मंगलवार, 29 मार्च 2011

गजल (बहरे मुतकारिब)

अहाँ बूझि लै छी जुआरी अनेरे
जिबै कोन बैबे नियारी अनेरे

हहारो उठेलौं नचारी गबेलौं
सिहाबै किए छी मदारी अनेरे

जतेको नबारी छबारी बुरैए
घुरेबै कियो नै सुतारी अनेरे

घरोमे उपासे बहारो निरासे
दहारे अकाले हियासी अनेरे

चलै छी खटोली उठा ऐ भरोसे
भसाठी अबैए डरै छी अनेरे

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अनमोल रचना@प्रभात राय भट्ट



रूप अहाँक लगैय चंदाचकोर अन्हार में करैछी ईजोर,
देख अहाँके मोनमें हमरा उठल हिलोर बड़ा बेजोर,

अहाँक केशक गजरा आईखक कजरा जान मारैय,
नशीली नयनक धार हमरा दिल पर वाण मारैय ,

खन खन खन्कैय कंगना छम छम बजैय पाजू,
 घुंघटा उठा सजनी हमरा संग मुस्की मुस्की बाजू,

अहाँके पबैला मंदिर मस्जिद मगैछी दुवा पढ़ैछि कलमा,
हे यै हमर गोरी गरिमा बनालू हमरा अहाँ अपन बलमा,२

चम् चम् च्म्कैछी रानी अहाँ दुतिया के चाँद सन,
गम गम गम्कैछी सुगिया अहाँ बेलीचमेलि फुल सन,

मृग नयनी अहाँक नयन ठोर लगैय रस भरल मधुशाला,
अंग अंगमें तरंग मोनमें उमंग जेना संगीतक पाठशाला,

प्रेम रस स उमरल रूप अहाँक देख भेली हम दीवाना यए,
देख अहाँ संग हमरा गोरी,जईर जईर मरैय जवाना यए,

डोली कहार लक आएब गोरी हम अहाँक अंगना
अहाँ बनब हमर सजनी हम बनब अहाँक सजना,

अहाँक रूप देखि चाँद चकोर सेहो लजागेल,
अहाँक सुन्दरताके तेज स ईन्द्रपरी सेहो झपागेल,

विधाता के रचल सजनी अहाँ छि अनमोल रचना,
अंग अंग में सजल यए अनुपम अनुराग के गहना,

हे यै हमर मोनक रानी गरिमा चलू हमर अंगना,
अहाँ बनब हमर सजनी हम बनब अहाँक सजना,२

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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रूप अहाँक


रूप अहाँक लगैय चंदाचकोर अन्हार में करैछी ईजोर,
देख अहाँके मोनमें हमरा उठल हिलोर बड़ा बेजोर,

अहाँक केशक गजरा आईखक कजरा जान मारैय,
नशीली नयनक धार हमरा दिल पर वाण मारैय ,

खन खन खन्कैय कंगना छम छम बजैय पाजू,
 घुंघटा उठा सजनी हमरा संग मुस्की मुस्की बाजू,

अहाँके पबैला मंदिर मस्जिद मगैछी दुवा पढ़ैछि कलमा,
हे यै हमर गोरी गरिमा बनालू हमरा अहाँ अपन बलमा,२

चम् चम् च्म्कैछी रानी अहाँ दुतिया के चाँद सन,
गम गम गम्कैछी सुगिया अहाँ बेलीचमेलि फुल सन,

मृग नयनी अहाँक नयन ठोर लगैय रस भरल मधुशाला,
अंग अंगमें तरंग मोनमें उमंग जेना संगीतक पाठशाला,

प्रेम रस स उमरल रूप अहाँक देख भेली हम दीवाना यए,
देख अहाँ संग हमरा गोरी,जईर जईर मरैय जवाना यए,

डोली कहार लक आएब गोरी हम अहाँक अंगना
अहाँ बनब हमर सजनी हम बनब अहाँक सजना,

अहाँक रूप देखि चाँद चकोर सेहो लजागेल,
अहाँक सुन्दरताके तेज स ईन्द्रपरी सेहो झपागेल,

विधाता के रचल सजनी अहाँ छि अनमोल रचना,
अंग अंग में सजल यए अनुपम अनुराग के गहना,

हे यै हमर मोनक रानी गरिमा चलू हमर अंगना,
अहाँ बनब हमर सजनी हम बनब अहाँक सजना,२

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट  

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सोमवार, 28 मार्च 2011

गजल


नोर झरैए     मोनक दागनि दगै छी
तराटक लागलए    आ बातो बकै छी

कोनटा बचल नै   एकान्ती ले एकोटा
अन्हरोखे उठै छी  आ गनती गनै छी

अन्हरियासँ बेसी    अन्हार जिनगीमे
ई इजोरिया किए   अहाँ मुँह दुसै छी

पिआ गेलाह देशान्तर      दूरस्त देस
कियो नै घुरै अछि से आसो नै तकै छी

भोरे अहाँ बिनु       दिन फेर बजरल
ऐरावतसँ भारी      ऐ दिनकेँ देखै छी

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रविवार, 27 मार्च 2011

MAITHILI VIDYAPATI GEET

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शनिवार, 26 मार्च 2011

गजल


गुम्म भेल जे ठाढ़ भेल छी मुनल मूह मटकुरिए नीक
बाट तकै बहार भेल गजर-गजर तकनहिए नीक

धन भेल थोड़ बिपत बड़ जोर प्रेमक राग बिसरलौं
प्रेम दफानि बिसारै से गदह-पचीसी बुझनहिए नीक

जे देखलक बरियारक गाछ कहलक बिरदाबन ईहे
उड़कुस्सी लागै दलानपर छै आब उजड़नहिए नीक

जकरा कतहु ने छै पुछारी से अछि सौराठक नोतिहारी
चन्द्रोगत नै प्रेम अछिञ्जल से आब बिसरनहिए नीक

हाथी अपने पएरे भारी चुट्टी अपने पएरे भारी अछि
ऐरावत प्रेम-जिंजीरसँ छारल तैं ठोकरेनहिए नीक

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मधुबनीक पावन भूमि पर विशाल सांस्कृतिक कार्यक्रम ---- पंकज झा

मैथिली अकादमी, (पटना) केँ सोजन्यसँ २७ मार्च २०११ क कालिदास महाविद्यालय उचैठ(दुर्गास्थान), बेनीपट्टी,मधुबनी (बिहार) क पवन भूमि पर विशाल सांस्कृतिक कार्यक्रमक आयोजन अकादमीक अध्यक्ष मिथिलाक चर्चित रचनाकार, कलाकार, संचालक, आ मैथिल प्रेमी श्री कमलाकांत झा (फोन न.०९४३१२५३६६०)के नेतृत्व मे कएल जा रहल आइछ, मात्र १ वर्ख में अखन तक मैथिलि अकादमी पटना द्वारा मैथिलीक बहुत राश विलुप्त पुस्तक-पुस्तिकाक प्रकाशन, मैथिली धरोहर नाटकक मंचन, पुस्तक मेलाक आयोजन, एवं बहुत रास सांस्कृतिक कार्यक्रम नै सिर्फ दरभंगा, मधुबनी जिलामे बल्कि समस्तीपुर,मुजफरपुर, बेगुसराई,भागलपुर, पुरनिया, सहरषा,सुपौल आदि मिथिलांचल के हर छेत्र में मैथिली भाषक विकासमे अपन क्रन्तिकारी योगदान के रहल. संस्था के अध्यक्ष श्री कमलाकांत झा जे अपन जीवन के महत्वपूर्ण समय मिथिला मैथिलीक प्रचार प्रसारमे लगा देला आई अपन कन्धा पर मैथिली भाषाक विकासक बीरा लेने मिथिलांचलक गाम गाम घूमी रहल छथि....

मिथिथांचल के जननी छिनामाश्तिका देवी माँ दुर्गा के अस्थान उचैठ में जोर सर स आई कार्यक्रम के सफल बनवा में स्थानीय लोक सब बहुत उमंग के संग दिन रात लागल छैथ. आई कार्यक्रम में मैथिलीक सुपरिचित कलाकार रंजना झा, कुंजबिहारी,रामबाबू भगवन बाबु, डॉ. नलनी चौधरी, अरविन्द आर बहुत राश मैथिलि के सुविख्यात कलाकार सब औताह. आई कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार के उप मुख्यमंत्री श्री सुशिल मोदी, विनोद नारायण झा, सालिग्राम यादव, हुकुमदेव यादव, आरो बहुत अस्थानीय नेता सब रहता. अकादमी के अध्यक्ष कमलाकांत झा के कहब छन्हि- मैथिली अकादमीक मुख्य काज मैथिली मिथिला के प्रचार के लेल मिथिलांचल के जन जन के जगेनाई थीक...


-----पंकज झा

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पेट किया जरैत - प्रभात राय भट्ट

जाईछी परदेश धनि छोइडक अपन देस,
भेजब कमाके धन रुपैया मीठमीठ सनेश,

जग केर रित सजनी आब अहाँ जानु,
जिनगीके चौबटिया पर येना नए कानु प्रभात राय भट्ट

प्रीत स जौं चलैत जिनगी त पेट किया जरैत,
अन्न विन दुनियां में लोग किया मरैत,

अहाँ विन सजनी हम जिव नए सकैत छी,
मुदा भूखे जौ पेट जरत त प्रीतो नए सुहाय्त,

गरीव भक जन्म लेलौ अई पत्थर के संसार में,
जिनगीक नाव अटकल रहिगेल मजधार में,

हम नाव बनब अहाँ पतवार बनू,संग संग चलू,
हम नवका खोज के राही,अहाँ राय दैत चलू ,

दुःख सुख केर जीवन साथी अपन साथ दिय,
जिनगीक यात्रामें जौं लरखराई त हिमतके हाथदिय,

जीवन के कटुसत्य सजनी आब अहाँ मानु,
जिनगी केर चौबटिया पर येना नए कानु,

लड़ दिय हमरा जिनगी स चलदिय कर्मपथ पर,
गन्तव्य स्थान जरुर मिलत चलू दुनुगोटा धर्मपथ पर,

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट

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शुक्रवार, 25 मार्च 2011

प्रेम दीवाना - प्रभात राय भट्ट

हम अहाकप्रेम दीवाना अहिं स:प्रीत करैत छी,
सुतैत जगैत उठैत बैसैत अहींक नाम रतैत छी ,
ऐसजनी अहींक नाम रतैत छी ..........२


हम अहाँक प्रेम दीवानी अहिं स:प्रीत करैत छी,
जखन तखन सद्खन सजना अहींक याद करैत छी,
ययौ सजाना अहिं के याद करैत छी.........२


रोज रोज हम लिखैत छी अपन प्रेम कहानी के पोथी ,
अहाँ विन तडपैछी जेना पाईन विन तडपैय पोठी,
वित् जाईय दिन कहना राईत नए वितैय.......
अहिं के सुरता सजनी सद्खन लागल रहैया....२


हमर मोनक बात पिया अहिं सब कहिदेलौं ,
अहुं केर तड़पन पिया हम सब जाईन्गेलौं,
फटईय हिया पिया एक दोसर के प्रीत विन,
बड मुस्किल स कटैय अहाँक हमर राइत दिन,


हम अहाँक प्रेम दीवाना अहिं स प्रीत करैत छी,
सुतैत जगैत उठैत बैसैत अहिक नाम रतैत छी,
ऐ सजनी अहिक नाम रतैत छी............२
हम अहाँक प्रेम दीवानी अहिं सा प्रीत करैत छी,
जखन तखन सद्खन सजना अहिक याद करैत छी,
ययौ सजना अहींक याद करैत छी...........२

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बृहस्पतिवार, 24 मार्च 2011

गजल


अकत तीत प्रेमक जे पथिक अदौकालसँ
धतालबूढ़ प्रेमकेँ बोहेलक दुनू हाथसँ

निर्मल आंगुरसँ छूबै जे ओकर पुठपुरी
फरफैसी पसारै निदरदी अगिलकण्ठ जँ

निमरजना प्रेम जे छलै धपोधप निश्छल
बिदोरै लेल प्रेमीकेँ छलै ओ कड़ेकमान तेँ

अकरतब कर्तव्यमे भेद नै बुझलकै जे
जराउ प्रेमक गप्प नै कहियो नुकेलकै जँ

खञ्जखूहर ऐरावत नै बाटक छेँ बाटमे
धांगि बाट बनेबाक दाम अगूबार पेने छेँ

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हमरा बिसैर गेलौं - प्रभात राय भट्ट

हमरा स की भूल भेलई जे अहाँ हमरा बिसैर गेलौं,
सब केर प्रीतम गाम येलई अहाँ किया नए येलों,
यौ पिया अहाँ हमरा बिसैर गेलौं...........२


अहाँ के कोना बिसरबई धनि अहीं छि हमर जान,
अहाँ के जौं बिसरबई त निकेल जेतई हमर प्राण,
ये धनि अहांके कोना बिसरबई ............२


सावन वितल भादो वितल,वितल पूस माघ क जारा,
मईर मईरक जिन्दा रहलौं बड मुस्किल भेल गुजरा,
यौ पिया अहाँ हमरा बिसैर गेलौं ............२


सावन में रिमझिम रिमझिम बदरा येना बरसल,
अहांक स्नेह आ प्रीत लेल सजना देह हमर तरसल ,
यौ पिया अहाँ हमरा बिसैर गेलौं .............२


पुर्निमो केर राईत में हमरा लगैय अन्हार ययौ,
माघफागुन येना बितईय जेना जोवन भेल पहार यौ,
सब केर पिया गाम एलई अहाँ किया नए येलौ,
ययौ पिया अहाँ हमरा बिसैर गेलौं ...........२


काम काज में दिन बीत जैइय मुदा राईत नए कटईय,
असगर मोन नए लगईय अहिक सुरतिया याद अबैय,
छि हम मजबूर भेल सजनी अईब केर परदेस में ,
अहाँ विन जिबैछी कोना बुझु विशेष में ........२


जाईग जाईग करैत छि प्रातः उठैत छि खाली हात,
केकरा स:कहू अपन मोन क बात के बूझत हमर हालत ,
अहि स:हमर यी निर्सल जिनगी केर हिया जुडायत,
सजनी अहा ला लक आइब मोनभैर प्रेमक सौगात..२


रचनाकार:प्रभात राय भट्ट

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मंगलवार, 22 मार्च 2011

गजल

अंतहीन अंत ऐ सोचनीक होइए
भासो नै बनैए नै चित्र पूर होइए

ऐ रंग आ तरंगक नै भेटैए बाट
सोचैत भँसियाइत मगज फटैए

नै बाजैए बाट जे छोड़ि चललौं कतऽ
आँखि बाजैए बिनु बजने बुझबैए

आदति जे लागल वेदना सहबाक
गेंठ बनैए से सोहनगर लगैए

ई गुमकी बढ़ल खत्म हएत की
खरचण्डाली प्रेम पिसीमाल भेलैए

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जालवृतक प्रति अपनेक सुझाव....

प्रिय ब्लॉग प्रेमी बंधूगन,

एहि जालवृत पर पहिने अहाँक सुझावकेँ लेल अलगसँ (CBOXकेँ) व्यवस्था उपलब्ध छले जकरा कुनू कारण सँ हटाबे परल दरअसल किछ पाठक बंधू ओकर गलत उपयोग करैत रहैथ तहि लेल यदि अपने के कुनू तरहक असुवधा हुवे तs छमा चाहब...


मैथिल आर मिथिला टीमकेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ एहि ठाम अवगत कराऊ...


जेना...

१. जालवृतमे कोनो तथ्यगत कमी अछि:(स्पष्ट करैत लिखू):-
२. जालवृतमे कोनो परिमार्जन आवश्यक अछि: (सङ्केत दिअ):-
३. जालवृतमे कोनो भाषागत, तकनीकी वा टंकण सम्बन्धी कमी अछि: (निर्दिष्ट करू कतए-कतए आ कोन ठाम):-
४. जालवृतमे कोनो आर त्रुटि अछि:-
५. जालवृतक उज्जवल पक्ष/ विशेषता:-
६. जालवृतक लेल कोनो आर सुझाव:-

जालवृतक प्रति अहाँक सुझाव मूल्यवान अछि अपन बहुमूल्य समयसँ किछु पल निकालि रचना/ प्रस्तुतिक विस्तृत समीक्षा करू। जाति-सम्प्रदायक जंजालसँ मैथिलीकेँ बाहर निकालि भाषाकेँ जनभाषा बनएबाक आन्दोलनमे हमरा सभ मिलि कए आगाँ बढ़ी आ तखने मैथिली साहित्यक वास्तविक अर्थमे विकास भए सकत। अहाँक देखाओल स्नेह आ विश्वास "मैथिल आर मिथिला" जालवृत्तकेँ मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय आ सर्वग्राह्य ब्लॉगक स्थान पर बैसेने अछि। अहाँ अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा maithiliblog@gmail.com पर सेहो पठा सकैत छी।


धन्यवाद.....

अहाँक सुझाव आ टीका-टिप्पणी पढबाक आश में...
मैथिल आर मिथिला (जालवृत टीम)
E-mail ID: maithiliblog@gmail.com

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नैन किया भईरगेल - प्रभात राय भट्ट

अहाक ठोरक मुस्कान सजनी कतय चलिगेल यए,
अहाक नैन में नोर सजनी किया भैरगेल यए ,
नोर नए बहाऊ सजनी यी थीक अनमोल मोती,
अहाँ हैस दी त जगमग करे हमार जीवन के ज्योति,
अहाक ठोरक मुस्कान सजनी कतय चलिगेल यए,


येना नए होऊ अहाँ उठास,मों नए करू उदास,
आई छई दुःख त काईलह सुख हेतई,
यी छन भर के विपति सब टईर जेतई,
रखु मोन में आशा अओर हमरा पर भरोषा,
पूरा हयात मोन क सबटा अभिलाषा,
अहाक ठोरक मुस्कान सजनी कतय चलिगेल यए,


दुःख सुख ता जीवन में अबिते रहतई,
चाहे हवा जाते तेज बहतई,
समुन्दर में लहर जतेय जोर उठतई,
चाहे धरती स ज्वाला फुटतई,
मुदा जीवन के यात्रा कखनो नए रुकतई,
अहाँक ठोरक मुस्कान सजनी कतय चलिगेल यए,
अहाँक नैन में नोर सजनी किया भईरगेल यए,


रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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रविवार, 20 मार्च 2011

मोछ वाली माउगी।

होली पर हास्य कथा।


धनिक दोकान दिस सॅ अबैत रही कि रस्ते मे खरंजे पर बिकाउ दास भेंट भए गेलाह पूछलनि बच्चा कहू करिया के कतहू देखलियैअ। हम बजलहूॅ नहि यौ बाबा हम अहॉ पोता के एमहर कहॉ देखलहूॅ। बिकाउ दास बजलाह धू जी महराज हम कारी सॅ केस दारही कटाएब अहॉ हमरा पोताक भांज कहि रहल छी। लगैए जे आई होरी खेलेबाक निशा मे अहॅू मातले छी। हमरे खनदानी नौआ छल कारी ठााकुर एमहर बिकाउ दासक पोताक नाम सेहो कारी। दूनू गोटे नामक अनुरूप देखैयोअ में ततबेक कारी। कारी जतबाक देखबा में कारी ओतबाक उजर धब- धब आकेर मोछ बड्ड ईमानदारी सॅ शाही अंदाज मे हजामत करैत छल। ओकरा मोछक आगू मे राजा महराजक मोछ छुछूआन लगैए। बिकाउ दास के हम कहलियैन बाबा बुझहैए मे धोखा भए गेल कारी नौआ तए अपने बथान दिस भेटत ओम्हरे जाउ ने। ताबैत उतरभारी दिस सॅ कारी अपने मगन में झूमैत चलि अबैत रहैए। ओनाहियो फागुन मे सभ अपना धुन में मगन रहैए। कारी के देखैत मातर बिकाउ दास बजलाह अईं रौ करिया एहि बेर जोगिरा गबै लेल नहि एबहि रौ तोहर सिद्धप वाली भाउज खोज पूछारी रहल छलखुन जे एहि बेर किर्तन मंडली होरी गीत गाबि जोगीरा खेलेताह कि नहि। कारी मोछ पिजबैत बाजल भैया अहॉ जाउ ने अहॉ भाउजी के कहबैन भांगक सरबत बना के रखतीह। हम सभ पहिने भगवति स्थान में होरी गीत गाबि अबीर चढ़ाएब तकरा बाद अंगने अंगने होरी खेलाएब।
कारी के गप सुनि हमहूॅ राग मल्हार मे मोने मोन नाचए लगलहूॅ जे आई भंाग पीबि कारी संगे खूम नाचब। एहि बिचार मे मगन रही की कारी बाजल जे बच्चा अहॅू चलि आएब एहि बेर झाइल बजौनिहार लोक कम छै अहॉ गीत गाबि झाइलो बजाएब। गाम घर मे नाटक खेलाई हमही गीत नाद गाबै सॅ के मंच संचालन तक करी। तहि द्वारे निधोखे हम बजलहॅू बेस जाउ हम भगवती स्ािान में भेंटइ भए जाएब दूपहर दू बजे किर्तन मंडलीक सभ कलाकार आस्ते आस्ते जुटान होमए लगलयै। कारी अपना दरवज्जा पर बैसी के चिलम फूकै मे मगन रहैए एक सोंठ खिचनहियै रहै की केम्हरो सॅ मनोज क्रांतिकारी धरफराएल आएल कारी के देह पर धाई दिस खसल। बाजल हौ कारी कक्का आई तोरे संगे होरी खेलाएब। एतबाक मे कारी फनकैत बाजल कह हनो खसान खसब होइत छैक एखने चिलमक आगि सॅ मोछ झरैक जाएत। फेर मनोज बाजल हौ कक्का हमरो बेसी डंफाक ओजन छै तही दुआरे धरफरा गेलहूॅ। तकरा बाद दूनू गोटे एक एक सोंठ चिलम खिचलक धुऑं नाक दए के फेकलकै की कारी बाजल रौ भातिज किर्तन मंडलीक कलाकार सभ कतए नुकाएल अछि।
एतबाक में हरेकृष्ण ढ़ोलकिया ढ़ोल ढ़ूम-ढ़ूमबैत बुद्धना हरमोनियम पिपयबैत रामअशीष झाइलि झनकबैत तीनू गोटे तीन दिसि सॅं एकसुरे बजबैत आएल। ताबैत मे मनोज डंफा डूग-डूगबैत बाजल हल्ला गुल्ला बंद करू सुनु कारी कक्का के वाणी जी नहि भरू ढ़ोलकिया के पानि जी। कि एतबाक मे कारी कठझाइल झनकबैत बाजल जोगी जा सारा...रा...रा. सभ गोटे एक सुरे बाजल सारा रा रा। बुद्धन बाजल रौ मनोजबा तेहेन शास्त्रीय राग मे पानि भरबाक लेल कहलीह जे दू-चारि टा छौंड़ा मारेर डरे भागी गेल। मनोज बाजल हौ भौया रंग घोरबाक लेल पानि चाहि ने। रामअशीष बाजल हं रौ भजार ठीके कहलीहि आब कह जे एहि बेर भाउजी के बनत। एतबाक में कारी मोछ पिजबैत बाजल रौ भातिज जूनि चिंता कर हम एखन जीवते छी।
होरी मे कारी सौंसे गौआक भाउजी बनैत छलैक की बुढ़-पुरान की छौंड़ा मारेर सभ गोटे हंसी खुशी सॅ गीत गाबि कारी संगे दिअर भाउज जेका होरी खेलाइत छल। मनोज बाजल हौ कक्का माउगी बनबहक से साड़ी बेलाउज कहॉ छह। कारी बाजल धूर रे बुरिबक जो ने तू अपने माए बला साड़ि नेने ने तोरे माए हमरा भाउजे हेतीह। हौ कक्का तूं मारि टा खूएबह तोरा बुझलेह छह हमर बाप मलेटी सॅ रिटायर हमर माए सेहो मलेटी। सारी मे लाल पीअर लागल देेखतैह कतेक मुक्का मारत से कोनो ठीक नहि। अच्छा कक्का तू चिंता नहि करअ हम अपने कनियॉ वला नुऑ नेने अबैत छी। कारी बाजल रौ भातिज तू बुरहारी मे हमरा गंजन टा करेमेह। हम ससुर भए के पूतहॅू देहक नुऑ कोना पहिरब रौ राम-राम। लोक साड़ी देखैते मातर चिन्हि जेतैए जे तोरे कनियॉक नुआ छै तब लोको कोनो दसा बॉकि नहि राखत। बुद्धन कनेक बुझनुक बाजल हौ तोरा डर किएक होइत छह कियो पूछतह कहिअक जे बुधनाक साउस के नुआं छियैक। हमर साउस एखन अपने गाम आएल छथहिन। कारि सुनि चौअनियॉ मुस्कान दैति एकसुरे दू गिलास देसी भांगक सरबत घोंटि गेल बाजल बुधन तूं हरमोनिया बजाअ ताबैत हम समधिन संगे होरी खेलेने अबैत छी जोगी जा सारा...रा....रा। कि फेर सभ एकसुरे गाबैए लागल जोगी जा सारा रा रा। हरेकृष्ण ढ़ोलकिया ढ़ोल धूम-धूमबैत बाजल होरी मे कक्का करै छथि बरजोरी बुरहोरी मे मोन होइत छनि थोरू थोरू जोगी जा सारा रा रा। मनोज डंफा डूग-डूगबैत बाजल हौ कारी कक्का एना किएक मोन लुपलुपाइत छह। कारी झाइलि झनकबैत बाजल रौ भातिज फगुआ होइते अछि रंगीन तोंही कह ने मलपुआ खेबाक लेल केकर मोने ने लुपलुपाइत छैक। हं हौ कक्का एनाहियो होरी मे नएका नएका भाउज सबहक गाल मलपुए सन पुल पुल करैत रहैत छैक।
कारी साड़ी पहिर अनमन माउगी बनि गेल मुदा मोछक देखार चिनहार दुआरे घोघ तनने। कारी हाथ सॅ झाइलि हम गीत गाबि झाइलि बजबैत होरी गाबै लगलहूॅ रंग घोरू ने कनहैया हो खेलैए होरी रंग घोरू सभ गोटे गीत गबैत भगवति स्थान बिदा भेलहूॅ। भगवति के अबीर चढ़ा प्रणाम करैत मंडलीक सभ कलाकार अंगने अंगने होरी खेलेबाक लेल बिदा भेलहूॅ। जेहेन घर तेहेन सरबत कतहॅ छूछे रंग टा। मुदा लोक हॅसी खुशी होरी खेलाई मे मगन होइत होइत बिकाउ दासक दरवज्जा पर पहुॅचलहॅू होरी गीत शुरू केलहॅू हो हो किनका के हाथ कनक पिचकारी बुधना हरमोनियम पिपयबैत बाजल हो बिकाउ कक्का के हाथ कनक पिचकारी। एतबाक सुनितेह विकाउ दास अपना बेटा के हाक देलखिहिन हौ मांगनि जल्दी सॅ मंडली सभहक लेल दूध भांगक सरबत नेने आबह। सुनि हम सभ आर बेसी जोर सॅ जोगीरा गबै लगलहूॅं ताबैत मनोज एक आध बेर डंफा लेने धरफड़ा के खसि पड़ल। ओकरा उठेलहूॅ सभ गोटे भरि छाक भांगक सरबत पीबि होरी गबै मे मगन। एम्हर जोगीरा देखबाक लेल कनिया-पूतरा धिया-पूता सभ घूघरू लागल।
एतबाक मे सिद्धप वाली दाई अबीर उड़बैत एलीह हॅसैत बजलीह गे दाए गे दाए नचनिहार माउगी के छीयैक? सुखेत वाली कनिया बजलीह माए इहेए चिन्थुहुन ने। दाई बजलीह चिन्हबै की पहिने रंग अबीर देह मुॅह छछारि दैति छियैक। दाई निधोखे रंग लगबै लगलीह की घिचा तिरी मे कारीक घोघ उघार भए गेलै। दाई बजलीह गे माए गे माए एहेन मोछ वाली कनियॉ पहिनुक बेर देखलहूॅ। ताबैत कारी मुस्की मारैत बाजल भाउजी हम छी अहॉक दुलरूआ दिअर कारी। दाई एतबाक सुनि ठहक्का मारैत बजलीह अईं रौ मोछ वाली कनियॉ ला कनि तोहर मोछो कारीये रंग मे रंगि दैति छियौ। एकटा दिअर भाउज के निश्छल प्रेम गामे घर में भेटत। तखने मनोज बाजल काकी कनियॉ पसीन भेल किने ? दाई बजलीह हं रौ मनोज बड्ड पसीन भेल 60 वर्षक अवस्था में पहिनुक बेर देखलहॅू एहेन सुनर मोछ वाली माउगी।

लेखक:- किशन कारीगर ।

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मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
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चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

बिदेसिया (संकल्पित नाटिका)

विद्यापतिक बिदेसिया (संकल्पित नाटिका).... भोजपुरीक साहित्य मैथिलीसँ कम समृद्ध अछि मुदा से अछि मात्र परिमाणमे, गुणवत्ताक दृष्टिमे ई कतेक क्षेत्रमे आगाँ अछि। भोजपुरीक भिखाड़ी ठाकुरक बिदेसियाक सन्दर्भमे हम ई कहि रहल छी। भिखाड़ी ठाकुर कलकत्तामे प्रवासी... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

कथा- माउगि

कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

मातृत्व...

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व.... नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि.... (आगाँ पढू)
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