरि कला देखबै छथि। मुदा तकरो असलियत उजागर करब असंभव नइँ रहल। "विदेह"क गजेन्द्र ठाकुर एहन एक "युवा" (पंकज झा उर्फ पंकज पराशर) क असली चेहरा हाले मे देखोलनि।


पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ राजकमल चौधरी.....उर्फ...

कतेक उर्फ एहि लेखकक बनत नहि जानि... राजकमल चौधरीक अप्रकाशित पद्य (आब विदेह मैथिली पद्य २००९-१० मे प्रकाशित पृ.३९-४०) “बही-खाता”क एहि धूर्तता, चोरि कला आ दंद-फंद करैवला पंकज पराशर..उर्फ..उर्फ.. [गौरीनाथ (अनलकान्त)क एहि चोर लेखकक लेल प्रयुक्त शब्द- सम्पादकीय अंतिका अक्टूबर-दिसंबर, 2009- जनवरी-मार्च, 2010- पंकज पराशर प्रसंगमे-] द्वारा “हिसाब” नामसँ छपबाओल गेल- देखू

सूचना: पंकज पराशरकेँ डगलस केलनर आ अरुण कमलक रचनाक चोरिक पुष्टिक बाद (proof file at http://www.box.net/shared/75xgdy37dr and detailed article and reactions at http://www.videha.co.in/videhablog.html बैन कए विदेह मैथिली साहित्य आन्दोलनसँ निकालि देल गेल अछि।
पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ राजकमल चौधरी.....उर्फ...

कतेक उर्फ एहि लेखकक बनत नहि जानि... राजकमल चौधरीक अप्रकाशित पद्य (आब विदेह मैथिली पद्य २००९-१० मे प्रकाशित पृ.३९-४०) “बही-खाता”क एहि धूर्तता, चोरि कला आ दंद-फंद करैवला पंकज पराशर..उर्फ..उर्फ.. [गौरीनाथ (अनलकान्त)क एहि चोर लेखकक लेल प्रयुक्त शब्द- सम्पादकीय अंतिका अक्टूबर-दिसंबर, 2009- जनवरी-मार्च, 2010- पंकज पराशर प्रसंगमे-] द्वारा “हिसाब” नामसँ छपबाओल गेल- देखू
राजकमल चौधरी
बही-खाता
एहि खातापर हम घसैत छी
संसारक सभटा हिसाब
...
...
हमर सभटा अपराध, ज्ञान...सँ लीपल पोतल
अछि एक्कर सभटा पाता
ई हम्मर लालबही थिक जीवन-खाता
जीवन-खाता

पंकज पराशर उर्फ अरुण कमल उर्फ डगलस केलनर उर्फ उदयकान्त उर्फ ISP 220.227.163.105 , 164.100.8.3 , 220.227.174.243 उर्फ राजकमल चौधरी.....उर्फ...
द्वारा एकरा अपना नामसँ एहि तरहेँ चोराओल गेल
हिसाब
हिसाब कहिते देरी ठोर पर
उताहुल भेल रहैत अछि
किताब

जे भरि जिनगी लगबैत छथि
राइ-राइ के हिसाब-
दुनिया-जहान सँ फराक बनल
अंततः बनि कऽ रहि जाइत छथि
हिसाबक किताब।
२००६
एहि लेखकक खौँझा कऽ अपशब्दक प्रयोग बन्न नहि भेल अछि आ ई नाम बदलि-बदलि एखनो एहि सभ कार्यमे लिप्त अछि, आब ई अपन धंधा-चाकरी सेहो बदलि लेने अछि। स्पष्ट अछि जे एकरा विरुद्ध कड़गर डेग उठाओल जएबाक आवश्यकता अछि। उपरका समस्त जानकारी अहाँ गूगल, चिट्ठा जगतकेँ दी से आग्रह आ तकरा नीचाँ ई-पत्रपर सेहो अग्रसारित करी सेहो अनुरोध।
vc.appointments@amu.ac.in, bisaria.ajay@gmail.com, vedprakas_s@yahoo.co.in, tasneem.Suhail@gmail.com, rajivshukla_hindi@yahoo.co.in, merajhindi@gmail.com, ashutosh_1966@yahoo.co.in, ashiqbalaut@yahoo.in, abdulalim_dr@rediffmail.com, zubairifarah@gmail.com, RameshHindi@gmail.com
एहि लेखकक दिमागी हालतिक असली रूप एहि जालवृत्तपर सेहो भेटत जतए ओ न्जाम बदलि-बदलि अपन पुरना मालिकक कम्प्यूटरसँ घृणित पोस्ट करै छल।
http://tirhutam.blogspot.com/

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शनिवार, 23 जनवरी 2010

नताशा 39 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक लेल नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ आनन्द उठाऊ।)

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सोमवार, 18 जनवरी 2010

जाढ़ - विनीत ठाकुर...


गत्तर–गत्तर जाढ़ दागे की कहु भाइ यौ
राति काटब कोना ओढ़ीकऽ चटाइ यौ
दुःखक पथार आव पसरल एकचारी
थर–थर कापै बैसल बुधनी बेचारी.....
हाथ–हाथ नहि सुझे लागलछै बड़ धूनी
लाही लत्तिपर बरसै परै जेना फूँहीँ
सुनि नहि पराती शब्दै नहि चिड़ीया
कोक्रीया गेलै आइ की दादी बुढ़ीया
गत्तर–गत्तर जाढ़ दागे की कहु भाइ यौ
राति काटब कोना ओढ़ीकऽ चटाइ यौ.....
घूर की फूकब भटे नहि निङ्हाँस–पोरा
करेजामें साटगे बुधनी नेनाके लऽ कोरा
कोपित भऽ धर्ती–जलवायु उगलै छै जहर
ताँय नागिन फूफकार छोरै शितलहर
गत्तर–गत्तर जाढ़ दागे की कहु भाइ यौ
राति काटब कोना ओढ़ीकऽ चटाइ यौ...
~: विनीत ठाकुर :~
माता: शान्ति देवी, पिता: ब्रह्मदेव ठाकुर, जन्म तिथि: ०१.०३.१९७६, शिक्षा: बी.एड, सेवा: शिक्षक, स्थायी पता: मिथिलेश्वर मौवाही - ६, धनुषा, नेपाल.. इ-मेल: binitthakur@yahoo.co.in

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रविवार, 17 जनवरी 2010

गजल

कहिओ सम कहिओ विषम
कहिओ बेसी कहिओ कम्म


होइत रहलै अकाल मृत्यु
कहिओ गोली कहिओ बम


खेलाइत रहलै देह पर
कहिओ देवी कहिओ जम


निकलैत रहल दिन-प्रतिदिन
कहिओ टका कहिओ दम्म


ठकि रहल अनचिन्हार के
कहिओ अहाँ कहिओ हम

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शनिवार, 16 जनवरी 2010

नव वर्ष में नवारम्भ

अजीत कुमार आजाद जी के संपादन में पटना सं प्रकाशित मैथिलीक एहि द्विमासिक पत्रिकाक प्रवेशांक केर सामग्री पर एक दृष्टिः-
1. समस्याक टाल पर मिथिला(संपादकीय)
2. ससरैत संस्कृति- प्रेमचंद मिश्र
3. प्रो. मायानंद मिश्रक निबन्ध साहित्य-डॉ. योगानंद झा
4. पाश्चात्य साहित्य आ हरिमोहन झाक व्यंग्य- विनोद कुमार झा
5. जीवकान्तःमैथिलीक वर्ड्सवर्थ- डॉ. धनाकर ठाकुर
6. भाषाक सुखाइत विरासत- पंचानन मिश्र
7. एक बेर फेर फेकू जाल महाराज जी(कथा)-विभा रानी
8. सतिया(कथा)- डॉ. अरविन्द अक्कू
9. धूमकेतु,डॉ. इन्द्रकांत झा,रामलोचन ठाकुर,शंभु नाथ ठाकुर, मेनका मल्लिक,अनमोल झा,रघुनाथ मुखिया, सच्चिदानंद सौरभ,अरविंद सोनू,योषितानंद लाल दास गोविन्द आ रामसेवक ठाकुरक कविता
10. महिला सशक्तिकरणःभारतीय संदर्भ-सुशीला झा
11. बोर्ड परीक्षाःशिक्षा पर राजनीति-कमल मोहन चुन्नू
12. सीताकुण्ड में पिण्डदान-नारायणजी
13. निराशोर्निर्ममो भूत्वा-त्रिलोकीबाबू त्रिकालज्ञ
14. जीवन जीबाक कला सिखबैछ रंगमंच-कुमार गगन
15. बाढ़िक विरुद्ध डमरुक तुमुलनाद-किसलय कृष्ण
16. बाबा विद्यापतिक नाम पर (प्रतिनिधिक रिपोर्ट)
17. फिल्मी परदा पर विद्यापतिक अवतरण-किसलय कृष्ण
18. अगिला बेर ओसामा-रासीमा चौधरी
19. कृष्णमोहन झाक पोथी एकटा हेरायल दुनियाक समीक्षा-मानेश्वर मनुज
20. मैथिलीक बेछप आंचलिक उपन्यास महाकल्प-डॉ. इन्द्रकांत झा
21. बानर महासभा(व्यंग्य)-बैद्यनाथ विमल
22. सम्मानित लोकनिकें बधाई

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नताशा 38 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक लेल नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ आनन्द उठाऊ।)



www.devanshuvatsa.com

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शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

स्वर्गीय देबानंद झा के फोटो के अनावरण


मिथिला सेवा समितिक संस्थापक सदस्य स्वर्गीय देबानंद झा के फोटो के अनावरण विद्यापति भवन में , आ पत्थर के प्रतिमा डोल्फिन स्कूल में बैसेल गेल अछि, जाही में भवानीपुर कोलेज के उपप्राचार्य श्री शंकर झाजी बिशेष अतिथि रुपे छलाह, अहि में कविता पथ आ हुनकर जिव्निक चर्चा भेल । अहि में पूरा बेलूर आ बहार स सैकरो आदमी उपस्थित छलाह ।
प्रकाश झा (वेबमास्टर) कोलकाता ।

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आजुक खंडग्रास सूर्यग्रहण केर समय नोट करू

दिल्लीः11.53-3.11 बजे,
चेन्नैः11.25-3.15 बजे,
कोलकाताः12.07-3.29 बजे,
पटनाः12.05-3.25 बजे तक
अगरतलाः12.06-3.32 बजे
हैदराबादः1129-3.15बजे,
विशाखापत्तनमः 1144-3.22 बजे
भोपालः11.41-3.14 बजे,
भुवनेश्वरः 11.57-3.26 बजे,
कानपुरः 11.55-3.18 बजे
पुणेः11.18-3.06 बजे तक
बंगलौरः11.17-3.11 बजे,
लखनऊः 11.57-3.19
चंडीगढः11.58-3.08 बजे,
इम्फालः12.44-3.33 बजे,
अहमदाबादः 11.27-3.03
दिसपुरः12.21-3.32 बजे तक
ईटानगरः 12.26-3.33

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बुधवार, 13 जनवरी 2010

कनेक ठहरियो कए योजना बना सकैत छी हरिद्वार कुंभस्नान कें

14 जनवरी- मकर संक्रांति पर्व स्नान

15 जनवरी- मौनी अमावस्या सूर्य ग्रहण स्नान

20 जनवरी- बसन्त पंचमी पर्व स्नान

30 जनवरी- माघ पूर्णिमा पर्व स्नान

12 फरवरी- महाशिवरात्रि पर्व शाही स्नान

15 मार्च- सोमवती अमावस्या पर्व शाही स्नान

16 मार्च- नव संवत्सर आरंभ पर्व स्नान

24 मार्च- रामनवमी पर्व स्नान

30 मार्च- चैत्र पूर्णिमा पर्व स्नान

14 अप्रैल- मेष संक्रांति बैशाखी पर्व शाही स्नान

28 अप्रैल- बैशाखी पूर्णिमा पर्व अधिमास स्नान

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शनिवार, 9 जनवरी 2010

चलला गाम बजार- बुद्धिनाथ मिश्र

हम ओ कनहा कुकूर नहि
जे बाबू साहेबक फेकल
माँड़े पर तिरपित भ’ जाइ।
हमर आदर नहि करू
जुनि कहू पण्डित, जुनि कहू बाभन
हम सरकारक घूर पर
कुण्डली मारिकें बैसल
ओ कुकूर छी
जकरा महर्षि पाणिनी
युवा आ इन्द्रक पाँतिमे
सूत्राबद्ध केने छथि।

हमर परदादा जहिया
बाध-बोनमे रहै छलाह तहिया बाघ जकाँ
तैनि क’ चलै छलाह।
तहिया गाम छलै दलिद्दरे
मुदा छलै सारिल सीसो।
तहिया गामक माइ-धीकें
दोसरा आँगन जा क’ आगि मँगबामे
नहि छलै कोनो अशौकर्य।
तहिया परिवारसँ टोल, टोलसँ गाम
गामसँ जनपद, जनपदसँ राष्ट्र
आ राष्ट्र सँ विश्व--परिवार बनैत छलै।
बूढ़-बुढ़ानुस कहै छलाह--
यत्रा विश्वं भवत्येकनीडम्!
छाड़ू पुरना बातकें, बिसरि जाउ
ओ परतन्त्रा देसक कुदिन-सुदिन
बिसरि जाउ ओ अराँचीक खोइयामे
सैंतल परबल देल जनौ।
आब अहाँ छी परम स्वतन्त्रा
वैश्वीकरणक सुनामी
अहाँक चैरा पर साटि रहल अछि
विश्वग्रामक चुम्बकधर्मी विज्ञापन।
एकटा जानल-सुनल अदृश्य हाथ
चटियासँ भरल किलासमे
घुमा रहल छै, ग्लोबकें।
दुनू पैर धेनें टेबुल पर
ग्लोब पर बैसल छै कुण्डली मारि क’
पुरना क्लबक साहेब सभ
आ सहेब्बाक आगाँ बैसल छै
झुण्डक झुण्ड नँगरकट्टा कुकूर।
बदलि दियौ
नवका ‘हिज मास्टर्स वाॅयस’क प्रतीक-चिद्द
कुकूरकें एकवचनसँ बहुवचन बना दियौ।

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लन्दन वाली कनियाँ - जगदम्बा ठाकुर

( हम थोर बहुत जे शिक्षा के अध्यन केलो से गाम से केलो , शिक्षा कोनो खास नही अछि जतेक अछि ओतबे में समांबेस अछि परिवार ,समाज ,गाम - घर में ऐगो अलगे पहचान होयत अछि , जकरा हर मनुष्य अपन संस्कृति के तोर पर अध्यन आ पालन करैत अछि, चाहे मुर्ख होय या अमूल्य शिक्षा धरी ज्ञानी , देशी होय या कुनू विदेशी सब के लेल अपन-अपन संस्कृति के पहचान होयत अछि , जकर उदाहरण हम अपनेक सबहक सामने उपस्थित करैत छी , )


लन्दन वाली कनियाँ
(अनुराधा अपन बाबु जी से उदास स्वर में , ---)
बाबु जी भैया के गाम से लन्दन गेना तक़रीबन चारिम साल छी ,मुद्दा एखन तक कुनू खोज -खबैर नही अछि , सब साल भरदुतिया आ रक्षा बंधन के दिन उदास बैस परैत छी , मुद्दा भया के कुन्नु चिन्ते नही ?
बाबु जी अनुराधा से -
बुच्ची एतेक उदास जुनी होऊ एक न एक दिन अहांक भैया जरुर ओता , लन्दन अहिठंन से सात समुन्दर पर स्थित अछि , वक्त त लगवे करैत अछि आखिर कत जायत ओ हमर बंस के मान मर्यादा रखबे करत --
(बच्चा काका बाबु जी से बात करैत बजला - )
भैया , कोइलख गाम से अपन बड़का बउवा पर घटक बनी आयल छल ओ सब हमरा से बहुत निक जेका बात केलनी बुझाना गेल जे घटक सब निक आचार बिचार बाला सब छैथि , आ कनियाँ सेहो आर के कालेज से बी ए केने छैन , यदि अहांक आदेस होय त हुनका सब के अपन दलान दरबज्जा पर बजाबी ?
(बाबु जी काका से धर्य पूर्वक बात करैत -- )
सुनू बचे लाल , बोउवा हमरा जायत जायत बस ईहा कहैत गेल जे बाबु जी हमरा लन्दन में दू साल के कोर्श अछि ओकर बाद अहाँ जे कहब से हम करैक लेल तैयार भ जायब , वियाह आ शादी त आई-कैल के युग में आम बात अछि ,

समय बितल गेल घटक पर घटक अबैत छल मुद्दा बड़का बोउवा के लेल धन्य सन, कुनू हाहेबरबादे नही गाम-घर के कुनू चिंता नही

एक दिन के बात अछि बाबु जी दरिभंगा कुन्नु खास काज के प्रयोजन से गेल छलैथि त ओतहि बाबु जी के स्कुलिया संगी साथी से मुलाकात भेलानी , बहुत देर के बाद बड़का बोउवा के विवाह दान के सेहो चर्चा चलल , सब आदमी बाबु जी से कही सुनी के जबरदस्ती गाछ लेलकैन, मज़बूरी बस बड़का बोउवा के विवाह बाबु जी से ठीक करा लेलकैन अंत में बाबु जी के हाँ कहै परलैन
गाम में सब कियो वियाहक तयारी में लगी गेल छल , कन्या गत के त और बेशी चिंता रहित छैक जे कतेक बर्याती आयात कतेको सर कुटुम सब राहत आ सर समाज सेहो सब राहत , ओही हिसाब से वियाहक तयारी करैत छलैथि , मुद्दा बड़का बोउवा के कुन्नु अता-पत्ता नही , कतय छैथि आ की करैत छैथि ?
कन्या गत के तरफ से बेर बेर ई समाद आबैत छलैन जे अहाँ के लड़का कहिया धरी गम आबैत छैथि , जतेक जल्दी होय ओतेक जल्दी वियाह कन्या दान भ जय त ठीक होयत छैक
बाबु जी के पास नै कुन्नु फोन नंबर आ ने कुन्नु अता पत्ता जे बड़का बउवा के खबैर करता गाम में बाबु जी के सब कियो ताना मारैत छलैन जे फला के बेटा एहन छैन , त फला झा के इज्जत नहीं छैन , बेटा के वियाह्य ठीक क लेलैथि आ बेटा के आते - पते नहीं छैन , बाबु जी शर्म से मरेय मान सन लागैत छलथि बस आशा ईहा छलैन जे कियो किमरोह से आवी के ई कहैं जे बड़का बोउवा आबी गेल बियाहक तयारी करू
दिन ,सप्ताह , महिना सब बितल जायत छल , मुद्दा भैया के कोनो खोज खबैर नै , कएक महिना बीत गेल कन्यागत सब अपन ई कथा के वापस क लेलकैन , ई कहिके जे हम अपन बेटी के वियाह अहि घर में नहीं करब , जकरा अपन परिवार ,समाज में मान मर्यादा के अपन संस्कृति के कुन्नु इज्जत नही छैन , हम दोसर थम कन्या दान क लेब , हमर बेटी सी- एम् सैंस कालेज से डिगरी केने अछि , ओकरा लेल अनेको आइ एस ऑफिसर भेटतैक

एहन - एहन बात सुईनी - सुईनी के बाबु जी के की हालत होयत छैन से त हमही सब जानैत छि , आखिर भैया किया नै गेलखिन जे गाम - घर के इज्जत ककरा कहैत अछि
दुखक पहर सन लागैत छल , दिन कटानायं सपना सन लागैत छल , प्रेम से बोल बचन सुनैक लेल कान समायक आश लागोने छल , जे दिन कहिया घुरत , देखलो कईक दिन के बाद हमरा दलान पर डाक पिन आयल छैथ बाबु जी हमरा झट सन अबाज देलैथि - आ कहलैथि जे देखियो ककर ई टेल्ली ग्राम आयल अछि , हम झट सन डाक बाबु से टेल्ली ग्राम लके देखय लगलो देखलो जे ई टेल्ली ग्राम बाबु जी के नाम से लन्दन से आयल अछि हमरा अपना आप क ख़ुशी के भंडार भेट गेल , ख़ुशी के अंत नहीं छल , जे हम अपन मुँह से केना क कोन रुपे शब्द निकालब ? एक तरफ से भैया के टेल्ली ग्राम के ख़ुशी आ दोसर भैया से जुरल भात्र प्रेम के याद के आंखी से नोर पोछैत कनिते हम बाबु जी से कहलियनि जे , भैया के ई टेल्ली ग्राम आयल अछि , बाबु जी के ई बात सुनी के , आँखी के सामने ख़ुशी क बदल छा गेलानी , जे ओ कुन रुपे कोनाक के अपन मुँह से शब्द के बरशात करता जे हमर बड़का बोउवा के टेल्ली ग्राम आयल अछि टोल मोहल्ला सारा गाम सोर भ गेल जे बड़का बोउवा के टेल्ली ग्राम आयल अछि सब कियो सुनी के बहुत खुश्ही भेला , जे आब बड़का बोउवा जरुर अपन गाम आयत
( बाबु जी अनुराधा से --)
बुच्ची ई टेल्ली ग्राम पढ़ी के सुनाऊ जे बड़का बोउवा कहिया धरी गाम आबैत अछि ? ---
अनुराधा - अछ बाबु जी ठीक अछि सुनबैत छी ---

आदरनिय माय - बाबु जी एवं काका- काकी ---
चरण स्पर्श ----
और छोट बुवा - बुच्ची सब के प्यार आ स्नेह संग शुभ आशीर्वाद -----
हम अहिठं अपनेक सबहक आशीर्वाद से कुसल मंगल सं छी ,
आ माँ भगवती सं सदा कामना करैत छी , जे अहुँ सब कुसल
मंगल सं होयब ----
आगा बात समाचार सब ठिक अछि , हमर चिन्ता नहीं करब हम अगिला महिना धरी अपन परिवारक संग फलाईट से पटना आयब आ पटना से गाम आयब , वाकी बात समाचार गाम एला के बाद करब ----

( अहाँ के बड़का बउवा )


ई बात सुनी के जे हम अपन परिवारक संग अगिला महिना धरी गाम आबैत छी , सब कियो पहिने से जायदा मरेय मान सन भगेला , ई सोईची के जे बेटा हमर नालायक भगेल , अपन मान मर्यादा ,अपन संस्कृति के विसैरी गेल , विदेश में जाके बियाह केलक शर्म से हमर नक् कटी गेल , सपनो में नही ई शोच्लो जे बड़का बोउवा ई एहन काज करत , बियाहो केलक त सतसमुन्दर पर जाके जाकरा अपन संस्कृति नही, संस्कृति ककरा कहैत अछि से ज्ञान नही , बोली बच्चन के ताल - मेल नहीं , जाकरा सीता और सावित्री जेका मान मर्यादा नहीं , उटैय - बसैय के तौर तरीका नहीं , ससुर- भैशुर के मान सम्मान नै , पहिरे - सोहारिय के ढंग नहीं , ओ की अपन मथिली संस्कृति के रक्षा करत , ई बात सब कियो सोची -सोची के अपन जिनगी के आखिरी साँस लैत छल

समाय बितल जायत छल , की एक दिन अचानक बड़का बोउवा के फोन आयल की हम सब दरिभंगा तक आबिगेल छी, कुछीक घंटा में अपन गाम आबी जायब ---

गामक लोक सब कियो तैयार भगेल छल , ई देखैक लेले जे बड़का बोउवा लन्दन से कनियाँ आनैत छैथि , ओकर केहन रंग , केहन रूप , केहन अंग्रेजी बोल बच्चन आ केहन पहिरे सोहरै के संस्कार हतय ? से देखै लेलेल सब कियो दालान के आगू में ठाड़ छल मुद्दा माय - बाबु , काका - काकी सब कियो नही सामने एलखिन देखैक लेलेल , कियाकि हुनका से पहिने हजारो लोग दालान के सामने ठाड़ छल , बड़का बोउवा के शर्म से निचा करैक लेल जे ई अहां की काज केलो समाज के नाम रोशन करैक बदला में बिदेशी क बियाह क अनलो ?
देखलो एतबा काल में एगो टेम्पू में से दू सालक एगो छोट बच्चा आ एगो दुराग्मानिया साड़ी सन पहिरने , हाथ में भरल हाथ लहठी चुरी , मांग में भरल सिनुर , आ माथ पर साडी लेने टेम्पू से बहार एली , देखि के सब कियो अकबक सन भगेला जे ई के आबिगेली , तबे में पछा से बड़का बोउवा सेहो एलैथ , सब के बेरा- बेरी से पैर छू के गोर लगल खिन आ एतेक भीड़ देखि के बड़का बोउवा झट सन बजला जे गाम में कुनह मेला लागल अछि की जे पूरा परपटा के लोक सब अहिठन ठाड़ छी ? तबे में किमरोह से एगो छोट का बच्चा बजल जे सब कियो अहिके कन्या के देखाई क लेल आयल अछि ---
( ई बात सुनी के लन्दन वाली कनिया अचम्भा में पारी गेली जे आब हम ककरा सब के की कहबै -- )
लन्दन वाली वाली कनिया बहुत बिलम्ब के बाद सोइच बिचारी के अपन मुहँ से आबाज निकैलते बजली -----
हमहूँ एगो आदर्श नारी छी , सीता यदि बड़ सुन्दर आ पतिवर्ता छली तयो हुनका अग्नि परीक्षा देबई परल छलैन, यदि हुनकर रहन - सहन आ बैवहार निक छलैन त हमहूँ ओही सं कम नै छी अहाँ सब अपन- अपन संस्कृति के बचाबई में जनम गुजारी देत छी , अपन मात्री भाषा शिखई में जनम से अनेको बरस लगाबैत छी , लेकिन हम अहाँ के मात्री भाषा आ संस्कृति सिखाई में केवल मात्र चरिय साल गमेलो
और एतबा नही अहांक संस्कृति के सात समुन्दर पार रहितो हम मान - सम्मान देलो हम लन्दन पोस्ट ग्रेजवट जरुर छी , मुद्दा अहाँ सबहक संस्कृति / कल्चर के सामने हम आई नस्त मस्तक छी , ओही कारने से हम आई अपनेक सबहक सामने सीता और साबित्री सन बनय चाहैत छी लक्ष्मी आ सरस्वती ओताही निवास करैत छैथि जतय नारी के मान - सम्मान आदर के साथ भेटैत अछि , ओ अछि अहाँ के मिथिला एतय हम बैदेही रूप में अपना - आप के देख चाहैत छी , जे हमहूँ एगो मिथिला के नारी छी ----
ई दिर्श्य देखि आ सुनी के , माय - बाबु ,काका -काकी सब कियो घर से बहार एला आ सब कियो बेरा - बेरी से लन्दन वाली कनिया के सामने हाथ जोरी का , आदर पुर्बक मिथिला के नारी जेका हुनको बिध क अनुसारे दुरागमन जेका लन्दन वाली कनिया के अपन घर के पुतोहू बनोलथी

( समाप्त )
www.apangaam.blogspot.com
लेखक -
जगदम्बा ठाकुर
पट्टीटोल, कोठिया ,
भैरव स्थान , झांझरपुर
मधुबनी , बिहार -८४७४०४
मोबाईल - 09312460150
ई मेल - madanjagdamba@yahoo.com
madanjagdamba@rediffmail.com

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सावनक बदरी

सुन्दर नशिमा चैल रहल अछि
जकर स्पर्श सं मोन झूम उठैय
न स नशा जाहीम
अहांक कोमल बदनक याद आवी रहल अछि
शि स शितलता
अहांक कजरैल आखिं जाहीम शांति और सनेह अछि
सावनक इ बदरी म दूर रहैत की वर्णन करू
आवै जखन साथ लक बारिश
ओई समयक की वर्णन करू
दफ्तर म बैसल गिन रहल छि रुपैया चारिआना
अनुभव होइत अछि यैह छि अहाँ मोतीक दाना
खन - खन बाजैत आवाज सुनलौ
अनुभव भेल बाज़ी रहल अछि अहाँक कंगना
यई रानी लिखू चिट्ठी
सावनक संग कहिया बजा रहल छि अपना अंगना !!

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लोकसभासँ शोकसभा धरि- बुद्धिनाथ मिश्र

महगू बाजल--
कते महगी आबि गेल छै!
दालि-चाउरमे तँ
आगि लागिए गेल छै।
कथीसँ डिबिया लेसी
मटियाक तेलो
उड़नखटोला भ’ गेल।
मुदा मन्त्राीजी नहि मानलनि।
लुंगी उठा-उठा क’ देखबै छथि--
एहि विकासशील अर्थव्यवस्थामे
कते सस्त भ’ गेल छै
लोकक जान-परान
महानुभावक चरित्रा
बेनंगन मौगीक शील।
कतेक सस्त भ’ गेल छै
पंडिज्जीक पोथी-पतरा
गोसाउनिक गीत
चिनबारक माटि
आ टीवी चैनलक मौसगर मनोरंजन।
मन्त्राीजी नहि देखा रहल छथि
ओ सुरंग जे लोकसभासँ शोकसभा धरि जाइ छै।
ओ नहि देखा रहल छथि
नीलामी घर
जाहिमे मैनोक पात बिकाइ छै
करोड़क करोड़मे!
ओ नहि देखा रहल छथि
बघनखा पहिरने हाथ
जे महानसँ महान योजनाक
मूड़ी पकड़ि क’ सौंसे चिबा जाइ छै।
कुसियारक रस बटैछ सदनमे
आ सिट्ठी फेकाइछ
गामक माल-जालक आगाँ।
लोक माल जकाँ
मरि रहल अछि
कि माल-जाल लोक जकाँ--
से कहब कठिन।

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शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

मिथिला दर्शन पत्रकारिता पुरस्कार

मैथिली पत्रकारिताक विकास कें ध्यान मे राखि तथा युवा पत्रकार कें प्रोत्साहित करबाक उद्दश्यें वर्ष २०१० सं ५०००/- टाका राशिक मिथिला दर्शन पत्रकारिता पुरस्कार आरभ कयल गेल अछि.


समकालीन समस्या सम्पर्कित साहित्येतर आलेख जे मिथिला दर्शन मे प्रकाशित होयत तकरे आधार पर ई पुरस्कार देल जायत. साल भरिक विभिन्न अंक मे प्रकाशित आलेख मे जे सर्वोत्तम होयत तेकर लेखक कें पुरस्कृत कायल जायत. एहि सन्दर्भ मे सम्पादक मंडलक निर्णय अंतिम होयत.


प्रथम मिथिला दर्शन पत्रकारिता पुरस्कार स्वस्ति foundation प्रदत प्रबोध साहित्य सम्मानक संगहि फरवरी २०११ मे प्रदान कयल जायत.


समसामयिक विषयक रचनाकार लोकनि सं आग्रह अछि जे ओ अपन २००० शब्द तक सीमित आलेख मिथिला दर्शनक कार्यकारी सम्पादक, श्री रामलोचन ठाकुर, क पता: 2 - M , चिराग अपार्टमेन्ट, 4 इतालिगाछा रोड, कोलकाता - ७०००२८ पर पठाबथि.


एहि विषय पर सार्वजानिक सूचना मिथिला दर्शनक नवीन अंक (वर्ष ५७; अंक ५; जनवरी - फरवरी २०१०; मकर संक्रांति संवत २०६६) क पृष्ठ ३४ पर देल गेल अछि.


प्रणव कुमार सिंह
मुख्य प्रबंधक
--
Mithila Darshan
-Maithili k pratham sampoorna paarivaarik patrika-
A - 132, Lake Gardens,
Kolkata - 700 045

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सोमवार, 4 जनवरी 2010

मिथिला दर्शनःजनवरी-फरवरी,2010 अंक

मिथिला दर्शन पत्रिकाक जनवरी-फरवरी,2010 अंक बजार में आबि गेल छैक। एहि अंक में प्रकाशित रचना सभ पर एक संक्षिप्त दृष्टिः-
1. संपादकीय- ज्ञान-विज्ञानक दौड़ में छुटैत मानव,मानविकी
2. आखर लेख- श्री रामलोचन ठाकुर
3. मिथिलाःहमर दुखक नहिं ओर-पंचानन मिश्र
4. ढहैत धरोहर,ढहरैत भाषा-उदय नारायण सिंह नचिकेता
5. मिथिलाक संस्कृतिक खोज-गोविन्द झा
6. 2010 केर प्रबोध साहित्य सम्मान विजेता जीवकांत जी कें जीवन-वृत्त
7. एकटा बड्ड पुरान गप्प(लिली रे केर उपन्यासक पहिल भाग)
8. पुनरावृत्ति(कथा)-पन्ना झा
9. जामे कुटुम समाय(कथा)-सुभाष चंद्र यादव
10. रघुनाथ मुखिया,लक्ष्मण झा सागर,रानी झा,शारदानन्द दास परिमल आ अरविन्द ठाकुर के कविता
११.
12. बिहार पब्लिक सर्भिस कमीशन में मैथिली-प्रेमशंकर सिंह
13. पद्मभूषण बिंदेश्वर पाठक-कुमारेश कश्यप
14. घरेलू हिंसा-ममता झा
15. रूप चर्चा
16. भनसा भात पर श्रीमती विजया मिश्र केर आलेख
17. माछक महिमा-डॉ. एस.सी.प्रसाद
18. गोनू झा के दू गोट खिस्सा
19. वर्ग-पहेली
20. बुझौअलि
21. श्रीकांत मंडलःरंगमंचक एकटा ज्योति-स्तंभः रामलोचन ठाकुर
22. ओह! श्रीकान्त जी!- कुणाल
23. नचिकेता कें कीर्ति नारायण मिश्र साहित्य सम्मान,2009 भेटबा पर रिपोर्ट
24.विद्यापति स्मृति-पर्व-कुमार गगन
25. मैथिल आ मिथिला संबंधी किछु संक्षिप्त समाचार
http://www.maithilionline.blogspot.com/

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ऋतुपति बसंत (Ritupati Basant)

स्वागत अछि हे ऋतुपति बसंत
वर्णनीय छी अहाँ अनंत
स्वागत अछि हे ऋतुपति बसंत

नवपल्लवक संग सुशोभित
मज्जर देखि होइत मनमोहित
बाट बटोही सहजहि आकर्षित
गाबथि वर्णन ऋषि-मुनि-संत
स्वागत अछि हे ऋतुपति बसंत

वीणा वादिनी देलन्हि प्रवेश
वरमुद्रा में हरलन्हि क्लेश
ऋतुराजक छन्हि गुण विशेष
गुण वखानक कोनो ने अन्त
स्वागत अछि हे ऋतुपति बसंत

मधुर सुगंध पसारैत महुआ
टिप-टिप झहरैत आमक मधुआ
गँहुमक खेतक हरियर बथुआ
तीसी सरिसव बनल महंथ
स्वागत अछि हे ऋतुपति बसंत

रंग अबीरक संग में होली
बूढ सियानक अलगहि टोली
नेना भुटकाक टुनटुन बोली
माटि लेटायल छोटका जन्त
स्वागत अछि हे ऋतुपति बसन्त

कुहू-कुहू कोइली गीत सुनाबय
मोर आ मोरनी पंख पसारय
बोल पपिहराक बड़ मन भावय
विहुँसैत "मनीष" निपोरैत दन्त
स्वागत अछि हे ऋतुपति बसन्त


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शनिवार, 2 जनवरी 2010

नताशा 37 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक लेल नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ आनन्द उठाऊ।)



http://www.devanshuvatsa.com

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शुक्रवार, 1 जनवरी 2010

प्रबोध सम्मान २०१० जीवकान्तकेँ भेटलन्हि

प्रबोध सम्मान २०१० जीवकान्तकेँ भेटलन्हि।

एहि बेरुका पुरस्कार चयन प्रक्रियामे २१ गोटेक शुरुआती दौड़मे छलाह। पहिल बेरमे ७ गोटे बहार भेलाह (लेबल १), दोसर बेर आठ गोटे बहार भेलाह (लेबल २), तेसर दौड़मे मात्र छह गोटे बचलाह (लेबल ३)। ओहि छह गोटेक क्रम एहि प्रकारसँ रहल:-
जीवकान्त: ४८ अंक
सोमदेव: २२ अंक
भीमनाथ झा: १७ अंक
रमानन्द रेणु: १७ अंक
चन्द्रभानु सिंह: १२ अंक
चन्द्रनाथ मिश्र अमर: १२ अंक

जज एहि प्रकारेँ रहथि:
एल-१- १०/१०
एल.२- ९/१०
एल.३- १०/१०

सभ मिला कऽ २९/३० जज जाहिमे २६ गोट जज रिपीट नहि छलाह, माने २६ विभिन्न गोटे जज छलाह।

सभटा वोट एहि तरहेँ रहल:

३०*३=९० आ ३०*२=६० आ ३०*१=३०
= १८०

वोट छह टा कम माने १७४ टा देल गेल, जाहिमे छह गोटे जे ऊपरमे रहलथि हुनका एहि मे सँ १३१ टा वोट भेटलन्हि।
जीवकान्तकेँ १७४ मे ४८ वोट भेटलन्हि-२७.५९% ( संगहि १३१ मे सँ ४८ भेल- ३६.६४%)

अंतिम लेबलमे दसमे सँ आठटा जज हुनका पहिल वोट देलन्हि।

जीवकान्तजीकेँ बधाई।


जीवकान्त- (१९३६- )
पूर्ण नाम- जीवकान्त झा
पिता-गुणानन्द झा, माता-महेश्वरी देवी, जन्म तिथि-२५.०७.१९३६ स्थान अभुआढ़, जिला-सुपौल
शिक्षा-मैट्रिक (१९५५ उ.वि.डेवढ़), आइ.एस.सी. (१९५७ आर.के.कॉलेज, मधुबनी), बी.ए. (१९६४ बिहार वि.वि.स्वतंत्र छात्र), डिप.इन.एड.(१९६९ मिथिला वि.वि.)
नौकरी-उच्च विद्यालयमे सहायक शिक्षक। विज्ञान शिक्षक (उ.वि.खजौली १९५७-८१), हिन्दी शिक्षक (उ.वि.डेओढ़ एवं उ.वि.पोखराम १९८१-९८)
पहिल रचना-इजोड़िया आ टिटही (कविता, जनवरी १९६५ मिथिला मिहिर)
पहिल छपल पोथी- दू कुहेसक बाट (उपन्यास १९६८)
नवीनतम पोथी-खिखिरक बीअरि (२००७ बाल पद्य कथा), अठन्नी खसलइ वनमे (पद्य-कथा संग्रह) आ पंजरि प्रेम प्रकासिया (जीवन-वृत्तक अंश) प्रेसमे
पुरस्कार-साहित्य अकादेमी (दिल्ली १९९८), किरण सम्मान (१९९८), वैदेही सम्मान (१९८५)
प्रकाशित पोथी-
कविता संग्रह:
नाचू हे पृथ्वी (७१), धार नहि होइछ मुक्त (९१), तकैत अछि चिड़ै (९५), खाँड़ो (१९९६), पानिमे जोगने अछि बस्ती (९८), फुनगी नीलाकाशमे (२०००), गाछ झूल-झूल (२००४), छाह सोहाओन (२००६), खिखिरिक बीअरि (२००७)
कथा-संग्रह:
एकसरि ठाढ़ि कदम तर रे (७२), सूर्य गलि रहल अछि (७५), वस्तु (८३), करमी झील (९८)
उपन्यास:
दू कुहेसक बाट(६८), पनिपत(७७), नहि, कतहु नहि (७६), पीयर गुलाब छल (७१), अगिनबान (८१)
हिन्दी अनुवाद- निशान्त की चिड़िया (हिन्दी अनुवाद-तकैत अछि चिड़ै, साहित्य अकादमी, दिल्ली २००३)

प्रबोध सम्मान

प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- )
प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- )
प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- )
प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- )
प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- )
प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- )
प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- )


साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली

१९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन)
१९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य)
१९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास)
१९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य)
१९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य)
१९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास)
१९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण)
१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य)
१९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना)
१९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य)
१९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य)
१९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास)
१९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य)
१९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास)
१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास)
१९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य)
१९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा)
१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)
१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा)
१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)
१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)
१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा)
१९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)
१९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध)
१९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)
१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)
१९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य)
१९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू)
१९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य)
१९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य)
१९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा)
२०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)
२००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)
२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य)
२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)
२००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)
२००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)
२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)
२००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा
२००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा)
२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)

साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार

१९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)
१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी)
१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू)
१९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)
१९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू)
१९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़)
१९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला)
१९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला)
२०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)
२००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)
२००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू)
२००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया)
२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी)
२००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)
२००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)
२००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)
२००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)




यात्री-चेतना पुरस्कार


२००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;
२००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;
२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;
२००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा;
२००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;
२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;
२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;
२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;
२००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी
२००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा


कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान


२००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झाकेँ कविता संग्रह “एना त नहि जे”
२००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता”केँ नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश

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मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
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चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

बिदेसिया (संकल्पित नाटिका)

विद्यापतिक बिदेसिया (संकल्पित नाटिका).... भोजपुरीक साहित्य मैथिलीसँ कम समृद्ध अछि मुदा से अछि मात्र परिमाणमे, गुणवत्ताक दृष्टिमे ई कतेक क्षेत्रमे आगाँ अछि। भोजपुरीक भिखाड़ी ठाकुरक बिदेसियाक सन्दर्भमे हम ई कहि रहल छी। भिखाड़ी ठाकुर कलकत्तामे प्रवासी... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

कथा- माउगि

कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

मातृत्व...

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व.... नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि.... (आगाँ पढू)
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