शनिवार, 27 अगस्त 2011

गरीबक जिनगी भेल पहार@प्रभात राय भट्ट




गरीबक जिनगी भेल पहार
दुनिया सगरो लगैया अन्हार -- २

भूखल पेट जेकर टूटल घरदुवार
वर्षा में भीत गिरल हवा उरौलक चनवार
फाटल अंगा झलकैया अंग उघार
सर्दी सं थर थर कापिं बहैय पूर्वाबयार
गरीबक जिनगी भेल पहार ..............2
दुनिया सगरो लगैया अन्हार ............2

दिन दू;खी पैर हुकुम करैया
नेता आर सरकार
गरीबक बच्चा कोना जिबैय
केकरो नै कुनु दरकार
गरीबक जिनगी भेल पहार ..............2
दुनिया सगरो लगैया अन्हार ............2

बड़का माछ छोटका माछके
बनौलक अपन  आहार 
धनवान बनल अछि शिकारी
निर्धन के करेय शिकार
गरीबक जिनगी भेल पहार ..............2
दुनिया सगरो लगैया अन्हार ............2

अन्न अन्न लय जी तर्सैया
भेटे नै किछु आहार
के बुझत मर्म गरीबक
साहू महाजन नै दैय उधार
गरीबक जिनगी भेल पहार ..............2
दुनिया सगरो लगैया अन्हार ............2

माए बाबु रोग सं ग्रसित
कोना करी हुनक उपचार 
तंग आबिगेलहूँ हम
देख इ दुनियाक व्यवहार
गरीबक जिनगी भेल पहार ..............2
दुनिया सगरो लगैया अन्हार ............2


रचनाकार:- प्रभात राय भट्ट

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बृहस्पतिवार, 25 अगस्त 2011

दूर जाऊ यौ दीवाना@प्रभात राय भट्ट





हम अहांक प्रेम दीवाना
अहिं सं प्रीत करैत छी
हमरा जुनी बुझु आन
अहिं छी हमर जान
कहैछी बात गोरी हम धर्म इमान सं
प्रेम करैछी अहां सं हम दिलोजान सं

दूर जाऊ यौ दीवाना
हमरा लग नै आबू
खोजू दोसैर ठिकाना
हमरा नै बह्काबू
बात हमर मानु  यौ करू नै अहां नादानी  
भैया हमर मोन पाडी देता अहांक नानी 

जयपुर सं लहँगा लेलौं
वनारस सं वनारसी साड़ी
जगमग करत रूपक ज्योति
देव अंग अंग हम हिरामोती
भेलू हम दीवाना गोरी देख अहांक रूपरंग 
मोन होइय अहांक हाथ पकरी चली संग

अटरपटर अहां येना किये बजैत छी
लेफ्ट राइट आगू पछु किये करैत छी
हमरा नै सिखाबू अहां प्रेमक परिभाषा
हम जनैतछी अहांक मोनक अभिलाषा
नै चाही हमरा हिरामोती आर अहांक लहँगा साड़ी
बापक प्यारी म्याके दुलारी हम थिक मिथिलाक  नारी

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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मंगलवार, 23 अगस्त 2011

मैथिल करू अपन मात्रिभुमिक रक्षा --अप्पू मिथिला




जागु जागु यौ मैथिल युवा जागु
सुनु मिथिला माएक विह्वल पुकार
सोनित सं भिजल माएक आँचर
छाती पैर हुनक चलल हरक फार
सुनु हृदय विदारक माएक चीत्कार
क्रूर शाषक  रहे मिथिलाक खतरा
ब्रिटिश केलक मिथिलाक चिर दू कतरा
बनौलक त्रिपक्षय सुगौली संधिक पत्रा
नेपालमें पईरगेल आधा मिथिलाक टुक्रा
बिहार नेपालमे मिथिला भेल अछि विभक्त
जागु जागु यौ मैथिल मिथिला माएक भक्त
कोना खेलब यौ मैथिल मिथिलाक कोरामें 
माएक आँचर डुबल अछि नोरक अश्रुधारामें
बिहार में मैथिलके देख्बैय बिहारी लाठी
नेपालमे देखाबैय मैथिलके पहाड़ी खोर्नाठी
केहन इ दुर्भाग्य बनल छि भाई भाई अनचिन्हार 
लहू सं लतपत भेल अछि मिथिलाक मुहार
१९१६ के सन्धिमें मिथिला बाँटल गेल
आधा मिथिला नेपालमे लीज पैर चैलगेल
जनकपुरधाम अछि नेपालक अंग तोडू इ भ्रम
२०१६ में भरहल अछि सन्धिक समझौता ख़त्म 
जागु जागु मैथिल करू अपन मात्रिभुमिक रक्षा
सब करी एक मिथिला एक प्रदेशक प्रतीक्षा
जय मिथिला जय मैथिल ///////////////////////

रचनाकार--अप्पू मिथिला

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रविवार, 21 अगस्त 2011

प्रो. रामशरण शर्मा क मृत्यु

प्रो. रामशरण शर्मा 1 सितम्बर 1920 बरौनी (बिहार) मे जन्म , मृत्यु 21 अगस्त 2011 पटनामे।
- 15 देशी-विदेशी भाषामे 115 से बेशी किताब प्रकाशित

-पहिल किताब "विश्व इतिहास की भूमिका (दू खंडमे) 1949 मे प्रकाशित
-अंतिम पुस्तक "इकोनामिक हिस्ट्री आफ अर्ली इंडिया"
-भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषदक संस्थापक अध्यक्ष
-जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप, यूजीसी नेशनल फेलोशिप आ वीके राजवाड़े लाइफटाइम अवार्ड

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बाढ़ि अपडेट

बाढ़ि अपडेट
मधेपुरा- नदीमे पानिक बढ़ब रुकल
एनएच 107- बलुआहा डायवर्सनक 20 फीट हिस्सा बहल
बेंगा पुल- लगक डायवर्सनपर तीन फीट पानि
चौसा प्रखंड- 6 टा पंचायत नदीक पानीमे
सुपौलक अमहा- नहर टूटल; दक्षिणी सुखासन आ पूर्वी आर्मी डायवर्सन पुलक जलकुंभी प्रशासन निकलबेलक

सुपौलक सरायगढ़ प्रखंड- उत्क्रमित मवि पिपरा-खुर्द पुनर्वासमे बाढ़िक पानि भरल
कटिहार- बारसोईमे बिहार-बंगाल सीमापर नागर नदीमे बाढ़ि, विघोर क्षेत्रक गाम जलमग्न, डेंगरापाड़ा , नजराबाड़ी, पीरासन गाममे बाढ़िक पानि

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चलैतछी डगैर पैर@प्रभात राय भट्ट




चलैतछी डगैर पैर शुद्ध मन वचन कर्म सं
गबैतछी गीत हम अपन ईमान धर्म सं
वैदेहीक जन्मभूमि  राजर्षि जनक के गाम 
मिथिलाक हम  वासी वास हमर जनकपुरधाम
जग में सुन्दर अछि इ नाम जय जय जय मिथिलाधाम

मिथिलाक जन जन मैथिल मथिली हमर भाषा
पुनह पुनह जन्म ली मिथिलेमें इ हमर अभिलाषा
उत्तर हिमगिरी हिमालय दक्षिण पावन पतित गंगा
कोशी गंडक  जनकपुर  चाहे   बसु दरभंगा  
इ समस्त भूमि अछि मिथिला जय जय जय मिथिलाधाम

दया धर्म हृदय में राखी मिथिलाक जन जन मैथिल
सौहार्द्य वातावरण सृजन करी मिथिलाक जन जन मैथिल
जातपातक भेदभाव सं दूर रही मिथिलाक मैथिल
हिन्दू करैय मुस्लिमके सलाम मुस्लिम  हिन्दुकें प्रणाम
डोम घर दहिचुरा खेलैथ पाहून राम जय जय जय मिथिलाधाम

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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शुक्रवार, 19 अगस्त 2011

परदेश छोईड चलू@प्रभात राय भट्ट



परदेश छोईड चलू अपन गाम यौ मीता
सभ भाईकें बोलाबैय अपन बोहीन सीता
घुमु अमेरिका लन्दन चाहे रूस जापान यौ 
भेटत नै जगमे यी सुन्दर मिथिलाधाम यौ
स्वर्ग सं सुन्दर अछि अपने जनकपुर नगरिया
चले चलू मीता राजा जनक केर दुवरिया

उर्वर्भूमि अछि अपने मिथिलाधाम यौ
गम गम गम्कैय खेत में बासमती धान
सगरो भेटैय माछ मखान आर पान यौ
गाछ गाछ पैर झुलैय मालदह आम
चले चल मीता बोहीन सीताक गाम यौ 
जगमें महान हमर मिथिलाधाम यौ

परदेश छोइड चलू अपन गाम यौ मीता
सभ भाई के बोलाबैय अपन बोहीन सीता
पाहून हमर मर्यादा पुरोषोतम राम यौ
विद्यापति वाचस्पति मिथिलाक शान यौ
मुर्ख बनैय एकही राईतमें ईठाम विद्वान यौ
कालिदास हमर भेलाह समूचा जगमे महान यौ

चले चल छोइड सौदी कतार दुबई कुबेत रे
श्रम सं सीचब मीता अपने बारी आर खेत रे 
रंगविरंगक साग सब्जी उब्जत खईब भईर पेट रे
हिया जुडैतो माए बाबु बोहीन भौजीक स्नेह रे
चले चल मीता अपन बोहीन सीताक गाम रे
जगमे महान हमर अपने मिथिलाधाम रे

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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बृहस्पतिवार, 18 अगस्त 2011

घुईर आऊ गाम यौ@प्रभात राय भट्ट




बौआ हमर नुनु  घुईर  आऊ गाम यौ
दिन राईत हम राटैछी अहिक नाम यौ
माए कें बिसरी बौआ गेलें तें प्रदेश
ममता केर देलें बौआ वियोगक सनेश

बौआ हमर नुनु  घुईर  आऊ गाम यौ
अहू ठाम भेटै छै रोजगार आर काम यौ
आनक चाकर बनल छोडू करू अपन देशक सेवा
सुख समृधि शांति भेटत आर भेटत निक निक मेवा

बौआ हमर नुनु घुईर आऊ गाम यौ
जगमे कहा भेटत एहन सुन्दर मिथिलाधाम यौ
मातृभूमि छोईड़ गेलें बौआ हमर कमौआ
माएक ममाताकें आंच लगा कतयेक कमेबे ढौआ

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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बुधवार, 17 अगस्त 2011

साहित्य अकादेमी बाल साहित्य पुरस्कार २०११

साहित्य अकादेमी बाल साहित्य पुरस्कार २०११ मैथिली लेल ले.क. मायानाथ झा केँ हुनकर लोककथा संग्रह "जकर नारी चतुर होइ" लेल देल गेल अछि। डॉ.भगवानजी चौधरी, प्रो. चन्द्रधर झा आ डॉ. इन्द्रकान्त झा जूरी रहथि, जूरीमे सं दू गोटे मैथिली साहित्य लेल अज्ञात नाम रहथि, से विवाद उठल जे जूरी लोकनि साहित्य अकादेमी मैथिली परामर्शदाता समितिक अध्यक्ष श्री विद्यानाथ झा "विदितक " रबर स्टाम्प रहथि । २०११ क विदेह साहित्य अकादेमी समानान्तर बाल साहित्य पुरस्कार सेहो ले.क. मायानाथ झाकेँ "जकर नारी चतुर होइ" लेल देल गेल छल।

ई घोषणा साहित्य अकादेमीक मैथिली विभाग लेल ओतेक असहज निर्णय नै छल। साहित्य अकादेमीक मैथिली विभागक ब्राह्मणवादी चेहराक असल परीक्षा हएत जखन ओकर मूल पुरस्कारक घोषणा हएत। २०११ क विदेह साहित्य अकादेमी समानान्तर मूल साहित्य पुरस्कार श्री जगदीश प्रसाद मण्डल जी केँ मैथिलीक आइ धरिक सर्वश्रेष्ठ कथा संग्रह “गामक जिनगी” लेल देल गेल छन्हि।


नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता (नेपाल देशक भाषा-साहित्य,  दर्शन, संस्कृति आ सामाजिक विज्ञानक क्षेत्रमे  सर्वोच्च सम्मान)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता
श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)
श्री राम दयाल राकेश (1999)
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान मानद सदस्यता
स्व. सुन्दर झा शास्त्री

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव

फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्ट काठमाण्डू, नेपालक सम्मान
फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान २०६७ - मिथिला नाट्यकला परिषदकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ - सप्तरी राजविराजनिवासी श्रीमती मीना ठाकुरकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ -बुधनगर मोरङनिवासी दयानन्द दिग्पाल यदुवंशीकेँ

साहित्य अकादेमी  फेलो- भारत देशक सर्वोच्च साहित्य सम्मान (मैथिली)


           १९९४-नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” १९११-१९९८ ) , हिन्दी आ मैथिली कवि।
            २०१०- चन्द्रनाथ मिश्र अमर (१९२५- ) - मैथिली साहित्य लेल।

साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान ( क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य आ गएर मान्यताप्राप्त भाषा लेल):-
           
           २०००- डॉ. जयकान्त मिश्र (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
           २००७- पं. डॉ. शशिनाथ झा (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
            पं. श्री उमारमण मिश्र

 साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली


१९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन)
१९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य)
१९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास)
१९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य)
१९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य)
१९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास)
१९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण)
१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य)
१९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना)
१९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य)
१९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य)
१९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास)
१९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य)
१९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास)
१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास)
१९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य)
१९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा)
१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)
१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा)
१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)
१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)
१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा)
१९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)
१९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध)
१९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)
 १९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)
 १९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य)
 १९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू, कथा संग्रह)
 १९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य)
 १९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य)
 १९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा)
 २०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)
 २००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)
 २००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य)
 २००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)
 २००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)
 २००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)
 २००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)
 २००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)
 २००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा)
 २००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)
 २०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास)
  
साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार
 १९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)
 १९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी)
 १९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू)
 १९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)
 १९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू)
 १९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़)
 १९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला)
 १९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला)
 २०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)
 २००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)
 २००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू)
 २००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया)
 २००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी)
 २००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)
 २००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)
 २००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)
 २००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)
 २००९- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी-  सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)
 २०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास ( "इग्नाइटेड माइण्ड्स" - मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा"- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी)

साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार
२०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल"  लेल
२०११- ले.क. मायानाथ झा "जकर नारी चतुर होइ" लेल
प्रबोध सम्मान
 प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- )
 प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- )
 प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- )
 प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- )
 प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- )
 प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- )
 प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- )
 प्रबोध सम्मान 2011- श्री सोमदेव (1934- )
  
यात्री-चेतना पुरस्कार

 २००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;
 २००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;
 २००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;
 २००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा;
 २००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;
 २००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;
 २००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;
 २००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;
 २००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी
 २००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा
 २०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी, महिषी, सहरसा

कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान
 २००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झा (कविता संग्रह “एना त नहि जे”)
 २००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता” (नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश)
 २०१० ई.- श्री महाप्रकाश (कविता संग्रह “संग समय के”) 

भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता
युवा पुरस्कार (२००९-१०) गौरीनाथ (अनलकांत) केँ मैथिली लेल।

भारतीय भाषा संस्थान (सी.आइ.आइ.एल.) , मैसूर रामलोचन ठाकुर:- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००३-०४ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।  रमानन्द झा 'रमण':- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००४-०५ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।

विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार

१.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ 
२०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल)
२०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल)

२.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ 
२०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह)
२०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह)
२०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक)
२०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मा नदीक माझी, बांग्ला- माणिक वन्दोपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद)

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शनिवार, 13 अगस्त 2011

रक्षाबंधन@प्रभात राय भट्ट




जगमें अनमोल अछि भाई बोहिनक प्यार
रक्षाबंधन अछि भाई बोहिनक बड़का त्यौहार
जुग जुग जीवु रन बन सं जीतक आबू
सुख समृधि शांति भैया अबिरल अहां पाबू

जगमें अनमोल अछि भाई बोहिनक प्यार
लौनेछी बोहिन अहांलेल रक्षाबंधनक उपहार  
भेटत कतय बोहिन सन निश्च्छल स्नेहक अनुराग
बिचरण करय जगमें बोहिनक निस्वार्थ प्रेमक प्राग

जगमें अनमोल अछि भाई बोहिनक प्यार भैया
सैद्खन पावि हम अहींक प्रगाढ़ प्रेमक दुलार भैया
मुह मिठाई  माथ फाग सोभैय ललाट पैर चन्दन 
बिसरब  नै बोहिन  केर भैया बन्हैछी रक्षाबंधन 


रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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सोमवार, 8 अगस्त 2011

बम बम महादेव@प्रभात राय भट्ट



बोलू यौ भैया बोल बम
बोलू ए बहिना बोल बम
मन सं बोलू बोल बम
तन सं बोलू बोल बम
सैद्खन बोलू बोल बम
बम बम महादेव बम बम बम २

बाबा रहैय भुत पिशाचक संग
बजैय डमरू आर मृदंग
पिबैय घोईर घोईर भंग
रहैय बाबा सैद्खन मतंग
नचैय भुत बैतालक संग
बम बम महादेव बम बम बम  २

गलामें बाबा केर सर्पक हार
छोडैय नाग फुफकार 
खोलू न बैद्नाथ अपन केबार 
भक्त आएल अहांक द्वार
करू न  दानी हमरो उधार
बम बम महादेव बम बम बम २

सभक नाथ बाबा पशुपतिनाथ
हमरा केने छि किये अनाथ
कल्पी कल्पी विनती करैछी जोड़ी हाथ
दर्शन दिय मोर दुखियाके हे जलेस्वरनाथ
शरणमें आएल छि अहिंके हे कप्लेस्वरनाथ
बम बम महादेव बम बम बम २

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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रविवार, 7 अगस्त 2011

गजल- सदरे आलम "गौहर"

सदरे आलम "गौहर"

व्याख्याता:-एस.एम.जे.कालेज खाजेडीह, ग्राम पो:- पुरसौलिया.मधुबनी


गजल
दाम एतय सभ चीजक देब' पड़ै छै।
अधिकारक लेल झग्गड़ '' पड़ै छै।

गज भरि जमीन जौँ कौरव नहि देब' चाहै।
पाँडव के फेर लोहा लेब' पड़ै छै।

कर्बला केर खिस्सा ' दुनिया जानै छै।
धर्मक खातिर शीश कटाब' पड़ै छै।

झग्गड़ झँझट मानलौँ नीक नहि होइ छै मुदा।
जीब' खातिर ईहो '' पड़ै छै।

"
गौहर" साधु '' लए चाहैत अछि मुदा।
दुर्जन केँ जे पाठ पढ़ाब' पड़ै छै।

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शनिवार, 6 अगस्त 2011

हम नै ज्याब आब मेला अकेला@प्रभात राय भट्ट


यौ  पिया हम नै ज्याब आब मेला अकेला
मेलामें देखलौं पिया बड बड अजगुत खेला
आदमी पैर आदमी रहे ठेलमठेल
बिचमें छौडा सभ करैत  धुरमखेल
यौ पिया हम नै ज्याब आब मेला अकेला २

दरुपिबा सभ केलक बड़ा हुलदंगा
केलक हमरा छेड़खानी लुचालाफंगा
कियो मारैय टिहकारी कियो मारैय पिहकारी
मटकी माईर माईर बोलाबे हमरा छौडाछेबारी
यौ पिया हम नै ज्याब आब मेला अकेला २

प्रेमी मग्न भेल गाबैत रहे पिया मल्हार
चोरबा लक भागल ओकर गिरमल्हार
कान ककरो चिरल नाक रहे फारल
चाई चंडाल गहना लक सभटा भागल
यौ पिया हम नै ज्याब आब मेला अकेला २

गंजा भांग पिने बुढ्बो अपने मोन मतंग
बड बड लीला भेल कनिया बहुरियाक संग
छौडा सभ केलक पिया हमरो बड तंग
आँखी सं देख्लौ पिया ई सभटा खेला
यौ पिया हम नै ज्याब आब मेला अकेला
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
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चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

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विद्यापतिक बिदेसिया (संकल्पित नाटिका).... भोजपुरीक साहित्य मैथिलीसँ कम समृद्ध अछि मुदा से अछि मात्र परिमाणमे, गुणवत्ताक दृष्टिमे ई कतेक क्षेत्रमे आगाँ अछि। भोजपुरीक भिखाड़ी ठाकुरक बिदेसियाक सन्दर्भमे हम ई कहि रहल छी। भिखाड़ी ठाकुर कलकत्तामे प्रवासी... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

कथा- माउगि

कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

मातृत्व...

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व.... नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि.... (आगाँ पढू)
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