कुण्डली
सत असत मे भेद करू, राखू नै किछु रोख
ततमत नै करू कनियो, जे छै होनी लेख
जे छै होनी लेख, हुए से नीक निकेना
सत्यक जीत हएत , जँ करबै अकसतिकस ने
डर संग असत केर, डर ढाहू मध्य हृदयक
ऐरावतक बुझैत, यएह छी असत्यक सत
सत असत मे भेद करू, राखू नै किछु रोख
ततमत नै करू कनियो, जे छै होनी लेख
जे छै होनी लेख, हुए से नीक निकेना
सत्यक जीत हएत , जँ करबै अकसतिकस ने
डर संग असत केर, डर ढाहू मध्य हृदयक
ऐरावतक बुझैत, यएह छी असत्यक सत
महामाला महाडाला करै स्वाहा लगैए ई
अकासी आस छै सोझाँ झझा देतै लगैए ई
कहैए ई मिलेबै आइ नोरोमे कने गोला
जँ भांगे पीबि एतै, भावना पीतै लगैए ई
जहाँ ताकी लगैए प्रेम बाझै छै सरैलामे
खने भोकारि पाड़ैए हँसै नै छै लगैए ई
टिपौड़ी छै बुझेबै बात की, धाही कनी देखू
कटैया पानि जेना ओ, नचै नै छै लगैए ई
गजेन्द्र पूब सुरुजक रहत देतै सूर्यकेँ झाँखी
चढ़त आकास देखै बानसब्बरै लगैए ई
मनुख जरैए गाम कनैए हमरा की/
चद्दरि तनने फोंफ कटैए हमरा की
बान्हक कातमे घर बनेने बाट जोही/
बाट बिसरि कऽ नै बिलमैए हमरा की
सुन्दर सपना रातुक, देखल बिसरी/
सपना सच नै भेल लगैए, हमरा की
चलू चलै छी नव देशमे घृणा जतऽ नै/
अप्पन देश बिलटि जँ गेलै, हमरा की
गारि देबाले बिर्त देलक हम नै लेलौं/
ऐरावत लेत प्रेम, नै दैए हमरा की
सोझाँ देखि मोन ललाइए चलू घुरि चली/
ई आस अपूर्ण बुझाइए चलू घुरि चली
कोन पक्का रंगसँ ढौराबी जे धोखराए नै/
मोनक रंगो धोखराइए चलू घुरि चली
छल बुझाइत छली आब बुझि गेल बात/
छलबाक चालि बुझाइए चलू घुरि चली
ठकैए हमरा हम जानि-बूझि ठकाइत/
प्राप्ति भेलै किछु बुझाइए चलू घुरि चली
भारी धापक धम्मक पसरि गेलै सगरे/
ऐरावत ऐल सुनाइए चलू घुरि चली
कुण्डली
बोल वचन हुअए नीक, बूझि बाजी जँ बात
गुम्म रहनाइए ठीक, हुए जँ नमहर जाल
हुए जँ नमहर जाल, लेत ओ लप दऽ भीतर
हल्ला बनि जाएत, नै अछि जँ बेर उचित पर
सुनू हमर ई बात, बात होइए अनमोल
ऐरावत कहि जाय, कहू नै ओल सन बोल
गजल
खेत, आरि, रस्ता सभटा अहीं तँ छी
बेढ़ि चारूकात पड़ता अहीं तँ छी
ओकर इयाद आबैए घुरि घुरि
इयादक याद अगता अहीं तँ छी
भजार मोन पड़ैए, बिदा होइ छी
टूटल सपनाक झंझा अहीं तँ छी
भोरे उदासी उड़ियाइत जाइत
जे बुन्नी बुनिऐल छिच्चा अहीं तँ छी
खुशी छूटल हँसी छूटल जाइए
दुख-सुखक अकाल जा, अहीं तँ छी
गोरखधन्धा नाटक ११ सितम्बर २०११ (चित्र साभार श्री पवन कान्त झा)
-मैथिली नाटक 'गोरखधन्धा' लेखक काश्यप कमल (पवन कान्त झा)
-मंचन ११ सितम्बर २०११, रवि दिन, सन्ध्या ६.३० बजे धरोहर, साहिबाबाद प्रस्तुति- सावन महोत्सव
-स्थान- महराजा अग्रसेन सभागार, राजेन्द्र नगर सेक्टर ५, (near M4U), साहिबाबाद, दिल्ली एन सी आर
-निर्देशक-किसलय कृष्ण
-कलाकार- काश्यप कमल (पवन कान्त झा), कौशल कुमार, शिखा, अजित, प्रणव, कमल आदि
-मैथिली नाटक - गोरखधन्धा केँ २००२ मे कोलकातामे सर्वोत्तम प्रस्तुति हेतु प्रथम पुरस्कार भेटल रहै।
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| गोरखधन्धा नाटक ११ सितम्बर २०११ चित्र साभार श्री पवन कान्त झा |
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| गोरखधन्धा नाटक ११ सितम्बर २०११ चित्र साभार श्री पवन कान्त झा |
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| गोरखधन्धा नाटक ११ सितम्बर २०११ चित्र साभार श्री पवन कान्त झा |
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| गोरखधन्धा नाटक ११ सितम्बर २०११ चित्र साभार श्री पवन कान्त झा |
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| रमण कुमार सिंह |
| विनीत उत्पल |
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| किशन कारीगर |
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| रवीन्द्रनाथ ठाकुर |
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| शेफालिका वर्मा |
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| स्तुति नारायण |
वाद
मैथिल आर मिथिला जालवृत्त सभ भाषा में उपलब्ध अछि|
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