सोमवार, 22 फरवरी 2010

लघु राज्यक सार्थकता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

राष्ट्रीय संगोष्ठी
दिनांक १४.०२.२०१० केँ प्रयागमे लघु राज्यक सार्थकता पर राष्ट्रीय संगोष्ठी सम्पन्न भेल।
संगोष्ठीक आयोजन श्री विधुकान्त मिश्र, मैथिली अकादमी आ मिथिला सांस्कृतिक संगमक सहयोगसँ भेल। मुख्य वक्ता रहथि- राँचीसँ डॉ. धनाकर ठाकुर, अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली परिषद। भाषिक, भौगोलिक एवं सामाजिक आधारपर लघु राज्य विशेष कऽ मिथिलांचलक गठन पर जोर देलखिन्ह। संगोष्ठीमे ई. प्रदीप झा, कर्नल देवकान्त झा, डॉ. ए.के. झा, श्री अखिलेश झा, श्री सुधीर मिश्र, संजीव झा आदि गोटे सभ अपन विचार प्रकट कयलन्हि। समारोहक अध्यक्षता कर्नल डी.के. झा कएलन्हि।

 



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सब सँ सुन्‍दर अछि जगत में हमर मिथिलाधाम: प्रवीण झा

नभमंडल के असंख्य ताराक मध्य चमकैत चान समान,
सब सॅ सुन्दर अछि जगत में हमर मिथिलाधाम ।

जकरा उत्‍तर गिरिराज हिमालय छथि स्वयं विराजै
कमला-कोशीक निर्मल धारा जकर चरण पखारै ।
जत$ भेटए मुख पानक लाली संग मधुर मुस्कान
सब सॅ सुन्दर अछि जगत में हमर मिथिलाधाम ।

छप्पन व्‍यंजन मध्य जतए सर्वोपरि अछि तिलकोर
स्वर्गो में नहि भेटए अपन मिथिलाक “माछक झोर” ।
स्वागत में प्रस्तुत होइछ जतए जोड़ा खिल्ली पान
सब सॅ सुन्दर अछि जगत में हमर मिथिलाधाम ।

सरस भूमि आ लोक सरस, भोजन दही-चूड़ा
इ भोजन नै भेटए स्वर्गो में, नै भेटए माछक मूड़ा ।
जतए अछि वाचस्पति, विद्यापति आ विदेह केर गाम,
सब सॅ सुन्दर अछि जगत में हमर मिथिलाधाम ।

भाषा मधुर, भोजन मधुर, मधुर अछि विधि-व्यवहार
चौठचन्‍द्र, मधुश्रावणी, कोजागरा सन अछि पाबनि-तिहार ।
डेग-डेग पर पोखरि भेटए, भेटए माछ-मखान
सब सॅ सुन्दर अछि जगत में हमर मिथिलाधाम ।

जखन कोजागरा में अबैत अछि पान-मखानक भार
पूर्ण इजोरिया में पुरैछ लोक सौसे गाम हकार ।
इ संसार जनैत अछि हमरा, हम छी कौटिल्यक संतान
सब सॅ सुन्दर अछि जगत में हमर मिथिलाधाम ।

विद्वानक इ धरती से के नै बुझैत अछि
प्रतिभाक कमी नै से दुनियॉं जनैत अछि ।
मंडनक विद्वता सुनि एला “शंकर” सन विप्र सुजान
सब सॅ सुन्दर अछि जगत में हमर मिथिलाधाम ।

सीता, अहिल्या बहिन छथि हम्मर
पतंजलि जनमला एही धरती पर ।
सौन्दर्य, सौम्‍यता देखि जतुका लोभेला स्वयं श्रीराम
सब सॅ सुन्दर अछि जगत में हमर मिथिलाधाम ।

मॉ मिथिला के कोरा में सरिपहुँ हम अतिशय सुख पाबी
मॉं मिथिला के चरण वंदना हम अहर्निश गाबी ।
पुनि-पुनि जनमी एही धरती पर, इएह विनती हे घनश्‍याम
सब सॅ सुन्दर अछि जगत में हमर मिथिलाधाम ।

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शनिवार, 20 फरवरी 2010

कैथी सीखू भाग-१ (नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ देखू।)

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नताशा 41 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक लेल नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ आनन्द उठाऊ।)

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बुधवार, 17 फरवरी 2010

रंग रंगीली मैथिल होली ....अमेरिका मे!!!!

ग्यारह बरख पहिने हम सब अप्पन देश छोइड अमेरिका ऐलों खान - पान , रहन - सहन , भाशा , कपडा स ....तीज त्यौहार सब कीछ बीदेशी जकां लागे । हमरा मोंन ऐछ हमर पहिल होली अमेरिका के .....जे कनैत बीतल छल , कियो छुट्टी नै लेइत छल .... होली में , कियो नब कपडा नै किनत ....कियो मालपुआ नै बनावतआ , कियो रंग नै लागैत , त केहन होली ...हम सब मनैब ???

ओही दिन स सोच्लौं की होल़ी जरूर मानायेब ....मालपुआ..... जरूर खायब .....आ रंग जरूर लगाएब .... एतेक नीक स होली मनायेब की , हम मिथिला वासी सब मिसाल बैन जैब कोनो प्रवासी लेल !!!!

पहिल बरख हम सभ परिवार मिल क होली मनेलौं ......सभ साल नब नाम होइत ऐछ होली के ....नब मेनू , नब कपडा .....आ नब मैथिल परिवार ।
एही बेर १० बरख भा रहल ऐछ ,आ एही होली के नाम ऐछ ......
रंग रंगीली मैथिल होली ......
अहाँ सभके अपडेट करैत रहब ....अप्पन रंगारंग कार्यक्रम के ,


३५ मैथिल परिवार , ८ राज्य सा मिश्र मिश्रछैथ । गान , बजान , खान पान के संगे मैथिल मिलन , ड्रेस प्रतियोगिता , छोट पैघ बच्चा सभक उत्सुकता और हमर सबहक संस्कृति और व्यवहारक जानकारी ....इ उद्देश्य रहैत ऐछ ,

रंग रंगीली मैथिल होली के ......
अहाँ सभ के होली के शुभकामना आ बहुत बहुत बधाई ......अमेरिका के रंग रंगीली मैथिल होली के परिवार दिस ....स !!!!

विद्या मिश्र






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मंगलवार, 16 फरवरी 2010

भालचन्द्र झाकेँ २००९ साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार

भालचन्द्र झाजी केँ २००९ क साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार हुनकर मराठीसँ मैथिली अनुवाद बीछल बेरायल मराठी एकाँकी ( मराठी सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी) लेल देल गेल अछि। एहि पुरस्कारमे पचास हजार टाका आ ताम्रपत्र देल जाइत अछि।

भालचन्द्र झा, ए.टी.डी., बी.ए., (अर्थशास्त्र), मुम्बईसँ थिएटर कलामे डिप्लोमा। मैथिलीक अतिरिक्त हिन्दी, मराठी, अग्रेजी आ गुजरातीमे निष्णात। १९७४ ई.सँ मराठी आऽ हिन्दी थिएटरमे निदेशक। महाराष्ट्र राज्य उपाधि १९८६ आऽ १९९९ मे। थिएटर वर्कशॉप पर अतिथीय भाषण आ नामी संस्थानक नाटक प्रतियोगिताक हेतु न्यायाधीश। आइ.एन.टी. केर लेल नाटक “सीता” केर निर्देशन। “वासुदेव संगति” आइ.एन.टी.क लोक कलाक शोध आऽ प्रदर्शनसँ जुड़ल छथि आऽ नाट्यशालासँ जुड़ल छथि विकलांग बाल लेल थिएटरसँ। निम्न टी.वी. मीडियामे रचनात्मक निदेशक रूपेँ कार्य- आभलमया (मराठी दैनिक धारावाहिक ६० एपीसोड), आकाश (हिन्दी, जी.टी.वी.), जीवन संध्या (मराठी), सफलता (रजस्थानी), पोलिसनामा (महाराष्ट्र शासनक लेल), मुन्गी उदाली आकाशी (मराठी), जय गणेश (मराठी), कच्ची-सौन्धी (हिन्दी डी.डी.), यात्रा (मराठी), धनाजी नाना चौधरी (महाराष्ट्र शासनक लेल), श्री पी.के अना पाटिल (मराठी), स्वयम्बर (मराठी), फिर नहीं कभी नहीं( नशा-सुधारपर), आहट (एड्सपर), बैंगन राजा (बच्चाक लेल कठपुतली शो), मेरा देश महान (बच्चाक लेल कठपुतली शो), झूठा पालतू(बच्चाक लेल कठपुतली शो),टी.वी. नाटक- बन्दी (लेखक- राजीव जोशी), शतकवली (लेखक- स्व. उत्पल दत्त), चित्रकाठी (लेखक- स्व. मनोहर वाकोडे), हृदयची गोस्ता (लेखक- राजीव जोशी), हद्दापार (लेखक- एह.एम.मराठे), वालन (लेखक- अज्ञात)।लेखन-बीछल बेरायल मराठी एकांकी(अनुवाद), सिंहावलोकन (मराठी साहित्यक १५० वर्ष), आकाश (जी.टी.वी.क धारावाहिकक ३० एपीसोड), जीवन सन्ध्या( मराठी साप्ताहिक, डी.डी, मुम्बई), धनाजी नाना चौधरी (मराठी), स्वयम्बर (मराठी), फिर नहीं कभी नहीं( हिन्दी), आहट (हिन्दी), यात्रा ( मराठी सीरयल), मयूरपन्ख ( मराठी बाल-धारावाहिक), हेल्थकेअर इन २०० ए.डी.) (डी.डी.)। थिएटर वर्कशॉप- कला विभाग, महाराष्ट्र सरकार, अखिल भारतीय मराठी नाट्य परिषद, दक्षिण-मध्य क्षेत्र कला केन्द्र, नागपुर, स्व. गजानन जहागीरदारक प्राध्यापकत्वमे चन्द्राक फिल्मक लेल अभिनय स्कूल, उस्ताद अमजद अली खानक दू टा संगीत प्रदर्शन।श्री भालचन्द्र झा एखन फ़्री-लान्स लेखक-निदेशकक रूपमे कार्यरत छथि।



साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली

१९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन)
१९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य)
१९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास)
१९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य)
१९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य)
१९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास)
१९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण)
१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य)
१९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना)
१९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य)
१९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य)
१९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास)
१९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य)
१९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास)
१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास)
१९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य)
१९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा)
१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)
१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा)
१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)
१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)
१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा)
१९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)
१९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध)
१९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)
१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)
१९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य)
१९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू)
१९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य)
१९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य)
१९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा)
२०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)
२००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)
२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य)
२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)
२००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)
२००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)
२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)
२००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा
२००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा)
२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)

साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार

१९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)
१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी)
१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू)
१९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)
१९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू)
१९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़)
१९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला)
१९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला)
२०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)
२००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)
२००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू)
२००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया)
२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी)
२००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)
२००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)
२००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)
२००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)
२००९- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी-  सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)

प्रबोध सम्मान

प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- )
प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- )
प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- )
प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- )
प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- )
प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- )
प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- )


यात्री-चेतना पुरस्कार


२००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;
२००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;
२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;
२००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा;
२००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;
२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;
२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;
२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;
२००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी
२००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा


कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान


२००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झाकेँ कविता संग्रह “एना त नहि जे”
२००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता”केँ नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश

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रविवार, 14 फरवरी 2010

मिथिलांगन केर नव अंक बहराएल

दिल्ली सं प्रकाशित मैथिली त्रैमासिक मिथिलांगन केर नव अंक(अक्टूबर,2009-मार्च,2010) उपलब्ध भ गेल अछि। एहि अंकक सामग्री पर एक दृष्टिः

1. दिव्यताक बीज- अर्जुन नारायण चौधरी

2. चर-चित्त(हालक प्रमुख घटनाक्रम आधारित स्तंभ)- गोविन्द चंद्र दास

3. कोसी केर क्रोधक के दोसी(आवरण आलेख)-गोविंद चन्द्र दास

4. शिवताडव स्तोत्र केर मैथिली अनुवाद-उमाचरण कंठ

5. नेपाल अछि जे मैथिली कें बचेने अछि(आचार्य सोमदेव जीक संग वृहद् साक्षात्कार)

6. वृद्ध चिंतन(कविता)- सोमदेव

7. कथा में लीन(कथा)-मानेश्वर मनुज

8. नीन्द में भेल बियाह(घोघ तर सं स्तम्भ में रूपा साहा केर अनुभव)

9. सामिष-निरामिष सूप-सरिता दास

10. गोदना पेंटिंगःदलित आ महिला कल्याणक उदाहरण-रवीन्द्र कुमार दास

11.संवाद परिक्रमा-साहित्य-संस्कृति आधारित कार्यक्रम सभहक संक्षिप्त रिपोर्ट

12. काकी के उछन्नर(वास्तविक घटना आधारित आलेख)-अनिता दास

13. हंसी-ठट्ठाःसर्वनारायण दास

14. तुरंता(कविता)-रवीन्द्र सुमन

15. दू शिक्षाप्रद बाल-कहानी-शालिनी कर्ण

16. रूसी लोकनिक भारत प्रेम-इंदू दास

17. अवाम(गामक परिचय)-मुकेश दत्त

18. पानिक लेल मुंह बौने जमीन-उदय राज

19. अभिनंदन(श्री कौशल कुमार दास के मिथिला विभूति सम्मान आ डॉ. जनक किशोर लाल दासक पोथीक विमोचन संबंधी रिपोर्ट)

20. घर आ कि बंदूक(मुसहर जाति द्वारा बंदूक वरण करबाक खबरि पर विचार आमंत्रण)। पछिला अंकक विषय प्राथमिक शिक्षा व्यवस्थाक बचकानी जीर्णोद्धार पर प्राप्त विचार सेहो।

21. मिथिला दर्शन मैथिली बुझौअलि

22. दिल्ली में मणिपद्म स्मृति-पर्व-डॉ. जनक किशोर लाल दास

23.सामा चकेबा नाटक पर श्यामभद्र केर रिपोर्ट

24. राजधानी में मैथिली रंगमंच कें स्थापित करबाक स्वप्न साकार भ रहल अछि(संजय चौधरी सं श्यामभद्र केर साक्षात्कार)

25. चांदनी चौकक चासनी-रवीन्द्र लाल दास

(पत्रिका प्राप्ति लेल संपर्कः9868182535)

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शनिवार, 13 फरवरी 2010

'अहाँ मैथिली बजै छी की ?' -रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'

शीर्षक पढि कने उटपटांग लागल होयत। मोने सोचैत होयब जे लगभग पांच कोटि लोकक ठोर पर जाहि अमिट, अतिपावन भाषाक राज अछि, जे भाषा भारतक संगहि-संग नेपाल मे सेहो विशेष प्रतिष्ठित अछि, जे भाषा अपन विशाल आ अमूल्य साहित्यनिधिक बल पर भारतीय संविधानक आठम अनुसूची मे सन्हिया गेल, जे भाषा जनक सुता जानकीक कंठ-स्वर सं निकलैत छल, जाहि माटिक संस्कार सिया कें सुशीला बनौलक, ताहि भाषा पर कोन संकट आबि गेल? वा फेर सोचैत होयब जे हम बताह त' नहि भ' गेलहुं अछि? नाना प्रकारक सोच दिमागी समुद्र मे हिलकोर मारैत होयत। जं से सत्ते, त' अपन सोच कें कने स्थिर करी। असल मे ई प्रश्न आइ-काल्हि पद्मश्री उदित नारायण (झा) क' रहल छथि, सेहो पूरा तामझामक संग। मायक भाषा संग मोह जिनगी भरि बनल रहैत छैक। चाहे कतेको स्वार्थंधता वा दंभता केर गर्दा मोन-मस्तिष्क मे हो मुदा जखन भावना प्रबल प्रवाह होइत छैक त' लोक कें मोन पड़ैत छैक माय, मातृभाषा आ मातृभूमि। ओ प्रत्येक वस्तु जाहि मे मातृअंश हो, एक-एक के मोन पड़य लगैत छैक। मैथिली मे गायन शुरू कS आइ सफलताक उच्चतम शिखर पर पहुंचल उदित नारायण के कोनो एक भाषाक गायक नहि कहल जा सकैत अछि। भारतक अनेको भाषा मे ओ एक संग गबैत आबि रहल छथि। कोनो सफल व्यक्तिक संग विवाद ओहिना लागल रहैत छैक जेना नवकनियाक  संगे लोकनिया। उदित नारायण सेहो एकर अपवाद नहि छथि। खैर जे हो, ओ सच्चा मैथिल छथि आ मैथिलीक प्रेमी छथि। पद्मश्री हेतु चयनित होयबा काल हुनक नागरिकता हेतु विवाद उठल छल। कतेको लोकनिक कहब छलनि जे ओ नेपालक छथि। मुदा जे हो, ओ मैथिल छथि चाहे नेपालक मिथिलाक होथि वा भारतक मिथिलाक। ओना सभ विवाद कें एकात करैत भारत सरकार हुनका पद्मश्री सं सम्मानित कयलक। मिथिलाक लेल इहो गौरवक बात। आब अहाँ सोचैत होयब जे हम 'उदितायण' केर पाठ किएक क' रहल छी? असल मे, पुरहित कोनो आध्यात्मिक अनुष्ठान शुरू करयबा सं पहिने संकल्प करा लेत छैक, त' एखन धरि हम सैह क' रहल छलहुं। मुद्दाक बात आब।
पड़ोसियाक घर मे हुलकी देबाक बेमारी सं के ग्रसित नहि अछि? से भोजपुरी टीवी चैनेल मे हुलकी-बुलकी देइत रहैत छी। कतहु , कखनो मैथिली सुनबा-देखबा लेल भेटि गेल त' नयन तिरपित भ' गेल। से साल भरि सं बेसिए समय सं भोजपुरी टीवी चैनेल महुआ लोकक मनोरंजन क' रहल अछि। एही पर एकटा संगीत आधारित कार्यक्रम आबि रहल छल- सुर-संग्राम। लो कगीतक श्रोता लेल बहुत नीक कार्यक्रम छल ओ । एहि रियलिटी शो मे मैथिली भाषी प्रतिभागी सभ सेहो छलाह। जेना पूजा झा (दरभंगा), रिमझिम पाठक (धनबाद), आलोक कुमार (खगड़िया)। आलोक कुमार, मोहन राठौर (यूपी)क संगहि विजेता रहलाह। एहि शो मे तीन बेर उदित नारायण अतिथि जज बनि क' आयल छलाह। पहिल बेर जे जज बनि क' अयलाह त' प्रतियोगी प्रियंका सिंह (गोपालगंज) केर माय, जे ओहि दिन स्टूडियो मे उपस्थित रहथि, सं पूछि देलथिन जे मैथिली-उथली बजै छी की? असल मे हुनका ज्ञात नहि रहनि जे प्रियंका सिंह गोपालगंज सं छथि। उदित नारायण के प्रियंकाक मायक पहिरावा देखि मिथिलानी होयबाक भ्रम भेल रहनि।
दोसर बेर मे ओ प्रतियोगी रिमझिम पाठकक उपनाम 'पाठक' देखि पूछि देलथिन- अहाँ मैथिली बजै छी की? रिमझिम लजाइत बजलीह- हं, थोड-बहुत। तकर बाद उदित नारायण हुनक गायिकी पर मैथिली मे कमेन्ट देलनि। एहि बात सं ई सिद्ध भेल जे हुनका ह्रदय मे मैथिलीक प्रति प्रगाढ़ प्रेम छनि। कारण, भोजपुरीक टीवी चैनेल पर मिथिली बजबाक हुनक छटपटाहटि सहजे देखल गेल। मुदा मैथिली के प्रोमोट करबाक लेल की कयलनि, आ की क' रहलाह अछि, से बेसी महत्वपूर्ण।
सक्षमे दिस संसार अपेक्षाक दृष्टि सं तकैत छैक। मैथिलीक अउनाहटि एही सं पता लगाओल जा सकैत अछि जे मैथिली अपना संसार मे जतेक हाथ-पयर मारबा मे सक्षम अछि, मारिये रहल अछि संगहि आन-आन भाषा-क्षेत्रक प्रिंट-इलेक्ट्रोनिक मीडिया मे सेहो घुसपैठ क' रहल अछि। जेना हिन्दी चैनेलक धारावाहिक सभ मे मैथिली गीत ओ संवाद सुनबा-देखबा मे आबि जाइत अछि त' भोजपुरी चैनेल महुआ पर त' कतेको चिन्हार मैथिली कलाकार रोजगाररत छथि त' एही चैनेल पर कहियो-काल मैथिली गीत-सिनेमा देखबा लेल सेहो भेटि जाइत अछि। आब प्रश्न उठैत अछि जे आख़िर कहिया धरि घुसपैठे सम काज चलबैत रहब? समाचार पत्र, टीवी चैनल, सिनेमाक क्षेत्र मे ठोस काजक नितांत आवश्यकता अछि। कारण एहि सं भाषाक प्रसार व्यापक रूपे होइत छैक। मैथिली घेंट उठौलक अछि। कोलकाता सं मैथिली दैनिक पत्र (मिथिला समाद) आ दिल्ली सं टीवी चैनेल (सौभाग्य मिथिला) शुरू भेल अछि। एहि दुनूक आगां अपन प्रसार व्यापक करबाक चुनौती छैक। मिथिला क्षेत्रक लोक माछ खा शरीरे बलिष्ट आ दिमागे तेज होइत अछि त' पान खा स्वरक प्रखरता सेहो बनल रहैत छैक। संगहि एहि क्षेत्रक लोक मे मखान सं सादगी सेहो देखबा मे अबैछ। मैथिलीक चर्चा अबिते विद्यापतिक छवि दृष्टि पटल पर नाचय लगैछ। विद्यापति मैथिलीक प्राण छथि, ताहि मे कोनो दू मति नहि। मुदा हमरा लोकनि कहिया धरि विद्यापतिये सं काज चलबैत रहब? हमरा लोकनि के गोसाओनिक घर सं निकलि बाहरोक बसात लगयबाक चाही। आधुनिक युगक मांगक अनुरूप अनुकूलित होयब आवश्यक।
एकैसम शताब्दी मे मिथिलाक कराह-स्वर दरभंगा होइत सोझे दिल्ली पहुँचि रहल अछि त' मैथिलीक छटपटाहटि सहजहि अनुभव कयल जा सकैत अछि। आशा अछि मैथिल एहि बात के बुझैत अपन माय, मातृभूमि आ मातृभाषाक मान बढ़यबाक प्रबल प्रयत्न करताह। हमरा लोकनि के संयुक्त प्रयास सं एहन मिथिलाक सृजन करबाक अछि, जाकर गमक सं वातावरण गमगमा जाय, जकरा देखने नयन तिरपित भ' जाय आ जकरा सुनने कर्णपटल धन्य भ' जाय। हमरा लोकनि कें एहन बसात बहयबाक अछि, जकर अनुभव मात्र सं ओकर पहिचान कयल जा सके। हमरा लोकनि कें एहन परिवर्तन अनबाक अछि जाहि सं कम सं कम मैथिल मैथिल कें चिन्हबा मे धोखा नहि खा सकथि। हमरा एखन मिथिला बनेबाक अछि जाहि सं कोनो उदित नारायण के ई नहि पूछय पड़नि जे 'अहाँ मैथिली बजै छी की ?'।

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मुगल गार्डन खुजल आइ सं

राष्ट्रपति भवन परिसर में छैक मुगल गार्डन। आइ सं 11 मार्च तक भोर 10 बजे सं सांझ 5 बजे तक सोम छोड़ि सभ दिन खुजल रहत-सभहक लेल। सांझ चारि बजे के बाद प्रवेश नहिं।

  • एहि बेरक मुख्य आकर्षण के केंद्र छैक कैक्टस आ बोनसाई खंड।

  • गुलाबक मारिते वैरायटी-सेंटिमेंटल, सेंचुरी टू, अमेलिया, चाइना मैन, पूसा पीतांबर, लैंडोरा, फर्स्ट प्राइज, शरबत, आइस बर्ग, मोंटेजुमा, समर स्नो, लूईसियाना, ओक्ला होमा, पासाडेना, क्रिश्चियन डिओर, क्वीन एलीजाबेथ, सुपर स्टार, मदर टेरेसा, माचो मैन, पिंक परफेट, मोंटेजुमा, अर्जुन आदि देखि सकैत छी।

  • लाल आ पीयर रंगक ट्यूलिप, लिली, डबल पेंसी, क्लेंडुला, पोप्पी, गेंदा, गंधवेणु, स्टॉक आदि सेहो उपलब्ध।

  • म्यूजिकल,हर्बल,स्पिरिचुअल गार्डन आ बायोडायवर्सिटी पार्क सेहो देख सकब।

  • मुगल गार्डन के पसार १५ एक़ड़ में छैक। जम्मू-कश्मीर के गार्डन सं प्रभावित भ कए सर लुटियंस एकरा डिजाइन कएने छलाह।

  • मुगल गार्डन तीन भाग में छैक। पहिल हिस्सा रेक्टेंगलर गार्डन छैक, जे मुख्य राष्ट्रपति भवन सं जु़ड़ल छैक। मध्य हिस्सा लांग गार्डन आर आखिरी हिस्सा सर्कुलर गार्डन छैक।

  • बायोडायवर्सिटी पार्क में हिरण, बतख, टर्की समेत मारिते प्रवासी पक्षी सं भेट हएत। मोर सेहो। एहिठाम ३३ तरहक औषधीय पौधा छैक जाहिमें जटरोफा सेहो छैक जाहिसं बायो-डीजल तैयार होइछ। सर्दी के मौसम में एतय सब्जी सभहक खेती सेहो होइत छैक।

  • चर्च रोड के अंत में स्थित राष्ट्रपति संपदा के 35नंबर गेट सं गार्डन में प्रवेश। व्हीलचेयर इस्तेमाल करनिहार राष्ट्रपति भवन के स्वागत कक्ष होइत जा सकैत छथि। विकलांगलोकनि हुकमी माई मार्ग अथवा राजपथ सं राष्ट्रपति भवन पहुंच सकैत छथि। नेत्रहीनलोकनिक लेल राष्ट्रपति भवन के 12 नंबर गेट सं प्रवेश।

  • पानिक बोतल, ब्रीफकेस, हैडबैग, महिला सभहक पर्स, कैमरा, रेडियो ट्रांजिस्टर, मोबाइल फोन, हथियार आर खाद्यपदार्थ नहिं अनबाक अनुरोध कएल गेल छैक। पछिला बरख 5.75 लाख लोक देखने छलाह मुगल गार्डन।

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बृहस्पतिवार, 11 फरवरी 2010

लिंग भेद- अजित कुमार आजाद

अहाँ
मस्जिदकें
मन्दिरमे बदलि देलिऐ

अहाँ ओहिमे
राता-राती रोपि देलिऐ लिंग
टाँगि देलिऐ घण्टी
बजब’ लगलहुँ घड़ीघण्ट
गाब’ लगलहुँ आरती

हे नरेन्द्र
अजानक विरोधमे
खतना कएल हजारक हजार जान लेलाक बाद
की अहाँ कहि सकै छी
अहाँक देवताक लिंग खतल नहि छनि

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रविवार, 7 फरवरी 2010

नताशा 40 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक लेल नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ आनन्द उठाऊ।)




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शुक्रवार, 5 फरवरी 2010

बदलत कोना? -रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'

लोक मरैत रहत सदैव, आतंकवादीक गोली सँ।

जनता ठकाइत रहत सदैव, क्रूर राजनेताक बोली सँ।

गरीब तंग रहत सदैव, पेटक किलकिलाइत भूख सँ।

स्त्री दबायल रहत सदैव, पुरुखक चमचमाइत बूट सँ।

सवर्ण डेराइत रहत सदैव, डोमक थूक सँ।

मिथिला दहाइत रहत सदैव, बेंगक मूत सँ।

बेटा बिकाइत रहत सदैव, मोटगर दहेज़ सँ।

बेटी जरइत रहत सदैव, आगिक लपेट सँ।

राशन घटल रहत सदैव, नहि होयत किछु भाषण सँ।

लोकतंत्र मे मारामारी रहत सदैव, हटय चाहत ने क्यो सिंघासन सँ।

देश सहमल रहत सदैव, कलियुगी रावण ओ कंस सँ।

किछु लोक चाहैत रहत सदैव, बचय समाज विध्वंस सँ।

अपने मे सब लड़ैत रहत सदैव, नहि होयत किछु झगरला सँ।

ई थेथर समाज एहने रहत सदैव, नहि बदलत बात छकरला सँ।

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बृहस्पतिवार, 4 फरवरी 2010

हाइकू

हाइकू


(१)
तारा दूरसँ
बुझाइत कतेक शीतल
वास्तवमे जड़ैत
(२)
शाखासँ लागल
पुष्प आ पत्रसँ आच्छादित
अछि लता झूलैत
(३)
पक्षी विश्राम कएल
बड़का यात्राक उपरान्त
एखनो जे अपूर्ण
(४)
अद्भुत अपवाद छैक
नागफनीक कॉँटक बीच
कुसुम खिलायल
(५)
नीलांबरमे मेघ
विचरैत अछि कोना जेना
सागरमे होए शार्क
(६)
भावी संकटक
पशु पक्षीमे पूर्वाभास
प्रभुक दिव्य आशिष
(७)
कोमल पंखुड़ी
सुगन्धक संग सजाओल
एक पुष्पक रूपमे
(८)
नदीक तरंग
ओहिना लागैत अछि जेना
ओकर घुरमल केश
(९)
दूटा पसरल पाँखि
बाज उड़ऽ लेल तैयार अछि
पूर्ण रूपसँ जागरूक


(१०)
पहाड़ीक ढलान
ताहिपर एकमात्र गाछक छाह
भेल यात्रीक विश्राम
(११)
संध्याक बेला
सुनसान आ शान्त पोखरिक कात
एक एकान्त स्थान
(१२)
मेघ रूपी बर्फमे
अछि हवाइ जहाज पिछड़ैत
आकाशमे विचरैत
(१३)
कठोरतम भूमि
समुद्रक छोरपर बसल
अछि पाथरक किनार
(१४)
विलक्षण अपवाद
आकाश जरैत संध्याकाल
समुद्रक उपरि
(१५)
पहाड़सँ उदित
सूर्यसँ आकाश भेल जागृत
ज्वालामुखी सन
(१६)
उगैत सूर्य संगे
आयल अंधकारक उपरान्त
अंतहीन दिनक आस
(१७)
दिवस आब थकल
रातिक स्वागतमे लीन साँझ
मिझाइत सूर्य दीप
(१८)
गाछ भने हरियर
ग्रीष्मोमे देखू पतझड़
भोरक आकाशमे
(१९)
पक्षीक चहक
आ आकाशक लाली संग
प्रकृति जागल
(२०)
अतिसुन्दर जाड़
मेघक घिस घिस छिड़यौलक
हिमपातक रूपमे
(२१)
तैयार उड़ऽ लेल
पक्षी विश्रामसँ जागल
वा अछि शुरूआत
(२२)
पक्षीक निरीक्षण
छूटल अन्नक फेरमे
कटनी भेलाक बाद
(२३)
फूलक हुँजक बोझ
शाखाकेँ झुका रहल
बसंत आयल अछि
(२४)
तितलीक पंख
अंकित रंग बिरंग आकार
प्रभुक चित्रकला
(२५)
मनुष लेल कठिन
किन्तु जीवन ओतहु अछि
शीतलतम स्थान
(२६)
उच्चतम शिखरसँ
धोन्ही भरल हरियर घाटी
निहारक इच्छा
(२७)
विभिन्न प्रकारक
घास पात जमीनपर उगल
आइरसँ दूर बँचल।
(२८)
ओसक बूँद पाबि अछि
घासक फुनगी आह्‌लादित
हीरा सन चमकैत
(२९)
बाहर घूमऽ निकलल
बतख अपन बच्चा संग
गर्मीक दिनमे
(३०)
बतख हेलि रहल अछि
पानिक ऊपरी सतह पर
लक्ष्यक दिस निरंतर
(३१)
स्प्रेसो
आस्ते पिबऽ लेल
गर्म देल गेल
(३२)
ईश्वरकेँ तकनाइ
नहि कठिन पाबू ओकरा
पवित्र हृदयमे
(३३)
दृष्टि भ्रमणमे
घाटीपर दूर दूर धरि
भटकि सकैत अछि
(३४)
घोड़ा भटकि रहल
उद्देश्यहीन बिन घुड़सवार
भेल अनुशासनहीन
(३५)
स्थिर पानिमे
प्रकृतिक प्रतिबिम्ब
साफ मुदा उलटा
(३६)
प्राकृतिक दृश्य
पानिक प्रतिरूप बिना
अपूर्ण बुझाइत अछि।
(३७)
पतझड़क पात
पसारलक अप्पन सतरंजी
हरियर घास बदला।
(३८)
समुद्रक तहमे
विभिन्न आकार प्रकारक
रंग बिरंग जीवन।
(३९)
नटखट समुद्र
तटक आरामसँ वंचित
कएने बेर बेर तंग।
(४०)
पहाड़क चोटी
आर बेसी ऊँच लागैत अछि
गहींर घाटीक बीच
(४१)
पोखरिमे देखू
प्रकृतिक प्रतिबिम्ब
उलटल बुझाइत अछि
(४२)
तितलीगण उतरल
पंखरूपी पैराशूट लऽ
फुलक झुण्डपर।
(४३)
उच्चतम शिखरपर
गुफासँ दृष्टिगोचर
होइत रमणीय दृश्य
(४४)
बच्चाक संग खेलमे
एकेटा खुशीक आभास
ओकर किलकारी
(४५)
टेढ़ मेढ़ रेखा अछि
बरसातक बहैत पानिसँ
खिड़कीक काँचपर बनल
(४६)
बादलसँ छनल
समुद्रक लहरिक तरंग
उपर चमकैत किरण
(४७)
पानिक तरंगकेँ
पक्षी बदलि रहल अछि
कलरवक लयमे
(४८)
मरुस्थलमे रेत
अछि हवासँ बहारल
सतह भेल समतल
(४९)
कतेक बेसी ध्यान
पातक प्रारूप देबऽमे
ईश्वर देने छथि
(५०)
बरसात खतम भेल
पानि तइयो झरि रहल अछि
गाछक पात सभसँ
(५१)
समुद्रक लहरि
बराबरि टकरा रहल
पाथर तइयो स्थिर
५२
मनोरम दृष्य
जेना चिन्नीक चाशनीमे लिप्त
अछि गाछ जाड़मे
(५३)
अपने रंगहीन अछि
गाछकेँ रंगीन बनौलक
नीचा गड़ल जड़ि
(५४)
शीतल प्रकाश युक्त
सुर्योदयक पहिनेक समय
सर्वोत्तम काल
(५५)
पाँखिक शाल ओढ़ने
प्रकृतिक भ्रमण हेतु
पक्षी निकलल जाड़मे
(५६)
चिडैय़ाक बच्चा
माए बाप संगे अछि ताबे
जाबे पंख नहि छैक।
(५७)
प्रवासी पक्षी
मीलक मील उड़ि कऽ आयल
गर्मीक आनन्द लेल।
(५८)
उछलैत पानि
नदीसँ भेँट लेल
खसल झरनाक रूपमे ।
(५९)
नागफणीक गाछ सभ
मरुस्थलमे सेहो अछि
मजगूतीसँ ठाढ़।
(६०)
कठोर पातसँ लिप्त
नागफनीक चोटीपर अछि
कोमल फूलक ताज
(६१)
आर सजायल गेल
कैक रंगक फूल आ लाइटसँ
क्रिसमसक साँझमे
(६२)
एक नारिकेरक फल
कठोर केशयुक्त कवचमे
मीठ उज्जर फल अछि
(६३)
भुखाएल बगुला
नदीक कातमे ठाढ़ अछि
माछक ताकिमे
(६४)
अतिथिक आगमन
कौआक कर्कश काँव काँवसँ
पूर्वसूचित भेल अछि
(६५)
सागरमे डॉलफिन
खतरनाक जीवक बीचमे
मनुषक साथी
(६६)
जिग ज़ैग ध्वनि केँ
गाड़ी दोहरा रहल अछि
भीजल सड़क पर
(६७)
भूकम्पक श्राप अछि
अज्ञात अपराधक सजा
मनुषकेँ भेटल
(६८)
छोट किन्तु तेज अछि
अपन लक्ष्य चिन्हऽमे
भड़ल भीड़क बीच
(६९)
समुद्रक नीचाँ
कतओ जायकाल रहैए
छोट माछ सभ झुण्डमे
(७०)
अंगूरक फल अछि
मीठ जेल जमाकऽ रखने
छोट छोट आकारमे
(७१)
स्वर्ग सदृश दृश्य
हरियर प्राकृतिक संग
चिड़ैआक कलरव
(७२)
राति हुअक पहिने
आकाश दहकि रहल
सूर्यास्तक पहिने
(७३)
खिलखिलाइत झरना
मधुर ध्वनि घोरि रहल
चारू दिशामे
(७४)
सूर्यक अएलापर
रातिक अन्हार भागि गेल आ
भोर शुरु भऽ गेल
(७५)
छाया उपर्युक्त अछि
गोबरछत्ताकेँ उगऽ
आ पसरऽ लेल
(७६)
एकटा पओलाक बाद
खरहा फेर भागि रहल अछि
आर भोजन लेल
(७७)
गाछक स्वर्णिम रंग
पतझड़क आगमनक
घोषणा अछि करैत।
(७८)
गरमीक ऋतु
कहॉँ ओतेक दुखद अछि
शुरुक दिनमे
(७९)
स्वयम्‌ सिद्ध मकरा
अपन सुरक्षा हेतु
जाल अछि बुनैत
(८०)
कोनो आकारमे
ढलि जाएत पानि मुदा गहराइ
एकर अपन गुण
(८१)
आकाश अखनो ऊँच
बादल पहुँचमे बुझाएल
ई धुन्धक रूपमे
(८२)
रातिमे इजोत दैत
बर्फसँ परावर्तित होइत
प्रकाशपुँज जाड़मे
(८३)
लुक्खी सभ निकलल
अपन घड़सँ आलस त्यागि
वसन्त ऋतुमे
(८४)
सोन सन सूरज भेल
उज्जर चमकैत हीरा सन
दिनक अएलापर
(८५)
गाछ सभ अछि होड़मे
सभसँ पहिने पाबऽ लेल
सुरुजक रोशनी
(८६)
एकटा मन्दिर अछि
खजूरक गाछक भीड़मे
एक पोखरि कातमे
(८७)
सुखाएल छोट पातसभ
गाछसँ नीचाँ खसैत अछि
नबकेँ अवसर दैत
(८८)
गाछक शाखासभ
अतेक ऊँचाइपर पसरल
जड़ि ततबे गहींर
(८९)
भोरक अयलापर
गाछपर लादल ओस भेल अछि
चमकैत हॅँसी सन
(९०)
सोन सन कम्बल अछि
ओढ़ने गहुमक खेत सभ
कटाइक पहिने
(९१)
चक्रवातीय पवन
जीवनसंहारक बनि गेल
जीवनरक्षक छल।
(९२)
प्रदान करैत अछि
पक्षी आ हरिण सभकेँ
गाछ आ वृक्ष आश्रय
(९३)
फूलसँ भरल अछि
एकटा घाटी एहन अछि
जेना खुशी मुस्काइत।
(९४)
पानि बढ़ि रहल
रस्ताक गाछ आ पाथर सभ
बिदा करैत ठाढ़
(९५)
जाड़क गाछ अछि ठाढ़
वसन्तक प्रतीक्षामे
पात सभसँ भिन्न भऽ

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सोमवार, 1 फरवरी 2010

फरीदाबाद में सूरजकुंड मेला शुरू

  • 15 दिन चलत। एहि वर्ष राजस्थान पर छैक फोकस।
  • विभिन्न राज्यक संस्कृति,लोककला आ संगीत केर प्रदर्शन हएत।
  • ताजिकिस्तान,थाईलैंड,मिस्र,अफगानिस्तान,भूटान आ बंगलादेशक शिल्प प्रदर्शनी सेहो छैक।
  • विभिन्न राज्यक खान-पान उपलब्ध। राजस्थानी दालबाटी चूरमा आ चोखी ढाणी कें मजा ल सकैत छी।
  • 400 सं बेसी दस्तकारक प्रदर्शनी।
  • 11 स्टॉल पर जेवरात,कार्पेट आ मार्बल शो-पीस उपलब्ध।
  • 7 लाख सं बेसी पर्यटक कें अएबाक संभावना।
  • 23 बरख सं आयोजित भ रहल अछि ई मेला।
  • मिस्र के तनोरा आ थाईलैंड के लोकनृत्यक आनंद रोज ल सकैत छी।
  • सांझ छह बजे सं रोज सांस्कृतिक कार्यक्रम।
  • शेखावटी गेट के आगू में,बच्चा सभहक लेल एक पैघ मनोरंजन पार्क स्थापित कएल गेल छैक।
  • 1 फरवरी कए रंगोली प्रतियोगिता,2 फरवरी कए पेंटिंग प्रतियोगिता,3 फरवरी कए निबंध लेखन आ 4 फरवरी कए मेंहदी प्रतियोगिताक आयोजन।
  • 9 फरवरी कए ड्राइंग,10 कए पतंगबाजी आर 11 कए फोटोग्राफी प्रतियोगिता राखल गेल छैक।
www.krraman.blogspot.com

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माघ मासक पाबनि-तिहार

  • 2 फरवरी- अंगारकी संकष्टी गणेश चतुर्थी
  • 3 फरवरी-औंकार पंचमी
  • 4 फरवरी-श्रीमहाकालेश्वर नवरात्र प्रारंभ(उज्जैन)
  • 5 फरवरी-चेहल्लुम
  • 6 फरवरी-जानकी जयंती/सीताष्टमी व्रत,अष्टका श्राद्ध आ कालाष्टमी
  • 7 फरवरी-अन्वष्टका श्राद्ध आ गुरुदास जयंती
  • 9 फरवरी-विजया एकादशी
  • 10 फरवरी-गोविन्द द्वादशी
  • 11 फरवरी-प्रदोष व्रत आ त्रयोदशी
  • 12 फरवरी-महाशिवराति आ हरिद्वार महाकुंभ में प्रथम शाही स्नान। कुंभ संक्रांति रात्रि 1.38 बजे,पुण्यकाल अगिला दिन।
  • 13 फरवरी-स्नान-दान-श्राद्ध अमावस्या,शनैश्चरी अमावस,पीपल-पूजन,छाया-दान
  • 14 फरवरी-स्नान-दान की फागुन अमावस्या
  • 15 फरवरी-पुत्र प्राप्ति हेतु 12 दिनक पयोव्रत प्रारंभ
  • 18 फरवरी-गणेश चतुर्थी । वसंत ऋतु प्रारंभ।
  • 21 फरवरी-भानु-सप्तमी पर्व सायं 6.26 तक(सूर्यग्रहणतुल्य),कामदा सप्तमी व्रत,कल्याण सप्तमी व्रत। होलाष्टक प्रारंभ।
  • 22 फरवरी-श्रीदुर्गाष्टमी व्रत। श्रीअन्नपूर्णाष्टमी व्रत।
  • 23 फरवरी-आनन्द नवमी।
  • 25 फरवरी-जनकपुर-मिथिला में अंतर्गृहीय परिक्रमा प्रारंभ। आमलकी(आंवला)एकादशी व्रत।
  • 26 फरवरी-प्रदोष व्रत। पयोव्रत पूर्ण। गोविन्द द्वादशी।
  • 27 फरवरी-चौमासी आ ईद
  • 28 फरवरी-सिंदूरार्पण-पातरिदान। होली। स्नान-दान व्रत केर फाल्गुनी पूर्णिमा। होलिका दहन रात्रि 10.07 बजे तक शुभ। होलाष्टक समाप्त। सत्यनारायण पूजा-कथा। जनकपुर-परिक्रमा पूर्ण।
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मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
(दोसर कड़ी), (तेसर कड़ी), (चारिम कड़ी), (पाँचम कड़ी), (छठम कड़ी), (सातम कड़ी), (आठम कड़ी), (नवम कड़ी), (दसम कड़ी), (एग्यारहम कड़ी), (बारहम कड़ी), (तेरहम कड़ी), (चौदहम कड़ी), (पन्द्रहम कड़ी )

चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

बिदेसिया (संकल्पित नाटिका)

विद्यापतिक बिदेसिया (संकल्पित नाटिका).... भोजपुरीक साहित्य मैथिलीसँ कम समृद्ध अछि मुदा से अछि मात्र परिमाणमे, गुणवत्ताक दृष्टिमे ई कतेक क्षेत्रमे आगाँ अछि। भोजपुरीक भिखाड़ी ठाकुरक बिदेसियाक सन्दर्भमे हम ई कहि रहल छी। भिखाड़ी ठाकुर कलकत्तामे प्रवासी... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

कथा- माउगि

कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

मातृत्व...

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व.... नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि.... (आगाँ पढू)
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मैथिल आर मिथिला
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