मंगलवार, 28 जून 2011

हम एकटा पत्रकार छी@प्रभात राय भट्ट

हम एकटा पत्रकार छी@प्रभात राय भट्ट

हम एकटा पत्रकार छी उतर पूरब पश्चिम dakshin सं
खबर,घटना,सूचना,समाचार लाबैत छी,
पत्रिकामें छापि गाम गाम पहुंचाबैतछी,
एक दिन एकटा कार्यालय हम गेलहुं,
परिचयपत्र देख हमर भेल सभ परेशान,
एकटा कर्मचारी कहलक औ बैसू जजमान,
लेखाशाखामें रखल अछि अहांलेल अनुदान,
हम कहलहुं यी सभ हमरा किछु नए चाही,
बस हाकिम साहब सं भेटटदिय,
हम एकटा पत्रकार छी बस इंटरभ्यु लेब दिय,
एकटा महिला कर्मचारी झट सं बोलल,
हाकिम साहब छैथ मीटिंग में बड ब्यस्त,
जुनी अहां करू नै एतेक कष्ट,
पत्रकार सभक ब्यवहार सं हम सभ छी अभ्यस्त,
लेखापाल कें भेटगेल छै हाकिम साहबक आदेश,
जौं कोई पत्रकार आबे हुनका उपहार दिया विशेष,
किछु नै लिखू किछु नै छापू बंद रखु अपन बोली,
चुप चाप निकैल जाऊ ऐठाम सं भैरक अपन झोली,
हम कहलियैन यी सभटा बात अछि निराधार,
की पत्रकारों करेय भ्रष्टाचार ???
जौं पत्रकार भज्यात भ्रष्ट कोना भेटत समाचार प्रष्ट ???

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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शुक्रवार, 24 जून 2011

गजल


मिरदङियाक तरंग भँसियाइए अङेजब कोना  
सुनि मोन घुरमाइए अकुलाइए अङेजब कोना 

आँखिक नोर झरलै बनलै अजस्र धार झझाइए
पियासल छी ठाढ़, जी हदबदाइए अङेजब कोना 

सगुन बान्हसँ बान्हल मोनक उछाही बिच
ठाढ़ सगुनियाँ बनल उसरगाइए अङेजब कोना 

हरसट्ठे अपने अपन चेन्हासी मेटा लेलक आइ
मुरुत हरपटाहि बनेने जाइए अङेजब कोना 

छरछर बहल छै धार मोनक, देखू चल अछि
धेने बनल बाट उधोरनि बनैए अङेजब कोना 

उड़ैचिड़ै आ बहैए अनेरे नील अकाश बिच
ऐरावत-मन जखन धियाइए अङेजब कोना 

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गजल


ओङठल आँखि ताकैए कहू की करी
नै बुझलौं तमसाइए कहू की करी


ज्ञानी बनै लेल जाइदेश छोड़ने
ई मोन जे पथराइए कहू की करी

धानी रंगक आगि पियासल किए छै
धाना निश्छल हिलोरैए कहू की करी

धान छै खखरी बनल अहिठाम आ
धानी आगि जे लहकैए कहू की करी
आगिसंगी पानि अजगुत देखल
धौरबी बनल सोचैए कहू की करी
ऐरावत धोधराह धुधुनमुहाँ नै
रि फाहा बनि जैए कहू की करी

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गजल


की कहबै, कोना कहबै, जे बुझतै ओ लुझतै
आँखिक नोर खसतै,    खन रूसतै-बिहुसतै

दाबी देखेतै आ हम देखबै नुका कऽ अँचरासँ
बहरा जाइ छी घबरा कऽ, नै ताकै ओ ने बाजै ओ

देखितिऐ अँचरासँ, आ बहरा जैतौं दुअरासँ
मोनसँ बेसी उड़ै चिड़ै, चिड़ैक मोन बनतै

बनि माँछ अकुलाइ छी बाझब जालमे कक्ख
जँ फँसि त्राण पाएब आँखि बओने से देखतै

चम्मन फूल भमरा, गुम्म, जब्बर, छै सोझाँ ठाढ़
जलबाह सोझाँ  माँछ, ऐरावत बनल, देखै ओ

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बुधवार, 22 जून 2011

अहां रहैत छि परदेस पिया@प्रभात राय भट्ट


अहां रहैत छि परदेस पिया,
एसगर लागेना मोरा जिया,
ओ सजनजी लागेना मोरा जिया.....२

जागल आईख सपना देखै छी,
नितदिन अहांक बाट तकैत छी,
अहांक देखैला फटेय हमर हिया,
ओ बलम जी लागेना मोरा जिया....२

रिमझिम वर्षीय सावनके बदरा,
केकरा संग सुतब लाईगक पजरा,
आईग लागल देहमें पिया जी मोरा,
ओ पिया जी लागेना मोरा जिया.....२

अहां विनु सुना लगैय पलंगिया,
गाम आबिजाऊ बलम जनकपुरिया,
बुझाऊ प्यास मिलनके जुडाऊ हिया,
ओ सजन जी लागेना मोरा जिया......२

देखू पिया उमरल जैइय हमर जवानी,
जेना सावनमें उमरैय कमला कोशीके पानी,
जुवानी भरेय हुकार अहां आबैछी नए किया,
ओ बलम जी लागेना मोरा जिया.........२

देखू सजनजी हम सोलह श्रृंगार केने छी,
अहिंके सूरत सैद्खन  हम ध्यान देने छी,
पंख लगा उईर आऊ घुईर फेर नै जाऊ,
ओ सजनजी अहां बिनु लागेना मोरा जिया....2

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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मंगलवार, 21 जून 2011

स्नेह लगाक@प्रभात राय भट्ट



गजल:-

स्नेह लगाक किये मुह  मोईड लेने छि,
प्रीत जगाक दिलमे किये छोइड देने छि,
अंहि सिखेलौं हमरा यी प्रेमक परिभाषा,
जुनी बनू बेदर्दी पूरा करू हमर अभिलाषा,
उईड चलू प्रेम नगर मोनमें इक्षा जगल,
मिलनके प्यास बुझाब  हम येलु भागल,
प्रेम मे अहांक प्रियतम भेल छि हम बताह,
सभटा जनैतबुझैत अहां बनल छि घताह,
हम अहां बिनु जिब नए सकब सजनी,
जहर बियोगक पीव नए सकब सजनी,
हम देखैछि अहांके जेना चाँदके देखैय चकोर,
आऊ सजनी अन्हार जिन्गिमे कदीय ईजोर,
देखू रिमझिम रिमझिम बरशैय साबनके बदरा,
फुल अहां छि हम भंभरा,रसपान कराउ हमरा,

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट

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सोमवार, 20 जून 2011

हम दू:खिया दू:ख केंय मारल@प्रभात राय भट्ट


हम दू:खिया दू:ख केंय मारल के पूछत हमर हाल,
केकरा स कहू के पतियाईत हमर बिप्तिक हालत,
अपने सुखमें आन्हर भेल अछि ऐठाम सभ नेहाल,
अपन हारल दुनियाके मारल भेल छि हम बेहाल,

दू:ख के सागर में अटकल अछि हमर जिनगीक  नैया,
विधाता भेल बेपक्ष बईमान मलाह  भेटल हमर खेबैया,
हम कोना उतरब पार बिधाता फसल छि बिच मजधार,
किछु नै सुझाइय किछु नै बुझाईय कोना हयात उद्धार,

दोस्त बनल दुश्मन अपन नाता गोता सेहो भेल पराया,
फूटल करम हमर जहिया स: कालचक्र के परल छाया,
हम निर्दोष सरस बोली बजैत अछि दिल स: साँच साँच,
दोषी कहिक धधरा में लगाबैय सभटा हमरा आंच,

सुईखगेल आईखक नोर कल्पी रहल अछि हमर ठोर,
करैय घाऊमें नुनदलन यी दुनिया भेल केहन कठोर,
जिनगी भेल पहार की दुनिया लगैय आब अन्हार,
अपनों आब मुह मोडैय जेना रही हम अनचिन्हार,

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट

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शुक्रवार, 17 जून 2011

माए अहाँ ऐइ जग में महान छि@प्रभात राय भट्ट


माए अहाँ ऐइ जग में महान छि,
हमरा लेल अहाँ एकटा भगवन छि,
नौ मास हमरा  गर्भ में रखलौं,
मृत्युक मुहमें जाक जन्म देलौं,
ब्यथा पीड़ा वेदना सभटा सहलौं,
हर्षित मोन स मलमूत्र सेहो केलों,
अमृत समान धुधपान करेलों,
जागी जागी अहाँ राईत बितेलौं,
आँचर स झापि गोद में सुतेलौं,
हम अबोध किछु नए बजलौं,
मोनक बात अहाँ सभटा बुझ्लौं,
हमर सुख में अहाँ कतेक दू:ख उठेलौं,
था था करी आँगुर पकरी चलब सिखेलौं,
माँ माँ बा बा बोलीक  बाजब सिखेलौं,
बत्सलनिश्छल प्रेम हमरा पैर लुटेलौं,
ममताक रूप भगवतिक स्वरुप,
माए हम इस्वर में देखैत छि अहींक रूप,
मंदिर मस्जिद सभठाम गेलौं,
मुदा अहाँ स बैढ़क ओ भगवन की ,
जईमें अहांक सूरत नै देख्लौं,
माए अहिं छि चारोतीरथ चारोधाम,
जन्म जन्मान्तर हम रटब अहींक नाम,
माए अहाँ ऐई जग में महान छि,
हमरा लेल एकटा भगवान छि,

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट

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बृहस्पतिवार, 16 जून 2011

एकटा उड़नखटोला कक्का छै@प्रभात राय भट्ट




एकटा उड़नखटोला कक्का छै,
सकल्सुरत स भोलाभाला, 
मुदा एकनंबर उचका छै,
सत्य कहैत हुनका बड तित लगैय,
झूठ बोलैत बड मीठ लगैय,
भीतर स छैथ ओ बिलकुल खाली,
झूठमुठमें हैंस हैंस क मारैय ताली,
घरमें छथि दू दुगो घरवाली,
मुदा हुनका मोन परैय छोटकी साली,
धुवा धोती में लगाबैय टिनोपाल,
सिल्क कुरता पैर छीट लालेलाल,
कान्हा पैर रखैय मखमल के रुमाल,
अजब गजब छै हुनक चालढाल,
सुइत उईठ भोरे भोरे करैया मधुपान,
गप मारी मारी खाय पिबैय चायपान,
चाहे दिन भैर हुनका भेटे नै जलपान ,
मुदा सैद्खन मस्त रहैय करैमे धुम्रपान,
झुठमुठ क करैया ओ रोजगारी,
चौक चौराहा बैठ क मारैय पिहकारी,

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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मंगलवार, 14 जून 2011

सभके लेल सौराठ सभागाछीमें आबय लेल आमंत्रण...

आमंत्रण...


२० जून सँ शुरु भऽ रहल अछि - उद्‌घाटन ४ बजे अपराह्न बिहारके गणमान्य नेतागण द्वारा होयत। अपने एहि समारोहमें २० जून सँ २९ जून धरि कहियो अवश्य सहभागी बनी। दहेज मुक्त मिथिला अपन सत्याग्रह मिथिलाके दहेजक दानवसँ मुक्ति दिलावयलेल केवल जनमानसमें जागृति फैला के जे कोनाके दहेज आइ एक कुप्रथा बनि गेल अछि, क...ोना एकर मारि गरीबी रेखा सँ नीचां रहनिहार लोकके जान लऽ रहल छैक, कोना बेमेल शादी भऽ रहल छैक, कोना लोक पाइ के बलपर दूल्हा खरीद कय रहल अछि, दहेजमें पाओल धन-संपत्तिके कोना दुरूपयोग कैल जैछ आर कोना समाज पाछू छूटि रहल अछि एहि भ्रष्ट सामाजिक-पारंपरिक-व्यवहारसँ। समय आबि गेल अछि जे एहि बदतर परंपराक स्वरूपके बदलल जाय आर एकर शुद्ध-सात्त्विक अर्थके सकारल जाउ - स्वेच्छा आ बिन-दबावपूर्ण-माँगके देल उपहार जे कन्यापक्षके द्वारा वरपक्षके देल जैछ। एहि समाजके अनावश्यक देखावटी आ आडंबरपूर्ण खर्चके बरबादी करयबाक कोनो आवश्यकता नहि अछि। इ सभ केवल आम अपील अछि दहेज मुक्त मिथिलाक - केकरो ऊपर कोनो जबरदस्ती दबाव वा कारबाही नहि जे केकरो आत्म-स्वायत्तताके विरुद्ध होय। एकर अलावे, हम सभ पंजीकरणके विधिके कंप्युटरीकृत करैके प्रोत्साहित करब आर पंजियनके महत्त्वपूर्ण परंपराके बचेबाक लेल प्रयास सेहो। अहाँ सभके आमंत्रित करैत छी एहि आबयवाला कार्यक्रम जे प्रतिदिन १० बजे विहान सँ अपराह्न ५ बजेतक सभाकालमें होयत। आउ आ जुड़ू दहेज मुक्त मिथिलाके एहि मंचपर आर संगहि हजारों लोकके भीड़-भरल मिथिलाके सुन्दर समारोहके आनन्द लियऽ। सौराठ एहि दस दिनक लेल पर्यटनके स्थल बनैक - अपन मित्र आ स्वजन लोकनिके सेहो बजाउ, संगहि अपन विचार आ दृष्टिकोण उपरोक्त समग्र तन्त्र ऊपर बेहतरी के लेल हमरा लोकनि संग बाँटू। यदि मानी तऽ, हमरा लोकनि एहि प्रयासके आनो-आनो ठाम विस्तार दी जाहिमें दहेज मुक्त मिथिला अपने लोकनिकेँ संग-सघेबाक लेल सदैव प्रतिबद्ध अछि।

दहेज मुक्त मिथिला
पंजी भवन, सौराठ सभा,
मधुबनी।

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रविवार, 5 जून 2011

बाबुजी छैथ बड होसियार@प्रभात राय भट्ट


हमर बाबुजी छैथ  बड होसियार,
हुनका सन कियो नै बुधियार,
लेनदेनमें छैथ ओ बड माहिर ,
भला अर्थ स: संसार चलैय,
ई बातों छै जग जाहिर,
हम कहैछी बी.ए.एम्.ए.पढ़दीय,
बाबु कहैछैथ बस आब रहदीय,
आई.ए.पैढ़ लेलौ ई की कम अछि?
हम कोण पढ़ल लिखल ?
मुदा शिक्षा मंत्री बनल अछि,
पि.ए. स:सभटा काज कराबैछी,
साइनके जगह औठाछाप लगाबैछी,
काज करू एहन जैमे पाए नै लागे,
बैसल बैसल अपार धन सम्पति घर आबे,
बात हमर सुन बेट्टा,बन तहूँ हमरा सन नेता,
फेर देख जिन्दगी में चमत्कार भजेतौं,
हमरा संग संग तोरो उधार भजेतौं,
जो मंदिर,मस्जिद में आईग लग्बादे,
गिरजा घर,बौध गुम्बा पर डोजर चल्बादे
ई सब करिहे राईत के अन्हार में,
दू चाईर गो हिन्दू के गिरादीहे ईनारमें,
फेर देख हिन्दू मुस्लिम में लडाई भजेतई,
हमरा नेता सभक बड़का कमाई भजेतई,
भलेही मंदिर मस्जिद के आईग बुईझ जेतई,
मुदा धर्म मजहब केर आईग लागले रहतई,
अनेरो घुमैत रहिहे गामेगाम टोला टोला,
साथ वोकरे दिहे जेकर छै बोलबाला,
वोट बैंक बैढ़ जेतौं भजेबें तहूँ हमरा सन नेता,

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट

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शुक्रवार, 3 जून 2011

एतेक चंचल तू किये@प्रभात राय भट्ट


एतेक चंचल तू किये
भेले रे मनमा,
भभर में हम फसल छि
तोहरे करनमा,
हमरा जे नै भावे 
ओतह करेछे  तू परिक्रमा ,
कह कोना हेतई
हमरो दिन सुदिनमा,
राईत दिन साझ सबेरे
रहैछे तू अपने फेरे,
निक बेजाई किछु नै सोचे
मस्त रहैछे तू अनेरे,
जालमे तोरा फसलछि
केने छे तू केहन काबू,
कियो जाईन नए सकल
रे मनमा तोहर जादू,
क जाईत छे तू एहन काम,
भ ज्यात छि हम बदनाम,
सूक्षम अतिसूक्षम रूप तोहर,
कियो देख नै सकैय तोरा,
निक काज में प्रसंसा
बेजाय में उलहन परे मोरा,
हम तारा स दूर दूर भागी,
मुदा साथ नए छोड़े तोहर छाया,
हमरा काया के भीतर,
पसरल छौ तोहर महामाया,
रे मनमा कोना हम समझाऊ,
तू हवा स तेज बुझाइतछें,
जते हम सम्झाबी तोरा,
ओत्बें तू बहकल जाईछें,
क्षण में महल माकन बनबैछे,
होस अबैत सभटा गिरबैछे,
कखनो राजा कखनो रंक,
कखनो जोगी कखनो भोगी,
हम तोहर की तू हमर ??

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट

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बृहस्पतिवार, 2 जून 2011

मातृभाषा@प्रभात राय भट्ट


मिथिलावासी बोल बोलू मेची स: महाकाली,
हिंदी उर्दू इंग्लिस चाहे बोलू आऔर नेपाली,
मुदा सब स अनमोल रत्न अछि अपने मातृभाषा,
किया तुलल छि कर पैर मातृभाषा के दुर्दशा,
जन्म लैत कान स:सुनलौ मैथिलि स्वर मधुर,
मैथिलि स्वर मधुर सुनीक नाईच उठैय मयूर ,
सरस सरल ममता सा भरल अछि माएक बोली,
जेना आमक गाछी में कु कु कु कुह्कैय कोयली,
मथिली भाषा आ मिथिलाक जीवनशैली स:
उत्तपन भेल अछि मिथिलाक विराट संस्कृति,
मनमोहक आ मनोरम अछि मिथिलाक प्रकृति,
गंगा हिमालय कोशी गण्डकी के मध्य्भूमि,
हराभरा जंगल एतिहासिक नदी के संगम,
अछि प्रेम प्राग सुन्दर अनमोल अनुपम,
हिंदी उर्दू इंग्लिस बोली चाहे अओर बोलू नेपाली,
माए के माथक टिकुली अछि मैथिलि बोली,
टिकुली बिनु सुन्दर नै लागत माएक सृंगार,
अपने हाथे किये करैत छि माएके सृंगारक ऊजार,

रचनाकार:प्रभात राय भट्ट

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मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
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चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

बिदेसिया (संकल्पित नाटिका)

विद्यापतिक बिदेसिया (संकल्पित नाटिका).... भोजपुरीक साहित्य मैथिलीसँ कम समृद्ध अछि मुदा से अछि मात्र परिमाणमे, गुणवत्ताक दृष्टिमे ई कतेक क्षेत्रमे आगाँ अछि। भोजपुरीक भिखाड़ी ठाकुरक बिदेसियाक सन्दर्भमे हम ई कहि रहल छी। भिखाड़ी ठाकुर कलकत्तामे प्रवासी... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

कथा- माउगि

कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

मातृत्व...

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व.... नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि.... (आगाँ पढू)
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मैथिल आर मिथिला
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