मंगलवार, 30 मार्च 2010

कुण्डलिया

एहि कुण्डलिया मे मात्राक कमी अछि, सुधी पाठक सँ क्षमाप्राथी छी।

महँगाइ तँ बाबू सरिपहुँ केलक कमाल
चिन्नी चक्कर दए रहल घीअक पड़ल अकाल
घीअक पड़ल अकाल, तीमन मे आगि लागल
चिक्कस सतरह तँ तेल सत्तर अछि भागल
कह अनचिन्हार करु ने मूँह सँ चरचा
बरतन-बासन बेचि चलाउ घरक खरचा

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रविवार, 28 मार्च 2010

दूटा लघुकथा- अनमोल झा

युगान्त

-हे सुनै छी की?
-हँ माँ कहथु ने, की कहै छथि।
-आइ रीता दाइ अबै छै।
-से की?
-से घर आँगन नीप लिअ। तिलकोड़, पापर, राहड़िक दालि, बड़ी सब सकाले कके राखि लिअ।
-बेस! एतऽ हम हिनका दुनु बेकतीक सेवाक लेल छियैनि। हिनका बेटी जमाय लेल नै। अबैत छथिन एहि बेर अपने गाम, चल जेबनि संगे। लऽ लिहथि तखन धधकल..कहलकै जे..!!


अधिकार


-एकटा बात ध्यानसँ सुनि ले लखना, जँ बेगारी नै खटमे हमर आ अबाज ऊँच कके बजमे तऽ बासडीह जे छउ तकरा खाली करऽ पड़तउ। हमर पुरखा तोरा बाप-पुरखाक रैयतमे अपना जमीनपर बसेने छला एहि उपकार ले जे तू हमरा मूँह लागल जबाब देमे।
-तकर माने की अहाँ हमर उपजल बोनि नै देब आ अहाँक बेटा-भातिज हमर इज्जति दिस आँखि उठायत। हाथ-पैर तऽ तोड़ि देबै तकर। हँ रहल बासडीह बला सवाल से एते सस्ता नै छैक जे खाली करबा देब अहाँ। दस-बीस साल जे बटाइयो खेती करै छै तऽ सरकार कहै छै जे खेत ओकरे छियै आ दू पाँच पुरखा सऽ जाहि डीहपर बसल छी हम सब से हम्मर नै! हाकिमक देल बासगीत परचा सेहो अछि हमरा लग।

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मैथिली चित्रकथा- नीतू कुमारी (नीचाँक चित्र सभकेँ बेरा-बेरी क्लिक करू आ पढ़ू-देखू।) - Story narrated by Gajendra Thakur (drawn in Videha Children-literature workshop)

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शनिवार, 27 मार्च 2010

सत्यानास - संग- लग्न

सत्यानास - संग- लग्न


अमंगल गुटखा खाद्य्म धुम्रपान अमंगल सर्बब्य्संम
कराग्रे बसती बीडी करमध्य चुरतम
करमूले श्थितो गुटखा प्रभाते कर दर्शनं


दुर्भाग्वती बीड़ी , कुमारी उर्फ़ सिकरेट देवी
कुपुत्री - श्री तम्बाकू लाल जी ,एवं श्री मति चिलम देवी ,
निवासी =+++ यमलोक , होउस - दुखनगर ,अंतिम इक्छा


संग

आत्मा कैंसर कुमार उर्फ़ लाईलाज बाबु ,
गुटखा लाल जी एवं श्री मति
भंग देवी , निवासी - गलत रास्ता
ब्यबसनपुर (नसा परदेश)

के अशुभ विवाह तय भेल अछि अन्तह अहि भयानक प्रसंग पर --
काका - गाजा सिंह , काकी- अफीम देवी , बाबा- हुकाराम ,मैया -सुल्फी देवी ,
मामा -चरस राम , मामी - सारवी देवी ,नाना - चाय सिंह , नानी कोफ्फी देवी ,
ताऊ -चुना राम ,फूफ्फा - जर्दा राम ,सन ईहन खास बुजुर्ग सबहक़ उपस्थित में ,
नब दम्पत्ती के अभिशाप करैक हेतु अहाँ सब
सादर आमंत्रित छि ,--------

विवाह समय - अनिशचितकाल
विवाह स्थल -समसान घाट मैरिज होम --
चिन्त्ता भवन ,कष्ट मोहल्ला ,दुर्गात्ति गल्ली ,
दुःख नगर , जिला - परलोक पुर
राज्य - अंतिम धाम
पिन -००००००
सत्यानास संग- लग्न ----
में अपनेक सब आमंत्रण जुनी होयब -----
हमर ई आशा और अभिलाषा अछि -----
अमंगल विवाह

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शुक्रवार, 26 मार्च 2010

प्रीति ठाकुरक - मैथिली चित्रकथा ( नीचाँक चित्र सभकेँ बेरा-बेरी क्लिक करू आ पढ़ू-देखू।)- narrated by Gajendra Thakur (drawn in Videha Children-literature workshop)

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रविवार, 21 मार्च 2010

स्टार प्लस पर आइ सं सुपरस्टार का जलवा

स्टार प्लस चैनल पर आइ सं "स्टार सिंटा सुपरस्टार का जलवा" नामक कार्यक्रम शुरु भ रहल अछि। ई कार्यक्रम प्रत्येक रविकए राति ९ बजे देख सकब । सिनेमा आ टीवी आर्सिस्ट एसोसिएशन (सिंटा)के स्वर्णजयंती पर बनल एहि कार्यक्रम द्वारा अनुदानस्वरुप सिंटा के सदस्य सभ कें चिकित्सा सेवा, रिहर्सल हॉल्स, प्रिव्यू थियेटर्स इत्यादि लोक-कल्याणकारी सुविधा उपलब्ध करा कए ओकर सभहक व्यक्तिगत आर पेशेवर जीवन कें बेहतर बनाएबाक प्रयास कएल जएतैक। ई शो छह सप्ताह तक चलत आ एहि मे भारतीय सिनेमा कें स्वर्णिम वर्षक झलक फ्लैशबैक में पेश कएल जाएत। कार्यक्रम मे वयोवृद्ध व्यक्तित्व सं ल कए नव खाढी धरिक कलाकारक अभूतपूर्व उपस्थिति देखबाक अवसर भेटत। बच्चन,खान आ कपूर बंधु तं रहबे करताह,आमिर खान सेहो अओताह जे पछिला दस बरख मे टीवी पर हुनक पहिल उपस्थिति हएत। कुल मिलाकए, ई शो हिंदी सिनेमा के बीचक संबंध कें आओर प्रगाढ करत । शो शुरू होमए सं पूर्व,एक समारोह में सलमान खान, सोहैल खान आर मिथुन चक्रवर्ती उपस्थित भेल छलाह । ओहि अवसर पर सलमान खान कहलनि जे ई कार्यक्रम एक नेक काज कें प्रोत्साहित करबाक लेल छैक आ तें प्रशंसनीय अछि। ठीक एही तरहक एकटा शो "लिफ्ट करा दे" फिलहाल सोनी चैनल पर चलि रहल अछि आ खूब लोकप्रिय भेल अछि।
फिल्म संबंधी आओरो रूचिगर सूचनाक लेल देखूः www.filmcrossword.blogspot.com

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बृहस्पतिवार, 18 मार्च 2010

गीत


हम पहिल बेर अपने लोकनिक सेवा मे गीत प्रस्तुत कए रहल छी।



छौड़ी चलै छैक एटम-बम के चालि (२)
हे रे - छौड़ी -----
जेम्हरे चलै, भुइयाँ डोलै
छौड़ा सभहँक फटै छैक मालि
छौड़ी चलै ---------


अँचरा ओकर फेकै छैक धधरा
कारी केश तँ लागै छैक बदरा
ठोर पर छैक भोरक सूरज
आँखि ओकर कमला-धार
छौड़ी चलै ---------


हम तँ बूझू सगरो देखल
रूप मुदा एहन नहि भेटल
डाँड़ लचका कए मोन भरछाबै
छाती ओकर दै हिया सालि
छौड़ी चलै ---------


रूप ओकर छैक चानी पीटल
छाँह ओकर बड़ शीतल-शीतल
मोन हमर तँ ओकरे पर रीतल
हमरे भेटतै आइ ने काल्हि
छौड़ी चलै ---------*

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बुधवार, 17 मार्च 2010

लोकप्रिय मैथिली MP3 गीत

गीतक लिंक निचा देल अछि!
  • लोकप्रिय मैथिली भगवती गीत!
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  • लोकप्रिय मैथिली विद्यापति गीत!
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  • लोकप्रिय मैथिली शिव भजन!
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  • संत लक्ष्मीनाथ सौबीसा - हरिनाथ झा, मोहन दर्शन, अमोद झा, सुनील पवन, मीनू मिश्र
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  • मैथिल छी मिथिला बास हमर - रजनी पल्लवी
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  • छठी मैया - शारदा सिन्हा!
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  • लोकप्रिय मैथिली विवाह गीत!
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  • शुभ विवाह - स्वर्णलता झा, आ हरिनाथ झा
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  • लोकप्रिय मैथिली होली गीत!
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  • मैथिली चहटगर गीत - Vol - I
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  • मैथिली चहटगर गीत - Vol - II
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  • मैथिली चहटगर गीत - Vol - III
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  • मैथिली चहटगर गीत - Vol - IV
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  • मैथिली चहटगर गीत - Vol - V "सौजन्य" विपुल झा
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  • ठोरक लाली - राम बाबू झा
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  • मैथिली लोकप्रिय गीत - मिथिला में रफी!
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  • चौवनिया मुस्कान - दिलीप दरभंगिया
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  • मैथिली सोहर - समदाउन गीत
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  • सिनेहिया - कुञ्ज बिहारी मिश्र
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  • कुञ्ज बिहारी मिश्र - मैथिली गीत
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  • छोटकी भउजी - माधव राय, आ मीनू मिश्र
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  • मैथिली मसाला मिक्स!
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  • तोहर हम दीवाना छी - राम बाबू झा, आ पायल मुखर्जी
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नोट : सभ गीत एक संग डाउनलोड करबाक लेल (ZipFile) लिंक पर क्लिक करू, गीत अलग - अलग डाउनलोड करबाक लेल (Folder) लिंक पर क्लिक करू... धन्यवाद...

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मंगलवार, 16 मार्च 2010

समीक्षा श्रृंखला-१४- जगदीश प्रसाद मंडल- कथाकार-उपन्यासकार-नाटककार

१९४२-४३ क बंगालक अकालक विषयमे अमर्त्य सेन लिखै छथि जे एहि अकालमे बंगालमे लाखक लाख लोक मुइलाह (फेमीन इन्क्वायरी कमीशनक अनुसार १५ लाख) मुदा अमर्त्यक एकोटा सर-सम्बन्धीक मृत्यु ओहिमे नहि भेल। तहिना मिथिलाक १९६७ ई.क अकालमे भारतक प्रधानमंत्रीकेँ देखाओल गेलन्हि जे कोना मुसहर लोकनि बिसाँढ़ खा कऽ अकालसँ लड़ि रहल छथि, मुदा एहिपर कथा लिखल गेल २००९ ई.मे। २००९ ई. मे जगदीश प्रसाद मंडलजी बिसाँढ़पर मैथिलीमे कथा लिखलन्हि। आ एहि विलम्बक कारण सेहो स्पष्ट अछि। मैथिली साहित्यमे जे एकभगाह प्रवृत्ति रहल अछि, ताहि कारणसँ अमर्त्य सेन जेकाँ हमरो साहित्यकार सभ ओहि महाविभीषिकासँ ओतेक प्रभावित नहि भेल होएताह। आ एतए जगदीश प्रसाद मंडल जीक कथा मैथिली कथा धाराक यात्राकेँ एकभगाह होएबासँ बचा लैत अछि। एहि संग्रहक सभटा कथा उत्कृष्ट अछि, रिक्त स्थानक पूर्ति करैत अछि आ मैथिली साहित्यक पुनर्जागरणक प्रमाण उपलब्ध करबैत अछि।

जगदीश प्रसाद मण्डल शिल्पी छथि, कथ्यकेँ तेना समेटि लैत छथि जे पाठक विस्मित रहि जाइत अछि। मुदा हिनका द्वारा कथ्यकेँ (कथा, उपन्यास, नाटक, प्रेरक-कथा सभमे) उद्देश्यपूर्ण बनेबाक आग्रह आ क्षमता हिनका मैथिली साहित्यमे ओहि स्थानपर स्थापित करैत अछि, जतएसँ मैथिली साहित्यक इतिहास “जगदीश प्रसाद मण्डलसँ पूर्व” आ “जगदीश प्रसाद मण्डलसँ” एहि दू खण्डमे पाठित होएत। समाजक सभ वर्ग हिनकर कथ्यमे भेटैत अछि आ से आलंकारिक रूपमे नहि वरन् अनायास, जे मैथिली साहित्य लेल एकटा हिलकोर अएबाक समान अछि। हिनकर कथ्यमे कतहु अभाव-भाषण नहि भेटत, सभ वर्गक लोकक जीवन शैलीक प्रति जे आदर आ गौरव ओ अपन कथ्यमे रखैत छथि से अद्भुत। हिनकर कथ्यमे नोकरी आ पलायनक विरुद्ध पारम्परिक आजीविकाक गौरव महिमामंडित भेटैत अछि, आ से प्रभावकारी होइत अछि हिनकर कथ्य आ कर्मक प्रति समान दृष्टिकोणक कारणसँ आ से अछि हिनकर व्यक्तिगत आ सामाजिक जीवनक श्रेष्ठताक कारणसँ। जे सोचैत छी, जे करैत छी सएह लिखैत छी- ताहि कारणसँ। यात्री आ धूमकेतु सन उपन्यासकार आ कुमार पवन आ धूमकेतु सन कथा-शिल्पीक अछैत मैथिली भाषा जनसामान्यसँ दूर रहल। मैथिली भाषाक आरोह-अवरोह मिथिलाक बाहरक लोककेँ सेहो आकर्षित करैत रहल आ ओही भाषाक आरोह-अवरोहमे समाज-संस्कृति-भाषासँ देखाओल जगदीशजीक सरोकारी साहित्य मिथिलाक सामाजिक क्षेत्र टा मे नहि वरन् आर्थिक क्षेत्रमे सेहो क्रान्ति आनत। विदेह मे हिनकर पाँचटा उपन्यास, एकटा नाटक आ दू दर्जनसँ बेशी कथा, नेना-भुटका-किशोर लेल सएसँ ऊपर प्रेरक कथा ई-प्रकाशित भऽ विश्व भरिमे पसरल मैथिली भाषीकेँ दलमलित करैत मैथिली साहित्यक एकटा रिक्त स्थानक पूर्ति कऽ देने अछि।

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समीक्षा श्रृंखला-१३- मैथिली भाषा साहित्य : बीसम शताब्दी - प्रेमशंकर सिंह

मैथिली भाषा साहित्य : बीसम शताब्दी - प्रेमशंकर सिंहजीक एहि निबन्ध-प्रबन्ध-समालोचना संग्रहमे मैथिली साहित्यक २०म शताब्दी आ एक्कैसम शताब्दीक पहिल दशकक विभिन्न प्रिय-अप्रिय पक्षपर चर्चा भेल अछि। अप्रिय पक्ष अबैत अछि एहि द्वारे जे राजनैतिक-सामाजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक समस्या-परिवर्तन आ एकीकरणक प्रक्रिया कखनो काल परस्पर विरोधी होइत अछि।

मैथिली साहित्यक पुरान सन्दर्भ मैथिली भाषा आ साहित्यमे वर्णित अछि। लोकगाथा मे मणिपद्मक लोकगाथाक क्षेत्रमे अवदानकेँ रेखांकित करैत लोकगाथाक चर्चा भेल अछि । लोकनाट्य मे मैथिली लोकनाट्यक विस्तृत उल्लेख अछि। बीसम शताब्दी- स्वर्ण युगमे मैथिली साहित्यक सए बर्खक सर्वेक्षण अछि। पारंपरिक नाटक मे मैथिलीक आ मैथिलीमे अनूदित पारम्परिक नाटकक चर्चा अछि।सामाजिक विवर्तक जीवन झा मैथिली नाट्य साहित्यमे हुनका द्वारा आनल नूतन कथ्य-शिल्पकेँ रेखांकित करैत अछि। हरिमोहन झाक परवर्त्ती रचनाकारपर प्रभाव हरिमोहन झा पर समीक्षा अछि। मैथिली आन्दोलनक सजग प्रहरी जयकान्त मिश्रक अवदानक आधारित अछि। संस्मरण साहित्य मे मणिपद्मक हुनकासँ भेँट भेल छल क सन्दर्भमे संस्मरण साहित्यपर चर्चा भेल अछि। अमरक एकांकी: सामाजिक यथार्थ मे अमरजीक एहि विधा सभक तँ मायानन्दिक रेडियो शिल्पु मे मायानन्द मिश्रक एहि विधाक सर्वेक्षण अछि। चेतना समिति ओ नाट्यमंच मे चेतना समिति द्वारा कएल रचनात्मक कार्यक विवरण अछि।

एहि सभ आलेखमे सत्यक आ कलाक कार्यक सौंदर्यीकृत अवलोकन, संस्था सभक निर्माण वा वर्तमानमे संपूर्ण समुदायक धर्म-नस्ल-पंथ भेद रहित आर्थिक आ सामाजिक हितपर आधारित सुधारक आवश्यकता, महिला-लेखन आ बाल-साहित्यक स्थान-स्थापर चर्चा, यथासंभव मेडियोक्रिटी चिन्हित करबाक प्रयास, मूल्यांकनमे ककरो प्रति पूर्वाग्रह वा घृणा नहि राखब- ई सभटा समीक्षाक आवश्यक तत्वक ध्यान राखल गेल अछि। एक पाँतिक वक्तव्य कतहु नहि भेटत, पूर्ण विवेचन भेटत।

कथाकार-कविक व्यक्तिगत जिनगीक अदृढ़ता, चाहे ओ वादक प्रति होअए वा जाति-धर्मक प्रति, साहित्यमे देखार भइए जाइत छैक। आ एहने साहित्य बेर-बेर अपनाकेँ परिमार्जित-परिवर्धित करितो मूल दोषसँ दूर नहि भऽ पबैत अछि, अपन व्यक्तिगत प्रशंसा आ दोसराक प्रति आक्षेपक कथा-कवितामे ब्लैकमेलर साहित्यकार द्वारा प्रयोग करबाक गुंजाइश रहैत अछि। मुदा तथ्यपूर्ण मूल्यांकनसँ लेखकक एहि प्रवृत्तिकेँ प्रेमशंकर सिंह चिन्हित करैत छथि। जातिवाद-सांप्रदायिकतावाद आबिये जाइत छैक, तकरा चिन्हित करैत छथि, हीन भावनासँ ग्रस्त साहित्य कल्याणकारी कोना भऽ सकत? ओ ई सेहो चिन्हित करैत छथि। मैथिली साहित्य, जतए पाठकक संख्या शून्य छैक, एक साहित्यकार दोसराक समीक्षा करैत अछि आ एतए व्यक्तिगत अहम् आ ब्लैकमेलिंगक पूर्ण गुंजाइश छैक। अहाँ दू-चारिटा कवि-कथाकार सम्मेलनमे चलि जाऊ, उद्घोषकक उद्घोषणा आ थोपड़ी उद्घोषकक आ साहित्यकारक पूर्वाग्रहकेँ चिन्हित कऽ देत। एहि सन्दर्भमे ई संग्रह एकटा नूतन दृष्टिकोण उपस्थित करैत अछि, बदलैत सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक-धार्मिक समीकरणक परिप्रेक्ष्यमे एकभग्गू प्रस्तुतिक रेखांकन करैत अछि आ गपाष्टक आ समीक्षाक अंतरकेँ चिन्हित करैत अछि।

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नव संवत्सर

आइ नव संवत्सर अछि। पूजा-पाठ मे लागल लोकनि कें संवत्सर अथवा चैत्र शुक्ल प्रतिपदा देया कोनो विशेष ज्ञान नहि रहितो,ओ सभ एहि प्राचीन परम्परा पर गर्व अवश्य करैत छथि। वस्तुतः,ई कोनो सामान्य तिथि नहि छैक । वर्ष प्रतिपदा केर तात्पर्य छैक प्राचीनतम नव वर्ष केर पहिल दिन जकरा भारतीय समाज भक्ति भाव सं पूरा नौ दिनों धरि मनबैत अछि। ई बूझब बड्ड जरूरी छैक जे ई इसवीं सन्‌ अथवा हिजरी सन्‌ केर पहिल दिन नहि, अपितु एहि सृष्टिक प्रथम दिन होइत अछि। एहि सृष्टिक प्रारंभ आइ सं एक अरब ९७ करोड़ २९ लाख ४९ हजार एक सए छओ वर्ष पूर्व भेल छल । ओही दिन सूर्यक प्रथम किरण पृथ्वी पर आयल छल जकर स्वागत मे नव सम्वत्सर मनाएल जएबाक परंपरा प्रारंभ भेल। नव सम्वत्सर देया एक मान्यता इहो छैक जे अझुके दिन ब्रह्माजी सृष्टि रचने छलाह, मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामक राज्यभिषेको आइये भेल छल आ उज्जयिनी कें चक्रवर्ती सम्राट वीर विक्रमादित्य सेहो एही तिथि सं विक्रम सम्वत्‌ प्रारम्भ करने छलाह। शिव पुराणक अनुसार, भगवान शंकर केर प्रेरणा सं, साठि टा संवत्सर बनल छल जाहि मे ब्रह्मा, विष्णु आ महेशक नियंत्रण मे 20-20 टा छल। एहि क्रम मे,एहि बरखक अ़़ड़तीसम सम्वत्सर विष्णु नियंत्रण क्रम केर "शोभन" अछि।
एहि वर्ष कें शोभन सम्वत्सर मे, सौर मण्डल कें सर्वेसर्वा मंगल आ हुनक प्रधानमंत्री बुध छथि। "सस्येश" अर्थात्‌ कृषि आ ओहि सं सम्बन्धित मंत्रालय शुक्र के पास हेबाक कारणे नीक पानि हेबाक अनुमान कएल गेल छैक। चाउर, केतारी, गहूम, बूट आदि केर उपजा नीक हएत। फल, फूल सभहक सेहो पर्याप्तता रहत। बेसी पानि परेशानी केर कारण सेहो बनि सकैत अछि। "धान्येश" अर्थात्‌ धन धान्य विभाग बृहस्पति लग भेलाक कारणें अन्न, धन केर लाभ समाज कें भेटत। कुल मिलाकए,एहि संवत्सर केर मिश्रित फल संसार कें भेटत।
रूचिगर सूचनाक मंच

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शनिवार, 13 मार्च 2010

गीत-रमा कान्त झा (सौराठ ) बिहार

बसन्त आबि गेल नव कालिया सगरो गाछ छागेल !

पुरबा पछवा बसात बहैए , जवानीक ओ मद भरैए ,

दुख ने द्र्द्का ठिकः रहैए ,आम मंजरमे मधु लगैए ,

देस दुनियाकेँ हाथ चेला बनैए ,बाबाक भाषण सुनैए ,

कियो रमा देव , कियो कामा देव , सब डौगी चोला पहिरे ,

नारी संग नाच नाचैए ,कियो चिकोटी कियो नागी पेची .

आनंदक भोगी बनैए , मदिराकेँ अमृत बुझैए ,

झुठे भगवानक नाम जपैए , अपना आपके आफसर बुझैए ?

रमा कान्त झा (सौराठ ) बिहार

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शुक्रवार, 12 मार्च 2010

की जिनगी बेकार अछि? नीमैह गेल त जिनगी कमाल अछि...



किछ दिन पहिने के बात अछि , पुसक ज़ारक मास अह़ा सब लोकेन अहि बेर देखबै केलो कतेक हद तक ढंड अपन चरम शीमा तक पहुँच गेल छल , ओही ढंडी के ई बात छी
हमर दफ्तर में किछ जरुरी काजक प्रयोजन भ गेल छल , जाही कारने , हमर दफ्तर के छुट्टी क समयक हिसाब से , बहुत देरी कअक फुर्सत भेटल , ताबे में देखलो हमर साईकिल सेहो पेंचरक अबस्था में अछि एक त ई ढंडी दोसर कुन्नु सबरी के साधन नै , हम अधिक असमंजस में परी गेलो जे आब हम अपन डेरा कोनक जायब , घड़ी के समय एग्यारह बता रहल अछि, चारू दिस कुन्नु चारा नहीं , आ घर पर धिया - पुत्ता सब के सेहो चिंता होयत हेतैन जे एतेक रैत के कतय छैथि , आगन वाली के त बाते किछ और कनिको देरी भेल , की हे भगवती कही ढेर रास कोबला - पाती क बसैय छैथि जे , हे भगवती हुनका रक्षा करबैन
ई सब बात सोची - सोची के हम और बेसी चिंता में छलो आखिर की कायल जाय ?
ताबे में ऐगो बुजुर्ग (उम्र ५५ से ५८ के) किमरोह से रिक्शा लअके हमरा लग अबी गेला , आ हमरा से झट सँ बजला
बेटा आप को कहा जाना है ?
हम कहल्यनी - हमको छलेरा सदर पुर गाँव जाना है वह हाँ से मै पैदल निकल जाउगा ,
रिक्शा वाला बाजल , बेटा वो कितना दूर है ?
हम कहल्यनी ,यहाँ से तक़रीबन १२ किलो मीटर दूर पर है ,
रिक्शा वाला हमरा से बाजल ,, बेटा हमरा घर उस जगह से बहुत दूर है मै नहीं जा पाउगा आप कोइ दूसरा रिक्शा देखलो
हम एहन बात सुनी के और बेशी चिंतागिर्त भगेलो , जे आब हम की करब , यदि पैदल जायत छी त कम सँ कम दू घंटा समय लागैत अछि , नहीं जायव त घर में अंदेशा , कुलमिला के चारू तरफ चिन्ते - चिंता , आखिर करब त करब की ?

एतेक बात मन में सोचेयत छेलो की , ताबे में फेर ओह्ह रिक्सा बाला हमरा सामने आबी के कहैत अछि ,, बेटा हम से पहले आप को अपने घर जाना जरुरी है , मै तो सरक क आदमी हूँ , लेट –सेट अपने घर चला जाउगा ? आप बैठ जाऊ , आगे - आगे रास्ता बताते रहना
ई बात सुनी के हमरा अपन मन में ई भेल , जे भगवती हमर सबहक पुकार सुनी लेलैथि आब कुनू चिंता नै हम सही सलामत अपन घर पहुंच जायब आखिर में भगवती अपन दूत हमरा लेल पठाई देलाथी
कनिक दूर गेल होयब की हमरा मुहँ से अचनाक अबाज निकैल गेल , की अंकल ईस साल क ढंड तो बहुत हद तक बढने लगे है ? पत्ता नहीं गाँव - घर क़ा क्या बुरा हाल होगा ?
रिक्शा वाला के अबाज आयल -
,, बेटा सबको इंसानियत के कारन मज़बूरी आ गारिबी क़ा पालन करना परता है, ईस में , मै और आप क्या कर सकते है ? सब कर्मो क़ा खेल है , भाग्य जिधर ले जाते है उधर जाना परता है , आखिर में हम गरीब लोग उसका पालन करते है , इस में ढंडी और गर्मी क्या करेगा ?
ई बात सुनीक हमरा अपना –आप में ई जानकारी भेटल जे " ई बुजुर्ग " किछ खास पढ़ल -लिखल छैथि --
हमर मुहँ से झट सं आवाज निकैल गेल जे - अंकल आप कितने पढ़े - लिखे है ?
हमरा उत्तर भेटल " बेचलर ऑफ आर्ट फ्रॉम मिथिला युनिभर्सिटी "
हुनकर ई शब्द सुनी के हमर दिमाग किछ और सोचय लागल जे, बी ए कके ई आखिर रिक्शा कियाक चलबैत छैथि ?
ओहो हमर मिथिला के निवासी बनी , हमर मन में हुनका से बारबार ईहः प्रश्न पुछैक इच्छा करैत छल जे आखिर की कारण अछि ?
जखन हुनका बोली बचन से मिथिला क अबाज निकलल त हम अप्पन मैथिलि भाषा मै हुनका झट सं पुछलियन की -
,, काका अहंक कतय घर भेलय " ?
रिक्शा वाला सरमायत - सरमायत धीरे - धीरे मधुर अबज में बजला , हमर घर सुपोल परैत अछि
हम फेर - काका अपनेक की नाम भेलय
उत्तर भेटल -- हरी शरण झा ,
हम - पुछलीयन काका अहाँ एतेक पढल - लिखल छी ओही के उरांत रिक्शा क्याक चलबैत छी ?
झा जी काका बजला - रिक्शा हम नै चलबैत छी , हमर मज़बूरी चलबैत अछि
हम फेर पुछलीयन - झा जी काका अहिठाम अपनेक संग और कियोक छैथि ? झा जी काका से उत्तर भेटल - हमर सब परिवार एतही छैथि ,जाही में हमर अर्धांग्नी आ दुगो पुत्र आ एगो सुपुत्री छैथि
हम फेर पुछलीयन - काकी आ बोउवा सब के ई निक लागैत छन जे अहाँ रिक्शा चलबैत छी?
झा जी काका कहलैथि - हमरा परिवार में किनको ई नहीं बुझल छैन जे हम रिक्शा चलबैत छी ,
हम फेर पुछलीयन से कोना ?आखिर अहाँ की काज करैत छी आ कोनाक रहैत छी ? --- आखिर की कारन अछि जे अह्ना डिग्री लअके रिक्शा चलबैत छि ---
जी काका , धीरे - धीरे अबाज निकलैथी कहलैथि हम सन १९९० में दिल्ली एलो , कैकटा कंपनी में जाके अपन बिग्यापन देलो कतोउ जोगर नै लागल क्याक की हमरा लग डिग्री त छल मुद्दा कम्पूटरक शिक्षा नै छल जाही कारण सब जगह से निष्कासित भ जायत छेलो बहुत दिनक बाद अपन जिनगी से हारल थाकल अपन जिनगी के सिकोरटी गार्ड के काज पकरलो ओही समय में हमरा ३००० रूपया दैत छल , समय ठीक ठाक से बितैत छल , आ धिया पुता सब सेहो स्कुल में पढैत छल , बहुत निक जेका गुजर बसर होयत छल , समय बितल गेल महगाई बढ़ल गेल , मुद्दा आमदनी के कुन्नु दोसर चारा नही छल , हम अपन परिवार के त पेट भरी लैत छेलो मुद्दा धिया - पुत्ता के पढाई के खर्चा हमरा से पुरेनाय बड़ मुसकिल छल - आखिर कतेक दिन तक परोशी से कर्जा लअके बच्चा सबहक स्कुल के माशिक शुल्क देबय एतबा नही, हमर जिनगी के कमाए के अंतिम चरम सीमा सेहो बितल जायत छल आ घर क खर्चा सेहो बेसी भेल जायत छल , जाही कारने गार्ड के आट घंटा काज केला के बाद बाकि समय में हम भाडा पर रिक्शा चलब लागलो ताकि हमर धिया पुता के आबैय बाला जिनगी में ई तकलीफ नै होय जे हमर बाबु हमरा पढ़े में खर्च नही द सकला आ हमर शिक्षा अधूरे रहिगेल , अन्त में हमरा जेक रिक्शा नहीं चलाबैं परै ,
हम फेर प्रश्न क देलियानी जे बोउवा आ बुची सब एखन की करैत छैथि ?
हरी काका कहलैथि जे -
हमर जेट पुत्र बी- टेक इंजीनियरिंग कोर्स के फ़ाइनल में छैथि , आ दोसर पुत्र एम बीया क तयारी करैत छैथ और पुत्री अंतर स्नातक परीक्षा दके अपन मायक संग घर मे काज धन्दा के देखैत छैथि ,
हमरा मन में बेर - बेर हिनका से प्रश्न पुछैक इच्छुक छल मुद्दा हम करब त करब की ?
हरी काका हम अपन गंतब्य स्थान के नजदीक तक आबी गेल छी, जायत - जायत बस एकटा प्रश्न के उत्तर देयत जाऊ
बाजु की पूछय चाहैत छी ---
हम झट सन बजलो हरी काका की जिनगी बेकार अछि ?
हरी काका से झट सन उत्तर भेटल - नीमैह गेल त जिनगी कमाल अछि ,


ऐतबा में हम अपन जेबी में सं एगो नमरी निकैल के हरी काका के देबय लागलो की हरी काका हमरा मना क देलानी ई कहीके की अहुं हमर जेट पुत्र के समान छी अह्ना अहि से दोसर कुन्नु काज करब , कतबो जिद कलियन , आखिर अन्त में ओ एको टाक हमरा से नहीं लेलैथि
नोट - (आखिर की कारण छल जे ओ हमरा से एको टा टाक नहीं लेलैथि हम मैथिल छी,
ताहि द्वारे या हुनका से बिसेष किछ बात कय लेलो ताहि द्वारे , या हम हुनका से उम्र में बहुत छोट छेलो दही द्वारे , या हमहू हुनके जेक गरीब मजदुर बनी प्रदेश आयल छी ताहि द्वारे , या हुनका अपन मैथिल लोक से बेशी प्रेम छानी ताहि द्वारे, आखिर की कारन छल , सब प्रान्त में देखैत छी बहुत रास अपन मैथिल भाई छैथि , कियक नै हरी काका सन छैथि जे एक दोसर से अपन गाम घर जेका एक दोसर संग भाई चार जेका ब्यबहार करैथि , ई बात हम अपना - आप के मन में बस ईहा सोचैत छेलो , आई ई बात कतेको अपन मैथिल भय - बंधू के सामने अपन मुहं से सेहो बतेलो कियोक नहीं बजला जे आखिर कारन की छल , अहं सब पाठक गन जरुर बतायब जे कारन की छल )
मदन कुमार ठाकुर,
कोठिया पट्टीटोल,
झंझारपुर (मधुबनी)
बिहार - ८४७४०४,
मोबाईल +919312460150 ,
ईमेल - @yahoo.com

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गजल

गजल
पूरबे आ पश्चिमे सँ अएलै एहन फसादी रे जान
रे जान लगलै बड़का पसाही रे जान


ओ जे मोटेलै बलू कोना मोटेलै रे जान
रे जान खेने हेतै सभटा धन सरकारी रे जान


दोसर के काजो करैए उपर सँ लातो खाइए
एहने होइए बुड़िबक बड़ा बिहारी रे जान


पघिलैए जे लाहक जेना जमैए मोमक जेना
रे जान कहबै ओहए बड़ा सुतारी रे जान

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नताशा 43 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक लेल नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ आनन्द उठाऊ।)


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आचार्य रमानाथ झा रचनावली


आचार्य रमानाथ झा रचनावली (पाँच खण्डमे)भारतीय भाषा संस्थानक सहयोगसँ वाणी प्रकाशन द्वारा प्रकाशित भऽ गेल अछि। एहिमे स्वर्गीय रमानाथ झाक मैथिली, हिन्दी, इंग्लिश आ संस्कृत लेखनकेँ एक ठाम समेटबाक प्रयास कएने छथि संकलनकर्ता-सम्पादक श्री मोहन भारद्वाज।
एहिमे पहिल खण्डमे विद्यापति
दोसर खण्डमे मैथिली साहित्य
तेसर खण्डमे मिथिला ओ मैथिली
चारिम खण्डमे विविध
आ पाँचम खण्डमे संस्कृत रचना
देल गेल अछि। स्वर्गीय रमानाथ झा जीक रचना सभ बड्ड दिनसँ अनुपलब्ध छल । एहि रचनावलीक सम्पूर्ण सेट रु.५०००/- मे उपलब्ध अछि।
पुस्तक प्राप्ति स्थान:
वाणी प्रकाशन, ४६९५,२१-A,दरियागंज, नई दिल्ली-११०००२
वाणी प्रकाशन, अशोक राजपथ (पटना कॉलेजक सोझाँ), पटना (बिहार)

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सोमवार, 8 मार्च 2010

मिथिलेश कुमार राय केर दू गोट कविता

कथादेशक नवलेखन अंक सँ हिंदी पाठकक सोझां आबय वाला मिथिलेश कुमार राय कविता आ कथा दोनो विधा मे सामान रूप सँ सक्रिय छथि. मैथिली केर पढ़ौनी आ लिखौनीक खगता वाला माहौल मे पलल बढ़ल हेबाक कारणें मैथिली मे रचनात्मक क्रिया कलाप करबा मे परेशानी केर अनुभव होइत छन्हि, संकोच सेहो ! मुदा बेर-बेरक उत्साह वर्धन आ किछु मित्र सबहक सहयोगक बलें एम्हर मैथिली लेखन दिस गंभीरता सँ प्रवृत्त भेला य'.
भारतीय भाषा परिषद सँ पुरस्कृत हिनक दू गोट छोट-छोट हिंदी कविताक अनुवाद प्रस्तुत करैत प्रसन्नताक अनुभव भ'रहल अछि !कविता वागर्थ - नवम्बर 2007 सँ साभार लेल गेल अछि . हमरासभ ई आशा क' सकैत छी जे मिथिलेशक मूल मैथिली रचना शीघ्रे पढ़बा लेल भेटत ! अनु. -कुमार सौरभ .

ईश्वरक संतान

आइ
जखन ऊपर सँ टूटि गेल अछि
अपना सबहक सम्पर्क
आ बन्न भ'गेल अछि
ग्रंथक रचल जेनय
की एखनहु जनमैत हेतैक
देवता सबहक ओहिठाम संतान
की राखल जाइत हेतैक ओकर सबहक नाम
की ओहो सब अपन पहचान लेल छटपटैत हेतैक

अपन जुआनीक दिन मे
पोखरिक कात बैसि
चुपचाप गिट्टी फेकैत रहैत हेतैक
पानि मे !


बच्चा भगवान होइत अछि*

जे भगवान होइत छथि
भस्म क' सकैत छथि
चक्र चला हलालि सकैत छथि गरदनि
भगवान पाथर बना सकैत छथि
अभिमंत्रित जल छीटि
किछु केर किछु क' सकैत छथि भगवान

बच्चा खाली कानि सकैत अछि
हिचकि-हिचकि
सूति जेबाक लेल !


(* तात्कालिक निठारी कांड आ बाल शोषण सँ व्यथित कविक अभिव्यक्ति .)

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कैथी सीखू भाग- ३ (नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ देखू।)


अन्तिम पाँती अपनासँ देवनागरीमे बदलू।

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शनिवार, 6 मार्च 2010

नताशा 42 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक लेल नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ आनन्द उठाऊ।)

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शुक्रवार, 5 मार्च 2010

मिथिला दर्शनक मार्च-अप्रील,2010 अंक

मिथिला दर्शनक नव अंक बजार मे उपलब्ध अछि। एहि अंकक सामग्री पर एक दृष्टिः
1.मानवमुखी विज्ञान(संपादकीय)
2.आखर लेख(एकल नागरिकताक परिप्रेक्ष्य मे भूमिपुत्रवाद पर कार्यकारी संपादकक टिप्पणी)
3. हमरो चाही अप्पन राज्य(मिथिला राज्यक मांग पर जीवकांत,धनाकर ठाकुर,आशीष झा आ विभूति आनंदजी केर टिप्पणी)
4. वैश्विक मंदी,मूल्य वृद्धि आ हम सब-नरेंद्र झा
5. ब्रह्मांड-विमर्श(महाप्रयोगक संदर्भ मे): योगेंद्र पाठक वियोगी
6. जीन परिवर्द्धित भांटा कतेक उपयोगी-विद्यानाथ झा
7. नेपालक डायरी-रामभरोस कापड़ि भ्रमर
8. एकटा बड्ड पुरान गप्प-लिली रे केर उपन्यासक अगिला अंश
9. हमर धरोहर(डॉ. लक्ष्मण झाक 1956 केर व्याख्यान)
10. पैंतालीस मिनट(कथा)-नीता झा
11. जुट्टीवाली देवी(कथा)-ऋषि वशिष्ठ
12. खसैत देवाल(कथा)-कुमार मनोज कश्यप
13. निबंध-कथाःमिथिलेश कुमार झा
14. विवेकानंद ठाकुर, कुमार मनीष अरविन्द,रामपुनीत ठाकुर तरुण, उदय नाथ झा अशोक आ डॉ. ब्रज किशोर वर्मा केर कविता
15. भाषा-टीकाक बहन्ने(विभूति आनंदक पोथी केर समीक्षा)- परमानन्द प्रभाकर
16. बाल-अपराधःकारण आ निराकरण-पन्ना झा
17. रूप-चर्चा
18. भनसा-भातः वीणा झा
19. आधुनिक जीवनक उपसर्गःरीढक दर्द-डॉ. अरविन्द कुमार चौधरी
20. ठंढ आ सर्दी-डॉ. उमाशंकर चौधरी
21. गोनू झा बनाम बंगटा
22. वर्ग पहेली-3
23. नेपाल मे आधुनिक मैथिली नाटकःमोजर देबाक प्रतीक्षा मे-रामभरोस कापड़ि भ्रमर
24. प्रबोध साहित्य सम्मान आ मिथिला सं जुड़ल आन गतिविधि सभ पर संक्षिप्त रिपोर्ट

पत्रिका लेल सम्पर्कः09709716464,09811406106

मिथिला समेत देश भरिक स्वास्थ्य-सूचना आधारित ब्लॉग: www.upchar.blogspot.com

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बृहस्पतिवार, 4 मार्च 2010

प्रीति ठाकुरक - मैथिली चित्रकथा ( नीचाँक आठो टा चित्रकेँ बेरा-बेरी क्लिक करू आ पढ़ू-देखू।)- Story narrated by Gajendra Thakur (drawn in Videha Children-literature workshop)










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मंगलवार, 2 मार्च 2010

हमर प्रेम


कृष्णमोहन झा

हमर ठोरक पपड़ी पर जे एकटा मर्म सुखा रहल अछि
हमर जिह्वा पर जे धूरा उड़ि रहल अछि
हमर सोनितक धार सँ जे धधरा उठि रहल अछि
हमर देहक शंख सँ जे समुद्रक आवाज आबि रहल अछि
हमर आत्माक अंतरिक्ष मे जे चिड़ै-चुनमुनी कलरव क’ रहल अछि
हमर स्मृतिक गाछ पर जे झिमिर-झिमिर बरखा भ’ रहल अछि
तकरा सभक चोट आ खोंच केँ
टीस आ मोंच केँ
रूप आ रंग केँ
स्वर आ गंध केँ
कोना पानक एकटा बीड़ा बनाक’
हम अहाँक आगू राखि दी आ कही-
लिअ’ ग्रहण करू
ई थिक अहाँक प्रति हमर प्रेम…

जखन कि हमरा बूझलए
जे हमर प्रेम
गुड़ियाम मे बान्हल एक टा पियासल बरद अछि
जे खाली बाल्टी केँ देखि-देखिक’ भरि राति हुकरैत अछि

हमर प्रेम अछि
छिट्टा सँ झाँपल एक टा छागर
जे बन्द दुनिया सँ बहरयबाक बेर-बेर चेष्टा करैत अछि

हमर प्रेम धूरा-गर्दा मे जनमल एक टा टुग्गर चिलका अछि
जे दीने-देखार हेरा गेल अछि
बीच बाजार मे

तखन अहीं कहू
कोना हम अपन आत्माक फोका केँ
एक टा मृदुल भंगिमाक संग अहाँक सम्मुख तस्तरी मे राखि दी
आ कही-
लिअ’ ग्रहण करू…

हमर प्रेम जँ किछु अछि तँ एक टा फूजल केबाड़
हमर प्रेम जँ किछु अछि तँ एक टा कातर पुकार
कि आउ
अइ दुनियाक सभ सँ कोमल आ सभ सँ धरगर चीज बनिक’
आबि जाउ

अहाँक स्वागत मे
हमरा ठोर सँ ल’क’ अहाँक ओसार धरि जे ओछाओल अछि
ओ कोनो कालीन नहि
अहाँक तरबा लेल व्यग्र
खून सँ छलछ्ल करैत हमर ह्रदय अछि

आ हमर हड्डीक प्राचीन अंधकार मे
ओसक एक टा बुन्न सन कोमल
अनेक युग सँ अहाँक बाट ताकि रहल अछि हमर प्राण…

हमर प्राण अछि अहाँक आघात लेल आतुर
अहाँक आघात एहि जीवनक एक मात्र त्राण

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कैथी सीखू भाग-२ (नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ देखू।)

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मार्च,2010 केर पाबनि-तिहार

1 मार्चः सप्तडोरक बंधन। होली
2 मार्चः चित्रगुप्त पूजन। होली भाई दूज टीका
3 मार्चः गणेश चतुर्थी व्रत
4 मार्चः ईद-ए-मौलाद
5 मार्चः रंगपंचमी
7 मार्चः भानुसप्तमी पर्व(सूर्यग्रहणतुल्य),कालाष्टमी व्रत,अष्टका श्राद्ध
11 मार्चः पापमोचिनी एकादशी व्रत
13 मार्चः शनि प्रदोष व्रत(पुत्र प्राप्ति हेतु)
14 मार्चः खरमास शुरू। मासिक शिवरात्रि व्रत। मीन संक्रांति रात्रि 1030 बजे। पुण्यकाल सायं 4.06 सं सूर्यास्त तक
15 मार्चः स्नान-दान-श्राद्ध केर सोमवती अमावस्या। हरिद्वार मे द्वितीय शाही स्नान। चैत्र संक्रांति प्रारंभ
16 मार्चः चैत्र नवरात्र प्रारंभ। नवपंचांग फल-श्रवण। कलश स्थापना। आरोग्य व्रत। तिलक व्रत। विद्या व्रत । नवसंवत्सरोत्सव
17 मार्चः श्रीरेमन्त पूजन
18 मार्चः गणगौरी तीज व्रतोत्सव। गौरी तृतीया। सौभाग्यसुंदरी व्रत। मनोरथ तृतीया व्रत। सरहुल
19 मार्चः गणेश चतुर्थी व्रत
20 मार्चः नागपंचमी। लक्ष्मीपूजा। चैती छठि केर खरना
21 मार्चः स्कंद षष्ठी व्रत। चैती छठि केर संझुका अर्घ्य। विल्वाभिमंत्रण षष्ठी। गज पूजा
22 मार्चः वासंतिक दुर्गापूजा प्रारंभ। महासप्तमी व्रत। कालरात्रि सप्तमी।चैती छठि केर प्रातः अर्घ्य
23 मार्चः श्रीदुर्गामहाष्टमी व्रत। हरिद्वार मे मनसा देवी मेला
24 मार्चः श्रीरामनवमी व्रत। अयोध्या परिक्रमा। श्रीदुर्गा महानवमी
25 मार्चः चैत्र विजयादशमी
26 मार्चः कामदा एकादशी व्रत
27 मार्चः शनि प्रदोष व्रत(पुत्र प्राप्ति हेतु)।अनंग त्रयोदशी
28 मार्चः मदनभंजिका चतुर्दशी
29 मार्चः चतुर्दशी। पूर्णिमा व्रत। सत्यनारायण पूजा-कथा
30 मार्चः श्रीहनुमान जयंती। स्नान-दान केर चैत्र पूर्णिमा। मथुरा मे श्रीद्वारकाधीश कें छप्पन भोग। वैशाख स्नान-नियम प्रारंभ
सम्पर्कः www.krraman.blogspot.com

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मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
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चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

बिदेसिया (संकल्पित नाटिका)

विद्यापतिक बिदेसिया (संकल्पित नाटिका).... भोजपुरीक साहित्य मैथिलीसँ कम समृद्ध अछि मुदा से अछि मात्र परिमाणमे, गुणवत्ताक दृष्टिमे ई कतेक क्षेत्रमे आगाँ अछि। भोजपुरीक भिखाड़ी ठाकुरक बिदेसियाक सन्दर्भमे हम ई कहि रहल छी। भिखाड़ी ठाकुर कलकत्तामे प्रवासी... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

कथा- माउगि

कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

मातृत्व...

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व.... नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि.... (आगाँ पढू)
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मैथिल आर मिथिला
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