बुधवार, 29 फरवरी 2012

               गजल
मतलब के सब संगी मतलबी छै लोक
कियो मनाबै छै ख़ुशी कियो मनाबै छै शोक

स्वार्थक वशीभूत दुनिया की जाने ओ प्रेम
प्रेम पथ पर किएक कांट बोए छै लोक

सभक मोन में भरल छै घृणाक जहर
दोसर के सताबै में तृष्णा मेटाबै छै लोक

ललाट शोभित चानन गला पहिर माला
भीतर भीतर किएक गला कटै छै लोक

सधुवा मनुखक जीवन भगेल बेहाल
कदम कदम पर जाल बुनैत छै लोक

अप्पन ख़ुशी में ओतेक ख़ुशी कहाँ होए छै
जतेक आनक दुःख में ख़ुशी होए छै लोक

अप्पन दुःख में ओतेक दुखी कहाँ होए छै
जतेक आनक ख़ुशी में दुखी होए छै लोक

अप्पन चिंतन मनन कियो नहि करेय
आनक कुचिष्टा में जीवन बिताबै छै लोक

विचित्र श्रृष्टिक विचित्र पात्र छै सब लोक
"प्रभात" के किएक कुदृष्टि सं देखै छै लोक
.....................वर्ण:-१६ ................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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               गजल
मतलब के सब संगी मतलबी छै लोक
कियो मनाबै छै ख़ुशी कियो मनाबै छै शोक

स्वार्थक वशीभूत दुनिया की जाने ओ प्रेम
प्रेम पथ पर किएक कांट बोए छै लोक

सभक मोन में भरल छै घृणाक जहर
दोसर के सताबै में तृष्णा मेटाबै छै लोक

ललाट शोभित चानन गला पहिर माला
भीतर भीतर किएक गला कटै छै लोक

सधुवा मनुखक जीवन भगेल बेहाल
कदम कदम पर जाल बुनैत छै लोक

अप्पन ख़ुशी में ओतेक ख़ुशी कहाँ होए छै
जतेक आनक दुःख में ख़ुशी होए छै लोक

अप्पन दुःख में ओतेक दुखी कहाँ होए छै
जतेक आनक ख़ुशी में दुखी होए छै लोक

अप्पन चिंतन मनन कियो नहि करेय
आनक कुचिष्टा में जीवन बिताबै छै लोक

विचित्र श्रृष्टिक विचित्र पात्र छै सब लोक
"प्रभात" के किएक कुदृष्टि सं देखै छै लोक
.....................वर्ण:-१६ ................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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मंगलवार, 28 फरवरी 2012

गीत@प्रभात राय भट्ट

गीत:-

सजना सजना यौ हमर सजना
सुनु सुनु ने कने हमर कहना //२
सजनी सजनी ऐ हमर सजनी मुखड़ा //
कहू कहू ने जे किछु अछि कहना //२


सजना सजना यौ हमर सजना
सुनु सुनु ने कने हमर कहना
ह्रिदय में हमर अहिं बास करैतछि
हमर मोनक सभटा आस पुरबैछि
हमर नयनक अहिं तारा छि सजना
हमर जीवनक अहिं सहारा छि सजना //२

सजनी सजनी ऐ हमर सजनी
कहू कहू ने जे किछु अछि कहना
कहू ने कहू हम सभटा जनैतछि
अहाँक प्रेम पाबी हम हर्षित रहैतछि
अहाँ हमरा मोन में हुलास बढ़बैतछि
अप्पन प्रेम नै टुटत इ बिस्वास हम दैतछि//२


सजना सजना यौ हमर सजना
सुनु सुनु ने कने हमर कहना
जन्म जन्म के हम छि पियासल
अहिं सं जीवनक उत्कर्ष अछि बाँचल
अहींक नाम सं खनकैय हमर कंगना
हमर दिल में अहिं धरकै छि सजना//२


सजनी सजनी ऐ हमर सजनी
कहू कहू ने जे किछु अछि कहना
जन्म जन्म तक हम रहब अहींक संग संग
अहींक प्रीत सं भरल अछि हमर मोनउपवन
अहाँक प्रीतक डोर सं बान्हल रहब रजनी
जीव नै सकब हम अहाँ बिनु सजनी //२


रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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रविवार, 26 फरवरी 2012

गीत @प्रभात राय भट्ट

गीत
ऐ सजनी कने घुंघटा उठाऊ ने हमर प्राण प्रिया
पूर्णिमा सन अहांक सूरत देखिला फाटेय हिया //२
थर थर कपैय देह मोर धरकैय करेज पिया
यौ पिया कोना घुंघटा उठाऊ धक् धक् धरकैय जिया //२
...
पहिल प्रेमक पहिल मिलन में एना करैछी किया
ऐ सजनी कने घुंघटा उठाऊ ने हमर प्राण प्रिया
अहि हमर लाजक घुंघटा उठा दिय ने पिया
नजैर कोना हम मिलाऊ धक् धक् धरकैय जिया //२

एकटा बात पुछू पिया कहू साँच साँच कहब तं
हमरा विनु कोना रहब अहाँ जौं हम नै रहब तं
धनि जे बजलौं फेर नै बाजब कहू हाँ कहब तं
अहाँ विनु जिब नै सकब हम जौं अहाँ नै रहब तं //२

संग छुटतै नै अप्पन टुटतै नै पिरितिया
खा कS कहैछी सजना हम इ किरिया
छोड़ी देब दुनिया हम तोड़ी देब जग के रीत
छोड़ब नै अहांक संग सजनी तोड़ब नै प्रीत //२

छोड़ी देब दुनिया हम तोड़ी देब जग के रीत
छोड़ब नै अहांक संग सजना तोड़ब नै प्रीत
अहिं सं जगमग करेय हमर जीवन ज्योति
अहिं छि सजनी हमर मोनक हिरामोती //२
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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कविता


मनुक्ख (कविता)
जिनगीक कैनभस पर,
अपन कर्मक कूची सँ,
चित्र बनेबा मे अपस्याँत मनुक्ख,
भरिसक आइयो अपन हेबाक
अर्थ खोजि रहल अछि।

हजारो-लाखो बरख सँ,
बहैत इ जिनगीक धार,
कतेक बिडरो केँ छाती मे नुकेने,
भरिसक आइयो अपन सृजनक
अर्थ खोजि रहल अछि।

राजतन्त्र सँ प्रजातन्त्र धरि,
ऊँच-नीचक गहीर खाधि,
सुरसाक मुँह जकाँ बढले अछि,
भरिसक आइयो इ तन्त्र सभक
अर्थ खोजि रहल अछि।

कखनो करेजक बरियारी,
कखनो मोनक राज सहैत,
बढले जाइ छै मनुक्खक जिनगी,
भरिसक आइयो मोन आ करेजक
अर्थ खोजि रहल अछि।

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गजल


कहैए राति सुनि लिअ सजन, आइ अहाँ तँ जेबाक जिद जूनि करू।
इ दुनियाक डर फन्दा बनल, इ बहाना बनेबाक जिद जूनि करू।

अहाँ बिन सून पडल भवन बलम, रूसल किया हमरा सँ हमर मदन,
अहाँ नै यौ मुरूत बनि कऽ रहू, हमरा हरेबाक जिद जूनि करू।

इ चानक पसरल इजोत नस-नस मे ढुकल, मोनक नेह छै जागल,
सिनेह सँ सींचल हमर नयन कहल, अहाँ कनेबाक जिद जूनि करू।

अहाँ प्रेम हमर जुग-जुग सँ बनल, हम खोलि कहब अहाँ सँ कहिया धरि,
अहाँ संकेत बूझू, सदिखन इ गप केँ कहेबाक जिद जूनि करू।

कहै छै मोन "ओम"क पाँति भरल प्रेम सँ, सुनि अहाँ चुप किया छी,
इ नोत कते हम पठैब, उनटा गंगा बहेबाक जिद जूनि करू।
(बहरे-हजज)

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शनिवार, 25 फरवरी 2012

बीसम नव दिल्ली विश्व पुस्तक मेला २०१२क उद्घाटन कपिल सिब्बल द्वारा/ २१म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी (अवसर बीसम नव दिल्ली विश्व पुस्तक मेला २०१२, सौजन्य अंतिका प्रकाशन) २५ फरबरी २०१२ सँ ०४ मार्च २०१२ (रिपोर्ट प्रियंका झा)


आइ बीसम नव दिल्ली  विश्व पुस्तक मेला २०१२क उद्घाटन कपिल सिब्बल, केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री, भारत सरकार द्वारा हंसध्वनि ओपेन एयर थियेटर, प्रगति मैदान, नव दिल्लीमे कएल गेल। एकर आयोजक रहैत अछि नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत। ई विश्व पुस्तक मेला दू सालमे एक बेर होइत अछि आ ४० साल पहिने १९७२ ई. मे एकर पहिल आयोजन भेल छल।  कपिल सिब्बल कहलन्हि जे ओ एकरा सभ साल कएल जएबाक प्रयास करताह। ओ कहलन्हि जे यूनाइटेड किंगडम आ यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिकाक बाद भारत अंग्रेजीमे सभसँ बेसी पोथी छापैत अछि, तकर अतिरिक्त विभिन्न भाषाक लगभग एक लाख पोथी भारतमे सभ साल छपैत अछि। विश्व भरिक १३०० प्रदर्शकक २५०० स्टाल ऐ मेलामे अछि। कार्यक्रमक अध्यक्षता श्री मनोज दास केलन्हि आ श्रीमती मृदुला मुखर्जी सम्माननीय अतिथि रहथि। यूनाइटेड किंगडम आ यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिकाक बाद भारत अंग्रेजीमे सभसँ बेसी पोथी छापैत अछि। तकर अतिरिक्त विभिन्न भाषाक लगभग एक लाख पोथी भारतमे सभ साल छपैत अछि।
भारतीय सिनेमाक सए बर्ख, दिल्लीक राजधानी रूपमे सए बर्ख आ रवीन्द्रनाथ टैगोरक १५०म जयन्ती ई तीनू संयोग ऐ बेर एक्के संग पड़ि रहल अछि।
अहाँ मैथिली कथा संग्रह/ उपन्यास (जगदीश प्रसाद मण्डल/ गजेन्द्र ठाकुर/ सुभाष चन्द्र यादव आदि), कविता/ गजल संग्रह (राजदेव मण्डल, विनीत उत्पल, ज्योति सुनीत चौधरी, कालीकान्त झा बूच, आशीष अनचिन्हार आदि), नाटक (विभा रानी/ नचिकेता/ बेचन ठाकुर/ गजेन्द्र ठाकुर/ जगदीश प्रसाद मण्डल आदि), कॉमिक्स (देवांशु वत्स), सचित्र बाल कथा संग्रह (प्रीति ठाकुर/ गजेन्द्र ठाकुर/ जगदीश प्रसाद मण्डल/ अनमोल झा), विदेह सदेह( १०० सँ ऊपर लेखक), अंग्रेजी-मैथिली शब्दकोश (गजेन्द्र ठाकुर, पञ्जीकार विद्यानन्द झा, नागेन्द्र कुमार झा), मिथिलाक पञ्जी प्रबन्ध (गजेन्द्र ठाकुर, पञ्जीकार विद्यानन्द झा, नागेन्द्र कुमार झा), मैथिलीक पहिल ब्रेल पोथी (सहस्रबाढ़नि, उपन्यास, गजेन्द्र ठाकुर), आ मिथिला/ मैथिलीक इतिहास (राधाकृष्ण चौधरी)..आदि पोथी कीनि सकै छी।

http://www.antikaprakashan.com/ (अंतिका प्रकाशनक साइट- मैथिली प्रकाशक)
http://www.shruti-publication.com (श्रुति प्रकाशनक साइट- मैथिली प्रकाशक)
http://esamaad.blogspot.in/2012/02/blog-post_25.html (समदिया, पहिल मैथिली न्यूज पोर्टल २००४ ई.सँ)


२१म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी (अवसर बीसम नव दिल्ली विश्व पुस्तक मेला २०१२, सौजन्य अंतिका प्रकाशन) २५ फरबरी २०१२ सँ ०४ मार्च २०१२,प्रतिदिन भोर ११ बजेसँ ८ बजे राति धरि, स्थान- अंतिका प्रकाशन , स्टाल 80-81, हॉल 11, प्रगति मैदान,२०म विश्व पुस्तक मेला 2012 नव दिल्ली


वि‍देह द्वारा मैथि‍ली पोथी प्रदर्शनी-
1. ‘वि‍देह’क पहि‍ल मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 27/09/2009 स्‍थान- नई दि‍ल्‍ली स्‍थि‍त श्रीराम सेन्‍टरक प्रेक्षागृहमे। अवसर- ‘जल डमरू बाजे’ नाटक-मंचन।
2. ‘वि‍देह’क दोसर मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 03/04/2011 स्‍थान- रामानन्‍द युवा कलव, जनकपुरधाम, नेपाल। अवसर- ‘सगर राति‍ दीप जरय’क 69म कथा गोष्‍ठी।
3. ‘वि‍देह’क तेसर मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 12/06/2010 स्‍थान- कवि‍लपुर लहेरि‍यासराय, दरभंगा। अवसर- ‘सगर राति‍ दीप जरय’ 70म कथा गोष्‍ठी।
4. ‘वि‍देह’क 4म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 02/10/2010 स्‍थान- बेरमा (तमुि‍रया) जि‍ला- मधुबनी। अवसर- सगर राति‍ दीप जरय’क 71म कथा गोष्‍ठी।
5. ‘वि‍देह’क 5म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- दुर्गापूजा-2010 स्‍थान- बेरमा (तमुि‍रया) जि‍ला- मधुबनी। 4 दि‍वसीय प्रदर्शनी।
6. ‘वि‍देह’क 6म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- दुर्गापूजा-2010 स्‍थान- घोघरडीहा (मधुबनी) दुर्गापूजाक मेला परि‍सर। अवसर- दुर्गापूजा-2010
7. ‘वि‍देह’क 7म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- दुर्गापूजा-2010 स्‍थान- हटनी (मधुबनी) दुर्गापूजाक मेला परि‍सर।
8. ‘वि‍देह’क 8म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 04/12/2010 स्‍थान- व्‍यपार संघ भवन, सुपौल। अवसर- सगर राति‍ दीप जरय’क 72म कथा गोष्‍ठी।
9. ‘वि‍देह’क 9म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 05/12/2010 स्‍थान- महि‍षी (सहरसा) अवसर- सगर राति‍ दीप जरय’क 73म कथा गोष्‍ठी।
10. ‘वि‍देह’क 10म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 09/07/2011 स्‍थान- अशर्फीदास साहु समाज महि‍ला इंटर महावि‍द्यालय परि‍सर- नि‍र्मली (सुपौल), अवसर- सामानांतर साहि‍त्‍य अकादमी मैथि‍ली कवि‍ सम्‍मेलन-2011
11. ‘वि‍देह’क 11म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 02 नभम्‍बर 2010 स्‍थान- एस.एम. पब्‍ि‍लक स्‍कूल परि‍सर झि‍टकी-वनगामा (मधुबनी), अवसर- स्‍कूल वार्षिकोत्‍सव।
12. ‘वि‍देह’क 12म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- सरस्‍वतीपूजा- 2011 स्‍थान- चनौरागंज (मधुबनी) अवसर- सरस्‍वतीपूजा नाट्य उत्‍सव- 2011
13. ‘वि‍देह’क 13म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 10/09/2011 स्‍थान- हजारीबाग (झारखण्‍ड), अवसर- सगर राति‍ दीप जरय’क 74म कथा गोष्‍ठी।
14. ‘वि‍देह’क 14म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- दुर्गापूजा-2011 स्‍थान- बेरमा (मधुबनी) 4 दि‍वसीय प्रदर्शनी।
15. ‘वि‍देह’क 15म मैथि‍ली पोथी-प्रदर्शनी, दि‍नांक- 02/11/2010 स्‍थान- उच्‍च वि‍द्यालय परि‍सर- खरौआ जि‍ला- मधुबनी। अवसर- महाकवि ‍लालदासक 155म जयन्‍ती समारोह।

16.विदेहक १६म मैथिली पोथी प्रदर्शनी १०-११ दिसम्बर २०११ केँ ७५म सगर राति दीप जरएक अवसरपर ,१० दिसम्बर २०११ केँ साँझ ६ बजेसँ शुरू भेल, स्थान-कॉपरेटिव फेडेरेशन हॉल, निकट म्यूजियम, पटनामे शुरू भेल आ ११ दिसम्बर २०११क भोर ८ बजे धरि चलल।
17.१७म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी:- २२-२४ दिसम्बर २०११ केँ गुवाहाटीमे। २२-२३ दिसम्बर २०११ केँ प्राग्ज्योतिष आइ.टी.ए. सेन्टर, माछखोवा, गुवाहाटी- ७८१००९ (२२ दिसम्बर २०११ केँ ४ बजे अप्राह्णसँ ९ बजे राति धरि आ २३ दिसम्बर २०११ केँ ११ बजे पूर्वाह्णसँ ३ बजे अपराह्ण धरि आ २३ दिसम्बर २०११ केँ फेर ५ बजे अपराह्णसँ देर राति धरि) आ  २४ दिसम्बर २०११ केँ भोरसँ राति धरि स्थान- रूम संख्या २१७,  होटल ऋतुराज, माछखोवा, गुवाहाटीमे। अवसर मि‍थि‍ला सांस्‍कृति‍क समन्‍वय समि‍ति‍क आयोजि‍त "अन्तर्राष्ट्रीय मैथिली सम्मेलन" आ "आठम मिथिला रत्न सम्मान समारोह" ( २२ दि‍सम्‍बर २०११) आ "वि‍द्यापति स्‍मृति‍ पर्व समारोह" (२३ दि‍सम्‍बर २०११) । १७म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी ग्राहकक आग्रहपर एक दिन लेल (२४ दिसम्बर २०११ केँ )  बढ़ाओल गेल।

18..१८म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी-तिथि १४ जनवरी २०१२ स्‍थान- अशर्फीदास साहु समाज महि‍ला इंटर महावि‍द्यालय परि‍सर- नि‍र्मली (सुपौल), अवसर- समानांतर साहि‍त्‍य अकादमी मैथि‍ली साहित्य उत्सव- सह विदेह सम्मान समारोह (समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार)

19.१९म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी- 27 जनवरी 2012 (शुक्र दि‍न), अवसर स्‍थानीय कवि‍ परि‍षद (सलहेसबाबा परि‍सर- औरहा, प्रखण्‍ड- लौकही)क चारि‍म वार्षिकोत्‍सव- 2012

20.२०म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी- जे.एम.एस. कोचिंग सेन्टर , चनौरागंज,झंझारपुर, जिला-मधुबनी, अवसर विदेह नाट्य उत्सव २०१२ दू दिन दिनांक २८.०१.२०१२ आ २९.०१.२०१२


21. २१म विदेह मैथिली पोथी प्रदर्शनी (अवसर बीसम नव दिल्ली विश्व पुस्तक मेला २०१२ जखन भारतीय सिनेमाक सए बर्ख, दिल्लीक राजधानी रूपमे सए बर्ख आ रवीन्द्रनाथ टैगोरक १५०म जयन्ती संगे पड़ि रहल अछि, एकर आयोजक रहैत अछि नेशनल बुक ट्रस्ट, भारत, सौजन्य अंतिका प्रकाशन) २५ फरबरी २०१२ सँ ०४ मार्च २०१२,प्रतिदिन भोर ११ बजेसँ ८ बजे राति धरि, स्थान- अंतिका प्रकाशन , स्टाल 80-81, हॉल 11, प्रगति मैदान,२०म नव दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2012 नव दिल्ली। ई विश्व पुस्तक मेला दू सालमे एक बेर होइत अछि आ ४० साल पहिने १९७२ ई. मे एकर पहिल आयोजन भेल छल।

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शुक्रवार, 24 फरवरी 2012

गीत:-
देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ
पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२

देह देखार देख कS एकर
चढ़ल हमरा बोखार रौ
कोना उतरतै हमर बोखार
करहि कोनो जोगार रौ
देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ
पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२

छ इन्चक घघरी पर
पेन्है छै तिन इन्चक चोली
चढ़ल जोवन सँ मारै छै
छौरा सभक दिल पर गोली
देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ
पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२

देख कS एकर चालढाल
सगरो मचल छै बबाल रौ
जर जुवानक बाते छोड़
बुढबो एकरा पाछू बेहाल रौ
देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ
पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२

अजब गजब छै रूप रंग
देखही चलै छै कोना उतंग रौ
बेलाईती बिलाई सन केस लगै छै
देसी बिलाई सन आइंख रौ
देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ
पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२

चौक चौराहा हाट बाजार
सभ करै छै एकरे इन्तजार रौ
सुन रे भजना सुन रे फेकना
कर ने हमरो लेल कोनो जोगार रौ
देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ
पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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गीत:-
देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ
पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२

देह देखार देख कS एकर
चढ़ल हमरा बोखार रौ
कोना उतरतै हमर बोखार
करहि कोनो जोगार रौ
देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ
पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२

छ इन्चक घघरी पर
पेन्है छै तिन इन्चक चोली
चढ़ल जोवन सँ मारै छै
छौरा सभक दिल पर गोली
देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ
पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२

देख कS एकर चालढाल
सगरो मचल छै बबाल रौ
जर जुवानक बाते छोड़
बुढबो एकरा पाछू बेहाल रौ
देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ
पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२

अजब गजब छै रूप रंग
देखही चलै छै कोना उतंग रौ
बेलाईती बिलाई सन केस लगै छै
देसी बिलाई सन आइंख रौ
देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ
पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२

चौक चौराहा हाट बाजार
सभ करै छै एकरे इन्तजार रौ
सुन रे भजना सुन रे फेकना
कर ने हमरो लेल कोनो जोगार रौ
देखही रे भाई इ छौरी छै बड व्यूटी रौ
पेन्ह कS मिनी स्कट चलबै छै स्कूटी रौ //२

रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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बृहस्पतिवार, 23 फरवरी 2012

गजल


हमर मुस्कीक तर झाँपल करेजक दर्द देखलक नहि इ जमाना।
सिनेहक चोट मारूक छल पीडा जकर बूझलक नहि इ जमाना।

हमर हालत पर कहाँ नोर खसबैक फुरसति ककरो रहल कखनो,
कहैत रहल अहाँ छी बेसम्हार, मुदा सम्हारलक नहि इ जमाना।

करैत रहल उघार प्रेमक इ दर्द भरल करेज हमरा सगरो,
हमर घावक तँ चुटकी लैत रहल, कखनहुँ झाँपलक नहि इ जमाना।

मरूभूमि दुनिया लागैत रहल, सिनेहक बिला गेल धार कतौ,
करेज तँ माँगलक दू ठोप टा प्रेमक, किछ सुनलक नहि इ जमाना।

कियो "ओम"क सिनेहक बूझतै कहियो सनेस पता कहाँ इ चलै,
करेजक हमर टुकडी छींटल, मुदा देखि जोडलक नहि इ जमाना।
(बहरे-हजज)

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बुधवार, 22 फरवरी 2012

गजल @प्रभात राय भट्ट

गजल
एसगर कान्ह पर जुआ उठौने,कतेक दिन हम बहु
दर्द सं भरल कथा जीवनके,ककरा सं कोना हम कहू

अपने सुख आन्हर जग,के सुनत हमर मोनक बात
कहला विनु रहलो नै जाइय,कोना चुपी साधी हम रहू

अप्पन बनल सेहो कसाई,जगमे भाई बाप नहीं माए
सभ कें चाही वस् हमर कमाई,दुःख ककरा हम कहू

देह सुईख कS भेल पलाश,भगेल हह्रैत मोन निरास
बुझल नै ककरो स्वार्थक पिआस,कतेक दुःख हम सहु

मोन होइए पञ्चतत्व देह त्यागी,हमहू भS जाए विदेह
विदेहक मंथन सेहो होएत,कोना चुपी साधी हम रहू

नैन कियो करेज,कियो अधिकार जमाएत किडनी पर
होएत किडनीक मोलजोल, सेहो दुःख ककरा हम कहू

बेच देत हमर अंग अंग, रहत सभ मस्ती में मतंग
बजत मृदंग जरत शव चितंग सेहो कोना हम कहू
.........................वर्ण:-२२.............................
रचनाकार:-प्रभात राय भट्ट

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मंगलवार, 21 फरवरी 2012

रूबाइ


कोना कऽ रंगलक करेज केँ इ रंगरेज, रंग छूटै नै।
नैन पियासल छोडि गेल, मुदा आस मिलनक टूटै नै।
हमरा छोडि तडपैत पिया अपने जा बसला मोरंग,
बूझथि विरहक नै मोल, भाग्य इ ककरो एना फूटै नै।

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सोमवार, 20 फरवरी 2012

गीत


शिवरात्रिक अवसर पर एकटा प्रस्तुति-

गौरी रहि-रहि देखथि बाट, कखन एता भोलेनाथ।

आंगन मे मैना कानि रहल छथि,
मुनि नारद केँ कोसि रहल छथि।
ताकि अनलाह केहन बर बौराह,
गौराक जिनगी भेल आब तबाह।
मैना पीटै छथि अपन माथ, कखन एता....................

भूत-बेतालक लागल अछि मेला,
प्रेत पिशाचक अछि ठेलम ठेला।
पूडी पकवान कियो नै तकै छै,
सब भाँग धथूरक खोज करै छै।
कियो नंगटे, कियो ओढने टाट, कखन एता...................

कोना कऽ गौरी अपन सासुर बसतीह,
विषधर साँप सँ कोना कऽ बचतीह।
पिताक घरक छलीह जे बनल रानी,
कोना लगेतीह आब ओ बडदक सानी।
आब तऽ किछ नै रहलै हाथ, कखन एता.....................

गौरीक मोनक आस आइ पूरा हएत,
बर बनि अयलाह शम्भू त्रिभुवन नाथ।
जगज्जननी माँ गौरी शंकर छथि स्वामी,
जग उद्धारक शिव छथि अन्तर्यामी।
फेरियो हमरो माथ पर हाथ, कखन एता.......................

"ओम" बुझाबै, सुनू हे मैना महारानी,
इ छथि जगतक स्वामी औढरदानी।
भोला नाथक छथि नाथ कहाबथि,
सबहक ओ बिगडल काज बनाबथि।
शिव छथि एहि सृष्टि केर नाथ, कखन एता...................

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गजल


कतौ बैसार मे जँ अहाँक बात चलल।
तँ हमर करेज मे ठंढा बसात चलल।

विरह देख हमर झरल पात सब गाछ सँ,
सनेस प्रेमक लऽ गाछक इ पात चलल।

मदन-मुस्की सँ भरल अहाँक अछि चितवन,
करेजक दुखक भारी बोझ कात चलल।

बुझाबी मोन केँ कतबो, इ नै मानै,
अहीं लेल सब आइ धरि शह-मात चलल।

छल घर हमर इजोत सँ भरल जे सदिखन,
जखन गेलौं अहाँ, "ओम"क परात चलल।
(बहरे हजज)

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गजल


किछ हमर मोन आइ बस कहऽ चाहै ए।
अहींक बनि कऽ सदिखन तँ इ रहऽ चाहै ए।

इ लाली ठोरक तँ अछि जानलेवा यै,
अछि इ धार रसगर, संग बहऽ चाहै ए।

अहाँ काजर लगा कऽ अन्हार केने छी,
बरखत सिनेह घन कखन दहऽ चाहै ए।

अहाँ फेंकू नहि इ मारूक सन मुस्की,
बिना मोल हमर करेज ढहऽ चाहै ए।

बिन अहाँ "ओम"क सुखो छै दुख बरोबरि,
सब दुख अहाँक इ करेज सहऽ चाहै ए।
(बहरे-हजज)

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सोझ बाट पर चलैत-चलैत (दीर्घ कविता)

1



सोझ बाट पर चलैत-चलैत

पहुँचि जाइत छी

अक्का दारूण बनमे

अनचिन्हार लक्ष्यक संग

नहि भेटैत अछी अपेक्षित लक्ष्य

बी.बी.सी सुनला उतरो

प्रतियोगिता किरण पठलों सन्ता

नहि भए पबैत छी कोनो सरकारी चपरासी

मानलहुँ

कननाइ कोनो समस्याक समाधान नहि

मुदा हँसनाइए कोन

समस्याक समाधान छैक ?

मजबूरीमे बौक जकाँ चुप्प रहनाइ

नियति बनि गेल छैक लोकक

टाट खरहीक हो की सीसाक

ओ मात्र टाटे होइए

ओकर काजे छैक सीमा निर्धारण

इ गप्प भिन्न जे सीसाक आर-पार देखाएत

इहो गप्प भिन्न जे टाटकेँ काटि हाथ मिला सकैत छी

मुदा

भावनाक आदान-प्रदान केनाइ

ओतबए संभव छैक

जतेक की बड़दक दूधसँ खीर बनेनाइ

देहक हाड़-पाँजर फाटि रहल

बाँसक गीरह जेना

पाकल बाँस भने नहि होइ

मुदा काँचो नहि छी

बेछील्ले बाँस करए बला बेसी अछी

बाँसक अनुपातमे

लोक गनगुआरि वा सहस्त्रबाहु हुअए

की नहि हुअए

मुदा काज सुतारबाक लेल

हजार-हजार टा हाथ-पएर भए जाइत छैक

आ हरेकक आँगुरमे बान्हल रहैत छैक

स्वचालित पिस्तौल



गोली लोक छाती पर नहि

पीठ पर खाइए

सोझ बाट पर चलैत-चलैत



2



सोझ बाट पर चलबासँ पहिने

कए लिअ अपन टाँगकेँ टेढ़

कारण

सोझ टाँगे सोझ बाट पर चलब

केखनो नीक नहि

ठीक नहि

आ अहाँ जखन देखिए रहल छीऐक जे

नेङरा सभ दौड़मे प्रथम स्थान लेलकै

तखन हमर सलाह पर

आपत्तिक कोनो प्रश्ने नहि

सभ लोक बामने टा

बनबाक जोगारमे

उगह चान की लपकह पूआ

केर जाप करैत हरेक मनुख

जोहि रहल अछी बाट

अर्ध-सत्यक

अधभूखल रहबासँ बेसी दुखदायी अछी

अधनङनटे रहब

दूभि खेनिहार बकरी भोगि रहल अछी जाबी

आ शेर खा रहल

जिंदा मासु

अधपहरा आ अधकपारीक संयोगसँ

जन्मल छी हम

अर्धमनुख

क्षणिक शांति लेल

दीर्घ आशांतिक निर्माण करब

एहिसँ बड़का छल कोनो नहि

भेड़िया-धसाना होइत संसदमे

पूर्वज आ वंशज

इएह दूनू देखाएत

आम कार्यकर्ता आब नहि बनि

पाओत कोनो

मंत्री

प्रधानमंत्री

राष्ट्रपति

टुटलो हथिसार नौ घरक साङह

होइत छैक

हमरा नहि संदेह एहि पर

संदेह तँ अछी हाथीक बल पर

जे आब एक बेरमे

एक टन खाओ लेला पर

एकै मिनटमे हकमि जाइत अछी

ओना हकमैए तँ कूकूरो

मुदा इ ओकर

जन्मजात गुण छैक

आ बड़दक ?

खटनाइ सएह ने

चलू सहमत छी हम अहाँक गप्पसँ

सोझ बाट पर चलैत-चलैत



3



सोझ बाट पर चलैत-चलैत

अहाँ

इ नहि बुझि सकैत छीऐक जे

छोट-छोट गप्प

पैघ कोना भए जाइत छैक

अहाँ

इहो नहि बुझि रहल छीऐक जे

एक किलो तूर कोना बदलि जाइत छैक

पहाड़क रुपेँ

सोझ बाट पर चलैत-चलैत

अहाँ

इहो नहि बुझि पबैत छीऐक जे

कोना लाशक नाम पर

बैंक-बेलैंस

बढ़ि जाइत छैक

जीति जाइत छैक नेता कोना

लाखक-लाख भोटसँ

अहाँकेँ इहो नहि बूझल हएत जे

मनुखक आत्मा

मरलैए नहि

मारल गेलैए

बम आ गोलीक सहारासँ

लोकसँ

धूनि नहि फटि पबैत छैक

मुदा

लोककेँ छाती महँक दूध

फाड़ए अबैत छैक

येन-केन-प्रकारेण अम्मत घोरि कए

एहन परिस्थितिमे जखन की

धनिकक बच्चा बड्ड जल्दी जबान होइत छैक

कामशास्त्र आ कोक शास्त्रक

कतेक महत्व छैक

से नहि बूझि पेबैक

प्रतिघंटामे कतेक बच्चा होइत छैक

तकर आकँड़ा लेब अहाँक लेल

असंभव नहि

मुदा

प्रति सेकेण्डमे कतेक कंडोम

बिकाइत छैक तकर थाह अहाँकेँ नहि लागत

अहाँकेँ इहो थाह नहि लागत जे

खाली समयकेँ कटबाक लेल

कतेक युवा

कतेक मिनटमे

कतेक बेर वीर्यपात करैत छैक

कतेक अभिसारिका

अभिसार करैत छथि

गुरुजनसँ चोरा कए

एकरो थाह नहि लागत अहाँकेँ

सोझ बाट पर चलैत-चलैत



4



सोझ बाट पर चलैत-चलैत

छटपटाइत अछी

कटल मुर्गी जकाँ

जखन ओकरा बुझाइत छैक जे

हम कोनो राकसक फेरमे छी

छटपटाइत-छटपटाइत



दैए चकभाउर

मोने-मोन जपैए सावित्री मंत्र

पढ़ैए हनुमान चलीसा

मुदा काज नहि अबैत छैक इ सभ

आ बेहोस भए जाइत छैक अंतमे

भोरक पहिल पहरमे निन्न

खुलला पर मोन पड़ैत छैक

जे पीने छलहुँ शराब भ्रमक भरिपोख

आ निकलि पड़ल छलहुँ

बजारमे

उत्तर आधुनिकता आ भूमंडलीकरणक संग

ग्लोबल विलेजक निर्माण करबाक लेल

इ सभ मोन पड़ैत छैक

सोझ बाट पर चलैत-चलैत



5



सुतबाक लेल नहि

जगबाक लेल खाइत छी निन्नक गोली

आ जखन जगले-जागल देखैत छी जे

वास्तवमे

कोनो अंतर नहि होइत छैक

सरकारक कागती विकास आ

साहित्यकारक कागती प्रगतिशीलतामे

तखन

हमर पएर तरसँ

बिला जाइत अछी रमणगर सोझ बाट

मायावी राक्षस जकाँ

आ खसैत छी हम यथार्थक पतालमे

छद्मक घोघ तर

मनुख कतेक सुन्नरि होइत छैक

एकर आकलन कोनो सौंदर्यशास्त्री नहि कए पौताह

मुदा कतेक करूप होइत छैक

मनुख छद्मक आवरणमे

तकर निर्धारण जानवर

तुरंत कए देत

सोझ बाट पर चलैत-चलैत



6

सोझ बाट पर बनल एकटा घरक

हरेक कोड़ो-बातीमे

लटकल छैक

बादुर

सन्हिआएल छैक करैत

घरमे राखल दाना-दाना पर

लिखल छैक

प्रेतक नाम

दाना-दानामे छैक

शोणितक सुआद

ओहि घरमे बसैत छैक

डाइन

जे डनिपन सिखबाक लेल

दए देलकै बलि

अपन पूत-भतार

देआद

सर-समांगकेँ

हरेक अधरतिआमे

नङटे नचैत अछी डनियाँ

हरेक राग-रागिनीक लय ओ ताल पर

केखनो ओ गाबए लगैत अछी

प्रखर सेक्युलर राग

तँ केखनो

अंधराष्ट्रवाद रागिनी

आ नचबाक लेल बाध्य कइए दैत छैक ओ

सभ भूत-प्रेत-बैतालकेँ

एहि राग-रागिनीक लय-ताल पर

नहि समता कए सकताह नटराज

एहि नाचसँ अपन नाचकेँ

उचित छन्हि हुनका जे

ओ छोड़ि देथु अपन पदवी

नटराजक

सोझ बाट पर चलैत-चलैत

7

बाट आ बाट नहि रहल

भने ओ सोझ हुअए की टेढ़

बनि गेलैक ओ राजगद्दी

बटोहिओ आब बटोही नहि रहल

भने ओ अहदी हुअए की कमासुत

बनि गेल ओ राजा

प्रजा नहि छैक

एहि सोझ बाटक नगरीमे

सभहँक पोनमे छैक लस्सा लागल

जाहिमे सटल छैक कुर्सी

मुदा एकटा गप्प बुझबै

हरेक कुर्सीमे

पोसा रहल छैक धामन साँप

बस देरी छैक

मात्र

गुदा मार्ग द्वारा

मगजमे घुसबाक

जे काज गहुमन आ नाग नहि कए सकल

से इ बिखहीन धामन देखाओत

ओना बिखहीन हुअए की बिखाह

साँप अंततः साँपे होइत छैक

से हमरा बुझा रहल अछी

सोझ बाट पर चलैत-चलैत

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गीत -जगदानंद झा 'मनु'

भोलेबाबा हौ
खोलबअ केखन अपन द्वार ) -२

हम दुखिया जन्मे कए दुखल
एलहुँ तोहरे द्वार
भोलेबाबा हो - - - - - अपन द्वार

तन दुखिया अछि मन अछि दुखिया
दुखिए जन्म हमार
सुनि महिमां भोले एलहुँ तोरे द्वारे
करबअ केखन हमर उद्धार
भोलेबाबा हो - - - - - अपन द्वार

मुनलह तु अपन नयना
मुनलह हमर कपार
एलहुँ भटकैत,भटकैत तोरे द्वारे
मुनलह किएक अपन केबार

भोलेबाबा हो - - - - - अपन द्वार ) -२

***जगदानन्द झा 'मनु'

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बुधवार, 15 फरवरी 2012

नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२ (रिपोर्ट बेचन ठाकुर)

नाटक, गीत, संगीत, नृत्य, मूर्तिकला, शिल्प आ चित्रकला क्षेत्रमे विदेह सम्मान २०१२
अभि‍नय- मुख्य अभिनय , सुश्री शि‍ल्‍पी कुमारी, उम्र- 17 पि‍ता श्री लक्ष्‍मण झा/ श्री शोभा कान्‍त महतो, उम्र- 15 पि‍ता- श्री रामअवतार महतो, /
हास्‍य-अभिनय सुश्री प्रि‍यंका कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री वैद्यनाथ साह /श्री दुर्गानंद ठाकुर, उम्र- 23, पि‍ता- स्‍व. भरत ठाकुर
नृत्‍य सुश्री सुलेखा कुमारी, उम्र- 16, पि‍ता- श्री हरेराम यादव/ श्री अमीत रंजन, उम्र- 18, पि‍ता- नागेश्वर कामत

चि‍त्रकला श्री पनकलाल मण्डल, उमेर- ३५, पिता- स्व. सुन्दर मण्डल, गाम छजना/ श्री रमेश कुमार भारती, उम्र- 23, पि‍ता- श्री मोती मण्‍डल संगीत (हारमोनियम) /श्री परमानन्‍द ठाकुर, उम्र- 30, पि‍ता- श्री नथुनी ठाकुर

संगीत (ढोलक) श्री बुलन राउत, उम्र- 45, पि‍ता- स्‍व. चि‍ल्‍टू राउत

संगीत (रसनचौकी) श्री बहादुर राम, उम्र- 55, पि‍ता- स्‍व. सरजुग राम

शिल्पी-वस्तुकला श्री जगदीश मल्लिक,५० गाम- चनौरागंज

मूर्ति-मृत्तिका कला श्री यदुनंदन पंडि‍त, उम्र- 45, पि‍ता- अशर्फी पंडि‍त

काष्ठ-कला श्री झमेली मुखिया,पिता स्व. मूंगालाल मुखिया, ५५, गाम- छजना

किसानी-आत्मनिर्भर संस्कृति श्री लछमी दास, उमेर- ५०, पिता स्व. श्री फणी दास, गाम वेरमा
















































































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मिथिलाक खानपान...

मिथिलाक खानपान-नीलिमा चौधरी आ राखी साह... मखानक खीर सामग्री- दूध-१ १/२ किलो, चिन्नी-१०० ग्राम, मखान कुटल- १०० ग्राम, इलाइची पाउडर- स्वाद अनुसार, काजू- १० टा, किशमिश-२०टा बनेबाक विधि- मखानक पाउडर (कनी दरदरा)क पहिने १/२ किलो ठंढ़ा दूधमे घोरि लिअ, शेष दूध केँ खौला लिअ। आब गर्म दूधमे ई घोड़ल मखानक मिश्रण मिला दियौक आर करौछसँ लगातार चलबैत रहियौक जाहिसँ मिश्रण पेनीमे बैसय नहि। .... (आगाँ पढू)

मिथिलांचलक विकास..

मिथिलांचलक विकास... मिथिलांचल क्षेत्र बिहार मे सबस पिछड़ल मानल जाइत अछि, अगर प्रतिव्यक्ति आय , साक्षरता और प्रसवकाल मे जच्चा-बच्चा के मृत्यु के मापदंड बनायल जाय तो मिथिलांचल देश के सबस गरीब आ पिछड़ल इलाका अछि। एकर किछु कारण त अहि इलाका के भौगोलिक बनावट अछि... (आगाँ पढू)

मिथिला अरिपन....

मिथिला चित्रकला- स्त्री आ पुरुषक दशपात अरिपन / स्वास्तिक अरिपन... स्त्रीगणक दशपात अरिपनकन्याक मुण्डन,कान छेदन आ' विवाहक अवसर पर कुलदेवताक घर आकि मण्डप पर बनाओल जाइत अछि।बनेबाक- विधि। एकर बनेबाक विधि सूक्ष्म अछि।ऊपरमे तीन पातक पुष्प, ,ओकरनीँचा पाँच-पातक कमल-पुष्प,ओकर नीचाँ सात-पात युक्त्त कमल, बीचमे अष्टदल कमल अछि। दश पात चारू दिशि अछि। नौ टा माँछक चित्र सेहो अछि... (आगाँ पढू)

एक विलक्षण प्रतिभा...

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (प्रथम कड़ी) - कुसुम ठाकुर..... एक बेर हमारा एक पत्रिका में किछु लिखय लेल कहल गेल छल, ई सन् १९९६ क गप्प थिक। हम बस एतबे लिखी सकलौं "हम की लिखी हमर त लेखनिये हेरा गेल"। मुदा आई बुझना जैत अछि जे नै, हमारा एकटा कर्तव्यक निर्वाहन... (आगाँ पढू),
(दोसर कड़ी), (तेसर कड़ी), (चारिम कड़ी), (पाँचम कड़ी), (छठम कड़ी), (सातम कड़ी), (आठम कड़ी), (नवम कड़ी), (दसम कड़ी), (एग्यारहम कड़ी), (बारहम कड़ी), (तेरहम कड़ी), (चौदहम कड़ी), (पन्द्रहम कड़ी )

चिनबारक दीप...

चिनबारक दीप–उषा किरण खान... समस्तीपुर मे गाड़ी बदली कऽ महेसरी अइमे बैसलि सरिया कऽ। आब घर बेसी लग आयल जाइत छैक। चारि टीसन आ छैक, फे तऽ टीसन सऽ एक कोस जमीन हैतै। चारि-पाँच गोटाक हेंज छैक्। बौआइत-बतियाइत गाम पहुँचि जयतै। आठे दिनुका दिन छैक, की सब करतै? एह, करऽक की छैक? सभटा बस्तुजात तऽ कीननहिं जाइत छैक.... (आगाँ पढू)

बिदेसिया (संकल्पित नाटिका)

विद्यापतिक बिदेसिया (संकल्पित नाटिका).... भोजपुरीक साहित्य मैथिलीसँ कम समृद्ध अछि मुदा से अछि मात्र परिमाणमे, गुणवत्ताक दृष्टिमे ई कतेक क्षेत्रमे आगाँ अछि। भोजपुरीक भिखाड़ी ठाकुरक बिदेसियाक सन्दर्भमे हम ई कहि रहल छी। भिखाड़ी ठाकुर कलकत्तामे प्रवासी... (आगाँ पढू)

पाँच पत्र...

पाँच पत्र-हरिमोहन झा... प्रियतमे अहाँक लिखल चारि पाँती चारि सएबेर पढ़लहुँ तथापि तृप्ति नहि भेल। आचार्यक परीक्षा समीप अछि किन्तु ग्रन्थमे कनेको चित्त नहि लगैत अछि। सदिखन अहींक मोहिनी मूर्ति आँखिमे नचैत रहैत अछि। राधा रानी मन होइत अछि जे अहाँक ग्राम वृन्दावन बनि जाइत, जाहिमे केवल अहाँ आ हम राधा-कृष्ण जकाँ अनन्त काल धरि विहार करैत रहितहुँ... (आगाँ पढू)

कथा- माउगि

कथा- माउगि - विभा रानी.... माउगि, माउगि, गे माउगि, गे माउगि! तों माउगि, हम माउगि, ई माउगि, ऊ माउगि - सभ किओ माउगे-माउगि। ऊँहूँ - सभ किओ भला माउगि हुअए। ई तय कर' बाली तों के? अएं गे? तोरा कहिया स' भेटलौ ई हक? ई सभ काज-धंधा हमरा आओरक अछि - हमरे आओर के करे दें। देख त' कने, तोहरो आओर के कतेक रंग-बिरंगा रूप दिया देलियौ! माउगि, गे माउगि.... (आगाँ पढू)

मातृत्व...

डा. मंजू गीता मिश्राक आलेख : मातृत्व.... नारी जीवनक सबसँ गौरवशाली एवं सुखद अनुभव थिक मातृत्व ।ई नारी जीवनक परिपूर्णताक प्रतीक अछि । पूरा नौ मास अपन गर्भमे फलैत-फूलैत एक शिशुक अपन जान सँ बेसी देखभाल करैत छथि । तत्पश्चात एक फूल सन सुन्दर सुकोमल शिशु जन्म लैत अछि, यैह स्त्रीक सबसँ अनमोल उपहार एवं आनन्ददायक क्षण थिक । एहि नौ मासक दौरान गर्भवतीक भोजन एवं वातावरण पर निर्भर करैत अछि.... (आगाँ पढू)
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