शनिवार, 26 नवम्बर 2011

गज़ल - अजय ठाकुर (मोहन जी)

आँखी स पिबऽ दिय एक पैग के त बात या
कैह त पायब हुनका ओ राज के त बात या

नै कोनो सिकवा गीला नै कोनो फरियाद या
हम समझै छी आहाक हालात के त बात या

हम आहाक सामने जाहिर कऽरी या नै कऽरी
जान लेब हमर की इ जजबात के त बात या

तपलीफ में छी हम जख्म अहिक नाम स
मैन लेलो हम एकरा सौगात के त बात या

आई तक "मोहन जी" हारलथि नै कोनो खेल स
जे मिलल तकदीर स ओ म्हात के त बात या

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दहेज़ मुक्त मिथिला बनाबू@प्रभात राय भट्ट


समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज़ //
की जाने लोग कोना करैया एकरा परहेज //२

बेट्टा बनल अछि मालजाल बाप बनल पैकारी
दहेजक आईगमें जईर रहल अछि बहु बेट्टी बेचारी
समाजमे दहेजक रोग लागल अछि बड भारी
जौं उपचार नहीं करब तेह फ़ैल  ज्यात महामारी
समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज़ //
की जाने लोग कोना करैया एकरा परहेज //२

बेट्टी जन्म लईते बाप माथ पैर हाथ धरैय
बेट्टीक ब्याह कोना करब चिंतामें डुबल रहैय
शिशु हत्या  करैया   कियो भ्रूण हत्या करैया
आईग लागल दहेजक बेट्टी जईर जईर मरैय
समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज़ //
की जाने लोग कोना करैया एकरा परहेज //२

मैथिल ललना पैढ़लिख भोगेलैथ विद्द्वान
मुदा दहेज़ छै अपराध ई किनको नहीं ज्ञान
मांगी दहेज़ किये करैतछी बेट्टी बहुक अपमान
करू आदर्श ब्याह यौ ललना बढ़त अहांक शान
समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज़ //
की जाने लोग कोना करैया एकरा परहेज //२

उठू जगु मैथिल ललना बढ़ू आब आगू
तिलक दहेजक विरुद्ध एक अभियान चलाबू
मैथिलि बैदेही जानकीके भ्रूण हत्या सं बचाबू
उठू जगु मैथिल दहेज़ मुक्त मिथिला बनाबू
समाजक कलंक बनल अछि तिलक दहेज़ //
की जाने लोग कोना करैया एकरा परहेज //२

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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बृहस्पतिवार, 24 नवम्बर 2011

गजल - अजय ठाकुर (मोहन जी)

सोचलो नै हम निक-बेजैई, देखलो सुनलो किछो नै /
मंगलो भगवान स हर समय, आहा सिवा किछो नै //

देखलो,चाहलो अहिके, सोचलो अहिके पुजलो अहिके /
"मोहन जी" के वफ़ा खता, आहाक खता किछोबो नै //

हुनका पर हमर आँख त, मोती बिछेलक दिन-रैत भैर /
भेजलो ओहे कागज हुनका, हम त लिखलो किछोबो नै //

एक साँझ के देहलीज़ पर,बैसल छलैथ ओ देर राती तक /
आँईख स केलैथ बात बहुत, मुह स कहलैथ किछ्बो नै //

पांच-दस दिन के बात या,दिल ख़ाक में मिल जायत /
आईग पर जखन कागज राखब, बाकी बचत किछ्बो नै //

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गजल - अजय ठाकुर (मोहन जी)

प्यार करे के सजा बहुत नीक दैतअछि कनियाँ /
मैर जाउ त जिबै के दुआ दैत अछि दुनियां //

"मोहन जी" कोन सूरज छथि जे इलज़ाम नै सहतैथ /
मिथिला में पत्थर के भगवान बना दैत अछि दुनिया //

इ जख्म प्यार के देखब नै ककरो /
आनि क पूरा बाजार सजा दैत अछि दुनिया //

किस्मित पर नाज़ नै करू मिथिला वाशी /
हाथ के लकीर मिटा दैत अछि दुनिया //

शादी के बाद मारे के उपाय करे अछि कनियाँ /
जिबे के उपाय सिखा दैत अछि दुनिया //

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रोटी रोजीक खोजी@प्रभात राय भट्ट


नेपालक मधेस प्रान्तमें महोतरी जिलाक धिरापुर गामक बर्ष ३० के भोला खत्बेक जीवनचक्र पैर आधारित यी आलेख अछि जे सम्पूर्ण मध्यमबर्गीय आओर निम्मन बर्गीय समुदाय के जीवन जुडल यथार्थ जीवनी  !
                        भोला एकटा निम्नबर्गीय परिवार में जन्म लेलक हुनक माए बाबु बड मुस्किल से मेहनत मजदूरी करी  भोला के पालनपोषण केलक, भोलाक माए बाबु गरीब होवाक कारन भोला प्रारम्भिको  शिक्षा  बन्चित रहल जेनतेन समय बितैत गेल  समयानुसार भोला पैघ सेहो भगेलाह ! समय के संग संग हुनक दाम्पत्य जीवन सुभारम्भ सेहो भगेलई,भरल जुवानी के अबस्था में दाम्पत्य जीवनक रस्वादन एवं आन्नदमें  पूर्णरुपेन डुबिगेलाह अपन आर्थिक स्थितिके नजैर अंदाज करैत गेलाह मुदा विना अर्थ जीवनक गाडीं कतेक दिन चैल सकैय ! कनिया के सौख श्रींगारक सामग्रिः भोजन भातक ब्यबस्था बृध माए बाबु के दबाई दारू सभक आभाव चारू   खटक लग्लई,तकर बाद भोला के अपन जिमेवारिक  बोध भेलैन ! हुनका किछ नै सुझाई  जे की करू  नै करू राईत दिन बेचारा भोला घरक लचरल ब्यबस्था देखि बड चिंतित रहलागल !एक दिन अपन मिता सुरेश कापर के अपन सभटा दु: सुनैलक  ! सुरेश बड नीक सलाह देलकै देखू मिता अई नेपाल देश में स्वरोजगारी के कोनो ब्यबस्था नै छई पढलो लिखल मनुख के नोकरी नै भेटैछैक तहन  हम अहां कोण जोक्रक छि ! हम एकैटा सलाह देब सउदी अरब चैल जाऊ ओईठाम बड़ पैसा भेटैछैक अहंक सभटा दू:ख दूर भ्ज्यात,सुरेशक गप सुनिक भोलाके माथमें चकर देबलगलै !!मुदा किछ देरक बाद भोला सहमती जनौलक आ सुरेश सं बिदा लैत घर तरफ प्रस्थान केलक!
               सुरेश घर पहुचैत कनियाँ कतय गेली ये हमरा बड़ जोर सं भूख लागल अछि किछु खयाला दिया नए,कनियाँक कोनो जवाब नै अयीलाउपरांत ओ भानस घरमे गेल कनियाँ के देखलक माथ हाथ धयने आ सिशैक सिशैक क कानैत,अहां किये कनैछी ये अतराढंवाली ?की भेल किछ बाजब तब नए हम बुझबई ! कनिया कहलकै....हम की बाजु आ बाजल बिनु रहलो नै जैइय,अहां जे कोनो काम धंधा नै करबै तहन ई चुल्हाचौका कोना चलति एक पाऊ चाबल छल जेकर मद्सटका भात बनाक माए-बाबु आ बच्चा सभमे परसादी जिका बाईंट देलौ आ हम त उपबासो कलेब मुदा अहांके त भूख बर्दास्त नै होइया ताहि सं हमर छाती फटी रहल अछि मुदा अहांके त कोनो चिंताफिकिर रह्बेने करेय !तपेश्वर मालिक सेहो बड़ खिसियक द्वार पर सं गेल कहैछल जे ५०० टका के हमर सूद ब्याज सहित २५००० भगेल मुदा यी भोलबा अखन धरी देब के नाम नै लैय,
     हे यए अतराढंवाली अहां आब जुनी चिंता  करू हमरा पैर भरोषा रखु सभ ठीक भजेतई ई किछ दिनक दू:ख थीक एकटा कहाबत छै जे भगवानक घरमे देर छै मुदा अंधेर नै,अतारधवाली के मोन अति प्रसन्न भेलै आ झट सं पुईछ बैठिय आईंयो रामपुकारक पापा आई की बात अछि जे अहां एतेक पुरुषार्थ वाला गप करैत छि ?की बजली यए अतराढंवाली एकर मतलब अहुं हमरा निक्मे बुझैत छि? त कान खोईलक सुनिलिय हम आब सउदी अरबिया जारहल छि  आ ढेर पैसा कमाक अहां लेल भेजब !अतराढंवाली ई बात सुईनते घबरागेल आ कहलागल की बज्लौं ?कने फेर सं बाजु त अहांके जे मोन में अबैय सहे बाईजदैत छि,एहन बात आब बजैत नै होईब से कहिदैछी हम................मोन त भोला के सेहो उदास भजैय मुदा हिमत करिकें कनियाँ के समझाबक कोशिश करेय देखियो कनिया हम जनैत छि जे हम कोनो काम धंधा नै करैत छि तयियो अहां हमरा सं खूब प्रेम करैत छि,आ हमहू अहां बिनु एकौ घडी नहीं रही सकैत छि यी सभटा जनैत बुझैत हम मज़बूरी बस एहन निर्णय लेलहुं आ अईके अलाबा दुसर कोनो रस्तो नहीं अछि ! आखिर यी जीवन त प्रेम आ स्नेह सं मात्र नै चलत नए जीवनमे दुःख सुख भूख रोग सोक पीड़ा ब्यथा वेदना संवेदना प्रेम स्नेह विबाह बिदाई जीवन मृत्यु समाज सेवा घर परिवार ईस्ट मित्र कर कुटुंब नाता गोता मान सम्मान प्रतिष्ठा घर माकन खेत खलिहान बगीचा मचान सत्कार तिरिस्कार मिलन बिछोड यी सभटा जिनगीक अभिन्न अंग अछि,आ यी सभटाके जैर एकैटा थीक जेकर नाम ऐच्छ पैसा............तै हमरा परदेश जाहिटा परते अहां कनिको मोन मलाल नै करू सबहक प्रियतम पाहून परदेश खटेछैक ! हेयौ रामपुकारक पापा यी बात सुनिके हमर छाती फटेय..तहन अहां बिनु हम कोना रहीसकैछी? नए नए हमरा नहीं चाही पैसा कौड़ी महल मकान हम नुने रोटी खेबई सेहो नहीं भेटत त साग पात ख्याक जिनगी काटीलेब कहैत भोलाके भैर पांज पकरिक सिशैक सिशैक नोर बहबैत कानैलागैय....मुदा भोला कुलदेवता के सलामी राखैत माए-बाबु सं आशीर्वाद लैत घर सं प्रस्थान भगेल.....................! अगिला पाठ क्रमश:.............
लेखक:-प्रभात राय भट्ट
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रोजी रोटिक खोजी भाग :-२@प्रभात राय भट्ट
२.भोला साउदी अरबके एकटा कंस्ट्रक्सन कम्पनी में राईतके ११बजे पहुंचल आ भिन्सरमे ७बजे आफिस में हाजिर भोगेल कम्पनी के मैनेजर साहब भोला सं कबूलनामा कागज पैर साईन करबौलक आ भोलाके उक्त कबूलनामा के विवरण सुनौलक :- १.मासिक वेतन ५०० रियाल ड्यूटी ८ घण्टा २.करार अवधि ३ वर्ष ! भोला इ बात सुनिक हतप्रभ भोगेल जेना मानु भोलाके माथ पैर बज्रपात गिरगेल फेर भोला अपने आपके सम्हारैत मैनेजर साहब सं कहलक नेपाल के मेनपावरक कबूलनामा अनुसार हमर पगार ६०० रियाल + खाना +२०० ओभर टाइम आ दू वर्षमे ३ मासक छुटी के सर्त भेल छल मुदा मैनेजर भोलाके एकोटा बात नै सुनलक तहन भोला कहलक हम सुखा ५०० में काम नै करब २०० खानामे खर्च भोज्यात बचत ३०० रियाल ३०० रियाल्के नेपाली टाका ६०० हजार मात्र होइतअछ तेहेतु हमरा वापस भेज दिय ! मैनेजर भोलाके सामने साम दंड भेद क सूत्र अनुसरण करईत कडा रूप सं प्रस्तुत भेल बेचारा भोला मैनेजर के चंडाल रूप आ कडा चेताबनीके सामने निरीह बईनगेल आ काम करबलेल तयार भोगेल !
             भोला अपन भाग्य के साथ समझौता करैत क्म्पनिके काजमे ईमानदारी पुर्बक सरिक भोगेल मुदा महिना लागैत पगार हातमें आबिते भोला हिसाब किताब में लाईग जाईतछल खाना नास्ता के खर्च निकालैत बाद मुस्किल सं ३०० रियाल बचैक आब भोला घरके बारेमे सोचैलागल ३०० रियाल के सिर्फ ६००० हजार नेपाली होइतअछ जाही सं घर परिवार चलत की रु.१००००० कर्जा सधत जेकर सिर्फ ब्याज ३०० हजार चैलरहलअछ याह बात सोचैत सोचैत प्रात:भोगेल फेर वेचारा भोला अपन दैनिक काम काज में तठास्त रूप सं लाइग जाय याह: क्रम लगभग ५/६ महिना चलैतगेल तेकरबाद भोला किछ टाका घर भेजलक जाही सं हुनक घर खर्च चैलरह्ल छल ! १ साल बितला बाद भोलाके घर सं चिठ्ठी आएल भोला उक्त चिठ्ठी पैढ़क मर्माहित भोगेल चिठ्ठीमें लिखल रहैक रामपुकार के बाबु घरक स्थिति बड़ नाजुक अबस्था सं गुजरी रहलअछ आ अहां जे कर्जा लक गेल छि ओकर ब्याज ३६०० हजार भोगेल महाजन आएल छल कहिक गेल जे आब मूल धन रु१३६००० भोगेल ऐ बात पैर ध्यान दिय भोला चिठ्ठी पढैत फेर घर क चिंता में डुबिगेल कर्जा कोना सधत ? भोलाके उदास देख हुनक संघतिया पुईछ बैठल आईयो मिता अहां ऐना सदिखन एतेक उदास किये रहैत छि यौ ? भोलाक ध्यान भंग भेल आ संघ्तियाके अपन सभटा दू:ख 
सुनौलक  ! संघतिया हाथ में खैनी मलैत कहलक रुकू कने ई खैनी खाय दिय तहन हम कुनु उपाय बताबैछी खैनी ठोर में धरैत झट सं एकटा गप भोलाके सुनौलक देखू हम जे कहैत छि से ध्यान सं सुनु चुप चाप हम आर अहां दुनु गोटे इ कम्पनी छोईडक भाईग चलु कतौ दोसरठाम जतय निक कमाई होइत होइक ! मुदा भोलाके संघतियक गप कनियो निक नै लागल  भोला कहलक देखू इ दोसर के देस में भाईग क कतय जाईब कहीं देहि नही भोगेल तहन के मदत करत आ दोसर इ देस के कानून बड़ कडा छैक पकड़ा गेला पैर जेलमे चकी चलबा पडत तहन धोबी के कुता नै घर नै घाट के होइतअछ से बुईझलिय  हम तह नै ज्याब अहां ज्याब तेह जाऊ !
              भोला फेर अपन काम काजमे जुइटगेल आ भोलाक संघतिया मासिक १५०० सय पगारमे दोसर ठाम काम करैलागल देखते देखैत दुई साल बितगेल ! भोलाके घर सं फेर एकटा चिठ्ठी आएल भोला चिठ्ठी पढ़लक चिठ्ठी पैढ़क खुसी होमय बजाय पुनह उदास भोगेल आ गंभीर सोचमे डुबिगेल भोलाके सब से बड़का परेशानी रहैक कर्जा जे साउदी आब बेरमे लेने रहैक भोला सोचलक जे एतबा न्यूनतम पगारमे कर्जा कोना सधत अंतत:भोला कम्पनी छोईड भागके निर्णय ललेलक ! भोला कम्पनी सं भाईग संघतिया के कम्पनिमे चईल्गेल आ मासिक १५०० सय पर काज करैलागल भोला ५ महिनामे रु १००००० टाका घर सेहो भेज देलक आ कनिया सं फ़ोन मार्फ़त गप केलक कनिया सं कहलक इ एक लाख टाका महाजन के खता में जमा कदिय आ हुनका कहिदीय जे ५  महिनके बाद हम हुनकर सभटा पाय चुकता कदेबैय ! आब भोला किछ प्रसन्न मुद्रामे रहैलागल आ अति प्रसन्ता के साथ सोचैलागल लोक ठीक कहैतछई जे
भगवान के घर देर छै मुदा अंधेर नै आब हमरो विपतिक घडी टैर रहलअछ मुदा वेचारा भोलाके की पता जे भाग्य रेखा कियो नै देखने छैक कखन की हेतई से मनुख क कल्पना सं बहुत दूर के चीज छैक समयचक्र कखन कुन रूप लेत इ एकैटा परमात्मा जनैत छथी! बड़ मुस्किल सं भोलाके ठोर पैर मुस्कान आएलछल मुदा दैबके इ रास नै येलैय भोला के जीवन में तेज गति सं एकटा बड़ भारी बज्रपातके आगमन भेलै भोला अपन ड्यूटी ख़त्म क्याक डेरा तरफ जाईके क्रम में रोड पार करैत समयमे भोलाके देह पैर तेज गति में कालरुपी एकटा गाड़ी चैढ्गेल भोला जीवन आ मृत्यु के बिच एक घण्टा लादैत रहल अंत:भोला अपन  चेतना गुमाबैठल ताहि समयमें उद्धार टोली आबिक भोलाके अस्पतालमें भरना कोदेलक ! इ दुखद घटनाके २० दिन बाद भोलाके घरमे खबैर गेल जे भोला आब इ दुनियामे नहीं रहिगेल रोड एक्सीडेंट में हुनक मृत्यु भोगेल इ बात सुनैत बेचारी भोलाके कनिया मूर्छित पैरगेल आ गाम घरक महिला सब भोला कनियाके चूड़ी फोईर मांगक सिंदूर धोबीक विधवा बनाबक काजमे एकमत भोगेल  तखने समाजसेवी एकटा महिला इ बातक घोर विरोध केलन आ सब महिलाके सम्झौलन जाधैर कुनु ठोस पुष्टि नए भेटैय ताधैर रूईक जाऊ कहीं इ समाचार गलत होइक आ भोला जिन्दा होइक ! गायत्री देवी जी के सुपुत्र प्रभात राय सेहो साउदी अरब में रहैथ ओ फोन सं सभटा बात सुनैलैथ आ प्रभात राय अस्वासन देलैथ जे अहां सभ हमर फ़ोन के प्रतीक्षा में रहू हम अखने वास्तविकता कीअछ
प्रभात भोलाके घटना प्रति जानकारी हासिल करैमे लागिगेल ! अस्पताल,पुलिस,एम्बुलेंस,ट्राफ्फिक सभठाम पता लागौल्क बाद प्रभातक मेहनत रंग लौलक 
भोलाके जिबिते अबस्था में रियाद स्थित एकटा अस्पतालके कोमा में भरना भेल देखलक प्रभात तुरत गाम में फोन स आँखी देखल पुख्ता जानकारी देलन्हि इ बात सुनैत धिरापुर गाम में हर्सौलास के माहौल बनल आ गामक सबलोक प्रभात के धन्यबाद दैत एकटा विनम्र अनुरोध केलैथ जतय खर्चा लागते हम सभ चंदा उठाक देब मुदा भोलाके जान बचादियौ ! प्रभात अस्वासन देलैथ अहां सभ जुनी चिंता करी हमरा सं जतय बैन पडत हम जरुर करब आब भोला के उद्धार कार्य में प्रभात दिन राईत एक क देलक तिन मासक बाद भोला अर्धचेतन अब्स्थामे आएल फेर एक महिना उपचार के बब्जुदो किछ आंशिक सुधार मात्र भेल एम्हर अस्प्तालक खर्च सेहो जीवन विमाके हद पार कगेल प्रभातके प्रयासमें भोलाके बैधानिक कम्पनी आ जीवन विमा अस्पताल क खर्च चुकता केलाक बाद डिस्चार्ज भेल आ नेपाल पठाउलगेल ! भोलाके जिबिते अबस्थामे गाम आबक खबैर सुनिक भोलाके परिवार लगायत समूचा गामक लोक एकबेर पुनह खुश भेल २ दिनक बाद भोला अपन मातृभूमि में पहुंचल आ सबहक प्रतीक्षा के घडी ख़त्म भेल ! भोलाके जीवित देखैला समूचा गामक लोक आबिगेल मुदा भोला इ सभ बात सं बहुत दूर जाचुकल रहैक ओ ऐ काबिल नै रहैक जे किनको सं मिलन के खुसी बाईट सकय भोला के अपांग आ अर्धचेतन अबस्था देख सबके मुह सं आह 
निकैल्गेलई ! भोलाके कनिया अपन सोहागरूपी पति परमेश्वर के अपांगो अबस्थामें भेटगेलैय ते खुसी जरुर भेलै मुदा किछ दिन बाद अतराढवाली के लेल ओकर सोहाग एकटा दीर्घकालीन बोझ बैनगेलैय ओई बोझक भार उठेनाई बड़ मुस्किल भरहल छै किये तेह आजीवन अपांग आ अर्धपागल रही गेलाह !!
लेखक:-प्रभात राय भट्ट

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रविवार, 20 नवम्बर 2011

बढ़ल परेशानी चढ़ल जवानी@प्रभात राय भट्ट



लालपुर के हम लालपरी
ललमुनिया हमर नाम
रुसल फूलल सभक दिल
बह्लाबक अछि हमर काम
एक तेह हमर चढ़ल जवानी
दोसर जान मरैय सावनके पानी
हाय रामा.........................२
हाय रे हाय रे हाय रामा // २

बढ़ल परेशानी चढ़ल जवानी
कियो कहे दिलवरजानी
कियो कहे रुपकरानी
कियो कहे आबू एम्हर
कियो बजाबे ओमहर
हम जाऊ कोमहर कोमहर
हाय रामा .......................२
हाय रे हाय रे हाय रामा //२

कसमस चोली मरैय जान
घघरीमें उठल प्यारके तूफान
जान मरैय ठोरक लाली कानक बाली
केशक गजरा आईखक कजरा
आगू पाछु घुमैयसमूचा  हिंदुस्तान
भेली रे भेली हम जवानी सं परेशान
हाय रामा ..................................२
हाय रे हाय रे हाय रामा .........//२

लच लच लचकैय पतरी कमरिया
देह सं ससरल जाईय हमर चुनरिया
कियो कहे आई लव यु
हेलो मैडम हाउ आर यु
निहायर २ मारे जुल्मी नजरिया  
आगू पाछु करे समूचा दुनिया
हाय रामा ...........................२
हाय रे हाय रे हाय रामा ...//२

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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शनिवार, 19 नवम्बर 2011

उर्वरभूमि बनाएब हम अपन धरती@प्रभात राय भट्ट



विचित्र सृष्टिक रचैता हे ईस्वर //
सभक सुदी रखैयबाला परमेश्वर // २

गरीबक जिनगी की अछि बेकार
किये करैया लोग हमर त्रिष्कार
पैघ मनुख किये दैय धिकार
कुनु ठाम नहीं अछि गरीबक अधिकार //

हे ययौ पालनहार कने सुनु ने हमर पुकार
सभक उद्धार  केलौं कने सुनु ने हमरो उपकार
फुलक हार नहीं नैयनक नोर चढ़ाबआएलछि
आईखक दुनु प्यालामे किछ मांगलेल आएलछि//

गगनचूमी कोठा अटारी नहीं चाही
हमर झोपरीमे सुख शांति दिय
कंचन कोमल काया नहीं चाही
बज्रदेह बाहिमें ताकत दिय.........//

विघा दस विघा जमीं नहीं चाही
कठा दस कठा खेत बारी दिय
चटान फोरबाक हिमत दिय
हिमाल सन अटल छाती दिय //

आराम आर विश्राम नहीं चाही
श्रमिकके श्रम करबाक सौभाग्य दिय
कोईर कोईर तोईर तोईर बाँझ पर्ती
उर्वरभूमि बनाएब हम अपन धरती //

खुवा मेवा मिष्ठान नहीं चाही
भोर साँझके दू छाक आहार दिय
सुख शैल विलास नहीं चाही
जीवन चालबलेल कुनु अधार दिय //

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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शुक्रवार, 18 नवम्बर 2011

गीत -अजय ठाकुर (मोहन जी)

हमरा त हमर कनियाँ और सैर लुट्लक, दोसर में कहा दम छल /

"मोहन जी" के हड्डी भाल्पट्टी में टुटल, और ओतुका हॉस्पिटल बंद छल //

हमरा त नरकटिया गंज में बैसेलक, ओकर कोयला खतम छल /

हमरा फेर बैलगाड़ी में बैसेलक, कियाकी ओकर किराया कम छल //

पुरना बैलगाड़ी पर हमरा बैसेलक, ओकर पहिये ढील छल /

हमरा त डॉक्टर और चपराशी उठेलक, नर्ष में कहा दम छल //

हमरा त देशी पिया क नशा में अनलक, अंग्रेज़ी में कहा दम छल /

हमरा त रोड पर जला देलक, कियाकी आम मजरे के समय छल //

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बृहस्पतिवार, 17 नवम्बर 2011

चेतना समिति, पटनाक यात्री-चेतना पुरस्कार २०११ ई.- डॉ. राम भरोस कापड़ि भ्रमर (जनकपुर)केँ

चेतना समिति, पटनाक सभसँ प्रतिष्ठित पुरस्कार यात्री-चेतना पुरस्कार २०११ ई.-  डॉ. राम भरोस कापड़ि भ्रमर (जनकपुर)केँ देल गेलन्हि।



















नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता (नेपाल देशक भाषा-साहित्य,  दर्शन, संस्कृति आ सामाजिक विज्ञानक क्षेत्रमे  सर्वोच्च सम्मान)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठानक सदस्यता
श्री राम भरोस कापड़ि 'भ्रमर' (2010)
श्री राम दयाल राकेश (1999)
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव (1994)

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान मानद सदस्यता
स्व. सुन्दर झा शास्त्री

नेपाल प्रज्ञा प्रतिष्ठान आजीवन सदस्यता
श्री योगेन्द्र प्रसाद यादव



फूलकुमारी महतो मेमोरियल ट्रष्ट काठमाण्डू, नेपालक सम्मान
फूलकुमारी महतो मैथिली साधना सम्मान २०६७ - मिथिला नाट्यकला परिषदकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ - सप्तरी राजविराजनिवासी श्रीमती मीना ठाकुरकेँ
फूलकुमारी महतो मैथिली प्रतिभा पुरस्कार २०६७ -बुधनगर मोरङनिवासी दयानन्द दिग्पाल यदुवंशीकेँ



साहित्य अकादेमी  फेलो- भारत देशक सर्वोच्च साहित्य सम्मान (मैथिली)


           १९९४-नागार्जुन (स्व. श्री वैद्यनाथ मिश्र “यात्री” १९११-१९९८ ) , हिन्दी आ मैथिली कवि।


           २०१०- चन्द्रनाथ मिश्र अमर (१९२५- ) - मैथिली साहित्य लेल।



साहित्य अकादेमी भाषा सम्मान ( क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य आ गएर मान्यताप्राप्त भाषा लेल):-
           
           २०००- डॉ. जयकान्त मिश्र (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
           २००७- पं. डॉ. शशिनाथ झा (क्लासिकल आ मध्यकालीन साहित्य लेल।)
            पं. श्री उमारमण मिश्र




साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली


१९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन)

१९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य)

१९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास)

१९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य)

१९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य)

१९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास)

१९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण)

१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य)

१९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना)

१९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य)

१९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य)

१९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास)

१९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य)

१९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास)

१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास)

१९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य)

१९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा)

१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)

१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा)

१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)

१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)

१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा)

१९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)

१९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध)

१९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)

१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)

१९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य)

१९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू, कथा संग्रह)

१९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य)

१९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य)

१९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा)

२०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)

२००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)

२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य)

२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)

२००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)

२००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)

२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)

२००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा)

२००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा)

२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)

२०१०-श्रीमति उषाकिरण खान (भामती, उपन्यास)



साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार


१९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)

१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी)

१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू)

१९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)

१९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू)

१९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़)

१९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला)

१९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला)

२०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)

२००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)

२००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू)

२००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया)

२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी)

२००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)

२००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)

२००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)

२००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)

२००९- भालचन्द्र झा (बीछल बेरायल मराठी एकाँकी-  सम्पादक सुधा जोशी आ रत्नाकर मतकरी, मराठी)

२०१०- डॉ. नित्यानन्द लाल दास ( "इग्नाइटेड माइण्ड्स" - मैथिलीमे "प्रज्वलित प्रज्ञा"- डॉ.ए.पी.जे. कलाम, अंग्रेजी)


साहित्य अकादेमी मैथिली बाल साहित्य पुरस्कार


२०१०-तारानन्द वियोगीकेँ पोथी "ई भेटल तँ की भेटल"  लेल
२०११- ले.क. मायानाथ झा "जकर नारी चतुर होइ" लेल

प्रबोध सम्मान


प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- )

प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- )

प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- )

प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- )

प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- )

प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- )

प्रबोध सम्मान 2010- श्री जीवकान्त (1936- )

प्रबोध सम्मान 2011- श्री सोमदेव (1934- )



यात्री-चेतना पुरस्कार



२००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;

२००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;

२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;

२००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा;

२००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;

२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;

२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;

२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;

२००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी

२००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा

२०१० ई.- डॉ. तारानन्द वियोगी, महिषी, सहरसा

२०११ ई.-  डॉ. राम भरोस कापड़ि भ्रमर (जनकपुर)


भारतीय भाषा परिषद, कोलकाता

युवा पुरस्कार (२००९-१०) गौरीनाथ (अनलकांत) केँ मैथिली लेल।


भारतीय भाषा संस्थान (सी.आइ.आइ.एल.) , मैसूर रामलोचन ठाकुर:- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००३-०४ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) जा सकै छी, किन्तु किए जाउ- शक्ति चट्टोपाध्यायक बांग्ला कविता-संग्रहक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।  रमानन्द झा 'रमण':- अनुवाद लेल भाषा-भारती सम्मान २००४-०५ (सी.आइ.आइ.एल., मैसूर) छओ बिगहा आठ कट्ठा- फकीर मोहन सेनापतिक ओड़िया उपन्यासक मैथिली अनुवाद लेल प्राप्त।



विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी सम्मान

१.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी फेलो पुरस्कार २०१०-११ 
२०१० श्री गोविन्द झा (समग्र योगदान लेल)
२०११ श्री रमानन्द रेणु (समग्र योगदान लेल)
२.विदेह समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०११-१२ 

२०११ मूल पुरस्कार- श्री जगदीश प्रसाद मण्डल (गामक जिनगी, कथा संग्रह)
२०११ बाल साहित्य पुरस्कार- ले.क. मायानाथ झा (जकर नारी चतुर होइ, कथा संग्रह)
२०११ युवा पुरस्कार- आनन्द कुमार झा (कलह, नाटक)
२०१२ अनुवाद पुरस्कार- श्री रामलोचन ठाकुर- (पद्मा नदीक माझी, बांग्ला- माणिक वन्दोपाध्याय, उपन्यास बांग्लासँ मैथिली अनुवाद)

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बुधवार, 16 नवम्बर 2011

मिथिला - भास्करानन्द झा भास्कर

मिथिला

हम छी मिथिलाक भिखमंगा
मांग रहल छी विकासक भीख
हाथ में लेने बाटी - कटोरी
चौबटिया पर छी नंगटे ठाढ़
जेना सुखायल हरियर गाछ !!!

मिथिलाक जे छल धरोहर
करै छल सगर विश्व गुणगान
पान पड़ा गेल , मखान सुखा गेल
गामक पोखरि अछि पड़ल उदास
आर बिन पानिक छरपटाए माछ !!!

भास्करानन्द झा भास्कर

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नाक हमर नकेल हुनकर - अजय ठाकुर (मोहन जी)

नाक हमर नकेल हुनकर - अजय ठाकुर (मोहन जी)

  तेल हुनकर फुलेल हुनकर
 
हुनकर महफिल में खेल हुनकर
 
दूर स जे देख रहल छी गुलदस्ता
 
दरशल तालमेल हुनकर
 
चाहे ओ ओ पाले या शिकार करथि
 
हुनकर बगरा गुलेल हुनकर
 
ऐ तरहक तालमेल हुनकर
 
की करू बंधी गैलो प्यार में
 
नाक हमर नकेल हुनकर
 


   

      

रचनाकार :- अजय ठाकुर (मोहन जी)

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गजल - भास्करानंद झा भास्कर

गरदनी रसपान देहप्रेमक सोपान भ गेलई
प्रेम रस आब नागक विष पान भ गेलई !

नवयौवनक रुप छलै प्रेम कविक स्वप्रेरणा
देहक सौन्दर्य पर बाला के गुमान भ गेलई !

खेल कूदि पढैत बढैत छोट छीन बालपन  
आई नवजात सब अहिना सयान भ गेलई !

मरि रहल अछि संस्कृति, जरैत संस्कार 
प्रेमक अनुभूति आब त श्मशान भ गेलई !

गरदनी रसपान देहप्रेमक सोपान भ गेलई 
पवित्र प्रेमक भाव के आब उठान भ गेलई !

भास्करानंद झा भास्कर







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साहित्यक लठैत - भास्करानन्द झा भास्कर

एखनो धरि
किछु लोक छथि ओझरायल
भाषाक भांति भांति घास फ़ूसि में !
साहित्यक लताक नैसर्गिक सौन्दर्य
स भय अनचिन्हार!!! अज्ञात !
एकटा गाछक ओट में ठार!!
ताकैत टुकुर टुकुर एना
जेना दूरक दृष्टिक हरायल !

माथ पर फ़ूसिये पहिरने
कोपमंडुकताक ललका पाग !
सामासिक ज्ञानक संस्कार सं
कटल! फ़ेकल फ़ाकल !
पुरान धुरान बुढियाक नुआ जका !

बस, आब बहुत भेल!
फ़ेकू परम्पराक धोती
पहिरु सब भाषाक पैण्ट
आ बनाबि एक ऎहन परिवेष
जतय उभरि कय आबि सकय
मिथिलाक विशाल महता !

भास्करानन्द झा भास्कर

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शनिवार, 12 नवम्बर 2011

गजल- अजय ठाकुर (मोहन जी)

गजल- अजय ठाकुर (मोहन जी)


कनियाँ हमर शराब छोरबा देलैथ अपन शपत खुआ क
प्रभाकर हमरा पिया देलैथ कनियाँ के शपत खुआ क //

पिलो त एते पिलो की लरखरा क गिर परलो
प्रभाकर और दोस्त सोचलैथ की हम मैर गेलो //

ल जा रहल छलैथ हमरा ओ अश्म्शान
रस्ते में मिल गेल शराब के दुकान //

हम कहलयैन ल लिय और ४-५ टा बोतल,
अपन शारा-स्थली पर बैश क पियब //

भगवान अगर मांगता जिंदगी के हिशाब,
हुनको एक पैग बना क पियब //

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गजल, अजय ठाकुर (मोहन जी)

गजल - अजय ठाकुर (मोहन जी)


प्रिय प्रीतम के आँखि में प्यार के चमक अखनो छैन
मगर हुनका हमर मोहब्त पर सक आइयो छैन

नाँव में बैस क धोने छलैथ हाथ ओ कहियो
सुंदर सागर पोखेर में मेहँदी के गमक आइयो छैन

प्रिय प्रीतम के छु नहीं पैलो प्यार स कहियो
लेकिन हमर होँट पर हुनकर होँट के झलक आइयो छैन

सब बेर पुछै छथि हमर चाहत के सवाल
ओनाहिये प्यार के परखनाय आइयो छैन

नै रैह पौती प्रिय प्रीतम हमरा बिना
दुनू तरप प्यार के धध्क आइयो आछि

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शुक्रवार, 11 नवम्बर 2011

दहेज बनल हमर अभिशाप@प्रभात राय भट्ट




सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२

नन्हका छौराछेबारी बनल बाप
दहेज बनल हमर अभिशाप
बड़का बटुआ बाबु सियौनेछी
हमर जिया किये तर्सौनेछी
सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२ 

अगुआ घटक अबिते बाबु
भोजैतछि अहां सभ बेकाबू 
काका मंगैय चैर पचास
बाबु करैय पुरे पांचक आस
सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२ 

घटक घुईर जाईत कहैय रहू कुमार
दहेज़ कारन जरल हमर कपार
केस पाकल दाढ़ी पाकल
चोट्क्ल हमर दुनु  गाल
सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२ 

आब दाम कियो नै लगाबैय
बाबु देख अहांक झखरल माल
बाप बनल अछि पैकारी
बेट्टा बनल अछि मालजाल
सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२ 

सगरो लागल अछि देखू
दहेज़ कुप्रथाक रोजगारी
बेट्टा भलही रही जाय कुमार
बापके लागल दहेजक बीमारी
सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२ 

ऊमर बितल जाईय हमर
बुढ़ारीमें कोना करब घ्यूढारी
मोन करेय हमहू जईतौ कोहबर
बाबु छोडू इ दहेजक रोजगारी
सभक बियाह भेलई यौ बाबु //
हमर लगन लगतै कहिया ...//२ 

 रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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शनिवार, 5 नवम्बर 2011

मिथिला उवाच-- (भाग -२)

नवीन ठाकुर, गाम- लोहा (मधुबनी ) बिहार, जन्म - १५-०५-१९८४, सिक्षा - बी .कॉम (मुंबई विद्यापीठ), रूचि - कविता , साहित्यक अध्यापन एवं अपन मैथिल सांस्कृतिक कार्यकममे रूचि। कार्यरत - Comfort Intech Limited (malad) (R.M. )



मिथिला उवाच



पुरवा बहि रहल अछि चंडाल जकां सायं-सायं कऽ रहल अछि जेना दौगि रहल अछि .....आतुर भऽ - व्याकुल भऽ, हरा गेलैए किछु ..ताकि रहल अछि जेना !

सुखा गेल मुँह , नाक , कान सभटा , पैर तरक धरा मे दरार पड़ि गेल अछि....सौंसे खेत मे ,



छाती फाटि कऽ कानि रहल अछि जेना बुझा रहल छै सीता एखने गेलीहेँ धरतीमे फांक दऽकऽ !

मूड़ी ऊपर उठेलहुँ तँ लागल जेना चुनरी ओढा देलक कियो मुँहपर .........!

हे भगवान् बज्जर खसौ ई करिया बदरा केँ। सभ दिन कऽ अपन सकल देखा कऽ ...मुँह दुइस कऽ भागि जाइए! कनेकबो दर्द नै छै कोंढ़मे बेदर्दाकेँ ......!

आह ..हा ...नाक पर एगो शीतल बूंद खसल ओढ़नी सँ चुबि कऽ .......मोनक भ्रम अछि की .....



तखने दुनु पपनीपर खसल जेना कहि रहल अछि, उठू, आब नै सताएब हम अहाँकेँ किया एतेक अन्धेरेज

भेल अछि .....संतोख भेल भीतरसँ कने !

ठनका ,ठनकल जोरसँ तखने ........!

कतऽ गेल गै छौड़ी ........अमोट सुखाइ छौ अंगनामे उठा ले ने, पाइन एलै...... भिजलौ सभटा !

यै भौजी, असगनीपर सँ कपड़ा उतारू सभटा ..........भिजल ........( अमोट उठबैत एगो भौजीयोकेँ काज अरहेने गेल दुलरिया )

एक अछार बरिस कऽ रुकि गेल तँ निकलि गेलौं खेत दिस कने .......... आह हा ........ह्रदयक गहराइ तक उतरि गेल ओ सोन्ह्गर माटिक सुगंध पहिल अछारक बाद दबने छल जे बहुत दिनसँ भीतरमे !

मृग मरीचिका जेना भटकलौंहेँ कने काल ....., ओर ने कोनो छोर ओइ सुगंधक ,...



सजि-धजि कऽ बैसल अछि जेना मिलनक आसमे प्रेमीक बाट तकैत...

चारु दिस सुन्न पड़ल अछि खेत, नबका फसलक इंतजारमे!

सरजू काका महिना भरिसँ हरक शान चढ़ा रहल छथि फारक, बड़द सभकेँ खुआ-पिया कऽ टनगर बनेने निङहारैत छलथि आकाश ..



सभ दिन चारू दिशामे घूमि कऽ बरखाक आसमे,

लिअ आइ बरसि पड़ल !


राति भरि कतेक बरसल नै बुझि पड़ल , मुदा निन एहन पड़लौं जेना काल्हिये बोर्डक परीक्षा खतम भेल ......!

भरि गर्मीकेँ निन आँखिमे घुरमैत छल !

भोरे उठि दलानपर बैसि कऽ चाह पिबैत रही.....चन्दन बाबू कान्हपर कोदारि नेने दौगल जाइत छलाह बाध दिस ......



टोकलियनि तँ इशारामे किछु कहि कऽ भागि गेला ..... आन दिन चाहक नामपर बिन बजेन्हो टपकि पड़ैत छलथि .......आइ की भऽ गेलनि!

हे यौ, ई चन्दन बाबूकेँ की भऽ गेलनिहेँ, भोरे -भोरे .....- सरजू काका ओम्हरसँ अबैत रहथि, पुछलियनि।

हौ बौआ हुनकर खेतक पाइन सभटा बहल जाइत छनि, गेलाहेँ आइर बान्हऽ ,



..........ओहो सुआइत.!

संझाक बेर बिदा भेलहुँ पोखरि दिस .....लागल, बेंगक अज्ञातवास खतम भऽ गेल .......टर्र.. टर्र ... करैत खत्ताक ओइ पारसँ अइ पार तक .........



सुर ताल देबऽबलाक कमी नै, सभ एकै साथे प्रतियोगितामे ठाढ़ भेल जेना !

सबहक धानक बीया खसि पड़ल .........लुटकुन बाबूक बीया बड़ जोरगर छनि ....हेतै कोना ने, बेचारा ..राति दिन एक कऽ कऽ छाउर आ गोबरसँ खेतकेँ पाटि देने छलखिन! हुनकर खेतो तँ सभसँ पहिने गाममे रोपा जाइत छनि ...!

आइयो कादो कऽ कऽ एलैथहेँ .......झौआहमे ..!

गमछामे किछु फड़फराइत देखलियनि.....पुछलियनि काका की अछि तौनी मे ......?

हौ, खेत मे बड़ माछ छल गमछा सँ माँरलहुँहेँ ! काल्हि निचका बला खेत मे चास देबै, भेज दिहक छोटका केँ, बड़ माछ छै ..ओहू खेत मे !

ठीक छै ......कहलियनि ......!

मंगनीक माछ खाइमे बड़ मोन लगै छै मुँहमे पाइन आबि गेल सुनि कऽ!

जल्दी अबिहेँ, मशाला पिसबा कऽ रखने रहबौ ..............( छोटका केँ जाइत-जाइत कहलिऐ। )

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मिथिला उवाच-- (भाग -१)

मिथिला उवाच - (भाग -१)



फलना बाबु मईर गेला बहुत नीक लोक छलाह ..........के कहलक ..........एखने एगो धिया-पुता बजैत जाई छल जे फलना दिन भोज हेतई ....बाहर निकल्हूँ त ...हरिबोल - हरिबोल सुनाई परल .!

तू ....जेबहक की नई कठियारी .....
हा हाँ कियक नई जेबै !
.....ज़ाब त संग क लेब कने -
...

फलना बाबु छि यु कठियारी के हकार दैत छि .........चिलना बाबु नै रहला .........!

ओहो.. ओहो ...काल्हिये त गप्प भेल छल हुनका संग हमरा पोखैर पर भेटल छलाह .........आहा..हां .. कहियोऊ ....... जन्म मरण के कोनो भरोसा नई होईत छई यऊ बाबु ..........ठीके कहैत छिये काका .......!

लेकिन गेलाह सबटा सुख भोइग क बेटा-पुतौह बड़ निक छैन , खूब सेवा वारी करैत छलैन .........!
.हाँ हाँ कियाक नई कर्थिन कमिये कोण छलैन ....एगो बेटा डाक्टर छैन ...एगो, वन विवाग के अधिकारी छैन ........बेटियों सब सुखी सम्प्पन छैन ,
सब काज सं निश्चित भ क मरला हा !
हा से त सब अर्थे सं महादेव के कृपा सन भरल पुरल छैथ,....... लेकिन काज राज ढंग सं करता की नहीं तखन ने ..........भगवान् कोनो कमी नहीं देने छैन .........जवार त खुआब्क चाही ........हा त से कियाक नई .......!

चल चल देरी भ रहल अछि ..........फेर एबाको अछि ..........पूजा पाठ करबाक अछि ......!

राम नाम सत्य है ............!

हरी बोल ....हरी बोल .......!
कथी के अतेक हल्ला भ रहल छई यऊ छोटका बाबू ........- भौजी फलना बाबु के स्वर्वास भ गेलैन !

ठीक छई आन्हा चली जाऊ कठियारी ....... भैया के पठआ दियुं कने अंगना भोर सं भुखले प्यासल बैसल छैथ ....दालान पर !

.................................................................. !

एजोरियो रईत में टोर्च लक ई के आबी रहल अछि बुर्लेल आदमी होऊ
तखने मुह पर टोर्च मार्लकैन .........काका ......एकाद्सा - दुआद्सा के नोत हँकार दैत छि ......पुरख्क दफ्फा ..!

आहा ...फलना बाबु ...औ औ बैसू .....!

नै काका बड़ काज आछि एखन ...!

हाँ आन्ह्के त एखन कजाक अंगना अछि बौआ , ........बहिन सब एलहा की नई ?
हाँ सब आबी गेल ......काका छोटकी पुछई छल आन्ह्के बारे में .........जे काका जिब्ते छथिन ने ..........!


हह हहह हा.. हा.. हाँ हाँ ओकरा त होइते हेतई , बच्चा में बड़ मारने रहिये ने ......!

बरकी बहिन के त नन्किरबो छ ने एकटा ......
हाँ ५ सालक छई नन्किरबा ..........!
भगवान् देह समांग दोउ बढ़िया .......बड़ निक ! ठीक छई चली छि काका .!

भोजक दिन -

क्या गो तरकारी छई होऊ भाई .........?
सात गो तरकारी छाई काका ......!
कोण-कोण ?
.........आलू- कोबी , भाटा -अदौरी , कदीमा , सज्मैन, साग , बड़ ,आ बड़ी ,

आह बहुत निक .......सबेर सकाळ बिझो भ जीते त ठीक रहितई ..बेसी राईत में नै ठीक होई छई ...धिया पुता सब उन्घा लागे छई ..........हाँ -

जाने....... कनेक देख क आब त कत तक काज आगा बढ्ल्या .......!

तखने.दूर सं..........!

फलना बाबु छि यऊ ....बिझो करबैत छि .!
हाँ हाँ .........ठीक छई ........!

है बिझो भेलई ....बिझो भेलई....!
है छौरी सब हल्ला नई कर ....!
बाबा ......भर्तुआ सुईत रहल ...!
है जो ने उठा दही ने सांझे सा हल्ला केने छलिया भोज खाब भोज खाब .....जो जल्दी लोटा ल क आग ..!
दू गो लोटा ल लिहां.......
हाँ...!

यो एगो ओउर पात दिय ई फाटल अछि ......
है छौरी ....पात खेबा की भात .....!
जा दियोऊ बच्चा छई है ले बोउवा ...दोसर पात !


है भात उठब ने ......! म तोरी गप की करैत छ उम्हर एखन धैर पतों नई परसाला ....!

दाइल लेब दाइल ..! डालना.... डालना....!


पैन ओ एगोटा त उठा ला कम सं कम ....की सब तरकारिये परसबा!..हरे करिया ..एम्हर आ ..चल पैन उठा ले तू .!
है हम पैन नै उठाब .......!
है बह्निचो पैन पिएला सन धर्म हेतो .......उठा न !

.....................

.............
है क़ात भ का हाथ धोए जाई जाऊ - है ई के धिया-पुता अछि ........है बिचई में रास्ता पर पैन हरबे छा
...लोक पिछैर का खस्ते एकने चंडाल कही के ...!

बहुत नीक .........छल काका भोज ,
जय जय भ गेलै ..!
होऊ एतबो नै कैरतई त नाक -कान कटब के छली की ...एतेक सम्पैत कत क रखते ....समाज में रह के छई की नई ....!

हाँ सेहो छिये........देखियो आब कालिह की होया ....सुन में आला जे जवार भ रहल अछि पांच गाम नोतात.!
आह करबाके चाहि .. अहि सं नाम होईत छई ....अपने नाम हेतई ने कोनो हमर थोरे ने हाँ .......गामक नाम सेहो हेतई कने !


भोजक २-४ दिन पश्चात ...........!

हाउ फलना बाबु के रईत तबियत ख़राब भ गेली की ....!

हल्ला सुनालिये काका आई भोर में ........ओहो लटकले छैथ ..........पाकल आम छैथ
....... आब जे दिन जीबैत छैथ से दिन !

हाँ .........हमरो जेबाक छाला बंबई लेकिन ई हल्ला सुनालिये
त रुईक गेलहुं !
दू चईर दिन और रूइक जाई छि .......कही ओहो ने ...आब कतबो छैथ त दियादे छैथ ने .....चली जायब त बद्नामिये हयात .....!

तहिदुआरे रुकिए जाई ...............!
(नविन ठाकुर )

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अजय ठाकुर (मोहन जी)- गजल

आहाक मीठ-मीठ याद में खोकर हम तऽ तनहा जी लै छी

याद बॅड जखन आबाई या तखन दु घोट शराब हम पी लै छी

आहाक मीठ-मीठ याद में खोकर हम तऽ तनहा जी लै छी

मिलयै जखन कनियो गम हमरा, याद आहाके कऽ लेल करे छी

लाख कहै दुनियाँ हमरा लेकिन, हम होट के सिब लैत छी

आहाँक मीठ-मीठ याद में खोकर हम तऽ तनहा जी लै छी!

आहाँक बितल याद में खोकर एक, मीठा दर्द हम पा लै छी

आहाँक छोट-छोट चिट्ठी के पैध कऽ कखनो क हैस लै छी

आहाक मीठ-मीठ याद में खोकर हम तऽ तनहा जी लै छी

किया छोरि देलो तन्हा हमरा, आहाँक तस्वीर सऽ कैह दै छी


रचनाकार :- अजय ठाकुर (मोहन जी)

अजय ठाकुर (मोहन जी)
ग्राम+पोस्ट - भाल्पट्टी
जिला - दरभँगा

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अजय ठाकुर (मोहन जी)- गजल

हमरा सुताबे के लेल जखन अन्हार रैत आबाई या
हम सुईत नै पाबै छी रैत अपने सुईत रहे या
पुछला पर दिल सँ एक आवाज़ आबै या
आई याद क लियऽ अपन प्रिय जान के रैत त रोज-रोज आबै या

कहाँ स लाबु ओ हम शब्द जे आहाँ के तारीफ के काबिल होय
कहाँ स लाबु ओ हम चाँद जैऽमे आहाक खूबसूरती शामिल होय
हे याई हमर बेवफा सनम एक बेर बता दिय
कहाँ स लाबु ओ किस्मत जै में बस आहा हमर होय

तारा में अकेला चाँद जगमगाय या
मुश्किल में अकेला इन्शान डगमगाया या
कँट (काँटा) स घबरैब नै मिथिला वाशी
कियाकी काँट में अकेला गुलाब मुस्कुराय या

आँइख में मंजिल छलै
गिरलो और समरैथ रहलो
आँधी में की दम छलै
चिराग हवा में जरबैत रहलो

दिल के हालत ककरो स कहल नै जय छल
दिल के हालत आब हमरा स सहल नहीं जय छल
तरपती तऽ हैती ओहो हमरे जेकॉँ
कियाकी हुनकर याद हरिदम नहीं आबे छल

आयल चिट्ठी मून भेल हुनकर हाथ के चूइम ली
जखन ओ पढ़ती त हुनकर होट के चुइम ली
भगवान नै करथि की ओ थिट्ठी के फारी दैथि
गिरैत-गिरैत हुनकर पैर के चुम ली

बितल बात हमरा याद आबै या
कुछ लम्हा के याद स आँखी भरी जाय या
ओ शाझ ओ भोर निराली जाय या
जखन आहा जेहन दोस्त के याद आबै या

हमरो कियो कुमारी कन्या याद करत हेती
अपना सपना में सजा रहल हेती
कियो करे या नै करे
ओ हमर जरुर इंतजार करेत हेती

कशिस त बहुत छल हमरो प्यार में
मगर की करू पत्थर दिल पिघलैतऽ नै या
अगर भगवान मिलता त हुनका स अपन हम प्यार मँगव
लेकिन सुनलो हन जे मरला स पहीले भगवान मिलते नहीं या

अजय ठाकुर (मोहन जी)
ग्राम+पोस्ट - भाल्पट्टी
जिला - दरभँगा

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अजय ठाकुर (मोहन जी)- गजल

हमर पेशेंस के अजमाकऽ, प्रिय प्रीतम के खुब मजा आबाई छैन
दिल के खुब जलाकऽ, प्रिय प्रीतम के खुब मजा आबाई छैन

खुब बात केला के बाद जहन हम कहे छियैन आब फोन राखु
बैलेंस के दिवाला निकैल कऽ,प्रिय प्रीतम के खुब मजा आबाई छैन

हुनका मालूम छैन जे हम नौकरी वाला छी मिलय नै जा सकब
लेकिन मिलय के कसम खुवाकऽ, प्रिय प्रीतम के खुब मजा आबाई छैन

हम तऽ ओनाहिये नशा में छी हमरा ओना नहीं देखु
मगर जाम-ए-नैन पिया कऽ, प्रिय प्रीतम के खुब मजा आबाई छैन

हम खुब कहे छियैन विवाह सऽ पहले इ सब ठीक नहीं या
सुतल अरमान के जगाकऽ,

रचनाकार :- अजय ठाकुर (मोहन जी)

अजय ठाकुर (मोहन जी)
ग्राम+पोस्ट - भाल्पट्टी
जिला - दरभँगा

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अजय ठाकुर (मोहन जी)- गजल

अजय ठाकुर (मोहन जी)
गजल


भोरे-भोरे उठी क शराब पीनाय कैलो हँन चालु
प्रभाकर जी आहा कहु जे इ पैग में कते पैन डालु

आहा ठंडा पैन स अपन आँखी धो क लाली त हटाबु
फ्रिज में स नबका बैगपेपर (दारू) के बोतल त पकराबु

रोज राति क सपना में हम ठेका पर जय छी
सबटा खेत और घरारी भरना लगा दैत छी

खेत और घरारी कखनो हम भरना नहीं लगैतो
आहा जे एक बेर अपन शराबी नैन स पिया दैतो

मानलो हम आहा के बहुत दूख-दर्द देलो
मुदा आहु त हमरा स पूरा प्रेम नहीं केलो

मानलो की आहा सुंदर-सुशिल हमर कनिया भेलो
मुदा आहा स ज्यदा हम दारू स प्रेम केलो

आब नहीं सताबु आबी जाऊ अपन घरे में रहब
भले दारू छोरी , दोस्त छोरी आहा के मारी सहब



रचनाकार :- अजय ठाकुर (मोहन जी)

अजय ठाकुर (मोहन जी)
ग्राम+पोस्ट - भाल्पट्टी
जिला - दरभँगा

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बृहस्पतिवार, 3 नवम्बर 2011

गजल


बतहा बसात सन टौआइत हमर जिनगी

मेंहक बरद सन थौआईत हमर जिनगी


बिपदाक टाल हमर जिनगीक दालान पर

सूखक कबाउछ में हौआइत हमर जिनगी


झहरैत मेघ थिक सब हमर मोनक मनोरथ

डालिक अरहुल सन मौलाइत हमर जिनगी


नोरक डबरा हमर जिनगीक आँगन में

काठक असरा सन घुनाइत हमर जिनगी


नेहक आतुर हमर जिनगीक भोर सांझ

सिनेहक सपना में बौआइत हमर जिनगी


स स्नेह

विकाश झा


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मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
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चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

बिदेसिया (संकल्पित नाटिका)

विद्यापतिक बिदेसिया (संकल्पित नाटिका).... भोजपुरीक साहित्य मैथिलीसँ कम समृद्ध अछि मुदा से अछि मात्र परिमाणमे, गुणवत्ताक दृष्टिमे ई कतेक क्षेत्रमे आगाँ अछि। भोजपुरीक भिखाड़ी ठाकुरक बिदेसियाक सन्दर्भमे हम ई कहि रहल छी। भिखाड़ी ठाकुर कलकत्तामे प्रवासी... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

कथा- माउगि

कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

मातृत्व...

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व.... नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि.... (आगाँ पढू)
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मैथिल आर मिथिला
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