रविवार, 30 अक्तूबर 2011

उग हो सुरुजदेव,प्रभात राय भट्ट



उग हो सुरुजदेव@प्रभात राय भट्ट


उग हो सुरुजदेव देब हम अर्घ चढाय-------//
हे छठी मईया होऊ नए हमरो पैर सहाय--//

हाथ अर्घ लेने हम जलमें ठार
उग हो सुरुजदेव सुनियौ  नए हमरो पुकार
थर थर कपैय देह जल विच हम ठार
उग हो दीनानाथ करियौ नए हमरो उद्धार
उग हो सुरुजदेव देब हम अर्घ चढाय-------//
हे छठी मईया होऊ नए हमरो पैर सहाय--//१

भेलई भीन्सरबा काग करैछई शोर
दर्शन कय खातिर नैना ब्याकुल मोर
सुगा मनडराई देख केराके घौर
फलफूल डाली देख चीडैया करय शोर 
उग हो सुरुजदेव देब हम अर्घ चढाय-------//
हे छठी मईया होऊ नए हमरो पैर सहाय--//२

अन्न धन लक्ष्मी दिय गोदमे ललना
पूरा करियौ दीनानाथ हमरो मनोकामना
बेट्टी लक्ष्मीनि दिय विद्द्वान जमाय
हो दीनानाथ दिनकर होऊ नए सहाय
उग हो सुरुजदेव देब हम अर्घ चढाय-------//
हे छठी मईया होऊ नए हमरो पैर सहाय--//३

बड़ारे जतन से अएली छठी मईयाके घाट
हे छठी मईया नैना तकैय अहींक बाट
कोढ़ीयन कय काया दिय निर्धनके धन
निष्ठुर निश्चर कय दिय दयालु मोन
उग हो सुरुजदेव देब हम अर्घ चढाय-------//
हे छठी मईया होऊ नए हमरो पैर सहाय--//४

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

Read more...

मंगलवार, 25 अक्तूबर 2011

जगमग दीप जरौने छि@प्रभात राय भट्ट




आबू नए हे मईया लक्ष्मी
हमरो घरमे आबू नए -----२
जगमग दीप जरौने छि
अहिक ध्यान धयने छि
वर्षेय आजू आनंद भवनमे
श्रद्धा सुमन मन उपवनमें

आबू नए हे मईया लक्ष्मी
हमरो घरमे आबू नए -----२
अन्न धन सं भंडार भरू
हमरो गरीबक उद्धार करू
रोग शोक कय दूर करू
सुख समृद्धि कय दूर करू

आबू नए हे मईया लक्ष्मी
हमरो घरमे आबू नए -----२
दिन दुखी हम दुखिया
आएलछि शरणमें अहींक मईया
मजधार में अटकल हमार नैया
भेटैयने कुनु पतवार कियो खेबैया

आबू नए हे मईया लक्ष्मी
हमरो घरमे आबू नए -----२
अहिं मलाह पतवार खेबैया
करियौने भवसागर सं पार हे मईया
सुनु ने हमरो पुकार हे मईया
करियौने हमरो वेड़ा पार हे मईया

आबू नए हे मईया लक्ष्मी
हमरो घरमे आबू नए -----२
कोना करी कीर्तन भजन
स्वर में अछि माधुर्ज नहीं
मोनक भाव प्रकट करवालेल
वाणी  में  अछि चातुर्ज नहीं

आबू नए हे मईया लक्ष्मी
हमरो घरमे आबू नए -----२
वाणीमें चातुर्ज दिय
स्वरमें माधुर्ज दिय
रिद्धिसिद्धि वंस वृद्धि दिय
गुणनमें रित सजनमें प्रीत दिय

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

Read more...

शनिवार, 15 अक्तूबर 2011

आऊ सूनु कने बात हमर.....


आऊ सूनु कने बात हमर,
नै पकरू अहाँ कान हमर,
कहै छि हम आई कनी अप्रियगर,
मुदा पिबहे पडत क्रोधक जहर,
अहंकार आ क्रोध के,
कंठे में धरु,
अहाँ आब नीलकंठ बनू,
जेकरा पुजैत एलहूँ सब दिन,
वैह महादेव बनू अहाँ,
ध्यान करू,
कनि ज्ञान करू,
विज्ञानक अहाँ संग धरु,
परंपरा के बुझु अहाँ,
तर्क तथ्य स तौलू अहाँ,
कसौटी पर कसलाक बादे,
ओकरा अहाँ अंगीकार करू,
अंध मोहि ध्रितराष्ट्र जँका,
आ  गांधारी ने बनू अहाँ,
हिसाब करू,
कनी विचार करू,
अलग अलग विधा स साक्षात करू,
अध्यन करू,
निर्माण करू,
श्रीजनात्मक्ताक अहाँ आयाम बनू,
तास छोडू,
भाँग छोड़ू,
बिना बात के बात छोड़ू,
अपन बड़ाई के राग छोड़ू,
दलानक बैसार छोड़ू,
राजनीत के कौचर्य छोड़ू,
आब समय नै भोज भात के,
आब समय अई समय संग चलै के,
उच्च अध्यन में पाई लगाऊ,
व्यपार बाणिज्य स हाथ मिलाऊ,
अपन सहजता अपन शरलता,
अपन दर्शन के और बढ़ाऊ,
इतिहास में नै,
आब बर्तमान के
अपन कर्मठता स सजाऊ,
विज्ञान के ज्ञाता बनू,
दर्शन में छलहूँ अग्रणी,
आब विज्ञानक बारी अई,
पूजा पाठ के विज्ञान स जोरू,
नियम निष्ठा के स्वास्थ्य स जोरू,
तहने टा कल्याण हैत,
जहने पान माछ मखान स उबरब,
खेबा टा के सिर्फ बात ने करब,
साँस साँस में ध्यान करब,
आ बात बात में विज्ञान,
गणित गणित के  चर्चा में,
तकनिकक आधुनिकता में,
समय अपन पूरा बितैब,
कनी याद करू,
सीता उठाबै छलीह शिव धनुष,
आ अहाँ दबल छि दहेज़क  दुर्बलता  ,
गाम गाम नशा में डूबल,
कुंठा के निक्षेप स भरल,
आरोप आ प्रत्यारोप स उबरु,
अपना के अहाँ कला स जोरू,
आब समय विश्रामक नै अई,
आब परिश्रम के अई जरूरत,
जनक के गीते टा नै गाऊ,
फेर जनक जँका विज्ञानक हर चलाऊ.
ज्ञानक मटकुर में सीता निकलतिह,
लक्ष्मी स भरपूर धरती,
राम पुरुषार्थ स्वयं औताह,
सीता के वरन करताह,
कतौ दुख के बास नै हैत,
सबहक मोन निर्मल भ जैत,
माता पिता ने डेरैल रहताह,
बाल बच्चा के पढैल करताह,
गाम गाम में हैत विज्ञानक चर्चा,
हर्षित मोन में खुश्हालिक बर्षा,
खेल खेल में गणितक पाठ,
बैसारी में कविता कहानी,
पुनः मैथिल ज्ञान विज्ञान स आलोकित,
करताह पूरा जग में इजोत |

(पंकजझा23@ जीमेल.कॉम)

Read more...

बृहस्पतिवार, 13 अक्तूबर 2011

बदरा उमैर उमैर घनघोर-प्रभात राय भट्ट,

बदरा उमैर उमैर घनघोर
बरसे आंगन मोर
प्यासल तनमन अछि
हृदय भेल हमर विभोर
दिल चुराक प्रीतम मोर
कतय गेले चितचोर //२
सिनेहियाक सूरत देखैले
नैना सं झहरे नोर
रिमझिम रिमझिम सावन वर्षे
तनमन में अगनके जलन
सजन उठल बड जोर
कतय गेले चितचोर //२
अंग अंग ब्यथा उठल
फटेय पोर पोर
बदरा के बूंद बूंदमें
लगैय संगीतक शोर
खन खन खनकैय कंगना
छम छम बजैय पायल मोर //२
पिया लग आऊ प्यास बुझाऊ
मोनमें उठल बड जोरक हिलोर
अहां बिनु जोवन भेल भारी मोर
कतय गेले सजन चितचोर
विरहिन भेष देख हमर
मुस्की मारैय चानचकोर //२
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

Read more...

बुधवार, 12 अक्तूबर 2011

गजल


हमर मोनक अहीं गूगल अहीं युआरेल छि
अहींक प्रेमक स्क्रैप सौं हमर भरल गीमेल छि !

ऑरकुट पर मुँह ठोर अइछ कने दोसर रंग
फेसबुक पर तेसरे रंग इ कोन खेल छि !

विडियो में चैट खातिर लेलौं हम थ्री गी
पोप केलक मेसेज अहाँ बीजी भ गेल छि !

आईटी सन सैद्खन अपडेटेड अहाँक स्टेटस
विन्डोजक प्रोसेसर में अहाँ एप एन्ड्रोआईड छि !

नेटवर्कक् अई माया सौं तरंगित अइ तन मन
अहीं जिनगीक प्रोग्रामक सॉफ्टवेर भ गेल छि !

स स्नेह
विकाश झा
.

Read more...

आब नै सताबू पिया परदेसीया@प्रभात राय भट्ट




गा आबू ने पिया परदेसीया
मोनक बतिया लिखैछी पतिया
प्यास मिलनके बड़ा रे सताबे
रही रही अहांक इयाद आबे     
विरहिन बनल हम जिबैतछी कलेशमें
एसगर कोना अहां रहैतछी पिया परदेशमे // १

गाम आबू ने सजना हमर सिनेहिया
एसगर छोइड गेलौं किये निरमोहिया
हमर हिया फटेय अहां लय पिया
अहां बिनु लागे ने कखनो हमर जिया
सेज पैर सुतैत हमर आंगी फटेय
अन्न पईन किछु निक ने लगैय // २

सास बुझैय हमरा बाझिन
नन्दी कहैय हाकिन डाकिन
जिनगी भेल अछि हमर  पहार सजना
लागे अहां बिनु सैद्खन अन्हार सजना
अहिं कहू यौ सजना कोना  खिल्तैय अंगना  
अहां बिनु कोना किल्क्तैय अंगनामें ललना  // ३

किलका खेलाबैय हमर संगी सखिया
हम गोदमे किलका खेलेबैय कहिया
गाम अबियौ मनसा पुर्बियौ पिया
हमर हिया फटेय मों काटे अहुरिया
गाम आबिजाऊ भेटैत हमर पतिया
आब नै सताबू पिया परदेसीया        // ४
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट 

Read more...

मंगलवार, 11 अक्तूबर 2011

कोजगरा (पूर्व) मिलन समारोह - मुंबई...


मुंबई मs दिनांक 09/10/2011 "दहेज मुक्त मिथिला" के सहयोगी नव संस्था "अंतरराष्ट्रीय मैथिल संस्थान" अपन स्थापना दिवस के रूप मs "नेहरु तारामंडल, वरली, (मुंबई) में आयोजित केलक "कोजगरा (पूर्व) मिलन समारोह"......



समारोह में सम्मिलित भेलैथ एक सँ बैढ़के एक हस्ती ... ज्योतषी श्री भोगेन्द्र झा, श्री महेश झा, श्रीमती गोदावरी झा, डॉ.रमा झा, श्री अमरकान्त मिश्र, श्री शशि कुमार झा, श्री एस. सी.मिश्रा,श्री नरेन्द्र झा(सिनेस्टार), श्री फूल सिंह(सिनेस्टार), श्री मूणिन्द्र झा(पत्रकार), श्री देवलोचन चौधरी, डॉ.प्रदीप शाहू समारोह के मुख्य पाहून छलाह...

श्री पंकज झा, भैया के अध्यक्षता में संस्था के अध्यक्ष डॉ.अरविन्द झा द्वारा दीप प्रज्वलित केलाक बाद समारोह के कार्यक्रम संध्या 6 बजे सँ सुरु भेल.... समारोह मs विचारगोष्ठी आ सांस्कृतिक कार्यक्रम रात्रि 10 बजे तक चलल.... अंत मs संस्था के उपाध्यक्ष पं. धर्मानंद झा द्वारा कार्यक्रम के समापन भेल.....

Read more...

रविवार, 9 अक्तूबर 2011

गाडीक पहिया नर आर नारी@प्रभात राय भट्ट



गाडीक पहिया नर आर नारी--------1
एक पहियामे हवा भरल 
दोसर पहिया पंचर परल 
जाधैर पंचर नै टलबैय   
कहू कोना गाड़ी चल्तैय

गाडीक पहिया नर आर नारी--------2  
सब कहैछी बेट्टाबेट्टी एक सामान
फेर बेट्टी किये होईय अपमान
बेट्टा इंग्लिश स्कुल में पढैय
बेट्टी किये बकरी पठरु चरबैय

गाडीक पहिया नर आर नारी---------३
बेट्टा पेन्हैय सुट सफारी
बदेल बदेल चढैय मोटर गाड़ी
बेट्टी पेन्हैय फाटल अंगी साड़ी
बारीमे उब्जबैय तिमन तरकारी

गाडीक पहिया नर आर नारी-----------४
बेट्टा खैय मिट मछली खुआ मलाई
आ घुटुर घुटुर दूध पिबैय
बेट्टी खैय सुखल रोटी पैर नून मिरचाई
आ टुकुर टुकुर माएक मुह ताकैय

गाडीक पहिया नर आर नारी------------५
बेट्टा सुतैय पलंग माएक छाती संग
बेट्टी सुतैय बिछाक पटिया बकरीपठरु संग
बेट्टा पैर लुटबैय माए बाबु अपन ममता
माए बाबु संग सूती बेट्टी के लागल सेहनता

गाडीक पहिया नर आर नारी------------६
दलानमें बैठ बेट्टा खेलैय जुआ तास
एसगर चौरीचांचरमें बेट्टी कटैय घास
भोरे सूती उठी बेट्टी बनाबैय भानस
खानामे  देर हुए ते सब देख्बैय तामस
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

Read more...

शनिवार, 8 अक्तूबर 2011

मैथिली गजलशास्त्र -१४

मैथिली गजलक पहिल दुर्भाग्य तखन देखा पड़ैत अछि जखन एतए गजलकेँ मुस्लिम धर्मसँ जोड़ि कऽ देखल जाए लगलै आ मुस्लिम धर्म आ ओकर साहित्यकेँ अछोप मानि लेल गेलै। गजलक प्रारम्भ इस्लामक आगमनसँ पूर्वक घटना अछि आ अवेस्ता आ वैदिक संस्कृत मध्य ढेर रास साम्य अछि। दोसर दुर्भाग्य मायानंद मिश्रक ओ कथन भेल जाहिमे ओ घोषणा केलथि जे मैथिलीमे गजल लिखले नै जा सकैए, हुनकर तात्पर्य दोसर रहन्हि मुदा लोक अही तरहेँ ओकरा प्रस्तुत करए लागल, कारण ओ स्वयम् गीतल नामसँ गजल लिखलन्हि।  मैथिली गजलमे "अनचिन्हार आखर" सन ब्लाग उपस्थित भेल जतए बहर (छन्दयुक्त) गजल आ गजलकारक लाइन लागि गेल। मुदा सभसँ बड़का दुर्भाग्य ई भेलै जे मैथिलीक किछु तथाकथित शाइर सभ रामदेव झा द्वारा बहर संबंधी विचारकेँ नकारि देलन्हि ( देखू- लोकवेद आ लालकिलामे देवशंकर नवीन जीक आलेख)। जँ वर्तमानमे गजलक परिदृश्यकेँ देखी तँ मोटामोटी दूटा रेखा बनैत अछि (जकरा हम दू युगक नाम देने छी) पहिल भेल "जीवन युग" आ दोसर भेल "अनचिन्हार युग"। आब कने दूनू युग पर नजरि फेरल जाए।
1)  जीवन युग- ऐ युगक प्रारंभ हम जीवन झासँ केने छी जे आधुनिक मैथिली गजलक पिता मानल जाइ छथि मुदा ओ कम्मे गजल लीख सकला। मुदा हुनका बाद मायानंद, इन्दु, रवीन्द्रनाथ ठाकुर, सरस, रमेश, नरेन्द्र, राजेन्द्र विमल, धीरेन्द्र प्रेमर्षि, रौशन जनकपुरी, अरविन्द ठाकुर, सुरेन्द्र नाथ, तारानंद वियोगी आदि गजलगो सभ भेलाह। रामलोचन ठाकुर जीक बहुत रचना गजल अछि मुदा ओ अपने ओकर क्रम-विन्यास कविता-गीत जकाँ बना देने छथिन्ह मुदा किछु गजलक श्रेणीमे सेहो अबैए। ऐ “जीवन युग”क गजलक प्रमुख विशेषता अछि बे-बहर अर्थात बिन छंदक गजल। ओना बहरकेँ के पूछैए जखन सुरेन्द्रनाथ जी काफियाक ओझरीमे फँसल रहि जाइ छथि। एकर अतिरिक्त आर सभ विशेषता अछि ऐ युगक। आ जँ एकै पाँतिमे हम कहए चाही तँ पाँति बनत---" गजल थिक, ई गजल थिक, आ इएह टा गजल थिक"।
2)  आब कने आबी " अनचिन्हार युग" पर। ऐ युगक प्रारंभ तखन भेल जखन इंटरनेटपर मैथिलीक पहिल गजल आ शेरो-शाइरीकेँ समर्पित ब्लाग "अनचिन्हार आखर" ( http://anchinharakharkolkata.blogspot.com ) क जन्म भेल।आ ऐ अन्तर्जालक “अनचिन्हार आखर” जालवृत्तक नामपर हम ऐ युगक नाम "अनचिन्हार युग" रखलहुँ अछि। ऐ युगक किछु विशेषता देखल जाए-

·         गजलक परिभाषिक  शब्द आ बहरक निर्धारण---- ई सौभाग्य एकमात्र "अनचिन्हारे आखर"केँ छैक जे ओ हमरासँ १३ खंडमे (एखन धरि १३ खण्ड) "मैथिली गजल शास्त्र" लिखेलक। आ ई मैथिलीक पहिल एहन शास्त्र भेल जइमे गजलक विवेचन मैथिली भाषाक तत्वपर कएल गेलै। तकरा बाद आशीष अनचिन्हार सेहो "गजलक संक्षिप्त परिचय" लीख ऐ परंपराकेँ पुष्ट केलथि। आ एकरे फल थिक जे सभ नव-गजलकार बहरमे गजल कहि रहल छथि।
·         स्कूलिंग ---- "अनचिन्हार आखर" गजल कहेबाक परंपरा शुरू केलक आ तइमे सुनील कुमार झा, दीप नारायण "विद्यार्थी", रोशन झा, प्रवीन चौधरी "प्रतीक", त्रिपुरारी कुमार शर्मा, विकास झा "रंजन", सद्रे आलम गौहर, ओमप्रकाश झा, मिहिर झा, उमेश मंडल आदि गजलकार उभरि कए अएलाह।
·         गजलमे मैथिलीक  प्रधानता----"अनचिन्हार युग" सँ पहिने गजलमे उर्दू-हिन्दी शब्दक भरमार छल आ मान्यता छल जे बिना उर्दू-हिन्दी शब्दक गजल कहले नै जा सकैए। मुदा "अनचिन्हार आखर" ऐ कुतर्ककेँ धवस्त केलक आ गजलमे १००% मैथिली शब्दक प्रयोगकेँ सार्वजनिक केलक।
·         गजलक लेल पुरस्कार  योजना--- "अनचिन्हार आखर" मैथिली साहित्य केर इतिहासमे पहिल बेर  गजल लेल अलगसँ पुरस्कार देबाक घोषणा केलक। ऐ पुरस्कारक नाम "गजल कमला-कोसी-बागमती-महानंदा" पुरस्कार अछि।
·         उपर चारू विशेषताक आधारपर एकटा अंतिम मुदा सभसँ बड़का विशेषता जे निकलल ओ थिक मायानंद मिश्रक ओइ कथनक खंडन, जकर अभिप्राय छल जे मैथिलीमे बहरयुक्त गजल लिखल नै जा सकैए। "अनचिन्हार आखर" सरल वार्णिक, वार्णिक आ मात्रिक छन्दक अतिरिक्त फारसी/ उर्दू बहरमे सेहो मैथिली गजल लिखबाक शास्त्र ओ उदाहरण खाँटी मैथिली शब्दावलीमे प्रस्तुत केलक।


Read more...

सोमवार, 3 अक्तूबर 2011

दहेज मुक्त मिथिलाके निर्माण एवं मिथिलाके धरोहरके संरक्षण---



मिले,
... श्रीमान्‌/श्रीमती/श्रीयुत्‌ ...........................................................
पता: ................................................................................
.......................................................................................
.......................................................................................

विषय: दहेज मुक्त मिथिलाके निर्माण एवं मिथिलाके धरोहरके संरक्षण

महोदय/महोदया,

उपरोक्त विषयमें अपने केँ सूचित करैत अपार हर्ष भऽ रहल अछि जे आजुक २१वीं शदीमें मिथिलाके युवा जनशक्ति जे आइ संसारके हर कोणमें पसरल छथि आ काफी प्रभावशाली योगदान दैत संसारके निर्माणमें व्यस्त छथि - हुनकहि जागृतिके इ सुखद परिणाम थीक जे ‘दहेज मुक्त मिथिला’ नामके एक संस्थाके निर्माण भेल अछि जेकर मुख्य उद्देश्य केवल एतेक जे मिथिलामें माँगरूपी दहेज के प्रथाके समाप्त कैल जाय - मिथिलाके बेटी ऊपर इ प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दुनू रुपें अत्याचार थीक; प्रत्यक्ष एहि लेल जे संतान सभ बराबर होइछ, जहिना लोक बेटाके पढाबयलेल अग्रसर छथि, तहिना बेटीके लेल सेहो छथि - तखन दू रंगके व्यवहार जे बेटाके विवाहमें बेटीवाला के त्यागके कोनो गणना नहि करैत माँगरूपी दहेज के थोपल जैछ। अप्रत्यक्ष अत्याचार एहि लेल जे दहेज के व्यवहार के कारण बहुतो माता-पिता अपन कन्याके उच्च अध्ययन सऽ वञ्चित रखैत छथि आ एहि तरहें मिथिलामें प्रतिभा रहितो मैथिलपुत्री बहुत पछुवायल छथि। जतय आजुक महिला संसारके उच्चतम्‌ शिखर माउण्ट एवरेस्ट सऽ लऽ के, राष्ट्रकवच सेनामें एवं विज्ञानके युगमें प्रखर प्रदर्शन करैत संसारके आगू बढाबयमें हर क्षेत्रमें अगुआ भूमिका निर्वाह कय रहल छथि ततय मिथिलाके बेटीपर दहेज के एहेन प्रहार छैक जे एक निश्चित सीमा तक मात्र पढाइ करैत छथि। उच्च शिक्षाके लेल हतोत्साहित होइत छथि। केवल विवाह एवं वर हेतु चिन्तित रहैत दहेजके व्यवस्थामें लागल थाकल परेशान मैथिल असल ऐश्वर्यके, रिद्धि-सिद्धिके एवं समुचित विकासके बहुत पैघ बाधक बनल छथि। एहि प्रतिकूलताके विरुद्ध छेड़ल मौलिकताके लड़ाईमें अपनेक सहयोगकेर आकाँक्षा रखैत इ पत्र प्रेषित कय रहल छी जे हमरा लोकनिक कार्य-प्रणालीमें मिथिलाके धरोहर जे लगभग हर गाम - हर इलाका में कोनो ने कोनो रूपमें अवश्य मौजूद अछि ताहि ऊपर एकजूट बनैत संरक्षण के कार्य कैल जाय - एहि में अपनेक सहयोग के अपेक्षा रखैत छी।

वर्तमानमें हमरा लोकनि सौराठ सभाके पुनरुत्थान हेतु जन-जागरण अभियानमें अपनेक सहयोग के याचना करैत छी। एहि सभाके जे पौराणिक शुद्ध संस्करण छल ताहिके पुनर्जागरण करयमें, दहेज मुक्त विवाह हेतु एवं विद्वत्‌ सभा जाहिमें मिथिलाके विकास हेतु आम चर्चा-परिचर्चा सेहो होइ आ लोक एकताके सूत्रमें बँधैत नव-नव-निर्माणके कार्यमें संलिप्त होइथ - ताहि लेल सालमें एक बेर सौराठ सभागाछीके पुनः जगायल जाय। एकर जागृति लेल अपनेक सहभागिता के अपरिहार्य आवश्यकता बुझैछ। संगहि जे पौराणिक परंपरा वैवाहिक अधिकार निर्णय कराबय हेतु पंजिकार द्वारा विगत पुश्ताके बीच कोनो प्रकार के रक्त सम्बन्ध जाँच कराबैत कैल जैछ एकर परित्याग कदापि नहि करै जाइ। सिद्धान्त लिखाबैक परंपरा पर सेहो सभ मैथिल ब्राह्मण जाग्रत रहैथ।

जानकारी दी जे एहि बेर सौराठमें श्री श्री १०८ श्री माधवेश्वर नाथ महादेवके मन्दिर जेकर निर्माण दरभंगा राज द्वारा करायल गेल आ जे आइ अत्यंत उपेक्षित अबस्थामें अछि, एकर जीर्णोद्धार हेतु दहेज मुक्त मिथिला कटिबद्ध अछि। अपने लोकनि सँ निवेदन जे एहि शुभ कार्यमें अपन यथायोग्य सहयोग निम्न खातामें अवश्य पठाबी।

खाताधारकके नाम :-सौराठ सभा विकास समिति एवं दहेज मुक्त मिथिला
खाताधारक बैंकके पता :- रहिका, मधुबनी , बिहार
खाताधारक बैंकके नाम :- भारतीय स्टेट बैँक
खाता नं. :- 31742944456
आई. एफ. एस. सी. कोड:- SBIN0005897

धन्यवाद,

सदस्य,
दहेज मुक्त मिथिला, पंजी भवन,
सौराठ सभागाछी, मधुबनी।
फोन: 09661042056..09135462251 .09279343090

Read more...
|| एतय अहाँ अपन विज्ञापन दिअ || Ads by: Maithil Aar Mithila Ads by: Maithil Aar Mithila मैथिल आर मिथिला विज्ञापन सेवा : एहि जालवृत पर अपन विज्ञापन देबाक लेल जालवृत टीमक ई-मेल maithiliblog@gmail.com पर सम्पर्क करू..

मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
(दोसर कड़ी), (तेसर कड़ी), (चारिम कड़ी), (पाँचम कड़ी), (छठम कड़ी), (सातम कड़ी), (आठम कड़ी), (नवम कड़ी), (दसम कड़ी), (एग्यारहम कड़ी), (बारहम कड़ी), (तेरहम कड़ी), (चौदहम कड़ी), (पन्द्रहम कड़ी )

चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

बिदेसिया (संकल्पित नाटिका)

विद्यापतिक बिदेसिया (संकल्पित नाटिका).... भोजपुरीक साहित्य मैथिलीसँ कम समृद्ध अछि मुदा से अछि मात्र परिमाणमे, गुणवत्ताक दृष्टिमे ई कतेक क्षेत्रमे आगाँ अछि। भोजपुरीक भिखाड़ी ठाकुरक बिदेसियाक सन्दर्भमे हम ई कहि रहल छी। भिखाड़ी ठाकुर कलकत्तामे प्रवासी... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

कथा- माउगि

कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

मातृत्व...

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व.... नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि.... (आगाँ पढू)
© कॉपीराइट सूचना:
मैथिल आर मिथिला
सर्वाधिकार सुरक्षित। एहि जालवृत्तपर ई-प्रकाशित कोनो रचनाकेँ प्रिंट, दृश्य, श्रव्य,इलेक्ट्रॉनिक वा कोनो डाटा स्टोरेज माध्यमसँ स्थांतरण वा प्रकाशन बिना सम्बन्धित प्रस्तुतकर्त्ता/ लेखकगणक, जिनकामे ओहि रचनाक कॉपीराइट निहित छन्हि, लिखित अनुमतिक नहि कएल जा सकैत अछि।

  © Maithil Aar Mithila. All rights reserved. Website Design By: Jitmohan Jha (Jitu)

Back to TOP