रविवार, 31 जुलाई 2011
शुक्रवार, 29 जुलाई 2011
जीवन सपना
जीवन सपना
- बृषेश चन्द्र लाल
किछु सपना एहन होइत अछि
ने छोडैत अछि ने जोडैत अछि ।
निन्नमे आबि मुदा देखू
नव आश जीवनमे कोरैत अछि ।।
जौं टुटि जाइछ जीवनधारा
सपने जीवनकेँ ढोइत अछि ।
कहुँ लोरीसँ कहुँ होरीसँ
जीवनकेँ सपना धोइत अछि ।।
मगन प्रेममे सपनामे
कहुँ खिलखिल क' मुस्काइत छी ।
कहुँ डरसँ थरथर कनैत–कनैत
कहुँ तपमे खूब भफाइत छी ।।
सपना जीवन की जीवन सपना
ई भेद बड अछि भेदी भैया ।
ने एतए नाओ मझधार विकट
ने ओतए केओ अछि खेवैया ।।
चलू सपनामे जीबू मनसँ
जीवन सपनेसन भ' जाओ ।
ई सुख दर्दकेर सागरमे
दुनू अपनेसन भ' जाओ ।।
ने भेद रहए सपनासँ जौँ
जीवन अनन्त भ' जाइत अछि ।
ने रहैछ तखन सीमा बन्धन ।
ई 'हम' दिगन्त बनि जाइत अछि ।।
दहेज मुक्त मिथिला के तरफ सँ विभिन्न नगरके --- कार्यकर्ता
२. राजु ठाकुर, मद्रास
३. अमित झा, बंगलौर
५. अरविन्द झा, कलकत्ता (राघवेन्द्रजी सेहो सहयोग करताह।)
६. अभिषेक आनन्द, दिल्ली (राघवेन्द्रजी, संतोषजी, विभिन्न मित्र सभ सेहो सहयोग करताह।)
८. पंकज भाइ, मुंबई (जितमोहनजी आ संदीपजी सेहो सहयोग करताह - ओनाहू अहाँ पहिले सऽ निर्णय केनहिये छी जे कार्यक्रम करबैक।)
१०. चन्दन झा, रायपुर
१२. प्रवीण चौधरी, बिराटनगर (एवं अन्य - यथासंभव)
१३. पवन झा, जनकपुर
१४. देवेन्द्र मिश्र, राजबिराज
१५. धीरेन्द्र भाइजी, काठमाण्डु संग अन्यत्र
१६. अजित भाइजी, लेखक बीच एवं अन्यत्र
१७. कुञ्जबिहारी मिश्रजी, अपन प्रत्येक कार्यक्रम में
१८. सियाराम झा सरस, अपन कार्यक्रम में
१९. डा. देवेन्द्र झा, अपन कार्यक्रम में
२०. सत्यानन्द पाठक, गुवाहाटी
२१. संजय घोष, सिलिगुड़ी एवं भूटान
योजनानुसार मिथिलाके हर गाम में हमरा लोकनिक प्रवेश आ संगठन निर्माण सेहो छल जे पंजियन में देरी के कारण लटकल अछि। पंडित विश्वमोहन चन्द्र मिश्रजीके अध्यक्षतामें एक पंजिकार भ्रमण टोलीके गठन के बात सेहो छल जाहि लेल दिल्लीके कार्यक्रम उपरान्त आवश्यक पहल होइक से जानकारी देबय चाहब।
अपने लोकनि सँ आग्रहजे अपन विचार सेहो निरंतर दैत रहियौक।
गजल
जीबन मे दर्दक सनेश शेष कुशल अछि
हम नहि कहब विशेष शेष कुशल अछि
अन्हरे सरकार तँ चला रहल राज-काज
की कहू, छै बौकक इ देश शेष कुशल अछि
देहे टा बदलैए आत्मा नहि सूनि लिअ अहाँ
एहने सरकारक भेष शेष कुशल अछि
मुक्का आ थापड़क उपयोग के करत आब
खाली आँखिए लाल-टरेस शेष कुशल अछि
गजल कहब एतेक सोंझ नै अनचिन्हार
हम तँ आब चलै छी बेस शेष कुशल अछि
**** वर्ण---------17*******
बृहस्पतिवार, 28 जुलाई 2011
छन्द विचार
दोहा
मैथिलीक उच्चारण निर्देश आ ह्रस्व-दीर्घ विचारपर आउ।
शास्त्रमे प्रयुक्त ‘गुरु’ आ ‘लघु’ छंदक परिचय प्राप्त करू।
तेरह टा स्वर वर्णमे अ,इ,उ,ऋ,लृ - ह्र्स्व आर आ,ई,ऊ,ऋ,ए.ऐ,ओ,औ- दीर्घ स्वर अछि।
ई स्वर वर्ण जखन व्यंजन वर्णक संग जुड़ि जाइत अछि तँ ओकरासँ ‘गुणिताक्षर’ बनैत अछि।
क्+अ= क,
क्+आ=का ।
एक स्वर मात्रा आकि एक गुणिताक्षरकेँ एक ‘अक्षर’ कहल जाइत अछि। कोनो व्यंजन मात्रकेँ अक्षर नहि मानल जाइत अछि- जेना ‘अवाक्’ शब्दमे दू टा अक्षर अछि, अ, वा ।
१. सभटा ह्रस्व स्वर आ ह्रस्व युक्त गुणिताक्षर ‘लघु’ मानल जाइत अछि। एकरा ऊपर U लिखि एकर संकेत देल जाइत अछि।
२. सभटा दीर्घ स्वर आर दीर्घ स्वर युक्त गुणिताक्षर ‘गुरु’ मानल जाइत अछि, आ एकर संकेत अछि, ऊपरमे एकटा छोट -।
३. अनुस्वार किंवा विसर्गयुक्त सभ अक्षर गुरू मानल जाइत अछि।
४. कोनो अक्षरक बाद संयुक्ताक्षर किंवा व्यंजन मात्र रहलासँ ओहि अक्षरकेँ गुरु मानल जाइत अछि। जेना- अच्, सत्य। एहिमे अ आ स दुनू गुरु अछि।
जेना कहल गेल अछि जे अनुस्वार आ विसर्गयुक्त भेलासँ दीर्घ होएत तहिना आब कहल जा रहल अछि जे चन्द्रबिन्दु आ ह्रस्वक मेल ह्रस्व होएत।
माने चन्द्रबिन्दु+ह्रस्व स्वर= एक मात्रा
संयुक्ताक्षर: एतए मात्रा गानल जाएत एहि तरहेँ:-
क्ति= क् + त् + इ = ०+०+१= १
क्ती= क् + त् + ई = ०+०+२= २
क्ष= क् + ष= ०+१
त्र= त् + र= ०+१
ज्ञ= ज् + ञ= ०+१
श्र= श् + र= ०+१
स्र= स् +र= ०+१
शृ =श् +ऋ= ०+१
त्व= त् +व= ०+१
त्त्व= त् + त् + व= ० + ० + १
ह्रस्व + ऽ = १ + ०
अ वा दीर्घक बाद बिकारीक प्रयोग नहि होइत अछि जेना दिअऽ आऽ ओऽ (दोषपूर्ण प्रयोग)। हँ व्यंजन+अ गुणिताक्षरक बाद बिकारी दऽ सकै छी।
ह्रस्व + चन्द्रबिन्दु= १+०
दीर्घ+ चन्द्रबिन्दु= २+०
जेना हँसल= १+१+१
साँस= २+१
बिकारी आ चन्द्रबिन्दुक गणना शून्य होएत।
जा कऽ = २+१
क् =०
क= क् +अ= ०+१
किएक तँ क केँ क् पढ़बाक प्रवृत्ति मैथिलीमे आबि गेल तेँ बिकारी देबाक आवश्यकता पड़ल, दीर्घ स्वरमे एहन आवश्यकता नहि अछि।
U- ह्रस्वक चेन्ह
।- दीर्घक चेन्ह
सरल वार्णिक छन्दमे ह्रस्व आ दीर्घक विचार नै राखल जाइए। मुदा वार्णिक छन्दमे ह्रस्व आ दीर्घक विचार राखल जा सकैत अछि, कारण वैदिक वर्णवृत्तमे बादमे वार्णिक छन्दमे ई विचार शुरू भऽ गेल छल:- जेना
तकैत रहैत छी ऐ मेघ दिस
तकैत (ह्रस्व+दीर्घ+दीर्घ)- वर्णक संख्या-तीन
रहैत (ह्रस्व+दीर्घ+ह्रस्व)- वर्णक संख्या-तीन
छी (दीर्घ) वर्णक संख्या-एक
ऐ (दीर्घ) वर्णक संख्या-एक
मेघ (दीर्घ+ह्रस्व) वर्णक संख्या-दू
दिस (ह्रस्व+ह्रस्व) वर्णक संख्या-दू
मात्रिक छन्दमे द्विकल, त्रिकल, चतुष्कल, पञ्चकल आ षटकल अन्तर्गत एक वर्ण (एकटा दीर्घ) सँ छह वर्ण (छहटा ह्रस्व) धरि भऽ सकैए।
द्विकलमे- कुल मात्रा दू हएत, से एकटा दीर्घ वा दूटा ह्रस्व हएत।
त्रिकलमे कुल मात्रा तीन हएत- ह्रस्व+दीर्घ, दीर्घ+ह्रस्व आ ह्रस्व+ह्रस्व+ह्रस्व; ऐ तीन क्रममे।
चतुष्कलमे कुल मात्रा चारि; पञ्चकलमे पाँच; षटकलमे छह मात्रा हएत।
वार्णिक छन्द तीन-तीन वर्णक आठ प्रकारक होइत अछि जे “यमाताराजसलगम्” सूत्रसँ मोन राखि सकै छी।
आब कतेक पाद आ कतऽ यति,अन्त्यानुप्रास देबाक अछि; कोन तरहेँ क्रम बनेबाक अछि से अहाँ स्वयं वार्णिक/ मात्रिक आधारपर कऽ सकै छी, आ विविधता आनि सकै छी।
वर्ण छन्दमे तीन-तीन अक्षरक समूहकेँ एक गण कहल जाइत अछि। ई आठ टा अछि-
यगण U।।
रगण ।U।
तगण ।। U
भगण । U U
जगण U। U
सगण U U ।
मगण ।।।
नगण U U U
एहि आठक अतिरिक्त दूटा आर गण अछि- ग / ल
ग- गण एकल दीर्घ ।
ल- गण एकल ह्रस्व U
एक सूत्र- आठो गणकेँ मोन रखबा लेल:-
यमाताराजभानसलगम्
आब एहि सूत्रकेँ तोड़ू-
यमाता U।। = यगण
मातारा ।।। = मगण
ताराज ।। U = तगण
राजभा ।U। = रगण
जभान U। U = जगण
भानस । U U = भगण
नसल U U U = नगण
सलगम् U U । = सगण
चन्द्रमुखी@प्रभात राय भट्ट
मंगलवार, 26 जुलाई 2011
कियो भेल अछि अवाद@प्रभात राय भट्ट
रविवार, 24 जुलाई 2011
फजलुर रहमान हासमीक निधन
(हिनकर एकटा कविता)
हे भाइ
हे भाइ
हमरा जुनि मारह
तोँ हमरा
दोसर जाति
दोसर धर्म्मक बूझि रहल छह-
मुदा हम छी
तोरे भ्राता
अग्रज वा अवरज!
हमरा सभकेँ एके माता
नहि मारह
गैर जानि कऽ
संसारक दृष्टिमे
तोँ पार्थ
आओर
हम “राधेय” बनल छी
मुदा “पृथा” जानि रहल अछि
हदय कानि रहल अछि
चुप अछि
मजबूरीसँ
बेवसीसँ
हे भाइ हमरा नहि मारह...। Read more...
गजल
ऊँह ई टीस उठल फेर वेदना सहै छी
गजल













