बुधवार, 28 सितम्बर 2011

कुण्डली

सत असत मे भेद करू, राखू नै किछु रोख

ततमत नै करू कनियो, जे छै होनी लेख

जे छै होनी लेख, हुए से नीक निकेना

सत्यक जीत हएत , जँ करबै अकसतिकस ने

डर संग असत केर, डर ढाहू मध्य हृदयक

ऐरावतक बुझैत, यएह छी असत्यक सत

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गजल (बहरे हजज)

महामाला महाडाला करै स्वाहा लगैए ई

अकासी आस छै सोझाँ झझा देतै लगैए ई



कहैए ई मिलेबै आइ नोरोमे कने गोला

जँ भांगे पीबि एतै, भावना पीतै लगैए ई



जहाँ ताकी लगैए प्रेम बाझै छै सरैलामे

खने भोकारि पाड़ैए हँसै नै छै लगैए ई



टिपौड़ी छै बुझेबै बात की, धाही कनी देखू

कटैया पानि जेना ओ, नचै नै छै लगैए ई



गजेन्द्र पूब सुरुजक रहत देतै सूर्यकेँ झाँखी

चढ़त आकास देखै बानसब्बरै लगैए ई

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गजल

मनुख जरैए गाम कनैए हमरा की/
चद्दरि तनने फोंफ कटैए हमरा की



बान्हक कातमे घर बनेने बाट जोही/
बाट बिसरि कऽ नै बिलमैए हमरा की



सुन्दर सपना रातुक, देखल बिसरी/
सपना सच नै भेल लगैए, हमरा की


चलू चलै छी नव देशमे घृणा जतऽ नै/
अप्पन देश बिलटि जँ गेलै, हमरा की


गारि देबाले बिर्त देलक हम नै लेलौं/
ऐरावत लेत प्रेम, नै दैए हमरा की

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गजल

सोझाँ देखि मोन ललाइए चलू घुरि चली/

ई आस अपूर्ण बुझाइए चलू घुरि चली



कोन पक्का रंगसँ ढौराबी जे धोखराए नै/

मोनक रंगो धोखराइए चलू घुरि चली



छल बुझाइत छली आब बुझि गेल बात/

छलबाक चालि बुझाइए चलू घुरि चली



ठकैए हमरा हम जानि-बूझि ठकाइत/

प्राप्ति भेलै किछु बुझाइए चलू घुरि चली



भारी धापक धम्मक पसरि गेलै सगरे/

ऐरावत ऐल सुनाइए चलू घुरि चली

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सोमवार, 26 सितम्बर 2011

गजल

एतऽ माथ चकराइए चलू घुरि‍ चली
तनोसँ तन छुबाइए चलू घुरि‍ चली

कि‍यो ककरो नहि‍ देखैए ऐ समाजमे
मोने मन झगड़ाइए चलू घुरि‍ चली

गोर मौगी गौरवे आन्हर भेलि‍ अड़ल
करि‍या बाट बुझाइए चलू घुरि‍ चली

कोन उपाए लगाबी तौड़ैले ऐ फानीकेँ
टूटि‍ मन जे कनाइए चलू घुरि‍ चली

करब नै कोनो आस ऐ समाजसँ हम
उमेश जँ घुरियाइए चलू घुरि‍ चली

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कुण्डली

कुण्डली


बोल वचन हुअए नीक, बूझि बाजी जँ बात

गुम्म रहनाइए ठीक, हुए जँ नमहर जाल

हुए जँ नमहर जाल, लेत ओ लप दऽ भीतर

हल्ला बनि जाएत, नै अछि जँ बेर उचित पर

सुनू हमर ई बात, बात होइए अनमोल

ऐरावत कहि जाय, कहू नै ओल सन बोल

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गजल

गजल




खेत, आरि, रस्ता सभटा अहीं तँ छी

बेढ़ि चारूकात पड़ता अहीं तँ छी





ओकर इयाद आबैए घुरि घुरि

इयादक याद अगता अहीं तँ छी



भजार मोन पड़ैए, बिदा होइ छी

टूटल सपनाक झंझा अहीं तँ छी





भोरे उदासी उड़ियाइत जाइत

जे बुन्नी बुनिऐल छिच्चा अहीं तँ छी





खुशी छूटल हँसी छूटल जाइए

दुख-सुखक अकाल जा, अहीं तँ छी

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शनिवार, 24 सितम्बर 2011

अनचिन्हार आखर- आशीष अनचिन्हार

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शुक्रवार, 23 सितम्बर 2011

बाल नाट्य अभिनय पाठशाला

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बुधवार, 21 सितम्बर 2011

दहेज मुक्ति के लेल मिथिलांचल स शुरू भेल नव् प्रयास


 दहेज मुक्ति के लेल मिथिलांचल स शुरू भेल नव् प्रयास
     पवन झा”अग्निवाण”
भारतीय संस्कृति के प्राचीन जनपद में स एक राजा जनक के नगरी मिथिलाक अतीत जतेक स्वर्णिम छल वर्तमान उतवे विवर्ण आइछ। देवभाषा संस्कृत के पीठस्थली मिथिलांचल में एक स बढ़ी क एक संस्कृत के विद्वान भेला जिनकर विद्वता भारतीय इतिहास के धरोहर आइछ। उपनिषद के रचयिता मुनि याज्ञवल्क्य, गौतम, कनाद, कपिल, कौशिक, वाचस्पति, महामह गोकुल वाचस्पति, विद्यापति, मंडन मिश्र, अयाची मिश्र, सन नाम इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में रवि के प्रखर तेज के समान आलोकित आइछ। चंद्रा झा मैथिली में रामायण के रचना केलि। हिन्दू संस्कृति के संस्थापक आदिगुरु शंकराचार्य के सेहो मिथिला में मंडन मिश्र के विद्वान पत्नी भारती स पराजित होव परलैन। कहल जाइत आइछ ओई समय मिथिला में पनिहारिन सब स संस्कृत में वार्तालाप सुनी शंकराचार्य आश्चर्यचकित भेला।
कालांतर में हिन्दी व्याकरण के रचयिता पाणिनी , जयमंत मिश्र, महामहोपाध्याय मुकुन्द झा “ बक्शी” मदन मोहन उपाध्याय, राष्ट्रकवि रामधारी सिंह “दिनकर”, बैद्यनाथ मिश्र “यात्री” अर्थात नागार्जुन, हरिमोहन झा, काशीकान्त मधुप, कालीकांत झा, फणीश्वर नाथ रेणु, बाबू गंगानाथ झा, डॉक्टर अमरनाथ झा, बुद्धिधारी सिंह दिनकर, पंडित जयकान्त झा, डॉक्टर सुभद्र झा, सन उच्च कोटि के विद्वान और साहित्यिक व्यक्तित्वों के चलते मिथिलांचलक ख्याति रहे। अइयो राष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त कतिपय लेखक, पत्रकार, कवि मिथिलांचल स संबन्धित छैथ। मशहूर नवगीतकार डॉक्टर बुद्धिनाथ मिश्रा, कवयित्री अनामिका सहित समाचार चैनल तथा अखबार में चर्चित पत्रकारक बड़ाका समूह ई क्षेत्र स संबंधित छैथ। मगर एकर फायदा ई क्षेत्र के नहीं भेट पावी रहल आइछ। राज्य और केंद्र सरकार द्वारा अनवरत उपेक्षा और स्थानीय लोकक विकाशविमुख मानसिकता के चलते कहियो देश का गौरव रहल इ क्षेत्र आई सहायता के भीख पर आश्रित आइछ। बढ़ीग्रस्त क्षेत्र होव के कारण प्रतिवर्ष इ क्षेत्र कोशी, गंडक, गंगा आदि नदि के प्रकोप झेलैत आइछ। ऊपर स कर्मकांड के बोझ स दबल इ क्षेत्र चहियो क भी विकास के नव अवधारणा के अपनेवा में सफल नै भ पवी रहल आइछ। जे लोक शैक्षणिक, आर्थिक और सामाजिक रूप स सक्षम छैथ सब आत्मकेंद्रित अधिक छैथ, तै हेतु हुनकर योगदान ई क्षेत्र के विकास में नगण्य छैन। मिथिलांचल स जे कोनो प्रबुद्धजन बाहर गेला ओ कहियो घुमियो क ई क्षेत्र के विकास के तरफ ध्यान नहीं देलखिन। पूरा देश और विश्व में मैथिल मिल जेता मगर अपन मातृभूमि के विकासक हुनका कनिको चिंता नई छैन।
एहन में सामाजिक आंदोलन के जरूरत के देखैत स्थानीय और प्रवासी शिक्षित एवं आधुनिक विचार के एक युवा समूह नव तरीका स मिथिलाञ्चल में अपन उपस्थिती दर्ज़ करेला। दहेज मुक्त मिथला के बैनर के निचा संगठित भ इ युवक सब अपन इ मुहिम का नाम देलखिन “ दहेज मुक्त मिथिला”।
... “दहेज मुक्त मिथिला” जेना कि नाम स स्पष्ट आइछ कि इ एकटा एहन आंदोलन छाई जेकर बुनियाद दहेज स मुक्ति के लेल रखल गेल आइछ। बिहार के महत्वपूर्ण क्षेत्र मिथिलांचल स जुरल और देश-विदेश में पसरल शिक्षित और प्रगतिशील युवकक एक समूह मैथिल समाज स दहेज के खत्म करवाक संकल्प के संग अई आंदोलन के शुरुआत केला। सामंती सोच के मैथिल समाज में ऐना त इ आंदोलन के आगू बहुत रास मुश्किलों के सामना कर परतइ मगर शुरुआती तौर पर एकरा भेट रहल सफलता स ऐना लागी रहल आइछ, कि मिथिलांचल के आम आदमी में दहेज के प्रति वितृष्णा के भाव घर कई लेने छैन और ऊ सब अई स निजात पेवाक एक्छुक छैथ।
दहेज मुक्त मिथिला के अध्यक्ष प्रवीण नारायण चौधरी कहैत छथिन जे कि “मिथिलांचल में अतीत मे स्वयंवर की प्रथा छल जाकर प्रमाण मिथिला नरेश राजा जनक के कन्या सीताक स्वयंवर थिक। समय के साथ मिथिलांचल में सेहो विवाहक रूप में विकृति आयल और नारीप्रधान इ समाज पुरुषक धनलिपसाक शिकार होइत गेल। कहियो अई समाज में शादी में दहेज के नाम पर झूटका(ईंटक टुकड़ा) गिन क देल जाइत छल, वेह आइ दहेजक रकम लाखों में पहुँच गेल। दहेज के साथ बाराती के आवाभगत में जे रुपैया खर्च होइत आइछ ओकर आंकलन स देह सिहर लागैत आइछ। जेना-जेना समाज में शिक्षा के प्रचार-प्रसार बढल दहेज के रकम सेहो बढ़ी रहल आइछ।“ श्री चौधरी आगू कहैत छैथ कि बड़का बिडम्बना छई कि लोक लड़की के शिक्षा पर भेल खर्च के स्वीकार करब बिसईर जाइत छैथ।
संस्थाक उपाध्यक्षा श्रीमती करुणा झा कहैत छैथ जे “मिथिलांचलक बिडम्बना इ रहल कि अत नारी के शक्ति के प्रतीक माइन सामाजिक तौर पर त खूब मर्यादित कैल गेल मुदा परिवार में ओकरा अधिकारहीन राखल गेल। ओकर जीवन परिवार के पुरुषक मर्ज़ी पर निर्भरशील रही गेल। शादी के बात त दूर संपत्ति में भी ओकर मर्ज़ी नहीं चलल। अई लेल दहेज का दानव अत बढैत चल गेल। लड़कि पिता के पसंद के लड़के स व्याहल जेवक अभिशप्त रहली। एकर असर यह भेल कि बेमेल ब्याह होव लागल और समाज में लड़कि सब घुंटी-घुंटी क जीवन जीवक बिवश भा गेली।“
अई मुहिम के मिथिलांचल के गाँव-गाँव में प्रचारित-प्रसारित करवाक हेतु आधुनिक संचार माध्यम के संग-संग पारंपरिक उपाय के सेहो सहारा लेल जा रहल आइछ। सम्पूर्ण देश में पसरल सदस्य अपन-अपन तरीका स अई मुहिम के प्रचारित कय रहल छैथ।
एक समय मिथिलांचल में सौराठ सभा काफी लोकप्रिय छल जहां विवाह योग्य युवक अपन परिवार के साथ उपस्थित होइत छाला और कन्या पक्ष ओता जाक अपन कन्या के लेल योग्य वर के चुनाव करैत छला। इ प्रथा दरभंगा महाराज द्वारा शुरू करावल गेल छल। शुरुआती दिन में संस्कृत के विद्वान के मंडली शाश्त्रार्थ के लेल अत जाइत छला। राजाक उपस्थिति में शाश्त्रार्थ में हार-जीतक निर्णय होइत छल। यदि कोनो युवा अपना से अधिक उम्र के विद्वान के पराजित करैत छला त ओई युवक के साथ पराजित विद्वान अपन पुत्री की विवाह करवा देत छलखिन। बाद में इ सभा बिना शाश्त्रार्थ के ही योग्य वर ढूँढवाक् एक टा जरिया बनल। आधुनिक काल के लोक इ सभा के नकाइर क मिथिलांचलक अभिनव प्रथा के समाप्त करवाक काज केला।
संस्था के सलाहकार वरिष्ठ आयकर अधिकारी ओमप्रकाश झा कहैत छैथ जे “मिथिलांचल के अपन पुरान प्रथा के जरिये ही सुधार के रास्ता पर आबक चाही। प्रतिवर्ष सौराठ सभाक आयोजन हो और लोग योग्य वर ढूंढ़वाक् लेल ओत आबैथ जेकर पहिल शर्त हो की दहेजक कोनो बात अत नई होयत तखन दहेज पर लगाम लगाव संभव होयात। पहले सेहो सौराठ में दहेज प्रतिबंधित छल। विवाह में बाराती के संख्या पर सेहो अंकुश लगनाई जरूरत आईछ। संप्रति देखल जाइत आइछ जे कि मिथिललांचल में विवाह में बाराति के संख्या और हुनक खान-पान के फेहरिस्त बढ़ैत जा रहल आइछ। गरीब त दहेज स अधिक बाराति के संख्या स डेराईत छैथ।”
बात सिर्फ आर्थिक लेन-देन तक सीमित होई त भी कोनो बात। अब त कन्या के साथ साज-ओ-सामान के जे फेहरिस्त प्रस्तुत कायल जाइत आइछ ओ बड़का-बड़का के होश उड़ा देत छैन। अई पर त आलम इ कि अधिकतर लड़कि विवाह के बाद दुखमय जीवन बितेबाक लेल मजबूर छैथ, किया की स्थानीय स्तर पर कोनो उद्योग नहीं आइछ और परदेश में खर्च के जे आलम छई ओ किनको स छुपल नई छैन।
“दहेज मुक्त मिथिला” आंदोलन के जरिये मैथिल समाज में सुधार के एकटा नव धारा चलेवा में जुटल लोक के सामने सबस बड़ा चुनौती मैथिल समाज के ओई लोक स आयत जे महानगर में रहनिहार नीक नौकरी या व्यवसाय के जरिये आर्थिक रूप से समृद्ध भा चुकल छैथ और दहेज के अपन सामाजिक हैसियत का पैमाना मानैत छैथ। एहन लोक निश्चित रूप स विकल्प के तलाश में अई आंदोलन के कुंद करवाक प्रयास करता जेकरा सामूहिक सामाजिक प्रतिरोध के जरिये ही रोकल और बाया जा सकैत आइछ। किछु राजनेता जे अपना आप के मैथिल समाज के मसीहा मानैत छैथ हुनको लेल सेहो अहन आंदोलन रुचिकर नहीं छैन। पर वक़्त के जरूरत छई कि इ क्षेत्र एहन आंदोलन के जरिये अपना में सुधार लाबैथ।
 
 
जय मैथिल , जय मिथिला समाज

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रविवार, 18 सितम्बर 2011

मिथिला स्मृति


कोशिक कान्ह प ठाढ़ भ
कमला आ बेलौंती में
डूब लगबइए छि !
जेठ में तपैत अई शहर में
मिथिलाक स्मृतियें सौं
शीतल होइत छि !

माघ पूसक जार में
दाएयक बोरसी आ बाबाक घुर
गुमारक अनुभूति दैत अईछ !


भादबक झपसी में
बोराक घोघी ,माथ परक सूप
उप्नैनिया मेघडंबर सौं
सैद्खन सुखले रहैई छि !

बसंतक आगमन सौं
महकैत महुआ
गमकैत मज्जर
कोइलिक मिसिरिया बोल,
हरियरका नुआ मैं पियरका साडी सौं
तन मन सजले रहैत अइछ..!!!!

स स्नेह -विकाश झा

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शुक्रवार, 16 सितम्बर 2011

गोनू झा आ आन मैथिली चित्रकथा

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मैथिली चित्रकथा

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ENGLISH MAITHILI DICTIONARY

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बृहस्पतिवार, 15 सितम्बर 2011

मुन्नी बदनाम भेलैए किएक ?


मुन्नी बदनाम भेलैए किएक ?
                  एकटा हास्य कथा।

इंडिया टी वि में एकटा संगी सँ भेंट केने फिल्म सिटी नोएडा स अबैत रही। समाचार बूलेटिन के समय भ गेल रहै तही दुआरे हरबड़ाएल आकाशवाणी अबैत रही। हम सेक्टर 16 मेटो स्टेशन लक आएले रही  की ओतए एकटा मित्र मदन भेंट भए गेलाह कुशल छेमक गप भेलाक बाद हम बजलहू भाए एखन हमरा जाए दियअ फेर कहियो गप नाद करब । ओ बजलाह यौ किशन अहू हरबड़ाएल नोएडा अबैत छी आ फूर सिन पड़ा जायत छी कहियो भेंटो घांट ने पहिन हमरा एकटा गप समझा दियअ तखन जाएब ।हम बजलहु  जल्दी कहू त ओ बजलाह ई कहू त मुन्नी बदनाम भेलैए किएक ?
       हम किछु बजितहु कि ताबैत डमरू डूगडूग के अवाज सुनलियै ओतए मेटो सीढ़ि लक बाबा भेंट भए गेलाह हमरा देखैत मातर ओ बजलाह हौ कारीगर बच्चा तोरे तकैत तकैत अई ठाम अएलहू पहिने हमरा जल्दी स एकटा गप बुझहाए दैए। हम बजलहू कोन गप यौ बाबा की ओ बजलाह हौ बच्चा एकटा गप कहअ त मुन्नी बदनाम भेलैए किएक ? हम बजलहु इ त हमरो नहि बुझहल अछि मुदा अहॉ कोन मुन्नी के गप कहि रहल छी। बाबा हॅसैत बजलाह हौ कारीगर तहू बड्ड अनठा अनठा के पुछैत छह कहअ त सौंसे दुनिया अनघोल भेल छै जे मुन्नी बदनाम भेलै शिला के जवानी तेरे हाथ न आनी। तई मे तोंही मीडियावला सभ और बेसी हल्ला केने छहक मुन्नी फिर से बदनाम हुई मुन्नी को देख डोला इमान। एतबाक नहि चैनलो में बचिया सभ देहदेखौआ कपड़ा पहिर खालि एहने समाचार सभ पढ़ैत छैक देखू वालीवुड मसल्ला मुन्नी बदनाम भेलै देखैत छहक इ समाचार देख सुनि दोसरो मुन्नी सभ बदनाम होइ लेल एखने स आतुर भेल छै। तहि दुआरे त हम पुछलियअ जे मुन्नी बदनाम भेलै किएक ?
   बाबाक प्रशन सुनि त हम गुम भए गेलहु किछु ने फुरा रहल छहल आ हॅसी सेहो लागि रहल छह। बाबा फेर बजलाह हौ एतेक कथि सौचै मे लागल छह ज कहि दिमाग तिमाग भंगैठ जेतह त  कोन ठिक तहू बदनाम भ जहियअ। देखहक एकटा गप त हम बुझहलियै जे जेबी मे एक्को टा पाइ नहि रहतह आ थूथून निक नहि रहतह त कतबो नाक रगरब त बापो जिनगी मे शिला के जवानी हाथ न आनी मुदा ई दोसर गप हमरा दिमागे मे ने घूसी रहल अछि जे मुन्नी बदनाम हुई। तहि दुआरे तोरा पुछलियअ जे मुन्नी बदनाम भेलै किएक ?हम बजलहु अच्छा बाबा एकटा गप कहू त अहा केना बुझहलियै जे मुन्नी बदनाम भेलै। बाबा बजलाह कहअ त सौंसे दुनिया ई गप अनघोल भेल छै तहू मे त आब शहर बजार स ल के गाम घर तक ई मुन्नी बदनाम ने भेलै कि हमरा रहनाई मुशकिल भए गेल। आब त कान दै जोग नहि रहलै जतै देखहक ततै मुन्नी बदनाम।
    हम बजलहू अई यौ बाबा मुन्नी बदनाम भेलै त अहा किएक अकक्ष भेल छी। बाबा बजलाह हौ कारीगर अकक्ष की जान बचाएब मुशकिल भए गेल अछि देखैत छहक छौंडा मारेर सभ पूजा करैत काल मंदिरे मे गाबअ लगतह मुन्नी बदनाम भेलै हेतै  यै मुन्नी अहा के गली गली मे चर्चा किदैन कहा । ततबेक नहि यै छौंडी सभ मंदिरे मे सप्पत खा खा बदनाम होइए के फिराक मे लागल रहतह। कहतह हे भोला बाबा तोंही जान बचबिहअ तोरा दू लोटा बेसी के जल चढ़ेबह। मुदा गारजियन सभ हमरा आबि आबि पुछतह यौ बाबा एतए कोनो मुन्ना मुन्नी के देखलियैए। आब त हमरा डरो होइए जे कहिं बदनाम होइ के झोंक मे कोइ हमरो लेल ने बदनाम भए जाय। तहू मे नबका तूरक धिया पूताक कोनो भरोस नहि एकरा सभ के पढ़नाइ लिखनाई मे कम आ बदनाम होइ मे बेसी मोन लगैत छैक। औग ने पौछ देखतह आ खाली बदनाम होइए के फिराक मे लागल रहतह। हम बजलहू अई यौ बाबा अहा लेल के बदनाम होइए।
 बाबा बजलाह हौ बच्चा जूनि पूछह कि कहियअ पछिला कोजगरा मे हम अप्पन सासुर हरीपुर गेल रही कुशल छेमक गप भेलाक बाद हमर छोटकी सारि टुन्नी बजलीह यौ पाहुन एकटा गप कहू । हम कहलियैन कहू ने की एतबाक मे केम्हरो स हमर बीरपुर वाली सरहोइज चाह पान नेने दौगल अएलीह। हम एक घोंट चाह पीनैहे रही की बीरपुर वाली बजलीह पाहुन एकटा गप बुझहलियैए हम हुनका पुछलियैन कोन गप यै त ओ बाजल चुपू अनठिया कहि के बुरहारी मे खाली गप अनठा अनठा बजैत छी आ हमर सरहोइज सारि खूम जोर सॅ हा हा के हसैए लगलीह। फेर बीरपुर वाली खिखिआ के हसैत बजलीह टुन्नी बदनाम हेतै यै बुरहबा पाहुन अहि के लिए। टुन्नी ताली बजा बजा सुल मे ताल मिला गाबए लागल टुन्नी बदनाम हेतै यौ बुरहबा पाहुन अहि के लिए । हौ बच्चा टुन्नी के गप सुनी त कि कहियअ हम असमंजस मे परि गेलहु जे इ अपनो बदनाम होएत आ बुरहारी मे हमरा गंजन टा कराउत। डरे हम दोसर घोंट चाहो नहि पिलहु चाह सेरा के पानि भ गेल।
फेर कि भेल यौ हम उत्सुकतावस बाबा स पुछलियैन त ओ बजलाह हौ बच्चा सभटा गप तोरा कि कहियअ टुन्नी के हम कहलियै अई यै टुन्नी एतेक छौंडा मारेर सभ साइकिल ल के ओइ बाध स ओई बाध शहर स बजार मुन्नी के तकने फिरै छै तेकरा सभ लेल बदनाम हएब से नहि त फुसियाहि के हमरा पाछु लागल छी। टुन्नी बजलीह नहि यौ पाहुन हम त अहि लेल बदनाम होएब तब ने लोको हमरा चिनहत जे हमहू बदनाम होइ लेल आतुर भेल छी। भने मीडियावला सभ के एकटा खबर सेहो भेट जेतैए जे मुन्नी फिर बदनाम हुई आ हमरो कोनो धारावाहिक मे झगरलगौन माउगी वा कि कोनो फिल्म मे आइटम गर्ल के काज भेट जाएत। कि कहियअ टुन्नी के बदनाम हेबाक प्रबल इच्छा देखि हम फुर दिस अपना सासुर स बिदा भगलहु आ फेर कहियो हरीपुर नहि गेलहु। ओकर गप सुनि त डरे हमरा हुकहुकी धए लेलक जे कहि ठीके मे टुन्नी बदनाम भेलै आ कि एना केलकै त हमहू बदनाम भए जाएब। तहि दुआरे त कहलियअ  हौ बच्चा जे कहिं कोई हमरो लेल ने बदनाम भए जाए तहू मे आबक धिया पूता के कोनो ठेकान नहि बदनाम होइ दुआरे फिलमी फंडा अपनौतह। गारजिअन के इ कहतह जे हम टीशन पढ़ै लेल जाइत छी आ पढ़नाइ छोड़ि के पार्क कॉफि हाउस घूमै लेल चलि जेतह आ बदनाम होइ के फिराक में लागल रहतह। जेना ओकरा सभ के और कोनो काजे नहि रहै तहिना।
   बाबा बजलाह हौ बच्चा तू ख़बर लेल हाट बजार स ल के शहर गाम सभ ठाम जाइत छह मुदा हमरा एकटा गप नहि बुझहा देलह। हम पुछलियैन कोन गप यौ बाबा की ओ बजलाह अईं हौ कारीगर तहू बड्ड अनठाह भ गेलह तोरा त ई गप बुझहले हेतह जे मुन्नी भेलै आ तहू मे मीडियावला सभ और बेसी हल्ला केने छहक। कतए कोन मुन्नी बदनाम भेलै सेहो ख़बर रखैत छह मुदा हमरा सिरिफ एक्के टा गप बुझहा दए ने जे मुन्नी बदनाम भेलै किएक ?

लेखक - किशन कारीगर

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मंगलवार, 13 सितम्बर 2011

जेहन करनी तेहन भरनी



जेहन करनी तेहन भरनी @प्रभात राय भट्ट

माए बाबु केर बुझलक बैरी
घरवाली सं करैय खूब प्रीत
देखू दुनियांकें अजगुत रीत
बेर बेर कनियाक मुह निहारैय
कहि कहि कें ललमुनिया 
माए बाप काहि: कटैय
बेट्टा  बजाबैय हरमुनिया 
महलक रानी बनल अछि पुतोहू
चाकर बनल अछि  बेट्टा 
माए बाप के झोपरी में पठौलक
देलक टुटल थारी फूटल लोटा
बरखा में देह पैर टप टप पानी चुबैय 
थर थर कापी देह सिहरैय
बेट्टा पुतहु शुख शयल  करैय 
जरल परल जुठकुथ
माए बाबुके खुआबैय  
मिट मछली खुवा मलाई
घरवाली सभटा नेराबैय
तरैस तरैस माए बाबु
सिधाएरगेलाह: परलोक
कहैय बेट्टा काल कंटक टरल
मोनमें नै कनियो शोक
बौआ  लाबू एकटा सलाई
झोपरी में आब के रहत
तें दैछी आब आइग लगाई
पोता के इ सभटा देख
मोनमें उठल उद्वेग
करैय बाबा दाई संग
बीतल घटनाक खेद
अहां  किये केलों
बाबा दाई संग दुरब्यबहार
अहां केहन कपूत भेलौं
दैतछी हम धिकार.............
आब हमरो किछु करैदीय 
इ टुटल झोपरी रहैदीय 
बाबु अहां बृद्ध हयब जखने 
अहू के उठाक झोपरी में
धदेव हम तखने 
रहैदीय इ टुटल थारी फूटल लोटा
अहिं के नक्सा पैर हमहूँ  चलब
किये त हम छि अहंक बेट्टा
जेहन करनी तेहन भरनी
याह अछि दुनियाक रीत
अपना संग दुरब्यबहार देख
किये लगैय आब तित ?????????
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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गोरखधन्धा नाटक ११ सितम्बर २०११ चित्र साभार श्री पवन कान्त झा

गोरखधन्धा नाटक ११ सितम्बर २०११ (चित्र साभार श्री पवन कान्त झा)
-मैथिली नाटक 'गोरखधन्धा' लेखक काश्यप कमल (पवन कान्त झा)
-मंचन  ११ सितम्बर २०११, रवि दिन, सन्ध्या ६.३० बजे धरोहर, साहिबाबाद प्रस्तुति- सावन महोत्सव
-स्थान- महराजा अग्रसेन सभागार, राजेन्द्र नगर सेक्टर ५, (near M4U), साहिबाबाद, दिल्ली एन सी आर
-निर्देशक-किसलय कृष्ण
-कलाकार- काश्यप कमल (पवन कान्त झा), कौशल कुमार, शिखा, अजित, प्रणव, कमल आदि
-मैथिली नाटक - गोरखधन्धा केँ २००२ मे  कोलकातामे सर्वोत्तम प्रस्तुति हेतु प्रथम पुरस्कार भेटल रहै।

गोरखधन्धा नाटक ११ सितम्बर २०११ चित्र साभार श्री पवन कान्त झा
गोरखधन्धा नाटक ११ सितम्बर २०११ चित्र साभार श्री पवन कान्त झा
गोरखधन्धा नाटक ११ सितम्बर २०११ चित्र साभार श्री पवन कान्त झा
गोरखधन्धा नाटक ११ सितम्बर २०११ चित्र साभार श्री पवन कान्त झा
गोरखधन्धा नाटक ११ सितम्बर २०११ चित्र साभार श्री पवन कान्त झा

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सगर राति दीप जरए- हजारीबाग

सगर राति दीप जरए- हजारीबाग
10 सि‍तम्बर साँझ 7बजेसँ 11 सि‍तम्बरक भि‍नसर 6बजे धरि‍ सगर राति‍ दीप जरय 74म कथा गोष्ठी श्री श्याम दरि‍‍हरे जीक संयोजकत्वमे सि‍न्दूर कैम्प हजारीबाग (झारखण्ड) मे सु-सम्पन्न भेल। गोष्ठीक अध्यक्षता केलनि‍- श्री रमानन्द‍ झा रमणआ मंच संचालन श्री कमल मोहन चुन्नूजी।झारखण्ड आ बि‍हार दुनू ठामक कथाकार अपन-अपन नूतन कथा/लघुकथाक पाठ केलनि‍ यथा- सुन्दर भेल मधाई (प्रदीप बि‍हारी), अपन सन मुँह (लक्ष्मी दास), कचोट (शशि‍कान्त झा), अल्लूक चुमौन (रामदेव प्रसाद मण्डल झारूदार’), मरनी बेटी (मि‍थि‍लेश मण्डल), कनफेरसँ मुँहफेर आ कुसि‍यारक मारि‍ (उमेश मण्डल), सुगन्धा (चौधरी जयंत तुलसी), भवडाह (जगदीश प्रसाद मण्डल), अधि‍कार (बेचन ठाकुर), एकरा की कहबै (रामवि‍लास साहु), मदि‍राक प्रभाव (शि‍वकुमार मि‍श्र), पोस्टमार्टम (संतोष कुमार झा), महादुखी वा महासुखी (धनाकार ठाकुर), बौआइत मनोभाव (गि‍रजानन्द ठाकुर), टीश (अशोक) आ गामक सुगंध इन्टरनेट (श्याम दरि‍हरे)। पठि‍त कथा आ लघुकथापर दू-टप्पी समीक्षा सेहो भेल।

ऐ अवसरपर पाँच‍ गोट मौलि‍क आ दू गोट अनुदि‍त पोथीक लोकार्पण भेल यथा- (1) मि‍थि‍लाक इति‍हास (प्रो. राधाकृष्ण चौधरी) लोकार्पण श्री जगदीश प्रसाद मण्डल द्वारा। (2) A survey of Maithili literature (प्रो. राधाकृष्ण चौधरी) लो.- श्री अशोक। (3) कलानि‍धि‍ (कालीकान्त झा बूच’) लो.- श्री प्रदीप बि‍हारी। (4) रहए चाहैए गाछ (जीवकान्त‍) लो.- श्री तुलानन्द मि‍श्र। (5) धूंध के बावजूद (अजीत कु. आजाद) लो.- श्री जगदीश सिंह। (6) कठि‍न समय मे शब्द, हि‍न्दीक मैथि‍ली अनुवाद (अजीत कु. आजाद) लोकार्पण- श्री जीवेन्द्रनाथ झा। (7) परती टूट रही है, मैथि‍लीक हि‍न्दी अनुवाद (अजीत कुमार आजाद) लोकार्पण- श्री रमानन्द झा रमणद्वारा।

सगर राति‍ दीप जरय'75म आयोजन श्री अशोक जीक संयोजकत्वमे पटनामे 10 दि‍स्मबर 2011केँ होएबाक संभावना।




























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सोमवार, 12 सितम्बर 2011

दिल्लीमे गूंजल मैथिली कविता

पूनम मंडल - दिल्लीमे गूंजल मैथिली कविता
देशक राजधानी दिल्लीमे साहित्यिक, सांस्कृतिक आ सामाजिक संस्था 'मिथिलांगन" द्वारा आयोजित कवि गोष्ठीमे मैथिली कविता आ गीत खूब गूंजल। अवसर छल साहित्य अकादमी पुरस्कारसँ सम्मानित डॉ. ब्रजकिशोर वर्मा 'मणिपद्म" क जयंतीक। आयोजन रविवार, 11 सितम्बर, 2011 केँ राजघाट स्थित सत्याग्रह मंडपमे कएल गेल।

विशाल मैथिली कवि गोष्ठीमे मैथिली भाषाक युवासँ लऽ कऽ मूर्धन्य कवि अप्पन विशिष्ट कविताक पाठ कऽ उपस्थित श्रोताकेँ मंत्रमुग्ध कऽ देलन्हि। कवि गोष्ठीक अध्यक्षता पटनासँ पधारल वरिष्ठ हिन्दी-मैथिली कवि डॉ. ललित कुमुद आ संचालन प्रख्यात कवि-नाटककार कुमार शैलेन्द्र केलनि। ऐ कवि सम्मलेनमे कविता पाठक आरंभ युवा कवि विनीत उत्पल अप्पन दू टा कवितासँ केलखिन। एक्कर बाद युवा कवि किशन कारीगर, स्तुति नारायण, विनीता मल्लिक, रमण कुमार सिंह, गीतकार मानवर्धन कंठ, शारदा नन्द दास 'परिमल", 'तुरंता" लेल जानल जाएबला वरिष्ठ कवि रवींद्र लाल दास 'सुमन", रवी-वीन्द्र-महेंद्रक जोड़ीक रवींन्द्र नाथ ठाकुर, कुमार शैलेन्द्र आ शेफालिका वर्मा अप्पन कविताक पाठ पढ़लनि। ब्रह्मदेव लाल दासक मोन ठीक नै छल तेँ ओ उपस्थित नै भऽ सकलाह आ हुनकर कविताक पाठ हुनकर पुतोहु सरिता दास केलनि।

समारोहक आरंभ प्रसिद्ध मैथिली गायक सुंदरमक नेतृत्वमे मिथिलांगन सांस्कृतिक दलक स्वागत गानसँ भेल। तकर बाद डॉ. शेफालिका वर्मा आ डॉ. ललित कुमुद मणिपद्मजीक व्यक्तित्व आ कृतित्व केँ लोकक आगू राखलखिन। समारोहमे मैथिली भाषाक विशिष्ट साहित्यकार रमानंद रेणु, मार्कण्डेय प्रवासी, फजलुर रहमान हासमी हिनका सभक निधन केँ लऽ कऽ शोक व्यक्त सेहो कएल गेल। संगे-संग दिल्ली उच्च न्यायालय लग भेल बम विस्फोटमे घायल भेल आ मारल गेल निर्दोष लोकक आत्माक शांति लेल दू मिनटक मौन सेहो राखल गेल।
कवि गोष्ठीमे शामिल सभटा कविकेँ मिथिलांगनक स्मृति चिन्ह देल गेल आ हुनका सभसँ संस्थाक सचिव अभय कुमार लाल दास आभार व्यक्त केलनि।

रमण कुमार सिंह

विनीत उत्पल

किशन कारीगर




रवीन्द्रनाथ ठाकुर

शेफालिका वर्मा

स्तुति नारायण

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शुक्रवार, 9 सितम्बर 2011

गद्य कविता

वाद



भूख की होइत छैक। यथार्थ की कल्पना ? अथवा एकरा एना कहिऔ जे भूखकेँ कोन वादमे बन्हबै ?

यथार्थवाद
तदर्थवाद
अभिव्यंजनावाद
नवचेतनावाद
वा की ??????????????.......

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दिल्ली मे मैथिलीक प्रथम कवि सम्मेलन 11 सितम्बर कए


दिल्ली केर प्रख्यात सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था- मिथिलांगन पछिला किछु बरख सं नामी साहित्यकार डाक्टर ब्रजकिशोर वर्मा मणिपद्म केर जयंतीक उपलक्ष्य मे कोनो ने कोनो कार्यक्रम करैत रहल अछि। एहि अवसर पर ई संस्था नैका बनिजारा(2007),उगना हाल्ट(2008),सामा चकेवा(2009) आ पछिला बरख छुतहा घैल नाटकक बहुचर्चित-बहुप्रशंसित आयोजन कएने छल। एहि बेर मिथिलांगन मैथिली कवि गोष्ठी केर आयोजन क रहल अछि।
ओना तं मैथिली-भोजपुरी अकादमी दिल्ली मे द्विभाषिक कवि सम्मेलन आयोजित करैत रहल अछि,मुदा ई पहिल बेर अछि जे दिल्ली मे कोनो संस्था मूलतः मैथिली कवि सम्मेलन कें आयोजन ल कए उपस्थित भेल अछि। आमंत्रित कविगण छथि-बिहार सरकारक फारेंसिक विभागक पूर्व अधिकारी डाक्टर ललित कुमुद,मिथिलाक महादेवीक रूप मे मशहूर डाक्टर शेफालिका वर्मा,मशहूर रवीन्द्र-महेन्द्र जोड़ी केर श्री रवीन्द्र नाथ ठाकुर,मैथिल शुभ-संस्कार आ विधि-विधान पर गीत लिखिकए अद्वितीय काज कएनिहार श्री ब्रह्मदेव लाल दास(मिथिलांगन हिनका पर मधुचंद्रिका नामक सीडी निकालि चुकल अछि),मैथिलीक सभ पत्रिका मे छपि चुकल (अंग्रेजियो मे प्रकाशित) नामी कवि श्री शारदान्द दास परिमल,मिथिलांगनक कर्ता-धर्ता आ अपन तुरंताक लेल प्रसिद्ध श्री रवीन्द्र लाल दास सुमन,नाटककार आ स्वतंत्र पत्रकार श्री कुमार शैलेन्द्र,हिंदुस्तान मे वरिष्ठ समाचार संपादक श्री मानवर्द्धन कंठ,अमर उजाला मे कार्यरत श्री रमण कुमार सिंह,राष्ट्रीय सहारा मे कार्यरत कवि-समीक्षक श्री विनीत उत्पल,दूरदर्शन मे कार्यरत,श्री किशन कारीगर,मिथिलांगन मे शारीरिक-बौद्धिक दुनू स्तर पर अत्यन्त सक्रिय श्रीमती विनीता मल्लिक आ हालहि मे लांच भेल समाचार चैनल न्यूज एक्सप्रेस मे कार्यरत आ नवोदित सुश्री स्तुति नारायण।
स्थान रहत सत्याग्रह मंडप,गांधी दर्शन,निकट राजघाट आ समय सांझ छओ बजे।
आउ,मिथिलांगनक हकार स्वीकार कए, सभ आयुवर्गक आ बहुविधप्रतिभा संपन्न कवि लोकनि कें सुनैत मैथिली कवि-गोष्ठीक आनंद ली। 

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बुधवार, 7 सितम्बर 2011

चुनमुन चुनमुन करैत चिड़िया@प्रभात राय भट्ट




चुनमुन चुनमुन करैत चिड़िया 
बैसल अपना खोतामे
ऊपर सं मूत्र प्रवाह केलक
हमर जल भरल लोटामे
तामस सं हम मातल
आइग लगेलौं खोतामें
फुर सं चिड़ैया उड़ीगेल
आइग लागल हमरा कोठामें
चीं चीं करैत चिड़ैया
खोता जरैत देख ब्याकुल भेल
लहलहैत आइगमें चिड़ैयाक
 बच्चा जैरक मईरगेल
मनाबरूपी दानव तोई
केले किये एहन दुष्कर्म
रिस रागक वशीभूत मनुख
कतय गमैले दया धर्म
हमरा खोतामे आइग लगेले
अपनो घर जरैले
तू बुझैत छे इ कोठा तोहर
हम बुझैत छि इ खोता हमर
ईर्ष्या  दोष  लोभ  क्रोध  मोह 
त्याग  देख  कने दूरदृष्टि
मुदा नै किछ तोहर नै हमर
इ थिक  ईस्वरक श्रृष्टि 
खाली  हाथ  येले  जगमे  
खाली  हाथ तोई जएबे
कर्निक धरनी मालिक कें
दरवारमे तोई पएबे
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
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चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

बिदेसिया (संकल्पित नाटिका)

विद्यापतिक बिदेसिया (संकल्पित नाटिका).... भोजपुरीक साहित्य मैथिलीसँ कम समृद्ध अछि मुदा से अछि मात्र परिमाणमे, गुणवत्ताक दृष्टिमे ई कतेक क्षेत्रमे आगाँ अछि। भोजपुरीक भिखाड़ी ठाकुरक बिदेसियाक सन्दर्भमे हम ई कहि रहल छी। भिखाड़ी ठाकुर कलकत्तामे प्रवासी... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

कथा- माउगि

कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

मातृत्व...

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व.... नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि.... (आगाँ पढू)
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मैथिल आर मिथिला
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