शुक्रवार, 25 फरवरी 2011

गीत बालविबाह@प्रभात राय भट्ट


गीत बालविबाह@प्रभात राय भट्ट

हम नए ब्याह करब यौ बाबा वालीउमरिया में !!

पढ़ लिख खेल कूद दिय,हमरा अपन संग्तुरिया में !!

--निक घर वर भेटल छौ,दहेज सेहो कमे मंगैछौ !!

आगुम की हेतै से नए मालूम,ब्याह करहीटा परतौ !!

ब्याह करहीटा परतौ गे बेट्टी.........................!!

--हम चौदह वरखक कन्याकुमारी अहाक राजदुलारी !!

मुदा दूल्हा छैथ विदुर आ पाकल हुनक केस दाढ़ी !!

हम नए ब्याह करब यौ बाबा वालिउमरिया में २ !!

--दूल्हा विदुर भेलई तईस: की धन सम्पति अपार छई !!

भेटतौ नए कतौ एहन घर वर दूल्हा सेहो रोजगार छई !!

--रुईक जाऊ रुईक जाऊ बाबा यौ हमरा पैघ होब दिय !!

पैढ़लिख क हमरो कोनो सरकारी नोकरी करदिय !!

बेट्टावाला अहाक दरवाजा पर अओता !!

कहता अहाक बेट्टी स:हम अपन बेट्टा क ब्याह करब !!

अहा कहब नै नै अखन हम बेट्टी क ब्याह नए करब !!

फुइक फुइक क चाय पीयब ,अहू किछ शान धरब !!

हम नए ब्याह करब यौ बाबा वालिउमरिया में !!

--एक लाख टका के बात कहले तू भगेले सयान गे !!

बेट्टी क भविष्य नए सोचलौ,हमही छलौ नादान गे !!

बेट्टी क ब्याह कोना हयात सतौने छल हमरा दहेज़ क डर !!

बाल विबाह करबई छलौ,खोईज लेलौ बुढ्बा वर !!

नए ब्याह करबौ गे बेट्टी तोहर वालिउमरिया में !!

पढ़ लिख खेलकूद तू अपन संगतुरिया में !!

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट

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हमर परिचय - प्रभात राय भट्ट


ई अछि हमर परिचयरुपी कविता,
ई अछि हमर प्रेमपरागक सरिता,
धन्य धन्य अछि भाग्य हमर,
जन्म लेलौ हम मिथिलाधाम में,
बास अछी हमर पावनभूमि धिरापुर गाम में,
स्वर्ग स सुन्दर आनन्द बरसैय,अई मिथिलाधम में,
धिरापुर केर धिरेस्वरमहादेव छैथ बड़ ओढरदानी,
हम बालक प्रभात अबोध अज्ञानी,
पिता गंगेस्वर छैथ ईश्वर के स्वरूप ,
माता गायत्री ममता स भरल देवीक रुप,
भातृत्व प्रेमक प्रतिक प्रकाश प्रभात प्रविन,
सब भाई मे अछी आदर सत्कार स्वाभिमान नबिन,
सुन्दर सरल सुशिल शालीन बहिन आशा,
धन्य धन्य अछि भाग्य हमर पुरा भेल अभिलाषा ,
भौजी सद्खन ममता स भरल स्नेह बर्सबैय,
भावो भावनात्मक बत्सल स्नेह बच्चा सब मे बटैय,
हमर मन उप्वनमें बास करैय चन्द्रबदन पत्नी पुनम,
सोन स सुन्दर सरल शुशिल बेट्टी अछी स्वर्णिम,
सत्यमार्गी संतान तेज्स्व्बी बेट्टा अछी सत्यम ,
धन्य धन्य अछि भाग्य हमर जन्म लेलौ मिथिलाधाममें!

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट, पिता :-गंगेस्वर राय, माता :-गायत्री देवी, ग्राम :-धिरापुर -महोतरी, अस्थाई बसोबास :-जनकपुरधाम - नेपाल.

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बृहस्पतिवार, 24 फरवरी 2011

गीत स्वतंत्रता के - प्रभात राय भट्ट ...


सुनु सुनु ययो बाबु भैया ,
नींद स तू जगबा कहिया ,
भूखे पेट पेटकुनिया देला स
नई चलत आब कम हौ
कालरात्री के भेलई अस्त ,
उठह उठह कर दुसमन के पस्त ,
आइधैर तोरा पर शासन केलक ,
आब कतय दिन रहबा गुलाम हौ,
भेलई परिवर्तन बदैल गेलई दुनियाँ,
मधेस अखनो रहिगेलई शासक केर कनियाँ,
हसैछ दुसमन दैछ ललकार ,
उठह उठह दुष्ट शासक के करः प्रतिकार ,
मग्लाह स त भूख गरीबी रोग शोक देलकह ,
आब छिनक ला ला अपन अधिकार हौ ,
अखनो नई जगबा त जिनगी हेतह बेकार हौ ,
बेसी सुत्बा त अम्लपित बैढ़ जेताह ,
बिस्फोट भक्ह प्राण निकैइल जेताह ,
उठह उठह करः अपन प्राण क रक्षा ,
सिखह तू मान-स्वाभिमान क शिक्षा ,
प्राण तोहर मधेस माई में ,
मान-स्वाभिमान छह तोहर स्वतंत्रता में ,
बन्धकी परल छह तोहर मधेस माई,
उठह उठह हों बाबु भाई ,
मधेस माई केर मुक्ति दिलाब ,
सुन्दर शांत विकाशील मधेस बनाब ,
कालरात्री केर भेलई अस्त ,
उठह उठह करः दुसमन केर पस्त ,

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट, पिता :-गंगेस्वर राय, माता :-गायत्री देवी, ग्राम :-धिरापुर -महोतरी, अस्थाई बसोबास :-जनकपुरधाम - नेपाल

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माहासंग्राम (गीत) - प्रभात राय भट्ट


संग्राम संग्राम ई अछि मधेस मुक्ति केर महासंग्राम !!
विना हक हित अधिकार पौने हम नए लेब आब विश्राम !!
अईधैर हम सहित गेलौ दुस्त शासक केर अन्याय !!
मुदा आब नई हम सहब लक हम रहब अपन न्याय !!
निरंकुश शासक शासन करईय घर में हमरा घुईस !!
मेहनत मजदूरी हम करैतछि, खून पसीना ललक हमार चुईस !!


अढाईसय वरखक बाद आई भेलई मधेस में भोर हौ !!
गाऊ गाऊ गली गली में आजादी क नारा लागल छै जोर हौ !!
निरंकुश शासक कहैया हम छि बड़ा बलबंत !!
मुदा आई हेतई दुष्ट निरंकुश शासक केरअंत !!
संग्राम संग्राम यी अछि मधेस मुक्ति केर महासंग्राम !!
विना हक हित अधिकार पौने आब नई हम लेब विश्राम !!


अईधैर हम सहैत गेलौ उ बुझलक हमरा कांतर !!
तन मन धन सब कब्जा कौलक हमरा बुझलक बांतर !!
आब हम मांगब नई छीन क लेब अपन अधिकार हौ !!
उतैर गेलौ हम रणभूमि में करैला दुष्ट शासक केर प्रतिकार हौ !!
मेची स महाकाली चुरेभावर स तराई,समग्र भूमि अछि मधेस माई !!
हिन्दू मुश्लिम यादव ब्राम्हिन थारू सतार संथाल हम सब एक भाई !!
जातपात कोनो नई हमर हम सब छि एक मधेसी हौ !!
अपन भाषा भेष संस्कृति नया संविधान में हम करब समावेशी हौ !!


रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट, पिता :-गंगेस्वर राय, माता :-गायत्री देवी, ग्राम :-धिरापुर -महोतरी, अस्थाई बसोबास :-जनकपुरधाम - नेपाल

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बालविधवा - प्रभात राय भट्ट


आहा जे नई भेटतौ त जिनगी रहित हमर उदास !!
सागर पास होइतो में बुझैत नई हमर मोनक प्यास !!
अहि स पूरा भेल हमर जिनगी केर सबटा आस !!
नजैर में रखु की करेजा में राखु अहि छि हमर भगवान !!
उज्जरल पुज्जरल हमर जिनगी में आहा एलौ !!
रंग विरंग क ख़ुशी केर फूल खिलेलौं !!
की हम भेलू अहाक प्रेम पुजारी ,अहा हमर भगवान यौ !!
मुर्झायल फूल छलौ हम ,अहि स खिलल हमर प्रेमक बगिया !!
बालविधवा हम अबोध छलौ ,समाज केर पैरक धुल !!
उठैलौ अहा हमरा करेजा स लगैलौ, बैनगेली हम फूल !!
पतझर छलौ भेल हम,सिच सिच क अहा लौटेलौ हरियाली !!
अनाथ अबला नारी के अपनैलौ आ बनेलौ अपन घरवाली
अहि स यी हमर जिनगी बनल सुन्दर सफल सलोना !!
गोद में हमर सूरज खेलैय,अहा बनलौ बौआक खेलौना !!
हमर उज्जरल पुज्जरल जिनगी में अहा येलौ !!
रंग विरंग क ख़ुशी केर फूल खिलेलौ,ख़ुशी स हमर आँचल भरलौं !!
हमर मन उपवन में अहि बास करैत छि, अहि केर हम पूजित छि !!

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट, पिता :-गंगेस्वर राय, माता :-गायत्री देवी, ग्राम :-धिरापुर -महोतरी, अस्थाई बसोबास :-जनकपुरधाम - नेपाल

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हम रहित छि परदेश - प्रभात राय भट्ट..


हम रहैत छि परदेश मुदा प्रेम अछि अपने देश स:!!
हम छि पावनभूमि मिथिलाधाम मधेस स:!!

लिखैत छि चिठ्ठी अपन ब्याथ केर नैनक नोर स:!!
मोनक बात चिठ्ठी में लिखैत छि मुदा बाईज नई सकैत छि ठोर स:!!

लिखैत छि अपन दुःख क पाती,रहैत छि कोना परदेश में !!
अईब केर परदेश हम फैस गेलौ बड़का क्लेश में !!

माए केर ममता भौजी केर स्नेह बिसरल नई जाईय !!
साथी संगी खेत खलिहान हमरा बड मोन परईय !!

माथ जौ दुखैत हमर माए लग में अब्थिन !!
की भेल हमर सोना बेट्टा के कहिक माथ मालिश करथिन !!

बोखार जौ लागैत हमरा भौजी बौआ बौआ करैत लग अब्थिन !!
दुधक पट्टी माथ पर रख्थिन आ दबाई ला क हमरा खुअब्थिन !!

मुदा अ इ परदेश में धर्ती गगन चंदा सूरज सब लगईय अनचिन्हार !!
बड अजगुत लगैय हमरा देख क ऐठामक दूरब्यबहार !!

मानब्ता नामक छीज नई छई इन्शान बनल अछि इंजिन !!
अठारह घंटा काम कर्बैय मालिक बुझैय हमरा मशीन !!

जान जी लगाक केलौ काम दू चैरगो रोग हमरा भेटल इनाम !!
नई सकैत छि त आब कामचोर कहिक हमरा केलक बदनाम !!

लिखैत छि कथा अपन ब्यथा केर बुझाब आहा सब बिशेष में !!
नून रोटी खैहा भैया अपने देश में ,जैइहा नई परदेश में !!

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट, पिता :-गंगेस्वर राय, माता :-गायत्री देवी, ग्राम :-धिरापुर -महोतरी, अस्थाई बसोबास :-जनकपुरधाम - नेपाल

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बुधवार, 23 फरवरी 2011

फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्ट काठमाण्डू, नेपालक सम्मान



फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्टद्वारा स्थापित मैथिलीक सभसँ पैघ राशिक पुरस्कार फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान २०६७ सँ मिथिला क्षेत्रक सुपरिचित रङ्गसंस्था मिथिला नाट्यकला परिषदकेँ सम्मानित करबाक निर्णय कएल गेल अछि। एहि सम्मानमे दू लाख एक हजार) टकाक संगहि प्रशस्तिपत्र प्रदान कएल जएतैक।
जनकपुरधामस्थित मिथिला नाट्यकला परिषद ( मिनापक वि.सं. २०३६ सालमे स्थापना भेल छल। तीन दशकसँ अधिक समयसँ मूलतः नाट्यविधाकेँ केन्द्रमे राखि ई संस्था नाट्य संगीत साहित्य तथा सामाजिक अभियानक माध्यमसँ मैथिली भाषा-संस्कृति एवं समाजक विकासमे विशिष्ट योगदान दैत राष्ट्रिय-अन्तर्राष्ट्रिय स्तरपर ख्याति कमबैत आएल अछि।
तहिना फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कारसँ सप्तरी राजविराजनिवासी श्रीमती मीना ठाकुर आ बुधनगर मोरङनिवासी दयानन्द दिग्पाल यदुवंशीकेँ सम्मानित करबाक निर्णय कएल गेल अछि। एहि पुरस्कारमे पच्चीस-पच्चीस हजार टकाक संगहि प्रशस्तिपत्र प्रदान करबाक प्रावधान अछि। एहि दुनू व्यक्तिमेसँ श्रीमती मीना ठाकुर विगत चारि दशकसँ मैथिली सांस्कृतिक, साहित्यिक तथा साङ्गीतिक क्षेत्रमे निरन्तर क्रियाशील रहैत विविध गतिविधिक माध्यमसँ महिला सशक्तिकरणमे निरन्तर सक्रिय छथि। सप्तरीक बेस सक्रिय संस्था- मैथिल महिला परिषदक संस्थापक अध्यक्ष  ठाकुरक सम्पादनमे सृजनधारा (कवितासङ्ग्रह प्रकाशित छनि। तहिना दयानन्द दिग्पाल यदुवंशी विगत चारि दशकसँ साहित्य तथा सत्संगक माध्यमसँ मैथिली भाषा-संस्कृतिक विकास एवं सामाजिक सद्‌भाव सम्बर्द्धनमा निरन्तर सक्रिय छथि। आशुकवित्वप्रतिभासम्पन्न कवि दिग्पालक कहिया फेरु अबै छी (कवितासङ्ग्रह प्रकाशित छनि।
विख्यात् उद्योगपति तथा समाजसेवी डा. उपेन्द्र महतोद्वारा स्वर्गीय माता फूलकुमारी महतोक नामपर अपन मातृभाषा तथा मातृसंस्कृतिक उत्थानार्थ स्थापित एहि पुरस्कारक लेल प्रसिद्ध साहित्यकार डा. राजेन्द्र विमलक संयोजकत्वमे श्रीमती पूनम ठाकुर आ धीरेन्द्र प्रेमर्षिक सदस्यतावला तीन सदस्यीय सिफारिश समिति गठन कएल गेल छल। स्व. फूलकुमारी महतोक जन्मजयन्तीक सन्दर्भमे फागुन १५ गते तदनुरूप फरवरी २७ तारिख कऽ जनकपुरधाममे एक विशेष कार्यक्रमक आयोजन कऽ ई सम्मान तथा पुरस्कार समर्पण कएल जएबाक कार्यक्रम अछि। धीरेन्द्र प्रेमर्षि- - फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान समितिसदस्य सचिव छथि।

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता (नेपाल देशक भाषा-साहित्य,  दर्शन, संस्कृति आ सामाजिक विज्ञानक क्षेत्रमे  सर्वोच्च सम्मान)
नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता
श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)
श्री राम दयाल राकेश (1999)
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994)
नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान मानद सदस्यता
स्व. सुन्दर झा शास्त्री
नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव
फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्ट काठमाण्डू, नेपालक सम्मान
फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान २०६७ - मिथिला नाट्यकला परिषदकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ - सप्तरी राजविराजनिवासी श्रीमती मीना ठाकुरकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ -बुधनगर मोरङनिवासी दयानन्द दिग्पाल यदुवंशीकेँ
साहित्य अकादेमी  फेलो- भारत देशक सर्वोच्च साहित्य सम्मान (मैथिली)


           १९९४-नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र यात्री १९११-१९९८ ) , हिन्दी आ मैथिली कवि।


           २०१०- चन्द्रनाथ मिश्र अमर (१९२५- )-
मैथिली साहित्य लेल।




साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान ( क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य आ गएर मान्यताप्राप्त भाषा लेल):-
            २०००- डॉ. जयकान्त मिश्र (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)

           २००७- पं. डॉ. शशिनाथ झा (क्लासिकल मध्यकालीन साहित्य लेल।)
            पं. श्री उमारमण मिश्र



साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली

 
१९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन)
१९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य)
१९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास)
१९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य)
१९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य)
१९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास)
१९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण)
१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य)
१९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना)
१९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य)
१९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य)
१९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास)
१९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य)
१९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास)
१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास)
१९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य)
१९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा)
१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)
१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा)
१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)
१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)
१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा)
१९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)
१९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध)
१९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)
१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)
१९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य)
१९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू, कथा संग्रह)
१९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य)
१९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य)
१९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा)
२०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)
२००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)
२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य)
२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)
२००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)
२००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)
२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)
२००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)
२००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा)
२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)
२०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास)


 
साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार

 
१९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)
१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी)
१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू)
१९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)
१९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू)
१९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़)
१९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला)
१९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला)
२०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)
२००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)
२००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू)
२००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया)
२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी)
२००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)
२००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)
२००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)
२००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)
२००९- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी-  सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)
२०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास ( "इग्नाइटेड माइण्ड्स" - मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा"- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी)


साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार
 
२०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल"  लेल

 
प्रबोध सम्मान

 
प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- )
प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- )
प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- )
प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- )
प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- )
प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- )
प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- )
प्रबोध सम्मान 2011- श्री सोमदेव (1934- )


 
यात्री-चेतना पुरस्कार

 

 
२००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;
२००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;
२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;
२००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा;
२००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;
२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;
२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;
२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;
२००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी
२००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा
२०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी, महिषी, सहरसा

 


कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान

 
२००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झा (कविता संग्रह “एना त नहि जे”)
२००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता” (नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश)
२०१० ई.- श्री महाप्रकाश (कविता संग्रह “संग समय के”) 


भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता
युवा पुरस्कार (२००९-१०) गौरीनाथ (अनलकांत) केँ मैथिली लेल।


भारतीय भाषा संस्थान (सी.आइ.आइ.एल.) , मैसूर
रामलोचन ठाकुर:- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००३-०४ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त। 
रमानन्द झा 'रमण':- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००४-०५ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।

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मंगलवार, 22 फरवरी 2011

अप्पन मिथिला .......अप्पन मिथिला

अप्पन मिथिला .....जेना नंदन कानन
जतऽ बहए सोन गंगा कोसी निरंजन

आउ कने लऽ चली जनकपुर धामवां

राम जी सीता जीक विवाह स्थानवां

सीता जी स्वयंवर, हुनके आस्नान्वान
सोनमती दूधमती जलेश्वर धाम वान

अप्पन मिथिला ....अप्पन मिथिला ....अप्पन मिथिला

चलू कने सब कियो ....मधुबनी नगरिया
कला चित्रकारी करे सभके उजरिया ...

दरभंगाक राज पाट...महल अटरिया
विद्यापतिक कविता अति मनोहरिया ,

सौराठ सभा गाछी के तँ अद्भुत नजरिया
अप्पन मिथिला ....अप्पन मिथिला ...अप्पन मिथिला

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हम साँच बजैत छी ...डॉ. शेफालिका वर्मा

हुजूर !
हम साँच साँच बजैत छी
साँच छोड़ी किछ नहि बजैत छी
हम दहेज़ नहि लैत छी .
राति दिन समाज सुधार में व्यस्त
रहैत छी
खाइत छी, पिवैत छी
मस्त रहैत छी
हुजूर ,हम दहेज़ नहि लैत छी.
की बाजलों
बड़का बौआ क व्याह में ?
नै नै जी नै
गलत बुझल अछ अहांके
स्थिति जानल नहि अहांके
टी वी देख बिन चैन नहि
फ्रिज क पानि बिन चैन नहि
से जज साहब !
अपन बेटी के ओ देलन्हि
हुजूर, हम ते नहि लेलहुं
हमरा सन गरीब ओते फ्रिज कत
टी वी कत
बस एकटा बेटा अछि
आला आफिसर
की कहलों गहना जेवर ?
ठीक बाजलों हुजूर
गहना से लादि देलक बाप ओकर
बाजल
अहाँ किछ नहि बाजु
रंग में भंग नहि घोरु
ई स्त्री-धन थीक
हमर बेटीक जीवन थीक
जखन सासुर में दुःख भेटत
जेवर जात स सुख भेटत
सोनाक खान में रहत
चैन क निन्न सूतत
हुजूर हमर की दोष अछि
की बेटी वाला निर्दोष अछि ?
की बाजलों ,छोटका बौआ ?
बेरोजगार ,निर्धन अछ
बस एकटा नौकरीक प्रश्न अछ ...
कोनो कोलेज में डोनेशन द
प्रोफेसरी दिआय दिय
आ की लाख लाख टका दय
सरकारी नौकरी लगाय दिय
बांचल अपन सुख साधन क सामान
ओ स्वयं ल क अओतीह
बेटी अहींक सुख पओतिह
हमर की
हमर ते किस्मत जेहन अछ ओहने
रही जायत.......................................

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शनिवार, 19 फरवरी 2011

मिथिलाधाम - प्रभात राय भट्ट (नेपाल)

मिथिलाधाम...
स्वर्ग स: सुन्दर अछी हमार मिथिलाधम !!
ऋषि मुनि तपस्वी आर माँ जानकी जन्म लेलैथ अहि ठाम !!
ज्ञानभूमि तपोभूमि आर स्वर्गभूमि अछी हमर जनकपुरधाम !!
गौतम कणाद मन्दन भारतीसुशिला यी अछी मिथिलांचल के गरिमा !!
युगो युग गुनगान होइत अछी मथिलांचल धर्ति क महिमा !!
हरबाहक श्रमदेखि धर्ति प्रतिदान केलैथ सिया जी सन् गहना !!
मिथिला क सब घर स्वर्ग लगैया,लोग ईहा के साधु सन्त !!
चाहे कोनो ऋतु होइ सद्खन बहैत ईहा बसन्त !!
मनोरम प्रकृति आर मनमोहक मिथिला क संस्कृति !!
एक दोसर स: सब लोग करैत अगाध प्रेम आर प्रिती !!
हर जीव ईहा के स्वाभिमानी करैथ नै किनको आशा !!
मधुरों स: मधुर मिथिला क मैथिल भाषा !!
मिथिले मे पुनरजन्म लि यी सब लोग मे अछी अभिलाषा !!
महाकवि विधयापति आर नागार्जुन सन् प्रखर विद्वान !!
जग ब्याप्त कैलैथ मिथिला क गरिमामय शान !!
स्वर्ग स सुन्दर धर्ति अछी हमर मिथिलाधम !!!!!!

कविता के रचैता:- प्रभात राय भट्ट, ग्राम: धिरापुर - २, जनकपुरधाम नेपाल

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सपना देख्लौ बड अजगुत - प्रभात राय भट्ट


सपना देख्लौ बड अजगुत..

की कहिय राएत सपना देखलौं बड अजगुत हो भाई ,
हमरा पाछु लागल रहे एकटा बहुरुपिया कसाई,
धमकी देलक गल्ह्थी लगौलक देखौलक चाकू छुरा ,
जान स माएर देबौ,प्राण निकाइलदेबौ,नईतकर हमर माग पूरा ,
गाल हमर लाल कौलक खीच क मारलाक चटा चट चांटा ,
निकाल बाक्स पेटी स फटा फट दू चार लाख टाका,
डर स हम थर थर कापी मोन रहे घबराईल ,
तखने एकटा पहरा करैत प्रहरी हमरा लग चईल आईल ,
मोने मोन हम सोचलौ इ करता हमरा मदत ,
मुदा उहो रहे ओई चंडाल कसाई केर भगत ,
दुनु गोटा कान में कौलक फुस फूस ,
बाईन्ध क हमरा डोरी स घर में गेल घुईस ,
छन में सबटा भेल छनाक घर में परल डाका ,
झट पट जे आईंख खोल लौ ,त की कहिय काका ,
उ सपना नई सचे के बिपना रहे ,
हमर बिपति क एकटा घटना रहे ,

रचनाकार :-प्रभात राय भट्ट, ग्राम: धिरापुर - २, जनकपुरधाम नेपाल

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गीत वियोग के - प्रभात राय भट्ट


गीत वियोग के...

पिया निर्मोहिया गेलैथ परदेश ,
भेजलैथ नई चिठ्ठी आ कोनो सन्देस,
जिया घबराईय ,चैन नई भेटैय,
सद्खन साजन अहि पर सुरता रहैय,
अहाविन हे यौ साजन मोन नई लगैय - २

आईबकेर परदेस हमहू छि कलेश में ,
दुःख केर पोटरी की हम भेजू सन्देस में ,
आईबकेर परदेस मोन पचताईय ,
अहाक रे सुरतिया सजनी बिसरल नई जाईय ,
अहा विन हे ये सजनी मोन नई लगईय - २

नई चाही हमरा गहना ,रुपैया आऔर बड़का नाम ययौ ,
ख्याब नून रोटी झोपडी में मुदा चएल आउ गाम ययौ ,
अहाक मुन्ना मुन्नी पर नई अछि हमार काबू ,
बाट चलैत बटोही क कहीदईया झट सा बाबु ,
सम्झौला स झट पुईछबैठेय कतए गेल हमर बाबु ,
सुनीकेर बेट्टाबेट्टी के बोली ,दिल पर चैइल जाईत अछि गोली ,
चुप चाप हम भजईत छि ,मोने मोन हम लाजईत छि

कहिदु मुन्ना मुन्नी के बाबु गेल छौ पाई कमाईला विदेस ,
ल क अईतोऊ तोरासबल्या खेलौना आ मीठ मीठ सनेश ,
मोन तर्शैय हमरो सजनी अहाक प्यार आ अनुरागला ,
आ बेट्टा बेट्टी केर मिठिका दुलार ला - २ !!!

कविता के रचैता:- प्रभात राय भट्ट, ग्राम: धिरापुर - २, जनकपुरधाम, नेपाल

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जगु यौ नबतुरिया भारत !!!!

राजनीती के टहल टिकोरा ,

सोषित पिरित जनता !
लाल चौक पर परसु देखल ,
बिजित युद्ध के झगरा !

कानी रहल अछी मात्रभूमि ,
आहित बित्ता बित्ता!
देशक रक्चक भक्चक भेला ,
हाक परु आब ककरा ??

आइए रहीम तुलसी में झगरा ,
सबहक सबरंग जत्था !
डेढ़ चाउरकेर सिक्ख्क खिचरी ,
केने देसक टुकरा टुकरा !

लोसित भेल नैतिकताक डोरी ,
सगर कलंकित सत्ता ,
हम सब तैयो चुप्पी साधल ,
तारीत कतरा कतरा

जागु यौ नबतुरिया भारत
नबका भारत ठार करू!
अहिसौं जौं पालरा झारब,
करब की ??
आ कहब केकरा ???

स -स्नेह
विकाश झा

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बुधवार, 16 फरवरी 2011

डॉ. नित्यानन्द लाल दास केँ साहित्य अकादेमीक मैथिली अनुवाद पुरस्कार २०१०

डॉ. नित्यानन्द लाल दास केँ साहित्य अकादेमीक मैथिली अनुवाद पुरस्कार २०१० देल जाएत।


डॉ. नित्यानन्द लाल दास , पिता स्वर्गीय सूर्यनारायण दास। फारबिसगंज कॉलेज, फारबिसगंज सँ अंग्रेजी विभागाध्यक्ष पदसँ अवकाशप्राप्त। डॉ. सुरेन्द्र झा "सुमन"क संयोजकत्वक कार्यकालमे "मैथिली परामर्शदातृ समिति" (साहित्य अकादेमी, दिल्ली)क सदस्य। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलामक अंग्रेजी पोथी "इग्नाइटेड माइण्ड्स"क मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा" नामसँ अनुवाद। मैथिली पत्रिका सभ जेना बटुक, प्रयाग; मिथिला मिहिर, पटना; स्वदेश, दरभंगा; पहुँच, पटना आ परती पलार, अररियामे रचना प्रकाशित। १९६७ ई. सँ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मे सक्रिय। प्रांतीय प्रतिनिधि २००४ धरि जिला सरसंघचालक। जे.पी.आन्दोलनमे लोकतंत्र सेनानी।


नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता (नेपाल देशक भाषा-साहित्य,  दर्शन, संस्कृति आ सामाजिक विज्ञानक क्षेत्रमे  सर्वोच्च सम्मान)
नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता
श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)
श्री राम दयाल राकेश (1999)
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994)
नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान मानद सदस्यता
स्व. सुन्दर झा शास्त्री
नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव
फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्ट काठमाण्डू, नेपालक सम्मान
फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान २०६७ - मिथिला नाट्यकला परिषदकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ - सप्तरी राजविराजनिवासी श्रीमती मीना ठाकुरकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ -बुधनगर मोरङनिवासी दयानन्द दिग्पाल यदुवंशीकेँ
साहित्य अकादेमी  फेलो- भारत देशक सर्वोच्च साहित्य सम्मान (मैथिली)


           १९९४-नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र यात्री १९११-१९९८ ) , हिन्दी आ मैथिली कवि।


           २०१०- चन्द्रनाथ मिश्र अमर (१९२५- )-
मैथिली साहित्य लेल।




साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान ( क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य आ गएर मान्यताप्राप्त भाषा लेल):-
            २०००- डॉ. जयकान्त मिश्र (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)

           २००७- पं. डॉ. शशिनाथ झा (क्लासिकल मध्यकालीन साहित्य लेल।)
            पं. श्री उमारमण मिश्र




साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली

 
१९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन)
१९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य)
१९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास)
१९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य)
१९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य)
१९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास)
१९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण)
१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य)
१९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना)
१९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य)
१९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य)
१९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास)
१९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य)
१९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास)
१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास)
१९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य)
१९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा)
१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)
१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा)
१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)
१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)
१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा)
१९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)
१९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध)
१९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)
१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)
१९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य)
१९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू, कथा संग्रह)
१९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य)
१९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य)
१९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा)
२०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)
२००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)
२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य)
२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)
२००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)
२००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)
२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)
२००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)
२००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा)
२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)
२०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास)



 
साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार

 
१९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)
१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी)
१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू)
१९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)
१९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू)
१९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़)
१९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला)
१९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला)
२०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)
२००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)
२००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू)
२००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया)
२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी)
२००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)
२००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)
२००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)
२००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)
२००९- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी-  सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)
२०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास ( "इग्नाइटेड माइण्ड्स" - मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा"- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी)


साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार
 
२०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल"  लेल

 
प्रबोध सम्मान

 
प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- )
प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- )
प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- )
प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- )
प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- )
प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- )
प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- )
प्रबोध सम्मान 2011- श्री सोमदेव (1934- )



 
यात्री-चेतना पुरस्कार

 

 
२००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;
२००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;
२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;
२००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा;
२००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;
२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;
२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;
२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;
२००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी
२००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा
२०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी, महिषी, सहरसा

 


कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान

 
२००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झा (कविता संग्रह “एना त नहि जे”)
२००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता” (नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश)
२०१० ई.- श्री महाप्रकाश (कविता संग्रह “संग समय के”) 


भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता
युवा पुरस्कार (२००९-१०) गौरीनाथ (अनलकांत) केँ मैथिली लेल।


भारतीय भाषा संस्थान (सी.आइ.आइ.एल.) , मैसूर
रामलोचन ठाकुर:- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००३-०४ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त। 
रमानन्द झा 'रमण':- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००४-०५ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।

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सोमवार, 14 फरवरी 2011

किरीम लगाउ-मुहॅ चमकाउ

किरीम लगाउ-मुहॅ चमकाउ

।एकटा हास्य कथा।

बाबूबरही बज़ार सॅ घूमी क अबैत रही जहॉ सतघारा टपलहूॅ की मुक्तेश्वर स्थान लग बाबा भेंट भए गेलाह। हुनका देखैते मातर हम प्रणाम कहलियैन की बाबा बजलाह आबह बच्चा तोरे बाट ताकि रहल छलहूॅ जे कहिया भेंट हेबअ कतेक दिन बाद एमहर माथे एलह कहअ केमहर सॅ ख़बर नेने आबि रहल छह। हम बजलहूॅ बाबा हम त बरही हाट सॅ तीमन तरकारी किनने आबि रहल छी।
बाबा हरबड़ाईत बजलाह हौ बच्चा हमरो एगो मुहॅ चमकौआ किरीम देए ने ।हम पुछलियैन बाबा ई कहू जे मुहॅ चमकौआ किरीम केहेन होइत छैक। बाबा खिसियाअैत बजलाह कह त तोंही मीडियावला सभ प्राइम टाइम मे हल्ला कए लोक के कहैत छहक जे मरद भए के माउगीवला किरीम यदि हमरा जॅका गोर बनना है त ईमामी हैण्डसम मरदवला किरीम सिरीफ साते दिन मे दोगुना गोरापन। अहि दुआरे भेल जे हमहॅू कनि गोर-नार भए जाइत छी। हम बजलहूॅ बाबा अहॉ कथि लेल एहि किरीम सबहक फेरा मे परैत छी अहॉ त केहेन बढ़ियॉ सौंसे देह बिभूत लेप के अपने मगन मे रहैत छी। हमहूॅ तए अहिं जॅका साधुए छी हमरा लग मुहॅचमकौआ किरीम नहि अछि। ई सुनि बाबा तामसे अघोर भेल बजलाह तहॅू फूसि बजैत छह देखेत छहक मीडियावला लक तए रंग बिरंगक किरीम रहैत छैक तहूॅ मंगनी मे मदैद नहि करबह त हयिए ले 5रूपया आ लाबह मुहॅचमकौआ किरीम।
हम असमंजस मे परि गेलहॅू जे बाबा सन औधरदानी लोक के किरीमक कोन काज से कनेक फरिछा के पूछि लैति छियैन जे की भेल। हम पुछलियैन त बाबा बजलाह हौ बच्चा तोरा सभटा गप की कहियअ। बड्ड सख सॅ चारि बरिख बाद बसहा पर बैसि हम अपन सासुर हरीपुर गेल रही। गौरी दाए त बियाहे दिन सॅ हमर ठोर मुहॅं देखि रूसल छलीह। हम सोचलहॅू जे आई हुनकर सखी सहेली माने हम अपन सारि सभ सॅ हॅसी मज़ाक कए मोन मे संतोख कए लैति छी। हम अपना सारि सॅ पूछलहू कहू कुशल समाचार कि हमर सारि उपकैरि के बजलीह बुरहबा बर बड्ड अनचिनहार बुरहारी मे लगलैन किरीमक बोखार आ सभ गोटे भभा भभा के खूम हॅसैए लगलीह। हम पूछलियैन जे साफ साफ कहू ने की कहि रहल छी कि हमर दोसर सारि आर जोर सॅ हॉ हॉ के हॅसैत बजलीह अईं यौ पाहुन बुरहारी मे सासुर अएलहॅू त अकील रस्ते मे हेरा गेल की\ हम बजलहू से की त एतबाक मे हमर छोटकी सारि मुहॅ चमकबैत बजलीह देखैत छियैक हाट बज़ार मे रंग बिरंगक किरीम पाउण्डस बोरो प्लस डोभ एसनो पाउडर फेरेन लबली बिकायत छै से सब लगा के मुहॅ उजर धब धब बना लेब से नहि। एहेन कारि झोरी मुहॅ पर त घसबैहनियो ने पूछत आ हम तए एम.बी.ए केने छी। जाउ थुथून चमकौने आउ तब हॅसी मज़ाक करब।
आब तोंही कहअ जे बिना किरीम लगौनेह जान बॉचत। देखैत छहक नएका नएका छौंड़ा सभ सासुर जाइअ सॅ पहिने ब्यूटी पार्लर जा थूथून चमकबैत अछि। हौ बच्चा कि कहियअ एखुनका छौंड़ीयो सभ कम ने अछि देखैत छहक किरीम लगबैत लगबैत मुहॅ मे फाउंसरी भए जाइत छैक मुदा थुथून चमकबै दुआरे इहो मंजूर। पछिला पूर्णिमा मेला देखबाक लेल छहरे-छहरे पिपराघाट मेला गेल रही त ओतए गौरी दाए के दू चारि टा बहिना सभ भेंट भए गेलीह हम पूछलियैन जे कहू मुहॅ मे एतेक फाउंसरी केना? कि ताबैत हमर साउस केमहरो सॅ बजलीह पाहुन हिनका सभटा गप कि कहियैन ई सभ किरीम लगेबाक फल। ई छाउंड़ी सभ फिलमी हिरोईन सॅ एक्को पाई कम नहि अछि बिना ब्यूटि पार्लर जेने एकरा सभ के अनो पानि नहि नीक लगैत छैक। ई सुनि हमरो भेल जे ब्यूटी पार्लर जा कनेक थुथून चमका लैति छी। मुदा हम जे ब्यूटि पार्लर जाएब से जेबी मे एक्कोटा पाइओ नहि अछि। भागेसर पंडा के कतेको दिन कहलियैअ जे हमरो ब्यूटि पार्लर नेने चलअ से ओकरो भरि भरि दिन फूंसियाहिक पूजा-पाठ सॅ छुट्टी ने।
हम बजलहॅू त बाबा दिल्ली चलू ने ओतए त बड्ड नीक एक पर एक ब्यूटि पार्लर छै। बाबा बजलाह हौ बच्चा हम डिल्ली नहिं जाएब हौ कियो नमरो पता नहि बता दैत छैक एक सॅ एक ठग लोक सभ रस्ते पेरे भेटतह हमरा त डर होइए। त बाबा चलू ने फिलिम सिटी नोएडा ओहि ठाम फेसियल करा लेब। बाबा बजलाह नहि हौ बच्चा बुरहारी मे एहेन करम नहि करब जे कोनो न्यूज़ चैनल जाएब। तोरो मीडियावला के सेहो कोनो ठीक नहि छह बेमतलबो गप के ब्रेकींग न्यूज़ बना दैति छहक। हम एमहर ब्यूटि पार्लर आ कोन ठिक तों खटाक दिस चैनल पर चला देबहक ब्रेकींग न्यूज़ किरीम लगाउ-मुहॅ चमकाउ।


लेखक:- किशन कारीग़र


परिचय:- जन्म- 1983ई0(कलकता में) मूल नाम-कृष्ण कुमार राय‘किशन’। पिताक नाम- श्री सीतानन्द राय ‘नन्दू’ माताक नाम-श्रीमती अनुपमा देबी।मूल निवासी- ग्राम-मंगरौना भाया-अंधराठाढ़ी, जिला-मधुबनी (बिहार)। हिंदी में किशन नादान आओर मैथिली में किशन कारीग़र के नाम सॅं लिखैत छी। हिंदी आ मैथिली में लिखल नाटक आकाशवाणी सॅं प्रसारित एवं दर्जनों लघु कथा कविता राजनीतिक लेख प्रकाशित भेल अछि। वर्तमान में आकशवाणी दिल्ली में संवाददाता सह समाचार वाचक पद पर कार्यरत छी। शिक्षाः- एम. फिल(पत्रकारिता) एवं बी. एड कुरूक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरूक्षेत्र सॅं।

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शुक्रवार, 11 फरवरी 2011

गाम आबि जाउ

बसंतक आगमन भेल अछि ,
धानक सीस जेना आमक मज्जर ,
फगुआ सेहो लकचियागेल ,
हम त कहब !!!
अहि बेर छुट्टीमे गाम आबि जाउ ,
दालान पर कोटपिस आ २८ खेलब ,
आ संगे मालदह आ किसुन्भोग क स्वाद ,
सहर मैं त कारबिदेक गंद सुन संतोस कर परत ,
आ बिसेस इ जे !!!!!!
कनिया काकी बाट तकैत तकैत नोरा गेली ,
तैं गाम आबी जाऊ !!!!!!!
***स स्नेह .....विकाश झा **

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बृहस्पतिवार, 10 फरवरी 2011

लोकप्रिय मैथिली MP3 गीत (भाग - २)

गीतक लिंक निचा देल अछि!

  • मैथिली लोकप्रिय गीत - Vol - I
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  • स्वर : हरिनाथ झा, सुरेश पंकज, चंद्रमणि झा, हेमकांत झा, सुनील कुमार, उमाकांत झा, आ सहयोगी ..
  • मैथिली लोकप्रिय गीत - Vol - II
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  • स्वर : हरिनाथ झा, रामबाबू झा, सुरेश पंकज, उमानाथ झा, चंद्रमणि झा, सच्चिदानंद पाठक, आ सहयोगी ..
  • मैथिली लोकप्रिय गीत - Vol - III
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  • स्वर : हरिनाथ झा, हेमकांत झा, सुरेश पंकज, पायल मुखर्जी, सुनील कुमार 'पवन ' प्रेम सागर, आ सहयोगी ..
  • लिखलौ जे चिट्ठी (मैथिली लोकगीत) - Vol - I
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  • स्वर : अनुराधा पौडवाल, कल्पना, रामबाबू झा, तृप्ति शाक्या, पायल मुखर्जी, हेमकांत झा, हरिनाथ झा, हरिकिंकर ठाकुर, श्याम रंगीला, आ सहयोगी ...
  • लिखलौ जे चिट्ठी (मैथिली लोकगीत) - Vol - II
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  • स्वर : रामबाबू झा, तृप्ति शाक्या, पायल मुखर्जी, हेमकांत झा, हरिनाथ झा, उमानाथ झा, सच्चिदानंद पाठक, सुरेश पंकज, सुनील कुमार, हरिकिंकर ठाकूर, आ सहयोगी ...
  • कोना कादो लागल - स्वर : कुञ्ज बिहारी मिश्र
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  • भौजी फैशन वाली (मैथिली D.J धमाका) - Vol - I
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  • स्वर : माधव राय, दीपक सावन, रौशन मंडल, गणेश बनकटिया, दुर्गानन्द झा, आ सहयोगी ...
  • भौजी फैशन वाली (मैथिली D.J धमाका) - Vol - II
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  • स्वर : माधव राय, दीपक सावन, रौशन मंडल, गणेश बनकटिया, दुर्गानन्द झा, आ सहयोगी ..
  • गजरा वाली (मैथिली D.J रिमिक्स) - Vol - I
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  • स्वर : दिलीप दरभंगिया, राधा पाण्डेय, विकाश झा, चितरंजन ठाकुर, मनोज देव, आ दिलीप मधुबनिया ..
  • गजरा वाली (मैथिली D.J रिमिक्स) - Vol - II
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  • स्वर : दिलीप दरभंगिया, राधा पाण्डेय, विकाश झा, चितरंजन ठाकुर, मनोज कुमार देव, आ दिलीप मधुबनिया ...
  • झुमका बंगाल के (मैथिली D.J ठुमका)
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  • स्वर : पूनम मिश्र, सुनील झा पवन, रंधीर मिश्र, साधना सुमन, आ सहयोगी ....
  • सुन गे गोरिया - Vol - I - राम बाबू झा, पायल मुखर्जी आ सहयोगी...
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  • सुन गे गोरिया - Vol - I - राम बाबू झा, पायल मुखर्जी आ सहयोगी....
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मैथिली लोकप्रिय MP3 गीत (भाग - १), "देखबाक लेल एहि लिंक पर क्लिक करू"

नोट : सभ गीत एक संग डाउनलोड करबाक लेल (ZipFile) लिंक पर क्लिक करू, गीत अलग - अलग डाउनलोड करबाक लेल (Folder) लिंक पर क्लिक करू... धन्यवाद...

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मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
(दोसर कड़ी), (तेसर कड़ी), (चारिम कड़ी), (पाँचम कड़ी), (छठम कड़ी), (सातम कड़ी), (आठम कड़ी), (नवम कड़ी), (दसम कड़ी), (एग्यारहम कड़ी), (बारहम कड़ी), (तेरहम कड़ी), (चौदहम कड़ी), (पन्द्रहम कड़ी )

चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

बिदेसिया (संकल्पित नाटिका)

विद्यापतिक बिदेसिया (संकल्पित नाटिका).... भोजपुरीक साहित्य मैथिलीसँ कम समृद्ध अछि मुदा से अछि मात्र परिमाणमे, गुणवत्ताक दृष्टिमे ई कतेक क्षेत्रमे आगाँ अछि। भोजपुरीक भिखाड़ी ठाकुरक बिदेसियाक सन्दर्भमे हम ई कहि रहल छी। भिखाड़ी ठाकुर कलकत्तामे प्रवासी... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

कथा- माउगि

कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

मातृत्व...

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व.... नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि.... (आगाँ पढू)
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