रविवार, 31 जुलाई 2011

हैंस दिय कनियाँ@प्रभात राय भट्ट



हैंस दिय हैंस दिय कने  हैंस दिय कनियाँ
देखू लौनेछी कनियाँ अहांलेल पैरक पैजनिया
महफा में बैठ चलू कनिया आई हमरा अंगना 
अहांके अईन्देव सजनी हम जयपुर के कंगना

कान दुनु सोन हम अहांके देव रे झुलनियाँ
नाकमें देव रे सजनी सानिया कट नथुनिया
छम छम बाजैय गोरी अहांक पैरक पैजनिया
लाखोमें एक अहां छि हमर सुनरी दुल्हनिया

खन खन खन्कैय अहांक  हाथक चुरी  कंगना
चलू चलू  चलू  कनियाँ  यए आई हमरा अंगना
मोती जडल लहँगा पैर लाले लाल चुनरिया
लागैछी अहां धनि पूर्णिमाके चाँद सन दुतिया

हैंस दिय हैंस दिय कने  हैंस दिय कनियाँ
देखू लौनेछी कनियाँ अहांलेल पैरक पैजनिया
अहाँ लेल मोन हमर कटैय दिन राईत अहुरिया
माईनजाऊ बात गोरी कहैय प्रभात जनकपुरिया

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

जीवन सपना

जीवन सपना
- बृषेश चन्द्र लाल

किछु सपना एहन होइत अछि
ने छोडैत अछि ने जोडैत अछि ।
निन्नमे आबि मुदा देखू
नव आश जीवनमे कोरैत अछि ।।

जौं टुटि जाइछ जीवनधारा
सपने जीवनकेँ ढोइत अछि ।
कहुँ लोरीसँ कहुँ होरीसँ
जीवनकेँ सपना धोइत अछि ।।

मगन प्रेममे सपनामे
कहुँ खिलखिल क' मुस्काइत छी ।
कहुँ डरसँ थरथर कनैत–कनैत
कहुँ तपमे खूब भफाइत छी ।।

सपना जीवन की जीवन सपना
ई भेद बड अछि भेदी भैया ।
ने एतए नाओ मझधार विकट
ने ओतए केओ अछि खेवैया ।।

चलू सपनामे जीबू मनसँ
जीवन सपनेसन भ' जाओ ।
ई सुख दर्दकेर सागरमे
दुनू अपनेसन भ' जाओ ।।

ने भेद रहए सपनासँ जौँ
जीवन अनन्त भ' जाइत अछि ।
ने रहैछ तखन सीमा बन्धन ।
ई 'हम' दिगन्त बनि जाइत अछि ।।

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दहेज मुक्त मिथिला के तरफ सँ विभिन्न नगरके --- कार्यकर्ता

  दहेज मुक्त मिथिला के तरफ सँ विभिन्न नगरके जे चार्ज बहुतो जुड़ल सदस्य सभ लेने रही से अपन-अपन नेतृत्वमें किछु-किछु कार्यक्रम घोषणा करै जाइ। एहि सँ सभके संस्थाके वर्तमान प्रगति, सौराठके सफल आयोजन, पंजियन लेल बाकी काज, वर्तमान उद्देश्य आ आगामी दिल्ली कार्यक्रम एहि प्रमुख विन्दुपर सभके जानकारी सेहो दऽ देबैन आ संगहि सभके नैतिक जागरण करैत एहि... मूहिममें जुड़य लेल आग्रह करबनि। हम स्मरण कराबय लेल चाहब:

१. सोनु मिश्रा, पटना (आइ के दिनमें अहाँके कृष्णानन्दजी सेहो सहयोग करताह।)

२. राजु ठाकुर, मद्रास

३. अमित झा, बंगलौर

४. विकास झा, जमशेदपुर

५. अरविन्द झा, कलकत्ता (राघवेन्द्रजी सेहो सहयोग करताह।)

६. अभिषेक आनन्द, दिल्ली (राघवेन्द्रजी, संतोषजी, विभिन्न मित्र सभ सेहो सहयोग करताह।)

७. मदन ठाकुर,  नोएडा 

८. पंकज भाइ, मुंबई (जितमोहनजी आ संदीपजी सेहो सहयोग करताह - ओनाहू अहाँ पहिले सऽ निर्णय केनहिये छी जे कार्यक्रम करबैक।)

९. राकेश रौशन, वाराणसी (सहयोग के आकांक्षा रहलापर आरो कार्यकर्ता देल जा सकैत अछि।)

१०. चन्दन झा, रायपुर

११. प्रकाश भाइ, मधुबनी

१२. प्रवीण चौधरी, बिराटनगर (एवं अन्य - यथासंभव)

१३. पवन झा, जनकपुर

१४. देवेन्द्र मिश्र, राजबिराज

१५. धीरेन्द्र भाइजी, काठमाण्डु संग अन्यत्र

१६. अजित भाइजी, लेखक बीच एवं अन्यत्र

१७. कुञ्जबिहारी मिश्रजी, अपन प्रत्येक कार्यक्रम में

१८. सियाराम झा सरस, अपन कार्यक्रम में

१९. डा. देवेन्द्र झा, अपन कार्यक्रम में

२०. सत्यानन्द पाठक, गुवाहाटी

२१. संजय घोष, सिलिगुड़ी एवं भूटान

एतेक सदस्य एवं गणमान्य लोकनि जाहिमें बहुत गोटे स्वयं जिम्मेवारी लेने छी से हमरा स्मरण अछि - यदि किनको कोनो प्रकारके असुविधा होय तऽ जानकारी दी जाहि सँ वैकल्पिक व्यवस्था देखल जाय। किछु सदस्यके नाम हम बिसैर गेल होइ तऽ अपनहि जानकारी देब। संगहि बहुतो महत्त्वपूर्ण व्यक्तित्व सभ संग एखन सम्पर्कके सिलसिला चलिये रहल अछि। समय-समय पर जानकारी दैत रहब। सभ गोटे मिलिके यथार्थके धरातलपर दहेज मुक्त मिथिलाके अभियानके जोर-शोर सऽ चलाबी से आग्रह।

योजनानुसार मिथिलाके हर गाम में हमरा लोकनिक प्रवेश आ संगठन निर्माण सेहो छल जे पंजियन में देरी के कारण लटकल अछि। पंडित विश्वमोहन चन्द्र मिश्रजीके अध्यक्षतामें एक पंजिकार भ्रमण टोलीके गठन के बात सेहो छल जाहि लेल दिल्लीके कार्यक्रम उपरान्त आवश्यक पहल होइक से जानकारी देबय चाहब।

अपने लोकनि सँ आग्रहजे अपन विचार सेहो निरंतर दैत रहियौक।

जय मैथिली! जय मिथिला!!
हरिः हरः!!

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गजल



जीबन मे दर्दक सनेश शेष कुशल अछि
हम नहि कहब विशेष शेष कुशल अछि

अन्हरे सरकार तँ चला रहल राज-काज
की कहू, छै बौकक इ देश शेष कुशल अछि

देहे टा बदलैए आत्मा नहि सूनि लिअ अहाँ
एहने सरकारक भेष शेष कुशल अछि

मुक्का आ थापड़क उपयोग के करत आब
खाली आँखिए लाल-टरेस शेष कुशल अछि

गजल कहब एतेक सोंझ नै अनचिन्हार
हम तँ आब चलै छी बेस शेष कुशल अछि

**** वर्ण---------17*******

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बृहस्पतिवार, 28 जुलाई 2011

छन्द विचार

दोहा/ रोला/ कुण्डलिया
दोहा
दोहा मात्रिक छन्द अछि। दोहामे दू पाँती आ चारि चरण होइत अछि। पहिल चरणमे १३,दोसर चरणमे ११,तेसर चरणमे १३आ चारिम चरणमे ११ मात्रा होइत अछि। पहिल आ तेसर चरणक आरम्भ जगणसँ (जगण U U) नै हएत आ दोसर आ चारिम चरण अन्त हएत दीर्घ-ह्रस्वसँ।
रोला
रोला सेहो मात्रिक छन्द अछि। रोलामे चारि पाँती आ आठ चरण होइत अछि। पहिल चरणमे ११, दोसर चरणमे १३, तेसर चरणमे ११ आ चारिम चरणमे १३ मात्रा, पाँचम चरणमे ११, छअम चरणमे १३ मात्रा होइत अछि। सभ पाँतीक पहिल चरणक अन्तमे दीर्घ-ह्रस्व, वा ह्रस्व-ह्रस्व-ह्रस्व होइत अछि। सभ पाँतीक दोसर चरणक अन्तमे चारिटा ह्रस्व, वा दूटा दीर्घ, वा दीर्घ-ह्रस्व-ह्रस्व (भगण U U), वा ह्रस्व-ह्रस्व-दीर्घ (सगण U U ।) होइत अछि। रोलाक प्रारम्भ ह्रस्व-दीर्घ-ह्रस्वसँ नै करू।  

कुण्डलिया
दोहा आ रोलाक कुण्डली (मिश्रण) भेल कुण्डलिया। दोहा लिख दियौ, फेर दोहाक अन्तिम चरणकेँ (११ मात्रा बला) रोलाक पहिल चरण बना दियौ (पुनरावृत्ति) आ फेर रोला जोड़ू। खाली ई ध्यान राखू जे दोहाक पहिल चरणक पहिल शब्द आ रोलाक अन्तिम चरणक अन्तिम शब्द एक्के रहए। कुण्डलियाक पहिल शब्द आ अन्तिम शब्द एक्के होइए। कुण्डलियाक चारिम आ पाँचम चरण सेहो एक्के होइए।

छन्द विचार
साहित्यक दू विधा अछि गद्य आ पद्य।छन्दोबद्ध रचना पद्य कहबैत अछि-अन्यथा ओ गद्य थीक। छन्द माने भेल-एहन रचना जे आनन्द प्रदान करए।

छन्द दू प्रकारक अछि।मात्रिक आ वार्णिक।
मात्रिक गणना
मैथिलीक उच्चारण निर्देश आ ह्रस्व-दीर्घ विचारपर आउ।
शास्त्रमे प्रयुक्त गुरुलघुछंदक परिचय प्राप्त करू।

तेरह टा स्वर वर्णमे अ,,,,लृ - ह्र्स्व आर आ,,,,ए.ऐ,,औ- दीर्घ स्वर अछि।

ई स्वर वर्ण जखन व्यंजन वर्णक संग जुड़ि जाइत अछि तँ ओकरासँ गुणिताक्षरबनैत अछि।

क्+अ= क,

क्+आ=का ।

एक स्वर मात्रा आकि एक गुणिताक्षरकेँ एक अक्षरकहल जाइत अछि। कोनो व्यंजन मात्रकेँ अक्षर नहि मानल जाइत अछि- जेना अवाक्शब्दमे दू टा अक्षर अछि, , वा ।


१. सभटा ह्रस्व स्वर आ ह्रस्व युक्त गुणिताक्षर लघुमानल जाइत अछि। एकरा ऊपर U लिखि एकर संकेत देल जाइत अछि।

२. सभटा दीर्घ स्वर आर दीर्घ स्वर युक्त गुणिताक्षर गुरुमानल जाइत अछि, आ एकर संकेत अछि, ऊपरमे एकटा छोट -।

३. अनुस्वार किंवा विसर्गयुक्त सभ अक्षर गुरू मानल जाइत अछि।

४. कोनो अक्षरक बाद संयुक्ताक्षर किंवा व्यंजन मात्र रहलासँ ओहि अक्षरकेँ गुरु मानल जाइत अछि। जेना- अच्, सत्य। एहिमे अ आ स दुनू गुरु अछि।

जेना कहल गेल अछि जे अनुस्वार आ विसर्गयुक्त भेलासँ दीर्घ होएत तहिना आब कहल जा रहल अछि जे चन्द्रबिन्दु आ ह्रस्वक मेल ह्रस्व होएत।
माने चन्द्रबिन्दु+ह्रस्व स्वर= एक मात्रा

संयुक्ताक्षर: एतए मात्रा गानल जाएत एहि तरहेँ:-
क्ति= क् + त् + इ = ०+०+१= १
क्ती= क् + त् + ई = ०+०+२= २
क्ष= क् + ष= ०+१
त्र= त् + र= ०+१
ज्ञ= ज् + ञ= ०+१
श्र= श् + र= ०+१
स्र= स् +र= ०+१
शृ =श् +ऋ= ०+१
त्व= त् +व= ०+१
त्त्व= त् + त् + व= ० + ० + १
ह्रस्व + ऽ = १ + ०
अ वा दीर्घक बाद बिकारीक प्रयोग नहि होइत अछि जेना दिअऽ आऽ ओऽ (दोषपूर्ण प्रयोग)। हँ व्यंजन+अ गुणिताक्षरक बाद बिकारी दऽ सकै छी।
ह्रस्व + चन्द्रबिन्दु= १+०
दीर्घ+ चन्द्रबिन्दु= २+०
जेना हँसल= १+१+१
साँस= २+१
बिकारी आ चन्द्रबिन्दुक गणना शून्य होएत।
जा कऽ = २+१
क् =०
क= क् +अ= ०+१
किएक तँ क केँ क् पढ़बाक प्रवृत्ति मैथिलीमे आबि गेल तेँ बिकारी देबाक आवश्यकता पड़ल, दीर्घ स्वरमे एहन आवश्यकता नहि अछि।


U- ह्रस्वक चेन्ह
।- दीर्घक चेन्ह

एक दीर्घ =दूटा ह्रस्व U

वार्णिक गणना
संयुक्त्ताक्षरकेँ  एक गानू आ  हलन्तक/ बिकारीक/ इकार आकार आदिक गणना नहि करू। वार्णिक छन्दक परिचय लिअ। एहिमे अक्षर गणना मात्र होइत अछि। हलंतयुक्त अक्षरकेँ नहि गानल जाइत अछि। एकार उकार इत्यादि युक्त अक्षरकेँ ओहिना एक गानल जाइत अछि जेना संयुक्ताक्षरकेँ। संगहि अ सँ ह केँ सेहो एक गानल जाइत अछि।द्विमानक कोनो अक्षर नहि होइछ।मुख्य तीनटा बिन्दु यादि राखू-

1.हलंतयुक्त्त अक्षर-0
2.संयुक्त अक्षर-1
3.अक्षर अ सँ ह -1 प्रत्येक।

आब पहिल उदाहरण देखू
ई अरदराक मेघ नहि मानत रहत बरसि के=1+5+2+2+3+3+1=17 मात्रा

आब दोसर उदाहरण देखू
पश्चात्=2 मात्रा

आब तेसर उदाहरण देखू
आब=2 मात्रा

आब चारिम उदाहरण देखू
स्क्रिप्ट=2 मात्रा

मुख्य वैदिक छन्द सात अछि-गायत्री,उष्णिक् ,अनुष्टुप् ,बृहती,पङ् क्त्ति,त्रिष्टुप् आ  जगती। शेष ओकर भेद अछि अतिछन्द आ  विच्छन्द। छन्दकेँ अक्षरसँ चिन्हल जाइत अछि। यदि अक्षर पूरा नहि भेलतँ एक आकि दू अक्षर प्रत्येक पादमे बढ़ा लेल जाइत अछि।य आ
व केर संयुक्ताक्षरकेँ क्रमशः इ आ  उ लगा कय अलग केल जाइत अछि।जेना-
वरेण्यम्=वरेणियम्
स्वः= सुवः
गुण आ वृद्धिकेँ अलग कयकेँ सेहो अक्षर पूर कय सकैत छी।
ए= अ + इ 
ओ= अ + उ
ऐ= अ/आ + ए
औ= अ/आ + ओ 


सरल वार्णिक छन्दमे ह्रस्व आ दीर्घक विचार नै राखल जाइए। मुदा वार्णिक छन्दमे ह्रस्व आ दीर्घक विचार राखल जा सकैत अछि, कारण वैदिक वर्णवृत्तमे बादमे वार्णिक छन्दमे ई विचार शुरू भऽ गेल छल:- जेना
तकैत रहैत छी ऐ मेघ दिस
तकैत (ह्रस्व+दीर्घ+दीर्घ)- वर्णक संख्या-तीन
रहैत (ह्रस्व+दीर्घ+ह्रस्व)- वर्णक संख्या-तीन
छी (दीर्घ) वर्णक संख्या-एक
(दीर्घ) वर्णक संख्या-एक
मेघ (दीर्घ+ह्रस्व) वर्णक संख्या-दू
दिस (ह्रस्व+ह्रस्व) वर्णक संख्या-दू

मात्रिक छन्दमे द्विकल, त्रिकल, चतुष्कल, पञ्चकल आ षटकल अन्तर्गत एक वर्ण (एकटा दीर्घ) सँ छह वर्ण (छहटा ह्रस्व) धरि भऽ सकैए।
द्विकलमे- कुल मात्रा दू हएत, से एकटा दीर्घ वा दूटा ह्रस्व हएत।
त्रिकलमे कुल मात्रा तीन हएत- ह्रस्व+दीर्घ, दीर्घ+ह्रस्व आ ह्रस्व+ह्रस्व+ह्रस्व; ऐ तीन क्रममे।
चतुष्कलमे कुल मात्रा चारि; पञ्चकलमे पाँच; षटकलमे छह मात्रा हएत।
वार्णिक छन्द तीन-तीन वर्णक आठ प्रकारक होइत अछि जे यमाताराजसलगम् सूत्रसँ मोन राखि सकै छी।
आब कतेक पाद आ कतऽ यति,अन्त्यानुप्रास देबाक अछि; कोन तरहेँ क्रम बनेबाक अछि से अहाँ स्वयं वार्णिक/ मात्रिक आधारपर कऽ सकै छी, आ विविधता आनि सकै छी।
वर्ण छन्दमे तीन-तीन अक्षरक समूहकेँ एक गण कहल जाइत अछि। ई आठ टा अछि-
यगण  U।।
रगण U
तगण ।। U
भगण U U
जगण U U
सगण U U
मगण ।।।
नगण U U U

एहि आठक अतिरिक्त दूटा आर गण अछि- ग / ल
ग- गण एकल दीर्घ ।
ल- गण एकल ह्रस्व U
एक सूत्र- आठो गणकेँ मोन रखबा लेल:-
यमाताराजभानसलगम्
आब एहि सूत्रकेँ तोड़ू-
यमाता U।। = यगण
मातारा  ।।। = मगण
ताराज ।। U = तगण
राजभा U। = रगण
जभान U U = जगण
भानस U U = भगण
नसल U U U = नगण
सलगम् U U । = सगण

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चन्द्रमुखी@प्रभात राय भट्ट


चन्द्रमुखी  यए  मृगनयनी चानिपिटल  देह  पिक्वैनी 
अहां घोघ  नए  गिराऊ सजनी  हमरा  देखदिय
रूप अहांक चम् चम् चम्कैय जेना चमके सितारा
देख अहांक रूप सजनी मोन भेलै हमर आवारा
अहां घोघ तर सँ मुस्की मरैय छि चौवनी
मोहिलेली मोन सजनी अहां हमर सोरहनी


चन्द्रमुखी  यए  मृगनयनीचानिपिटल  देह  पिक्वैनी 
अहां घोघ  नए  गिराऊ सजनी  हमरा  देखदिय
भेलू हम घायल अहांक नजरियाकें वाण सँ
जुनी तडपपाऊ सजनी मैर ज्याब हम प्राण सँ
सोलहो श्रींगार साजल अंग अंग अहां  के
करैय ईशारा हमरा मदमातल उमग अहां के

चन्द्रमुखी  यए  मृगनयनीचानिपिटल  देह  पिक्वैनी 
अहां घोघ  नए  गिराऊ सजनी  हमरा  देखदिय

रंगविरंगक  फुल सँ साजल अछि आजुक सेज
रसपान कराऊ सजनी प्यास लागल अछि तेज
सोनपरी सन काया देखि मोनमे उठल हिलोर
यी सोहनगर राईत फेर नै भेटत भेल जैइय भोर

 रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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मंगलवार, 26 जुलाई 2011

कियो भेल अछि अवाद@प्रभात राय भट्ट



कि कहू यौ बाबु भैया  कोना हम जिबैछी,
आईखक नोर  घुईट घुई ट हम पिबैछी,
बेईमान सँ बैच क रहू दैतछि हम यी सम्वाद,
कियो भेल अछि अवाद करी कें हमरा बर्वाद,
फुल गुल सँ भरल बगीचा भगेल विराना 
पतझर जीवन देख आब मरैय सब ताना 
बात बात पैर नाक फुला देय सब उलहना 
चोट पैर चोट मरैय देखू निठुर जमाना  
कियोभेलअछिआबाद करीकें हमरा बर्वाद 
कोना चिन्हु चेहरापैर सब लगौने अछि नकाब
कोना करू दोहरी चरित्र क मनुखक हिसाब,
आदमी की चिन्हैयमें धोखा खा जाईत छि
सभकिछु गामा क मोने मोन पचताईछि
गिरगिट जिका बहुरुपिया रंग फेरैत जाईय
पग पग हमर भरोषाके खून करैत जाईय
कियो भेल अछि अवाद करिकें हमरा बर्वाद  

   रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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रविवार, 24 जुलाई 2011

फजलुर रहमान हासमीक निधन

फजलुर रहमान हासमीक २०-०७-२०११ केँ मृत्यु भऽ गेलन्हि। जन्म -पटना जिलाक बराह गाममे। वृत्ति अध्यापक। हिन्दी कविता संग्रह "रश्मि राशि" आ मैथिली कविता संग्रह "निर्मोही" प्रकाशित। १९९६मे अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दूसँ मैथिली अनुवादपर साहित्य अकादमीक मैथिली अनुवाद पुरस्कार।


(हिनकर एकटा कविता)



हे भाइ

हे भाइ
हमरा जुनि मारह
तोँ हमरा
दोसर जाति
दोसर धर्म्मक बूझि रहल छह-
मुदा हम छी
तोरे भ्राता
अग्रज वा अवरज!
हमरा सभकेँ एके माता
नहि मारह
गैर जानि कऽ
संसारक दृष्टिमे
तोँ पार्थ
आओर
हम “राधेय” बनल छी
मुदा “पृथा” जानि रहल अछि
हदय कानि रहल अछि
चुप अछि
मजबूरीसँ
बेवसीसँ
हे भाइ हमरा नहि मारह...।

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गजल


बाट तकैत दिन बीति जाएत बुझलिऐ
आस तकैत जिनगी बिताएत बुझलिऐ

आफन तोड़ब अहाँ सुनबै तखन की की
बीतत बेर उदासी कहाएत बुझलिऐ


ऊँह ई टीस उठल फेर वेदना सहै
छी
आदति बनल बनि बुझाएत बुझलिऐ

सहबाक शक्ति जे खतम भेल काल्हियेसँ
सम्वेदना अदौसँ जँ हराएत बुझलिऐ


गढ़ुआरि छी पहिने दर्द नै छल कनेको
दुख सहैक सुभावे कहाएत बुझलिऐ

करऽ पड़त मेहनति तिगुना कैक गुना
गोनरिपर बैसल सोचाएत बुझलिऐ

गभछब ऐ मालक जिरतिआ कहबैत
गोरहन्नी लऽ खपड़िआ गाएत बुझलिऐ

गतायात बन्न, भाव गोपलखत्ता गेलैए
गच्छ बना कऽ गोधियाँ बनाएत बुझलिऐ
ऐरावतक गोधिआँ बनत के असगर
हाथी-हेंज बिसरत हराएत बुझलिऐ

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गजल


छोड़ि कऽ जे बिनु बजने जा रहल अछि
हृदै चिरैत आगि सुनगा रहल अछि

नीक लगै छल ओकर बोलक संगोर
जाइए आइ हृदैकेँ कना रहल अछि

नै बुझलिऐ ई एते बढ़ल अछि बात
देखल आइ जे ओ भँसिया रहल अछि

हमरासँ कते की माँगै छल रहरहाँ
जे जुमल ओ बिनु लेने जा रहल अछि

ओकर हाक्रोस हमर चुप्पी सुनै छल
बाजब से बिनु सुनने जा रहल अछि

ऐरावत पटा देलक अपन लहास
नेसुआ कऽ नेढ़िया सृष्टि खा रहल अछि

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मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
(दोसर कड़ी), (तेसर कड़ी), (चारिम कड़ी), (पाँचम कड़ी), (छठम कड़ी), (सातम कड़ी), (आठम कड़ी), (नवम कड़ी), (दसम कड़ी), (एग्यारहम कड़ी), (बारहम कड़ी), (तेरहम कड़ी), (चौदहम कड़ी), (पन्द्रहम कड़ी )

चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

बिदेसिया (संकल्पित नाटिका)

विद्यापतिक बिदेसिया (संकल्पित नाटिका).... भोजपुरीक साहित्य मैथिलीसँ कम समृद्ध अछि मुदा से अछि मात्र परिमाणमे, गुणवत्ताक दृष्टिमे ई कतेक क्षेत्रमे आगाँ अछि। भोजपुरीक भिखाड़ी ठाकुरक बिदेसियाक सन्दर्भमे हम ई कहि रहल छी। भिखाड़ी ठाकुर कलकत्तामे प्रवासी... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

कथा- माउगि

कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

मातृत्व...

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व.... नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि.... (आगाँ पढू)
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मैथिल आर मिथिला
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